सोमवार, 21 अक्तूबर 2013

राजीव आनंद की जासूसी कहानी - इंस्पेक्टर गौरव के कारनामे : केस ऑफ मिस्टेकन आइडेंटिटी

इंस्‍पेक्‍टर गौरव के कारनामे

केस ऑफ मिसटेकेन आइडेन्‍टीटी

इंस्‍पेक्‍टर गौरव अपने कार्यालय में रिवोलभिंग चेयर पर बैठा अपने दांये हाथ से बांयें कान को खींचता हुआ, पुलिस डिपार्टमेंट से उसके लिए आयी नई फाइल को पढ़ रहा था․ गौरव को इस नयी फाइल में जो बात सबसे ज्‍यादा चौंका रही थी वह था राजशेखर नामक व्‍यक्‍ति का गायब हो जाना और राजशेखर का कद-काठी, शक्‍ल-सूरत लगभग गौरव से मिलना․

यह मामला बड़ा विचित्र परंतु भयानक घटना की ओर संकेत कर रहा था․ हुआ यह था कि राजशेखर और अनामिका दोनों भाई-बहन एक साथ रहते चले आ रहे थे․ राजशेखर और अनामिका के माता-पिता का स्‍वर्गवास एक प्‍लेन दुर्घटना में हो चुका था․ अनामिका अपने भाई राजशेखर से दो साल छोटी थी․ राजशेखर एक सरकारी बैंक का ब्रांच मैनेजर हुआ करता था․ अनामिका अभी तक अविवाहित थी और एक कन्‍वेंट स्‍कूल में इंग्‍लिश भाषा की टीचर थी․ पढ़ने का शौक तो था ही उसे लेकिन घर पर अनामिका लगभग दुनिया के सभी जासूसी उपन्‍यासों को पढ़ डाला था․ उसकी उम्र अभी तीस वर्ष की थी․

कोलकाता से सटे सियालदाह में राजशेखर और अनामिका का पुश्‍तैनी मकान, खेत, बारी, बगान और तालाब था․ कहने का तात्‍पर्य यह है कि दानों एक अमीर खानदान से थे तथा दोनों भाई-बहन अच्‍छी नौकरी करते थे․ रहते साथ-साथ ही थे लेकिन दोनों में से कोई भी एक-दूसरे के व्‍यक्‍तिगत जिंदगी में दखल नहीं देता था․ राजशेखर छुट्‌टी के दिनों को अपनी बहन के साथ ही बिताना पंसद करता था․ इतनी ही दूर इंस्‍पेक्‍टर गौरव फाइल पढ़ा था कि कमरे में राजदत आया और ध्‍यानमग्‍न गौरव से पूछा कि सर जी नया मामला कुछ ज्‍यादा पेचीदा मालूम देता है․

गौरव मुस्‍कुराया और कहा हाँ राजदत, देखा जाए तो मामला बहुत ही पेचीदा है क्‍योंकि एक राजशेखर नाम का बैंक मैनेजर अचानक गायब हो जाता है और उसकी बहन अनामिका द्वारा पुलिस में रिपोर्ट महीना भर पहले दर्ज करवाने के बाद पुलिस अपने तरफ से ऐंडी-चोटी लगाकर राजशेखर को ढूढ़ नहीं पाती है तब जाकर यह फाइल मुझे दिया जाता है, गौरव ने संक्षेप में राजदत को मामला बताया․

गौरव बहुत ही उत्‍साहित होकर राजदत से कहा, जानते हो राजदत, मामले का सबसे दिलचस्‍प पहलू क्‍या है ?

राजदत व्‍यग्रता से पूछा, क्‍या है सरजी ?

गौरव ने बतलाया कि ये जो राजशेखर साहब है न वो हर तरह से मुझसे मिलते जुलते है․ गौरव ने फाइल में लगे राजशेखर की तस्‍वीरों को एक-एक कर दिखाते हुए, राजदत से पूछा, है न हम दोनों में समानता ?

राजदत आश्‍चर्य चकित सा था तस्‍वीरों को देखकर․ सर जी राजदत ने कहा, समानता तो आपमें और राजशेखर में इतनी ज्‍यादा है कि अगर फाइल फोटो को यहां कार्यालय में लगा दिया जाए तो कोई समझ नहीं सकता कि ये तस्‍वीरें आपकी नहीं हैं․

बैठो राजदत, फाइल आगे देखते है, गौरव ने कहा․

राजदत सामने के चेयर पर बैठ गया․ गौरव आगे फाइल को पढ़ना शुरू किया, अब जो फाइल में लिखा था, वो था राजशेखर की कुछ विशेषताएं, जैसे राजशेखर का सबसे पसंदीदा पेय था एपल वाइन, जिसे वह एक खास तरह के अंड़ाकार शीशे के ग्‍लास में पीना पसंद करता था․ दूसरी विशेषता थी कि राजशेखर अपने बंगले के बगल में स्‍थित एक बहुत बड़ा तालाब, जिसमें वह रोज सुबह-सुबह स्‍नान करता था, को सिर्फ तीन मिनट में तैर कर पार कर जाता था․ जब कि अच्‍छे से अच्‍छा तैराक भी उतने बड़े तालाब को पंद्रह मिनट से पहले पार नहीं कर सकता․ तीसरी विशेषता थी कि राजशेखर एपल वाइन पीते वक्‍त पाइप में प्रींस हेनरी नामक तम्‍बाकू भर कर पीता था․ वाइन वह सिर्फ दो पैग ही पीता था और पाइप में भरा हुआ आधा तंबाकू वह पाइप में ही छोड़ देता था․ चौथी विशेषता थी कि राजशेखर को कार बहुत तेज चलाने की आदत थी․ वह अपने फोर्ड कार से सिर्फ पांच मिनट में हावड़ा ब्रिज पार कर जाता था․ हां तेजी से कार चलाने पर भी पिछले बीस वर्षों में उसने एक भी एक्‍सीडेंट नहीं किया था․ पांचवी विशेषता बहुत ही रोचक परंतु भयानक थी और वह थी कि अपने वाइन पीए हुए ग्‍लास को वो हवा में उछाल देता था और साइलेंसर लगे जर्मन पिस्‍टल से सूट कर चकनाचूर कर देता था․

