बुधवार, 9 अक्तूबर 2013

फ्रेंक्‍वाइस सागा की कहानी - रेड वाइन में गिरते आंसू

फ्रेंक्‍वाइस सागा की कहानियाँ

रेड वाइन में गिरते आंसू

एक घन्टा... मैं उसे एक घंटा दे रही हूँ। कोई भी स्वाभिमानी स्त्री अधिक से अधिक इतना समय तो प्रतीक्षा करने के लिए दे ही सकती है। कम से कम मेरी जैसी विवाह से संतुष्ट और स्त्री, एक मानय सुन्दरी जो लास्य पूर्ण है और जो लालसा जाग्रत करने की सामंर्श्य रखती है। एक ऐसी स्त्री जिसके पीछे दर्जनों व्यक्ति लगे हैं। कम से कम छः के नाम तो मैं यों ही गिना सकती हूँ। आकर्षक हैट और सुंदर पुर कंधों पर डाले एक स्त्री पैरिस के चौराहे के किनारे लगी पत्थर की बैंच पर बैठी एक पुरुष का इंतजार कर रही है, जिसे आने में देर हो चुकी है। यह भयावह और असहनीय है। मैं सुंदर, सुसंस्कृत, कमनीय और मूडी हूँ। इसके बावजूद डेढ़ घंटे बाद भी मैं राह देखती बैठी रहूँगी। अपने बदसूरत हैट को रौदे डालूगी और इस गंधाते फर को यहीं बैंच पर छोड़ जाऊँगी और इतना सब होने के बावजूद जब वह आएगा और यदि वह चाहेगा तो यहीं इसी चौराहे पर मैं पूरे कपड़े उतार दूंगी। उसके पीछे-पीछे मैं पूरे शहर का चक्कर लगा लूँगी।

और यदि वह नहीं आया न, तो मैं अपने आप को मार डालूंगी। घर जाऊँगी, हेनरी को चूमूंगी, पलंग पर हैट रखूँगी (ऐसा करने से दुर्भाग्य आता है) हेंगर पर फर को लटका ऊँगी (चूंकि स्वभाव से मैं व्यवस्थित हूँ) और फिर वह बोतल निकालूंगी जिसे मैंने आकर्षक बाथरुम के मेकअप रिमूवर के पीछे छिपा रखा है, उसे अपनी हथेली पर उड़ेल दूंगी और फिर उन कड़वी सफेद गोलियों को कुनकुने पानी से निगलूंगी एक-एक कर। गिनकर, न ज्यादा न कम। असफल आत्महत्या कर मैं दूसरों को मज़ाक उड़ाने का मौका तो नहीं ही दूंगी। वैसे भी मेरा बहुत अपमान और उपहाउसड़ाया जा चुका है। मैं बेतुके ढंग से प्यारकरती हूँ। बेहूदे ढंग से रहती हूँ लेकिन मजा किया ढंग से मरना नहीं चाहती। मेरे अंदर हास्य बचा ही नहीं है। प्यार, वह पूरी तरह मौजूद है बड़े-बड़े अक्षरों में किन्तु मेरी हास्य प्रवृत्ति बहुत पहिले ही खिड़ीकी से बाहर उड़ चुकी है। बर्नाड फराक्स के आने के साथ ही।

