बुधवार, 11 सितंबर 2013

राजीव आनंद के 2 व्यंग्य

व्‍यंग्‍य

गुरूजी की कसम

अपने को चाणक्‍य के चेले समझने वाले चौपटानंद को बड़ा आश्‍चर्य हो रहा था यह जानकर कि शिक्षक दिवस के अवसर पर सम्‍मानित करने के लिए राज्‍य सरकार को बेहतर कार्य करने वाले शिक्षक नहीं मिल रहे है․

चौपटानंद को जब से इस बात की जानकारी हुई है कि राज्‍य में बेहतर प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों को 25000 नकद दिए जाने है, जिला स्‍तर पर 15000 और अनुमंड़ल स्‍तर पर 10000 तब से अपने गुरूजी की कसम खाते हुए चौपटानंद उक्‍त राशि को 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर हथियाने के लिए मशक्‍कत कर रहे है․ अपने भाई, बहनोई का लिस्‍ट बनाकर तीनों स्‍तरों पर सम्‍मान राशि हथियाने की जुगत में लगे है․ चौपटानंद का कहना है कि उनसे और उनके परिवार के लोगों से अच्‍छा शिक्षक राज्‍य में तो क्‍या पूरे देश में ढिबरी बार कर खोजने से नहीं मिलेगा․

पिछले दस वर्षों से ठेका पर शिक्षगिरी करते आ रहे चौपटानंद को लगता है कि ठेका पर सम्‍मान राशि भी लिया जा सकता है․ चौपटानंद का मानना है कि उन्‍होंने अपने गुरू को शिक्षण क्षेत्र में काफी पीछे छोड़ चुके है क्‍योंकि उनके गुरू ने तो केवल एक चंद्रगुप्‍त पैदा किया था परंतु इन्‍होंने तो कई राजाओं को पैदा कर दिया जो आज राजनीति के अखाड़े में बड़े-बड़े घोटाला को अंजाम दे चुके है․

चौपटानंद अपने गुरूकुल के प्रधानाचार्य से पूछा कि आप मांगे जा रहे श्रेष्‍ठ शिक्षकों की सूचि में मेरा, मेरे भाई तथा मेरे बहनोई का नाम क्‍यों नहीं शामिल किया है तो प्रधानाचार्य का कहना था कि श्रेष्‍ठ शिक्षकों की सूचि मांगी गयी है․ चौपटानंद इतना सुनकर बिफर उठे, उन्‍होंने अपना मुंडन करवा लिया और लंबी सी चुटिया अपने सर पर छोड़ दिया है․ जैसे-जैसे शिक्षक दिवस नजदीक आ रहा है वैसे-वैसे चौपटानंद शुद्ध सरसों का तेल अपने सिर के शिखा पर लगाते हुए उसे खुला रखने की कसम अपने गुरू के नाम पर खाते हुए गुरूकुल के आसपास जो झाडि़यां उग आयी है उसे साफ करते नजर आ रहे है․

चौपटानंद ने अपने शिखा को तेल पिलाते हुए अपने गुरू की कसम खाते शिक्षण क्षेत्रों के गलियारे में घूमते यह घोषणा कर रहे है कि अगर उन्‍हें शिक्षक दिवस के अवसर पर श्रेष्‍ठ शिक्षक, उनके भाई को जिला स्‍तर पर और उनके बहनोई को अनुमंडल स्‍तर पर श्रेष्‍ठ शिक्षक घोषित नहीं किया गया तथा सम्‍मान राशि नहीं दी गयी तो वो शिक्षा के क्षेत्र में कायम भ्रष्‍ठ मगध साम्राज्‍य को नेस्‍तनाबूद कर देंगे․

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व्‍यंग्‍य

तेल का कुंआ देगी․․․․․․

अरब देश का एक अमीर शेख भारतीय विमान पर सफर कर रहा था, उसे चार विमान परिचारिकाओं में से एक विमान परिचारिका बहुत पंसद आ गयी․ शेख कुछ न कुछ बहाने करके विमान परिचारिका को अपने पास बुलाता रहा और उसे टूटी-फूटी अंग्रेजी में प्रलोभन देता रहा․ विमान परिचारिका शेख पर ध्‍यान न देते हुए अपनी ड्‌यूटी करती जा रही थी․ विमान परिचारिका की बेरूखी से शेख बड़ा परेशान हुआ, दौलतमंद होने का अंहकार उसे चैन से बैठने नहीं दे रहा था․ प्रलोभन देने का आदि शेख जब परिचारिका पर प्रलोभन का कोई प्रभाव न पड़ता देख, आखरी दमदार प्रलोभन दिया कि ‘‘अगर तुम मेरे साथ चलेगी तो तुमको एक तेल का कुंआ हम देगी''․ इस प्रलोभन का विमान परिचारिका पर उलटा ही असर हुआ और अब शेख द्वारा बार-बार बुलाने पर भी कोई न कोई बहाना कर विमान परिचारिका दूसरी विमान परिचारिका को शेख के पास भेज देती थी․ अंतत अमीर शेख ने उस विमान परिचारिका को खरीदने की पेशकश विमान के वरिष्‍ठ अधिकारियों के समक्ष रख दिया․

विमान के वरिष्‍ठ अधिकारियों ने अमीर शेख को बताया कि यह विमान भारत सरकार की संपत्‍ति है तथा हम सभी विमान परिचारिकाओं सहित भारत सरकार के मातहत काम करने वाले लोग है․ शेख के मोटी बुद्धि में इतना ही धंस सका की विमान परिचारिका को खरीदने के लिए भारत सरकार को ही खरीदना पड़ेगा इसलिए शेख ने बिना किसी हिचकिचाहट के भारत सरकार को ही खरीदने का प्रस्‍ताव रख दिया․

विमान अधिकारीगण बड़े पेशोपेश में पड़ गए, अब वे अपने अमीर कस्‍टमर को कैसे बताएं कि भारत सरकार को वो नहीं खरीद सकता क्‍योंकि भारत सरकार तो पहले ही विश्‍व वैंक और आइएमएफ के हाथों बिक चुकी है․

राजीव आनंद

सेल फोन - 9471765417

2 blogger-facebook:

  1. अब वे अपने अमीर कस्‍टमर को कैसे बताएं कि भारत सरकार को वो नहीं खरीद सकता क्‍योंकि भारत सरकार तो पहले ही विश्‍व वैंक और आइएमएफ के हाथों बिक चुकी है․

    सुन्दर !!

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  2. akhilesh Chandra Srivastava10:47 am

    Dono.hi vyang uttam hain. Badhaiee

    उत्तर देंहटाएं

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