ये सभी विशेषताएं राजशेखर की बहन अनामिका ने फाइल के माध्‍यम से पुलिस को उपलब्‍ध करायी थी․

राजदत मामले को सुनकर स्‍तब्‍ध था․ उसे समझ में नहीं आया कि एक व्‍यक्‍ति के गूमशूदगी के फाइल में इतनी बातें क्‍यों लिखी गयी है․ उसने गौरव से जानना चााहा․

गौरव ने चुटकी लेते हुए राजदत को बतलाया कि पुलिस इस मामले में महीने भर पूछताछ कर चुकी है और राजशेखर की बहन से गहन पूछताछ के बाद ही यह फाइल तैयार की गयी है․ हालांकि राजशेखर क्‍यों अचानक गूम हो गया तथा उसका कोई दुश्‍मन भी है, फाइल पढ़ने से ऐसा कुछ पता नहीं चलता है․ अनामिका ने सिर्फ एक जगह अपना बयान दिया है कि शनिवार को जब उसका भाई देर रात तक नहीं आया तो वो थोड़ा घबरायी क्‍योंकि बिना बताए राजशेखर कभी भी इतनी देर तक घर से बाहर नहीं रहता था․ हालांकि उसे फोन करने की आदत नहीं थी लेकिन मीटींग वगैरह या बैंक के किसी फन्‍कशन में व्‍यस्‍त रहने पर वह स्‍टाफ से मुझे फोन जरूर करवा दिया करता था․ मैंने रात के 9 बजे से 12 बजे तक राजशेखर से संबंधित बैंक के लोगों को फोन करती रही और सभी ने मुझे बताया कि राजशेखर नीयत समय पर ही बैंक से निकले थे․ अनामिका आगे कहती है कि मुझे आश्‍चर्य हो रहा है यह सोचकर कि राजशेखर मुझे बिना बताए हुए भी कहीं जा सकता है․ खैर किसी तरह मैंने रात काटी और सुबह करीबन 8 बजे ही पुलिस स्‍टेशन पहुंच कर उसके गुमशुदगी का रिपोर्ट लिखाया․

रात के 8 बज चुके थे, गौरव अब चुपचाप फाइल बंद कर अपने दांये हाथ से बांये कान को खींच रहा था․

राजदत गौरव की तंद्रा भंग करते हुए कहा कि सर जी, घर पर भाभी जी इंतजार कर रही होगी․

गौरव जैसे जागा, हांँ, राजदत, अब चलता हॅूं․ कल फिर आगे फाइल देखा जाएगा․ गौरव अपनी बुलेट से घर की ओर रवाना हो गया․ घर पहुंच कर अपनी आदत अनुसार अपनी पत्‍नी निहारिका के द्वारा लाए गए एक ग्‍लास दूध एक ही सांस में पी गया और न जाने क्‍यों आज रात का खाना खाने के पहले ही अपने स्‍पेनिश गिटार को ट्यून करने लगा․ ट्यून करने के बाद स्‍टॉफ नोटेशन पर काफी देर तक अपनी उगलियां दौड़ाता रहा फिर अपनी पंसदीदा धून ‘कमस सेपटेंबर' और ‘बेबी एलीफेंट' बजाया․ धुन बजाने के क्रम में वह अपनी नयी फाइल और उस केस के संबंध में ही सोच रहा था․ गौरव तकरीबन दो घंटे गिटार बजाने में बिता चुका था, उसकी पत्‍नी ने उसे टोका कि क्‍या आज खाने का इरादा नहीं है ? गौरव जैसे ध्‍यान से जागा हो, उसने तुरंत ही गिटार के ट्यून को ढ़ीला कर दिया और बैग में रखते हुए गुसलखाने की ओर भागा․ दस-पंद्रह मिनट में फ्रेश होकर बाहर निकल आया और डायनिंग टेबल पर जा बैठा, फिर दोनों पति-पत्‍नी ने रात का खाना खाया और फिर अपने बेडरूम की और चल दिए․

सूबह जल्‍दी-जल्‍दी घंटे भर वर्जिश और योग-ध्‍यान करने के बाद गौरव अपने रात भर के ‘फास्‍ट' को ब्रेक करने के लिए टेबल पर जा बैठा और ब्रेकफास्‍ट करने लगा और फिर बिना ज्‍यादा वक्‍त गवाएं अपने कार्यालय की ओर बुलेट से रवाना हो गया․

राजदत अभी कार्यालय नहीं आया था․ गौरव फाइल निकालने के बाद उसे पूरा पढ़ गया, पूरी फाइल पढ़ने के बाद भी उसे कहीं भी कोई रोशनी की किरण नजर नहीं आयी․ अभी वह फाइल बंद कर रिवालभिंग चेयर पर खूद को ढीला छोड़ा ही था कि राजदत कमरे में प्रवेश किया और गौरव को अपने दांये हाथ से वांये कान को खींचते हुए देखकर समझ गया कि सर जी पूरा फाइल पढ़ चुके है और मन ही मन गुथ्‍थी को सुलझाने में लगे हुए है․ राजदत ने टोका, गुड मार्निंग, सर जी․

गौरव जैसे नींद से जागा, गुड मार्निंग राजदत․ राजदत उत्‍साहित सा पूछा सर जी, मामले में कुछ प्रगति हुई क्‍या ?

गौरव ने कहा, राजदत मैंने पूरी फाइल बड़ी गंभीरता से पढ़ गया, पुलिस के बयान, सारे स्‍टेटमेंन्‍टस जो राजशेखर की बहन ने दिए, सभी को मैं पढ़ चुका लेकिन सुराग नाम की चीज मिली नहीं․

राजदत ने हतोत्‍साहित होते हुए कहा, तो क्‍या सर जी, पुलिस की तरह आप भी फाइल बंद कर देंगे ?

