बुधवार, 11 सितंबर 2013

कुबेर का व्यंग्य - तोंद की नैतिकता

तोंद की नैतिकता

ओवरसियर बाबू को मैंने पाँच वर्ष पूर्व देखा था। तब वे इस विभाग में नये-नये थे। बड़े उत्‍साही, छरहरे बदन वाले सुंदर नवयुवक थे।

सुंदर तो वे आज भी हैं, लेकिन अब वे छरहरे नहीं रहे। पैर की ऊँगलियों से लेकर चेहरे पर गालों तक, चमड़ी के नीचे चर्बी की एक मोटी परत जमा हो जाने के कारण अब उनकी त्‍वचा में रक्‍तिम चिकनाहट आ गई है। तोंद इतनी पसर गई है कि हिन्‍दुस्‍तान की सारी उपज खाकर भी तृप्‍ति न मिले।

उनकी तोंद खाने और पचाने के लिए पूरी तरह अनुकूलित हो चुकी है।

गांव के बरसाती नाले पर स्‍टाप डेम का निर्माण कार्य चल रहा है। यह कहानी वहीं से शुरू होती है।

उनकी तोंद मजदूरों के बीच चर्चा का विषय बनी रहती है।

कोई कहता है - ''सरकारी माल है भइया, निकल रहा है।''

समझदार और कुछ पढ़े-लिखे लोग कहते - ''गरीबों के पसीने की कमाई है भइया, वरना नैतिकता की भी कहीं तोंद होती है? एक दिन फूटेगी जरूर।''

हरि अनंत हरि कथा अनंता। जितने मुँह, उतनी बातें।

मस्‍टररोल में बकायदा रोज मजदूरों की हाजिरी लगाई जाती है। मजदूरी का भुगतान भी नियमित होता है।

सबको भनक लग चुकी है कि मस्‍टर रोल में हेराफेरी की जा रही है। जगतू राम मेट का काम करता है। काम आराम का है। मजदूरों पर रौब झाड़ने का भी मौका मिल जाता है। ओवरसियर साहब के आराम और चाय-वाय की व्‍यवस्‍था इसी के यहाँ होती है। उसकी बीवी बड़ी सुंदर और सुकुमार है। वह कभी साइट पर नहीं जाती, पर लोग जानते हैं, मस्‍टर रोल में उसकी नियमित हाजिरी लगती है।

अगनू , जगनू , मगनू और बहुत सारे ऐसे व्‍यक्‍ति जो इस भू-लोक में कही पैदा भी नहीं हुए होंगे, उनके नाम भी मस्‍टररोल में लिखे हुए हैं। उनकी भी नियमित हाजिरी लगाई जाती है।

लोग मानते हैं - 'जिसकी करनी, उसकी भरनी। क्‍या करना हैं। ज्‍यादा हुआ तो चुकारे के दिन देखा जायेगा।'

पर चुकारे के दिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। जितने लोग काम में लगे हुए थे, उतने लोगों के ही नाम मस्‍टररोल में लिखे गये थे। जिसने जितना काम किया था, उतना ही भुगतान किया गया। न कम, न ज्‍यादा। लोगों को अपने शक्‍की दिमाग पर झुंझलाहट हुई।

काम पूरा हुआ। बारिश का मौसम आया। बाढ़ भी आई। इस साल बाढ़ का वेग बड़ा प्रचंड था। बेचारा स्‍टापडेम उसका दबाव सहन नहीं कर पाया। अलविदा कह गया।

ओवरसियर साहब की तोंद थोड़ी और पसर गई है पर उसकी नैतिकता असंदिग्‍ध बनी हुई है। उसकी असंदिग्‍धता अगनू ,जगनू ,मगनू और न जाने ऐसे ही कितने और लोगों के अंगूठों के निशानों से प्रमाणित हो चुकी है। ऊपर वाले अधिकारियों का मुहर तो पहले ही लग चुका है।

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कुबेर

9407685557

kubersinghsahu@gmail.com

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