सोमवार, 21 अक्तूबर 2013

नीरा सिन्हा की 3 लघुकथाएं

अविश्वास

एक पहुंचे हुए साधु बाबा भिक्षाटन करते हुए एक घर पहुंचे. भीक्षा मांगने के लिए आवाज लगायी, घर के मालिक दीनदयाल बाबू निकले, उन्‍होंने साधु बाबा को भिक्षा देने के लिए अपनी बेटी को आवाज लगायी, संस्‍कारी बेटी सूप में चावल, हल्‍दी, पैसा वगैरह लेकर आ ही रही थी कि दीनदयाल बाबू ने उसे अंदर कमरे में ही रूकने को कहा और खूद अंदर जाकर सूप अपनी बेटी के हाथों से लेकर साधु बाबा को देने आ गए.

साधु बाबा यह सब देख रहे थे, उन्‍होंने दीनदयाल बाबू से कहा, पुत्र मुझे कन्‍या के हाथों से ही भीक्षा चाहिए.

दीनदयाल बाबू बोले क्षमा कीजिएगा महाराज, यह इच्‍छा मैं आपकी पूरी नहीं कर सकता. मैं अपनी पुत्री को आजकल के साधुसंतों के सामने जाने नहीं देता.

आया की ममता

आया के साथ रहते-रहते एक वर्ष का आर्यन बड़ा हो रहा था. खाना, पीना, खेलना सबकुछ आर्यन अपनी आया के साथ ही करता था.

आर्यन की माँ कंपनी के पैकेज पर विदेष जा रही थी, उसने आर्यन को आया के पास ही छोड़ दिया. विदेश से लौटने के बाद आर्यन की आया महीने भर की छुट्‌टी लेकर चली गयी.

आर्यन आया की अनुपस्‍थिति को बर्दाश्त न कर सका और बीमार पड़ गया.

प्‍यार पर विश्वास

प्‍यार तो बहुत करती थी जया अपने प्रेमी से पर माता-पिता के विरूद्ध जाकर फैसला करने की सोच भी नहीं सकती थी.

प्रेमी राहुल को जब पता चला कि जया की शादी कहीं और की जा रही है तो एक दिन जया के अकेलेपन का फायदा उठाते हुए जया पर किरोसीन डाल कर आग लगा दिया.

राहुल जब किरोसीन जया पर डाल रहा था, उस वक्‍त जया ने कहा राहुल ऐसा मत करो नहीं तो प्‍यार पर आइंदा कोई विश्वास नहीं करेगा.

रिश्तों की कोचिंग

श्‍यामली यद्यपि रिश्तों की कोचिंग कर आयी थी लेकिन रिश्ता टूटने पर क्‍या करना चाहिए इस जरूरत की कोचिंग नहीं ली थी. लीवइन रिलेशन में वह जिसके साथ रह रही थी, उससे रिश्ता टूटने के कगार पर ही था और श्‍यामली को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्‍या करे. श्‍यामली का पुरूष साथी परम्‍परागत पति-पत्‍नी की तरह रहना नहीं चाहता था और श्‍यामली थी कि अपने पुरूष साथी से ही चिपके रहना चाहती थी.

श्‍यामली ने अपनी सहेली कविता से राय लेनी चाही कि वह अब क्‍या करे. कविता बोली वेरी सिंपल, जिस रिश्ते को आगे ले जाना मुमकिन नहीं उसे एक मोड़ देकर छोड़ देना चाहिए.

नीरा सिन्‍हा

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