गौरव मुस्‍कुराया और कहा राजदत किसी चुनौती को चुनौती देना मेरा पेशा है․ सुराग नहीं मिला तो मिल जाएगा․ आज से इस मामले में मेरा काम शुरू होता है․

गौरव थोड़ी देर रूका फिर राजदत से बोला, राजदत चलो आज राजशेखर के आवास चलते है․ सुराग की खोज राजशेखर के आवास से ही शुरू करनी होगी․

राजदत सहर्ष तैयार हो गया और कमरे से बाहर निकल कर अपने सर जी का इंतजार करने लगा․

गौरव जब कमरे से बाहर आया तो राजदत को वहां खड़ा पाया․ गौरव ने राजदत से कहा राजदत हम लोगों को सियालदाह के लिए रवाना होना होगा और दोनों अपने-अपने पत्‍नियों को खबर कर सियालदाह के लिए रवाना हो गए․ गौरव और राजदत इस केस के तहकीकात के संबंध में कोलकाता के एक होटल में ठहर गए․ कुछ घंटे होटल के कमरे में बीताने के बाद एक टैक्‍सी भाड़े पर लिया और फाइल में दर्ज राजशेखर के आवासीय पते पर रवाना हो गए․ रविवार का दिन था राजशेखर की बहन अनामिका घर पर ही थी․

राजशेखर का आवास बहुत ही भव्‍य और आलीशान था, चारों तरफ चारदीवारी से घिरा हुआ․ चारदीवारी के अंदर प्रवेश करने के लिए एक बड़ा गेट और बगल में एक छोटा गेट जिससे अंदर जाने के बाद सैंकड़ों फल-फूल के पेड़ और पौधे, झील की तरह एक बड़ा सा तालाब․ गौरव और राजदत जैसे ही गेट से राजशेखर के आवास में प्रवेश किया, गौरव ने राजदत को रूकने को कहा․ राजदत ठिठका, गौरव ने राजदत के दांये हाथ से अपना ब्रीफकेस ले लिया और उसे राजदत को दोनों हाथों से उपर उठा कर पकड़े रहने को कहा․ राजदत को कुछ समझ में नहीं आया, उसे जैसा कहा गया था वैसा ही किया․

गौरव ने ब्रीफकेस को खोला, कोई पांच मीनट ब्रीफकेस खोले रखा और फिर जैसे ही बंद किया, राजदत बुरी तरह चौंक गया तथा गौर से अपने सर जी को देखने लगा, यह क्‍या सर जी, आप तो आप लग ही नहीं रहें है․

गौरव अपने गालों पर दाढ़ी और मूंछों पर हाथ फेरते हुए कहा राजदत, अब मैं राजशेखर जैसा तो नहीं लग रहा हॅूं․ ?

राजदत बोला, नहीं, नहीं, सर जी अब तो आप दाढ़ी-मूंछ लगाकर सरदार इंद्रजीत सिंह लग रहे है․

गौरव मुस्‍कुराया, सरदार इंद्रजीत, वही नामकुम थाने का थानेदार, गौरव ने मुस्‍कुराते हुए कहा․

जी सर जी, राजदत भी मुस्‍कुरा रहा था․ गौरव ने राजदत को अब चलने को कहा, दोनों बीस मीनट चलने के बाद राजशेखर के आवास पर पहुंचे․ तीन-चार बार कॉलिंग बेल दबाने के बाद दरवाजा खुला, एक अधेड़ उम्र की बंगाली महिला दरवाजे पर खड़ी दिखाई दी․ गौरव ने उस महिला से पूछा राजशेखर और अनामिका का यही घर है․

महिला ने दबी जुबान में बांगला भाषा में कहा, हें, अेसो तथा गौरव और राजदत को अंदर ले गयी और बैठकनुमा बड़े से कमरे के सोफे की ओर इशारा किया और कहा, आपनी बोसून, आमी अनामिका मेमसाहेब के डाकची अर्थात मैं अनामिका मेमसाहब को बुलाती हॅूं․

महिला अंदर चली गयी, गौरव और राजदत सोफे पर बैठ गए या यूं कहिए कि धस गए․ सोफा बहुत ही लगजर्रियस था․

थोड़ी देर में अनामिका कमरे में प्रवेश की और अंग्रेज स्‍टाइल में गौरव और राजदत से हाथ मिलाने के बाद उसका परिचय पूछा․ गौरव ने बताया कि वे दोनों पुलिस विभाग के डिडेक्‍टीव एजेंसी से है और राजशोखर के गूमशुदगी के मामले में आपसे मिलने आए है․

अनामिका उन्‍हें बैठने को कहा और आवाज देकर उस अधेड़ महिला को चाय और नाश्‍ता लाने को कहा․ हाँ तो इंस्‍पेक्‍टर गौरव, अनामिका ने व्‍यंग्‍यात्‍मक ढ़ंग से पूछा, आप यहां क्‍या तहकीकात करेंगे ?

गौरव ने कहा, मिस अनामिका, क्‍या मैं वो तालाब देख सकता हूँ जिसे आपके भाई राजशेखर साहब तीन मिनट में तैर कर पार करते थे․

अनामिका ने कहा, हाँ-हाँ, क्‍यों नहीं, चलिए मैं आपको वो पोखरा दिखाती हॅूं और तीनों कमरे से बाहर आ गए․ थोड़ी दूर कमरे से निकल कर सीधे चलने के बाद बांयी ओर एक पंगडंड़ी की तरह रास्‍ता जाता हुआ दिखायी दिया जिसके दोनों तरफ घने पेड़ लगे हुए थे, उस पगडंड़ी पर करीबन पांच मिनट चलने के बाद वे तीनों एक पोखरे के नजदीक पहुंचे जो पोखरा कम झील ज्‍यादा लगता था․ वहां का दृश्‍य बड़ा ही मनोरम था जिसका आनंद गौरव और राजदत उठा रहे थे․

गौरव ने अनामिका से पूछा, क्‍या आप बता सकती है मिस अनामिका कि एक साधारण व्‍यक्‍ति इस पोखरे को इस पार से उस पार कितने देर में कर सकता है ?

अनामिका ने कहा, यही कोई पंद्रह से बीस मिनट में․

गौरव ने पुनः पूछा, आपके भाई साहब इस पोखरे को कितने देर में तैर कर पार कर जाते थे ?

