विकास सोनी की लघुकथा - चंदा

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लघुकथा - चंदा 

मीना आंटी जो मकान मालिक हैं और ऊपर के मकान में रहती हैं , उन्होंने नीचे का कमरा किराए से दे रखा हे, अभी  किरायेदार की पत्नी नीलम के साथ बातें करने में व्यस्त हैं ।

दरवाजे पर दस्तक हुई ।  नीलम ने दरवाजा खोला ।

" गणेश स्थापना का चंदा दीजिए " एक साथ आए करीब पंद्रह लड़कों में से एक ने कहा ।

नीलम ने उन्हें 21 रुपये दिए ।

"ऊपर कहाँ जा रहे हो ?" मीना आंटी की चिल्लाने की आवाज़ उन लड़कों के कानों में गूँज गई ।

"चंदा लेने" एक लड़के की तरफ से जवाब मिला ।

"अरे दोनों घर एक ही हें , उपर का चंदा भी इसी में आ गया है  । "

और फिर दरवाजा बंद हो गया ।

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- विकास सोनी

रायपुर , छत्तीसगढ़

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