बर्नाड फराक्स। क्या नाम है। इसमें न तो आकर्षण है, कुछ भी तो नहीं है। फिर जब मैं सोचती हूँ कि मैं हूँ राबर्टा ड्‌यूरेट, शादी शुदा खुशहाल स्त्री, सुंदर, लास्यपूर्ण, पुरुषों की चहेती आदि। ऐसी स्त्री जो बर्नाड फराक्स को जानती ही नहीं थी और पिछले छः महिनों से मैं बर्बाद हूँ क्योंकि मैं बर्नाड फराक्स को जानती हूँ, एक इंश्योरेंस एजेंट जो न तो खास सुंदर है न ही बुद्धमिान, स्वार्थी, दंभी और जंगली जो पिछले दस मिनिटों से मुझे इंतजार करवा रहा है और जिससे मैं प्यार करती हूँ। घंटे के ऊपर एक सेकंड भी मैं उसकी राह नहीं देखूंगी। बहरहाल शाम गहराने लगी है, यह बेंच वर्फ जैसी तो सर्द है, चौराहा बीरान है, मेरे साथ कुछ भी तो घट सकता है। मेरे ऊपर हमला भी तो हो सकता है, अब यही देखो न उस लफंगे द्वारा जो इसी ओर भूखी आँखों और गंदगी से भरा बेग लिए चला आ रहा है। वह बूढ़ा भी तो नहीं है, आराम से मेरी गर्दन मरोड़ सकता है। यह कर क्या रहा है? मेरी बैंच पर बैठने की उसकी हिम्मत कैसे हुई। अब यह तो हद ही हो गई। क्या कमाल की जोड़ी हम बना रहे हैं, मैं अपने फरों में और वह अपने चीथड़ों में। यह देख बर्नाड ठहाका मारकर हंसेगा। यदि वह आ गया तो।

लूकास ट्‌यूदेवेंत जो ''तुलू थैला'' के नाम से जाना जाता है, ने धीरे से पैर पसारे और आराम की लंबी सोसाली। वह ठीक-ठाक था, सिवाय वहाँ बैठी औरत और उसकी संपन्नता के, बैंच खाली थी, आजकल खाली बैंच खोजना नर्क को खोजने जैसा है। जैसे ही मौसम सुहाना होना शुरू होत है वैसे ही कार विहीन जनता लूकास की बैंचों पर मक्खियों मच्छरों जैसे मड़राने लगती हैं, प्यारी चिकनी बैंचे जो सबकी सब उसकी होती हैं सर्दियों में। घंटों वे लोग इन पर लदे रहेंगे, चूमा चाटी करते, किताबें पढ़ते और कभी कभार और सबसे बदतर होता है उन लफंगे लड़कों पर नजरें रखना जो बदमाशी करने के मौके की तलाश में रहते हैं। लेकिन अब तो रात शुरू हो गइ्र है यह अंधेरे से भरा चौराहा, कठोर पत्थरों की बैंचे खाली पैर और भरे पेट दोनों हीप्रकार के लोगों को अपनी ओर आकर्षित नहीं करेंगी। केवल इस भूरे ;ब्रनेटद्ध बालोबांली को छोड़कर। उस हैट में अच्छा खासा माल है। वो बार-बार सामने की सड़क को देख रही है। स्पष्ट है वो किसी का इंतजार कर रही है। ऐसी स्त्री को इंतजार कराने वाला अच्छा खासा हरामी ही होगा।

यदि लूकास ने बहुत-बहुत समय पहिले ही सुंदर औरतों, शानदार कारों और अपनी आकर्षक, सभ्यता से बैराग्य न ले लिया हो तो उसने उसकी ओर निश्चित रूप से कदम उठाए होते। जैसे कपड़े वह पहिने है यदि वैसे न पहिने होते तो बेहतर ढंग से वह उसकी ओर आगे बढ़ सकता था। छठवें दशक में जब वह तीसरे दशक में चल रहा था, तब सुंदर, सजीला आकर्षक कपड़ों में ऐशो आराम में जिन्दगी गुजारने वाला लूकास था, तब वह किसी भी स्त्री को अपने वश में करने की सामर्थ्य रखता था।

उसने अपना बेग खोला, पूरी भरी बोतल निकाली, कार्क खींचा, अपनी कोहनी मोड़ी और फिर बीच हवा में रूक गया। पास बैठी स्त्री के कंधे गले में रोकी गई सिसकियों के कारण जोर-जोर से हिल रहे थे यह देखना असह्‌य था। दिल से न चाहते हुए भी लूकास ने अपनी कीमती बोतल बढ़ा दी। पत्थर पर रखने सेकाँच ने टन्नटनऽऽ की आवाज़ की, स्त्री मुड़ी और तबलूकास ने उसके पूरे चेहरे को देखा। उसने दो पीली आँखों को देखा जो मुस्करा और दर्द के साथ बड़े-बड़े आंसुओं से भरी थीं। बहुत देर तब दोनों एक-दूसरे को देखते रहे। वेदना से भरी नीली आँखें, दया छलकाती काली आँखें। फिर वो जैसे होश में आई हो उसने धीरे से ''धन्यवाद'' कहा और एक लम्बा घूंट भरा और बोतल उसकी ओर बढ़ा दी। उसके आंसू तत्काल ही सूख गए, उसका रंग वापिस आ गया और मुस्कान किनारे पर आ रूक गई। लूकास ने रैड वाइन के असीमित लाभों में एक और जोड़ दिया।