यही कोई तीन मिनट में, अनामिका ने कुछ गर्व के साथ कहा․

बहुत अच्‍छे, गौरव ने उत्‍साहित होते हुए अनामिका से कहा․

इस दौरान राजदत सिर्फ अपने सर जी और मिस अनामिका के बीच हो रहे वार्तालाप को सुन रहा था․ गौरव, राजदत और मिस अनामिका तीनों वहां से वापस चले आए․ कमरे में तब तक चाय और नाश्‍ता उनका इंतजार कर रहा था․ चाय को देखते ही गौरव ने कहा, मिस अनामिका, मुझे माफ कीजिए, मैं चाय नहीं पीता․

अनामिका ने कहा कोई बात नहीं, आप जो भी पीते है बताइए, मैं उसका इंतजाम किए देती हॅूं․

जी धन्‍यवाद, मैं अभी कुछ भी पीना पंसद नहीं करूंगा, गौरव ने कहा․ गौरव ने बिना समय गवाएं मिस अनामिका से कहा, क्‍या आप मुझे वह शीशे का अंड़ाकार ग्‍लास दिखला सकती है जिससे राजशेखर साहब एपल वाइन लिया करते थे․

हाँ-हाँ क्‍यों नहीं, मिस अनामिका ने कहा तथा गौरव को उस कमरे के एक तरफ आने को कहा, अनामिका पहले ही वहां पहुंच गयी और एक अलमारीनूमा लकड़ी के दरवाजे को खोला तो वह खुलकर एक अर्द्ध अंड़ाकार टेबल में तब्‍दील हो गया और अलमीरा के पहले खाने में करीने से कई तरह के इंग्‍लिश वाइन के बोतल नजर आए․ बगल के खाने में एक चांदी के सुंदर तश्‍तरी पर दर्जन भर शीशे के अंड़ाकार ग्‍लास रखे हुए थे․ गौरव ने एक ग्‍लास को उठाकर अच्‍छी तरह उलट-पलट कर देखा और फिर जहां से उठाया था वहीं रख दिया․ जी धन्‍यवाद, मिस अनामिका, गौरव ने कहा․

तकल्‍लुफ की कोई जरूरत नहीं, इंस्‍पेक्‍टर, यह तो मेरा फर्ज है, अनामिका ने कहा․

क्‍या मैं उस पिस्‍टल को देख सकता हूँं जिससे आपके भाई साहब ग्‍लास को हवा में उछाल कर चकनाचूर कर देते थे, गौरव ने अनामिका से कहा․

आप लोग यहीं ठहरिए, मैं बस गयी और आयी, मिस अनामिका ने ऐसा कहते हुए कमरे से अंदर की ओर चली गयी․ पांच मिनट के बाद वह लौटी अपने हाथों मे एक किताब लिए हुए और गौरव के सामने उस किताब को जब खोला तो वह किताब नहीं बल्‍कि पिस्‍टल रखने का एक खूबसूरत बोक्‍स था․ गौरव ने उस बोक्‍स से पिस्‍टल को निकाला और अपने अभ्‍यस्‍त उंगलियों से उसे घूमा फिराकर देखा फिर पिस्‍टल को बोक्‍स में रख दिया․ अब गौरव ने उस तंबाकू पीने वाले पाइप को देखना चाहा․

मिस अनामिका ने वो तंबाकू का पाइप और प्रिंस हेनरी नामक तंबाकू लाकर इंस्‍पेक्‍टर गौरव को दिखलाया․

गौरव अब उस फोर्ड कार को देखना चाहता था जिससे राजशेखर सिर्फ पांच मीनट में हावड़ा ब्रिज क्रास कर जाया करता था․ गौरव ने मिस अनामिका को फोर्ड कार दिखलाने का आग्रह किया․

मिस अनामिका सहर्ष तैयार हो गयी और गौरव एवं राजदत को कमरे से बाहर ले जाकर दांयी ओर ले गयी तथा गैराज का दरवाजा उस अधेड़ महिला को खोलने के लिए कहा․ महिला ने गैराज के दरवाजे का ताला खोल दिया․

गौरव ने मिस अनामिका से पूछा, माफ कीजिएगा, मिस अनामिका, अब तो यह कार यूंही पड़ी रहती होगी ?

मिस अनामिका ने कहा, नहीं, मैं इस कार को हर सप्‍ताह चलाती हॅूं और इसी कार से कोलकाता जाती हॅूं․ हावड़ा ब्रिज इस कार से मैं आधे घंटे में क्राश करती हॅूं․

जबकि, गौरव और अनामिका लगभग एक साथ बोल पड़े, राजशेखर हावड़ा ब्रिज को इस कार से मात्र पांच मिनट में क्रास कर जाते थे․ गौरव और अनामिका बोल कर एक-दूसरे को देखने लगे․ गौरव अपना हाथ बढ़ाते हुए मिस अनामिका से कहा अगर आपको तकलीफ न हो तो बस आप सिर्फ मुझे राजशेखर का कमरा दिखा दें जहां गायब होने से पहले वे आखरी बार रहे थे․

अनामिका ने कहा इसमें तकलीफ की क्‍या बात है, चलिए मैं आपको राजशेखर का कमरा दिख देती हॅूं․ गौरव और राजदत राजशेखर का कमरा देखने के बाद वहां से निकल पड़े․ गौरव ने अनामिका से कहा ओके मिस अनामिका, अब हमलोगों को इजाजत दीजिए, आपकी मदद के लिए धन्‍यवाद․

मिस अनामिका ने पूरे गरमजोशी के साथ गौरव से हाथ मिलाया और दोनों को छोड़ने मेन गेट तक आयी․

राजशेखर के घर से बाहर आने के बाद राजदत जो इतनी देर से चुप था लगभग बेचैनी से अपने सर जी से पूछा, सर जी मुझे यह बात समझ में नहीं आयी कि मिस अनामिका से मिलने से पहले आपने दाढ़ी और मूंछें क्‍यों लगायी ?

गौरव ने कहा, राजदत तुम भूलते बहुत हो, अरे भाई, मिस अनामिका का भाई राजशेखर मुझसे मिलता-जुलता है बल्‍कि यूं कहो कि मेरा ही दूसरा रूप है, तो अगर मैं बिना दाढ़ी-मूंछ लगाए मिस अनामिका से मिलता तो उसे इस बात का पता तो चल ही जाता न कि मैं राजशेखर का हमशक्‍ल हॅूं और यह बात मैं मिस अनामिका से छुपाना चाहता था․

वो क्‍यों सर जी, राजदत ने बड़े भोलेपन से पूछा ?

वो मैं तुम्‍हें बाद में बताउंगा, गौरव ने अपनी दाढ़ी और मूंछ उतारकर राजदत को देते हुए उसे ब्रीफकेस में रखने को कहा․ राजदत दाढ़ी और मूंछ को ले कर चलता रहा और टैक्‍सी में बैठने के बाद ब्रीफकेस खेलकर रख दिया․ गौरव और राजदत अपने होटल के कमरे में पहुंच चुके थे․ राजदत ने खाने का आर्डर देकर कमरे में आया तो देखता है कि गौरव कमरे के खिड़की के पास खड़ा अपने दांये हाथ से बांयें कान को खींचता हुआ कुछ सोच रहा है․ वेटर खाना लेकर आ चुका था, राजदत ने गौरव से कहा, सर जी खाना लग चुका है․ गौरव खाने के मेज पर आ बैठा, उसे अपनी पत्‍नी निहारिका का याद हो आयी․ खैर गौरव और राजदत खाना खाने लगे․

खाना खाने के बाद गौरव ने फोन से अपनी पत्‍नी से बात की और कहा निहारिका मैं तुम्‍हें बहुत मिस कर रहा हॅूं लेकिन काम ही कुछ ऐसा है अभी कुछ दिन और लग जाएंगे․ तुम अपना ख्‍याल रखना, इतना कह कर गौरव ने फोन डिस्‍कनेक्‍ट कर दिया․

राजदत कहा रहा था, सर जी आज पूरा दिन मिस अनामिका के यहां ही बीत गया, क्‍या आपको वहां कोई सुराग मिला․

गौरव बोला राजदत उतावले मत बनो, रात हो गयी है, सो जाओ, कल सुबह बातें करेंगे․

गौरव और राजदत करीबन सप्‍ताह भर और कोलकाता में रूके․ इस दरम्‍यान गौरव राजशेखर के बैंक, बैंक के स्‍टाफ और उसके मित्रों, जानकारों सभी से सरदार इंद्रजीत सिंह के भेष में ही मिलता रहा और फिर वापस लौट आया․

गौरव के घर लौटते ही निहारिका अपने पति से लगभग लिपट सी गई․ पंद्रह दिनों से गौरव बाहर ही था, कहते है दूर रहने से प्‍यार बढ़ता है, वही हुआ․ दूसरे दिन से गौरव ने वो सभी जो राजशेखर की विशेषताएं थी उसे हासिल करने के लिए अभ्‍यास करने लगा․ निहारिका अपने पति से पूछा भी करती कि आप जब से कोलकाता से लौटे हैं, कुछ नये-नये शौक पाल लिए है क्‍या, कभी तैरते है तो कभी कार इतना फास्‍ट चलाते है और सबसे आश्‍चर्यजनक बात तो यह है कि आजकल आप दूध भी एक खास तरह के अंड़ाकार शिशे के ग्‍लास में पीते है, आखिर माजरा क्‍या है ?

गौरव निहारिका के ढ़ेर सारे प्रश्‍नों को सुनता, पर जवाब एक का भी स्‍पष्‍ट रूप से नहीं देता बल्‍कि टाल जाता था․ आखिर प्रोफेशनल सीक्रेट भी कोई चीज है․ निहारिका द्वारा ज्‍यादा जिद करने पर ‘प्रोफेशनल सीक्रेट' कह कर आगे सवाल नहीं करने की ताकीद कर दिया करता․ समय बीतता गया, गौरव राजशेखर के सभी विशेषताओं को हासिल कर चुका था․ राजशेखर द्वारा तालाब को तैर कर पार करने में लगा तीन मिनट का समय, हावड़ा ब्रिज को फोर्ड कार से पार करने में लगा पांच मिनट का समय, पाइप में प्रिंस हेनरी तंबाकू एपल वाइन के साथ पीने का, सभी को गौरव अब एक अभ्‍यस्‍त खिलाड़ी की तरह करना सीख चुका था․ हाँ एपल वाइन की जगह गौरव दूध उसी तरह के अंड़ाकार शीशे के ग्‍लास में पीने का अभ्‍यस्‍त हो गया था, फिर उसे उछाल कर पिस्‍टल से चकनाचूर करने का भी अभ्‍यास कर चुका था․ अब गौरव तैयार हो गया था राजशेखर के केस को हल करने के लिए दूसरे स्‍टेज पर तहकीकात करने को․ दरअसल गौरव ने किसी से कुछ अभी तक कहा नहीं था लेकिन वह राजशेखर के हमशक्‍ल होने का फायदा उठाना चाहता था इसलिए शक के आधार पर उसने मिस अनामिका को हिरासत में नहीं लिया था․ शक की सुई मिस अनामिका की ओर संकेत कर रही थी लेकिन इस बात को पुलिस अपने तहकीकात में समझ नहीं सकी थी․ मुजरिम कोई न कोई सुराग अवश्‍य छोड़ता है परंतु इस केस में मुजरिम ने कोई सुराग नहीं छोड़ा था․

मिस अनामिका से मिलने के बाद गौरव को यह समझने में देर नहीं लगी कि मिस अनामिका का कहीं न कहीं हाथ तो है राजशेखर के गुम होने में, अब सिर्फ यह पता लगाना है कि मिस अनामिका ने इसे कैसे अंजाम दिया है, जिसका कोई सुराग अब तक तो नहीं मिला था․

गौरव चाहता तो मिस अनामिका को रिमांड़ पर ले सकता था पर गौरव का मानना था कि कनफेशन के बाद गिरफ्तार करना कानून का सही इस्‍तेमाल कहलाएगा․ मिस अनामिका इतनी स्‍मार्ट थी कि उसे हिरासत में लेकर भी सत्‍य तक नहीं पहुंचा जा सकता था लिहाजा गौरव ने फैसला किया कि वह राजशेखर बनकर मिस अनामिका के घर जाएगा और उसके साथ जैसे राजशेखर रहता था वैसे ही रहेगा․ जाहिर है मिस अनामिका उसे देखकर राजशेखर होने का धोखा तो खा सकती है पर गौरव ही राजशेखर है इस बात को मिस अनामिका को मनवाने में गौरव को काफी मशक्‍कत करनी पड़ेगी और जब मिस अनामिका मुझसे सारे इम्‍तहान ले लेगी और गौरव सभी इम्‍तहान में अव्‍वल रहेगा तभी मिस अनामिका यह कबूल करेगी कि राजशेखर कहां गुम हुआ या गुम करवा दिया गया․