''इससे सहायता मिलती है न''। एक ईमानदार पियक्कड़ के गर्व के साथ उसने पूछा।

''इसमें तो कोई संदेह ही नहीं है'', उसने अपने जेब से रूमाल निकालते हुए कहा। इतनी जोर से उसने नाक से आवाज़ निकली कि अपनी ही आवाज़ निकली कि अपनी ही आवाज़ सुन वो चौंक गई। क्षमा माँगती आँखों से उसने लूकास को देखा जो बोतल मुँह से लगाए था, जन्म के सज्जन ने ऐसा कोई भाव प्रकट नहीं किया जैसे उसने कुछ सुना भी हो सिवाय वाईन के संगीत के जो उसके गले के भीतर जा रही थी।

''यह कौन सी है''?उसने लूकास से पूछा।

''पता नहीं'' लूकास ने अपनी बांह से मुँह पोंछते हुए कहा बस मुझे इतना पता है कि यह तेरह प्रतिशत है। मुझे दोबार्ट से मिली है। एक दोस्त से। कुछ और चाहिए क्या? उसने धीरे से सुझाव तो दे दिया शराफत के नाते लेकिन उसमें विशेष आग्रह का अभाव था, क्योंकि उसके हिसाब से यह पूरी शाम चलनी चाहिए थी।

''नहीं नहीं, बहुत-बहुत धन्यवाद ब्रानेट'' ने चतुराई से इन्कार किया। ''इसने मेरी अच्छी सहायता की है। मुझे इसकी जरूरत थी...''

चूँकि उसी ने यह मामला उठाया था, इसलिए लूकास का आगे प्रश्न करना न्याय-संगत था।

''निराशा या छोड़ दिया है''।

''मुझे लगता है शायद छोड़ ही दिया है, मुझे उसका इंतजार करते आधा घंटे से अधिक हो गया है''।

''जरूर ही दोगला (बास्टर्ड) होगा'' लूकास ने निष्कर्ष निकालते कहा। ''कसम से छः बजकर पाँच मिनिट के एक मिनिट बाद मैं खड़ी हो जाऊँगी। मैं घर चली जाऊँगी। बस''।

यदि मैं तुम्हारी जगह पर होता ना तो मैं ओह छोड़ो...। उसने एक यो ही हाथ हिला अस्पष्ट सा इशारा किया, उसका चेहरा विचारमग्न हो गया, और वह एकाएक आकर्षक सा दिखने लगा, राबर्टा ने सोचा।

''यदितुम मेरी जगह होते तो ;उसने उसकी बात को दोहराय''।

''वैसे तो मुझे इससे कुछ लेना-देना नहीं है, लेकिन मैंने इन्हीं बैंचों पर बैठकर कई बार स्त्रियों का इंतजार किया है और हर बार सवा-सवा घंटे तक इंतजार किया और हर बार अंत बुरा ही रहा है। कम से कम मेरे लिए, मेरा अर्थ है...।''

उसने उसे एकटक देखते हुए पूछा, ''और दूसरी परिस्थितियों में? जब तुम जल्दी उठकर चले गए तब?''