दूसरे दिन गौरव कार्यालय जाकर राजदत को विश्‍वास में लिया और अपनी पूरी योजना उसे बता दिया․ राजदत योजना सुनकर स्‍तब्‍ध था क्‍योंकि ऐसा करने में खतरा भी बहुत था․ बहरहाल अब राजदत को यह समझ में आया कि गौरव मिस अनामिका से दाढ़ी-मूंछ लगाकर क्‍यों मिलने गया था․

गौरव ने उसे स्‍तब्‍ध देखकर कहा, राजदत तुम भी मेरे साथ चलोगे और सियालदाह में एक होटल लेकर हमलोग वहां रहेंगे फिर मैं राजशेखर बनकर उसके घर चला जाउंगा․ मैं तुम्‍हें वहां से समय-समय पर कान्‍टेक्‍ट करता रहूंगा․

राजदत सभी बातों को सुनकर हामी भर दिया․

दूसरे दिन गौरव अपनी पत्‍नी से यह कह कर सियालदाह रवाना हुआ कि उसे वहां कुछ समय लगेगा लेकिन एक ताकीद निहारिका को करता गया कि जब तक वह सियालदाह में रहेगा, उसे फोन पर वह संपर्क न करें․ समय मिलने पर वह ही निहारिका को संपर्क करेगा․ हाँ इमरजेंसी में, गौरव ने निहारिका को राजदत का फोन नंबर दे दिया और ताकीद कर गया कि राजदत को पहले संपर्क करे․ राजदत से मुझे हर पल की जानकारी मिल जाएगी․

गौरव और राजदत सियालदाह के लिए रवाना हो गए․ सियालदाह पहुंच कर निहायत साधारण बंगाली धर्मशालानूमा होटल में एक कमरा ले लिया․ कमरे में पहुंच कर दोनों रिलेक्‍स हो गए, उसके बाद गौरव ने राजदत को अपने प्रोग्राम के संबंध में बताया․ रात को खाने में भात और माछेर झोर दोनों ने खाया․ दूसरा दिन रविवार था, गौरव राजदत को बोला कि तुम मेरे साथ निकलो, राजशेखर के घर के कुछ पहले मैं तुम्‍हें छोड़ दूंगा और दोनों निकल पड़े․

गौरव बहुत पुरानी परंतु मंहगी पोशाक खास कर राजशेखर बनने के लिए पहना हुआ था․ बाल बिखरे हुए थे, शर्ट पतलून में आधा अंदर और आधा बाहर था․ पतलून के घुटने में मिट्टी वगैरह के दाग लगे हुए थे․ शर्ट कहीं-कहीं गंदी और कहीं दरकी हुयी थी․ गौरव को देखकर लग रहा था कि बड़ी मुसीबत को झेलता हुआ वह आ रहा है․

राजशेखर का घर आ गया था, गौरव राजदत को चौंकन्‍ना रहते हुए लौट जाने को कहा․ राजदत बेस्‍ट अॉफ लक कहते हुए गौरव उर्फ राजशेखर से विदा लिया और होटल की ओर चल पड़ा․

राजशेखर बना गौरव मिस अनामिका के सामने जब पहुंचा तो उसे देखकर अनामिका को तो जैसे सांप सूंघ गया, उसे सहसा अपनी नजरों पर विश्‍वास ही नहीं हुआ कि सामने उसका भाई राजशेखर खड़ा है․

स्‍तब्‍ध सी खड़ी अनामिका को कुछ मिनट तक देखते हुए गौरव उर्फ राजशेखर ने अपनी बहन अनामिका से पूछा, अंदर आने नहीं कहोगी अनामिका ?

हाँ-हाँ, कम अॉन राज․ हालांकि अनामिका ऐसा संबोधन नहीं करना चाहती थी जो वह अपने भाई को करती थी पर रिफलेक्‍स एक्‍शन की तरह उसके मुंह से वही संबोधन निकला जो वह अपने भाई राजशेखर के लिए करती थी․

गौरव का पहला कदम सफल सिद्ध हुआ, अनामिका उसे घर में आने को कहा․ गौरव अंदर चला गया, अनामिका ने उस अधेड़ महिला को पानी, नाश्‍ता वगैरह लाने को कहा और खुद अपने कमरे में चली गयी․ अनामिका की धड़कने बढ़ गयी थी, उसका चेहरा भयभीत सा हो गया था और माथे पर पसीने की बूंदें छलक आयीं थी․ थोड़ी देर शांत अपने कमरे में बैठ कर खूद को संभाल लिया था अनामिका ने․

इस बीच गौरव पानी पी लिया था और सोफे में बैठा अनामिका का इंतजार कर रहा था․

अनामिका खुद को संयत कर चुकी थी․ स्‍मार्ट कुछ ज्‍यादा ही थी अनामिका इसलिए उसने आगन्‍तुक को दिल से अपना भाई स्‍वीकार नहीं कर पा रही थी․ उसे आगन्‍तुक पर भारी संदेह था कि यह कोई बहुरूपिया है जो राजशेखर के रूप में उसके घर में घूस आया है․ अनामिका ने मन ही मन आगन्‍तुक को जांचने की योजना बना ली थी․

अनामिका जैसे ही गौरव उर्फ राजशेखर के सामने आयी, गौरव ने ही बात छेड़ी, क्‍या तुम नहीं पूछोगी कि मैं इतने दिन कहां रहा, गौरव ने अनामिका के तरफ प्रश्‍न उछाला․

अनामिका ने बड़े अनमने ढ़ंग से पूछा, हाँ-हाँ, तुम इतने दिन कहां रहे ?

गौरव ने नाटकीय ढ़ंग से बताया, उस दिन काफी गर्मी थी, मैं बैंक से निकलकर घर ही आ रहा था पर गर्मी के कारण मुझे नौका सैर करने का मन हुआ․ मैंने मोटर बोट लिया और दूर उस बोट में निकल गया फिर मुझे याद नहीं कि कब बोट एक बड़े पत्‍थर से टकराया और कब मैं बेहोश हो गया․ मुझे मछुवारों ने बचाया और मेरा इलाज और सेवा किया․ जब मैं स्‍वास्‍थ्‍य महसूस करने लगा तब आज आ रहा हॅूं․

अनामिका ने ऊबते हुए कहानी सूना और मन ही मन सोचा कि कहानी तो अच्‍छी बनाई है पर उसे तो कहानी के झूठ होने का सौ प्रतिशत विश्‍वास था․ उसे यही चिंता थी कि आगन्‍तुक राजशेखर के भेष में आखिर है कौन और यहां क्‍यों आया है ?

अनामिका आगन्‍तुक को जांचने के लिए बोली, तुम अपने कमरे में जाओ और आराम करो क्‍योंकि तुम बहुत थके लग रहे हो․ अनामिका देखना चाहती थी कि आगन्‍तुक राजशेखर के कमरे में कैसे पहुंचता है․

गौरव तो पहले ही दाढ़ी-मूंछ लगाकर पूरे घर का मुआयना कर चुका था इसलिए उसे राजशेखर के कमरे तक जाने में कोई समस्‍या नहीं हुई․ गौरव सोफे से उठा और थका-मांदा सा राजशेखर के कमरे में चला गया․

अनामिका को यह देख कर फिर आश्‍चर्य हुआ कि आगन्‍तुक को इस आलीशान महलनुमा घर में राजशेखर का कमरा खोजने की भी जरूरत नहीं पड़ी․

रात हो चुकी थी, गौरव राजशेखर के कमरे में सोया हुआ था․ गौरव जानबूझ कर खाने के लिए नीचे डायनिंग रूम में नहीं आया क्‍योंकि उसे तो अनामिका को यह समझाना था कि वह थका हुआ है․

अनामिका ने भी उसे खाने के लिए नहीं बुलाया क्‍योंकि आगन्‍तुक के आने के बाद से अनामिका भी सामान्‍य नहीं रह पा रही थी․ उसे भविष्‍य में बड़े तूफान आने का अंदेशा हो रहा था․ रात का खाना अनामिका भी ठीक से खा नहीं पायी․

दूसरे दिन सुबह राजशेखर की तरह गौरव तालाब चला गया, स्‍नान वगैरह कर नीयत समय पर आकर नाश्‍ते के टेबल पर बैठ गया, नाश्‍ता अनामिका के साथ ही किया और फिर तैयार होकर अपनी फोर्ड कार से बैंक के लिए रवाना हो गया․

समय जैसे-जैसे बीतता जा रहा था अनामिका की चिंता बढ़ती जा रही थी क्‍योंकि किसी भी दृष्‍टिकोण से आगन्‍तुक अनामिका को बहुरूपिया नहीं लग रहा था․

एक दिन जब गौरव स्‍नान करने के लिए तालाब गया हुआ था, पीछे-पीछे अनामिका भी तालाब चली गयी और गौरव को तैर कर तालाब को पार करने के लिए कहा․

गौरव तो यही चाहता था, उसने तीन मिनट के भीतर ही तालाब को तैर कर पार कर लिया․ अनामिका अपना सुंदर सा रिस्‍ट वॉच देखती रह गयी․ उसे फिर निराशा हाथ लगी․ हालांकि राजशेखर के दिनचर्या और बैंक से लौटने के बाद वह जो भी करता था उसमें गौरव द्वारा अपनाए गए दिनचर्या और कार्य आश्‍चर्यजनक रूप से समान थे․ अनामिका कहीं भी इसमें भेद नहीं कर पा रही थी․

अनामिका ने शाम को बैंक से लौटने के बाद आगन्‍तुक के व्‍यवहार को देखकर दंग रह गयी जब गौरव उर्फ राजशेखर अंड़कार शीशे के ग्‍लास में एपल वाइन का दो पैग लिया तथा फ्रेंच हेनरी तंबाकू को पाइप में भरकर आधा पिया और आखिर में अपने जर्मन पिस्‍टल से ग्‍लास को उछाल कर चकनाचूर कर दिया․

गौरव हालांकि एपल वाइन नहीं पर रहा होता, इन दिनों वह मटमैले रंग का एपल वाइन की तरह शरबत खास इसी वजह से बनवाकर एपल वाइन की बोतलों में भर रखा था․ पाइप में तंबाकू जला कर बिना पिए ही आधा तंबाकू फूंक कर जला दिया करता था․

खाने के टेबल पर उस रात अनामिका काफी घबरायी सी लग रही थी․ जितना ही सामान्‍य व्‍यवहार गौरव अनामिका के साथ करता उतना ही असामान्‍य सी अनामिका हो जाती․ अनामिका को अंदर ही अंदर कोई भयंकर चिंता खाए जा रही थी․ अब अनामिका के लिए आशा की किरण सिर्फ फोर्ड कार से पांच मिनट के अंदर हावड़ा ब्रिज क्रास करने वाला जांच रह गया था․ इसके लिए वह बेसब्री से रविवार का इंतजार करने लगी थी․ उसे इस बात का पक्‍का विश्‍वास था कि हावड़ा ब्रिज क्रास टेस्‍ट में आगन्‍तुक निश्‍चित रूप से असफल होगा․

लगभग पंद्रह दिन बित चुके थे․ राजदत से कान्‍टेक्‍ट करने पर गौरव को मालूम हुआ था कि निहारिका का फोन दो बार आ चुका है और निहारिका गौरव से बात करना चाहती है․

बैंक के लिए निकलते हुए गौरव रास्‍ते से निहारिका को फोन लगाया․ निहारिका के बार-बार पूछने पर कि और कितने दिन वहां लग जाएगें, गौरव ने बताया कि और लगभग पंद्रह दिन लग जायेंगे․ निहारिका उत्‍सुकतावश पूछ बैठी कि क्‍या केस में सफलता मिली ?