जब मैं जल्दी उठकर चला गया था तो इसलिए कि यह करना मेरे वश में था, लूकास ने उसकी आँखों में देखते उत्तर दिया, ''उन्होंने मुझे रास्ते में ही पकड़ लिया और मेरे साथ होली।''

कुछ देर वहाँ दुश्चिता भरी खामोशी पसरी रही। राबर्टा और लूकास क्लासिकल जोड़े की तरह लग रहे थेः दार्शनिक और निष्या। राबर्टा ने अपने पैरों को देखा और फिर रास्ते को। अनजाने में उसने हाथ बढ़ाया और लूकास ने वीतराग भाव से उसके हाथों में बोतल दे दी। आखिर, वह कैसा भी हो, अपनी ही जाति के प्रति उत्तरदायित्व का बोध तो उसे था ही। राबर्टा ने एक घूंट भरा एक बड़ा सा घूंट, उसने भारी हृदय से यह देखा इसके बाद अपनी मँहगी बांह से पोंछा ठीक उसी कीतरह।

''और जब उन्होंने तुम्हे रास्ते में पकड़ लिया''? राबर्टा ने रूक रूककर पूछा।

''उस समय तक मैं घर ही पहुँच चुका होता था, लूकास ने अपने आप पर हंसते हुए कहा ;उसके सामने के तीन दांत गायब थे और उसे शर्म आ रही थी अपने नए शिकार के सामनेद्ध और घर पर क्लापिन्ते थी जो मुझे बेहद प्यार करती थी। उसने संक्षेप में अपनी बात समाप्त की ''तब'' उसने एक अस्पष्ट सा इशारा किया जिससे साफ जाहिर हो रहा था'', तब सर्दियों में मेरे अपने पुल के नीचे कलपिन्ते के साथ... ''कि राबर्टा के मन में भी वहीं विचार प्रवेश कर गया। तब सर्दियों में पाल डोमर स्ट्रीट के अपने घर में हेनरी के साथ...''

अचानक वह खड़ी हो गई, अपने का साफ किया। कितनी प्यारी और आकर्षक स्त्री है, लूकास ने सोचा इतनी सजी धजी ओर सब कुछ।

''बस, अब मैं वही करने जा रही हूँ मैं घर जा रही हूँ''।

''अभी एक घंटा तो हुआ नहीं है न?'' लूकास ने पूछा, उसकी आँखें हंसी से खनकीं। उसे बेहद अच्छा लगा, एक प्रेक्टिकल जोकर की तरह वह वहीं रूकेगा और उस आदमी को देखेगा जरूर। वह ऐसे संतुष्टि दायक क्षणों की प्रतीक्षा करता रहा है। ऐसी प्यारी आँखों वाली स्त्री को रोनेको बाध्य करना। वह यह अपराध कर बच नहीं सकेगा।

''मैं जानती हूँ'', उसने उत्तर दिया और हंस पड़ी नहीं अभी एक घंटा पूरा नहीं हुआ है। यह गलत तो है मैं अच्छा गुड बाई मांश्योर। धन्यबाद इस... सभी कुछ लिए धन्यवाद, कहते उसने लूकास के हाथों में पकड़ी बोतल की ओर इशारा किया। एक पल को लूकास शंक्ति हो गया लेकिन वो पहिले ही झुक गई थी, अपने गर्म हाथों को लूकास के हाथों में रख दिया, उन्हें हल्के से दबाया और तेज कदमों से चल दी। कुछ ही पलों में वो गायब हो गई सही समय पर, लूकास ने सोचा जैसे ही उसने तीन सेकंडों के बाद एक युवक को हड़बड़ाते हुए आते देखा, वह बैचेन था और अगले आधे घंटे तक वह बेसब्री से वहीं टहलता रहा।

जैसे उसके मन में देर से आने के लिए माफी माँगने का विचार कभी नहीं आया, इसी प्रकार बर्नाड को कभी यह अहसास नहीं हुआ कि राबर्टा उसका इंतजार नहीं करेगी वहाँ राबर्टा को बैंच पर बैठे उसका इंतजार करते रहना था और वह दुर्बल सा आवास अपने आप हंसे जा रहा था।

किन्तु राबर्टा ने उसके बाद उसका कहीं इंतजार नहीं किया। भगवान जाने क्यों, राबर्टा अब उससे प्यार नहीं करती थी।

 

अनुवाद - इन्द्रमणि उपाध्याप

489 नारायण नगर,

गढ़ा, जबलपुर

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