गौरव ने पूरे विश्‍वास के साथ कहा, मिल जाएगी और यह कह अपनी पत्‍नी को अलविदा कह फोन रख दिया․ बैंक में सभी स्‍टॉफ गौरव को राजशेखर ही समझते थे․ इतनी बारीकी से गौरव ने बैंक के सभी कार्यों को अंजाम दिया था कि किसी को भी यह शक नहीं था कि गौरव राजशेखर नहीं है․

आखिर देखते-देखते रविवार आ चुका था․ आज अनामिका आगन्‍तुक को लेकर फोर्ड कार से हावड़ा ब्रिज को पांच मिनट में क्रास करने की जांच करना चाहती थी․ गौरव भी मन ही मन इस जांच के लिए खुद को तैयार कर चुका था क्‍योंकि वह समझ रहा था कि अब सिर्फ हावड़ा ब्रिज ही क्रास करना बाकी रह गया है․ ये परीक्षा पास करने के बाद संभवत केस सुलझ जाएगा․ पूर्व में गौरव घर से निकलने के बाद कई बार हावड़ा ब्रिज अभ्‍यास के तौर पर पांच मिनट के अंदर क्रास कर चुका था․

अनामिका और गौरव उर्फ राजशेखर नीयत समय यानी सुबह चार बजे हावड़ा ब्रिज पहुंच गए․ सुबह भीड़-भाड़ नहीं होने की वजह से ब्रिज क्रास करने में सुविधा होती थी․ अनामिका के मन में यह विश्‍वास था कि इस परीक्षा में आगन्‍तुक असफल होगा ही तथा गौरव को पूरा विश्‍वास था कि वह इस परीक्षा को पूर्व की तरह सफलता से पूरा करेगा․ अनामिका रेस के लिए हरि झंड़ी कार के बगल के सीट पर बैठकर दिखा दी․ गौरव अभ्‍यस्‍त होने के कारण बड़ी आसानी से हावड़ा ब्रिज को पांच मीनट में क्रास कर गया․ अनामिका स्‍तब्‍ध रह गयी हालांकि अपने आश्‍चर्य और चिंता का उसने अपने व्‍यवहार से परिलक्षित होने नहीं दिया․ उस रात अनामिका के लिए कयामत की रात थी․ वो सोच रही थी कि अगर आगन्‍तुक राजशेखर है तो फिर․․․․․․․․․․वो आगे सोच नहीं सकी․

गौरव भी उस रात चौकन्‍ना अपने कमरे में कुछ न कुछ हाथ लगने की आश में जागा हुआ था․ रात के ठीक 12․30 बजे जब गौरव के कमरे का लाइट अॉफ हो चुका था अनामिका अपने कमरे से चुपचाप निकली और आंगन में नारियल के पेड़ के दो फीट बगल में फावड़े से मिट्‌टी खोदना शुरू किया․ एक घंटे के बाद उसे गडढ़े में एक काफिन नजर आया, जिसे टार्च लाइट में उसने खोला और ये क्‍या कॉफिन में रखी लाश कंकाल बन चुका था, अभी अनामिका टार्च लाइट कंकाल पर से हटाती कि गौरव वहां पहुंच चुका था और अपनी पिस्‍टल अनामिका के कनपट्‌टी पर लगाते हुए कहा कि सब सच-सच बता दो, नहीं तो मैं तुम्‍हें गोली मार दूंगा․

अनामिका मुड़ कर पहला प्रश्‍न यही की कि तुम कौन हो ?

मैं इंस्‍पेक्‍टर गौरव हॅूं, तुम्‍हारे भाई के गुम होने के केस का मैं ही तहकीकात कर रहा हॅूं․ यू आर अंड़र एरेस्‍ट, मिस अनामिका․ अनामिका को गन पंवाइट पर गौरव ने कमरे तक ले आया और साथ ही राजदत को फोन से इत्तला कर दिया कि वह तुरंत राजशेखर के घर पहुंच जाए क्‍योंकि केस सुलझ गया है․

राजदत तुरंत ही होटल से राजशेखर के घर के लिए रवाना हो गया․

अनामकिा मायूस थी․ उसने कहा कि अरूप मेरे स्‍कूल में विज्ञान टीचर है तथा मेरा मित्र भी है․ वह मुझसे शादी करना चाहता है पर राजशेखर को अरूप पंसद नहीं था हालांकि राजशेखर मुझे अरूप से शादी करने में कोई अड़चन नहीं डाल रहा था․

गौरव को आश्‍चर्य हुआ, उसने पूछा फिर राजशेखर मरा क्‍यों और कैसे ?

अनामिका बोली मैं प्रॉपर्टी के लालच में पड़ गयी थी․ अगर राजशेखर रास्‍ते से हटा दिया जाता है तो इस पूरे प्रॉपटी पर मेरा एकक्षत्र राज होगा और मैं अरूप के साथ यहां रह सकूंगी․

इसलिए तुमने राजशेखर को रास्‍ते से हटा दिया, गौरव ने व्‍यंग्‍यात्‍मक ढ़ंग से पूछा ?

हाँ, इसलिए मैंने राजशेखर को मारा․

पर तुमने उसे मारा कैसे ?

अनामिका शर्मिंदगी महसूस करते हुए गौरव को बताया कि मैंने उसे एपल वाइन में धीमा जहर मिला दिया था․ पंद्रह दिन राजशेखर उस एपल वाइन को पीता रहा और एक दिन जब वह सोया तो फिर सुबह नहीं उठा․ मैंने उसे कॉफिन में डालकर वहां आंगन में दफना दिया था․

राजदत लगभग सुबह साढ़े तीन बजे राजशेखर के घर पहुंच चुका था․ आते ही राजदत ने गौरव को सैल्‍यूट करते हुए कहा, मुबारक हो सर जी, जिस केस को पुलिस बंद कर चुकी थी, उसे आपने आखिर सुलझा ही लिया․

मुजरिम तुम्‍हारे सामने है राजदत, गौरव ने गर्व के साथ कहा․ इसने ही अपने भाई को मारा और पुलिस में उसके गुम होने की रिपोर्ट दर्ज करवायी․

सुबह गौरव और राजदत अनामिका को एरेस्‍ट कर थाने पहुंच गए थे․

बाद में अदालती कार्रवाई में अनामिका को अपने भाई का कोल्‍ड ब्‍लडेड मर्डर करने के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गयी थी․

राजीव आनंद

सेल फोन - 9471765417

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