राकेश शुक्ल का आलेख - चीनी भी जहर है!

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चीनी भी जहर है!

हम भारतीय चावल, आलू, ब्रेड, स्नैक्स एवं शीतल पेयों के रूप में प्रतिदिन कार्बोहाइड्रेट युक्त आहार का सेवन करते हैं जिससे शरीर को ऊर्जा मिलती है परंतु अधिकता में ग्रहण करने पर पोषण संबंधित रोगों का जन्म होता है जिनमें हृदय रोग, मोटापा, मधुमेह, दंतक्षय, चयापचयी अनियमिततायें, पोषण न्यूनता तथा कैंसर जैसी परेशानियां मुख्य हैं.

आवश्यकता से अधिक मात्रा में ग्रहण किये जाने वाले कार्बोहाइड्रेट्स में शर्करा का प्रमुख स्थान है. गत पांच दशकों में भारत में शर्करा का उपयोग विश्व उत्पादन के पांच प्रतिशत से 13 प्रतिशत तक बढ़ गया है जिससे भारत विश्व का सबसे बड़ा चीनी अपभोगकर्ता देश बन गया है जहां संपूर्ण यूरोपियन यूनियन के कुल उपभोग से एक तिहाई ज्यादा तथा चीन के उपभोग से 60 प्रतिशत अधिक चीनी का उपभोग किया जाता है. भारत का प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष चीनी उपभोग 20 किलो है जो वैश्विक औसत (25 किलो) से कम है परंतु यह दर तेजी से बढ़ रही है.

विश्व भर में यह सलाह दी जाती है कि महिलाओं एवं पुरुषों को प्रतिदिन क्रमश: 05 तथा 09 चम्मच से अधिक शर्करा नहीं ग्रहण करना चाहिए. मधुमेह के प्रति अधिक संवेदनशील होने के कारण शर्करा का उपयोग भारतीयों को पांच चम्मच प्रतिदिन तक ही करना चाहिए. शर्करा का यकृत पर दुष्प्रभाव एल्कोहल के सदृश ही होता है जो शर्करा के किण्वन से बनता है. शर्करा तथा अन्य कार्बोहाड्रेट के सेवन से शरीर में इंसुलिन का उत्पादन बढ़ाने का शरीर पर दबाव पड़ता है जिससे शरीर की कोशिकाओं में इंसुलिन प्रतिरोधकता उत्पन्न होने लगती है और रक्त ग्लूकोज स्तर तेजी से बढ़ने लगता है. कई लोगों में तो टाइप -2 मधुमेह की परेशानी देखने को मिलती है. दीर्घकाल तक उच्च शर्करा स्तर, रक्त संचरण तंत्र पर अत्यधिक दबाव डालता है जिससे रक्त शिराओं की भित्तियां मोटी एवं कठोर हो जाती हैं.

प्रसंस्कृत कार्बोहाइड्रेट्स से प्राप्त अतिरिक्त कैलोरी, वसा कोशिकाऔं में परिवर्तित होकर मोटापा बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान करती है जिससे मधुमेह, कैंसर, वसीय यकृत रोग, मानसिक तनाव एवं हृदय रोगों के उत्पन्न होने का खतरा बना रहता है. राष्ट्रीय पोषण संस्थान हैदराबाद के अनुसार, प्रतिदिन 20-25 ग्राम शर्करा प्रति वयस्क व्यक्ति के लिए सुरक्षित मात्रा है. इसके लिए, शर्करा युक्त पेयों यथा- शीतलपेय, काफी, आदि तथा प्रत्यक्ष शर्करा सेवन से बचना चाहिए. शीतलपेय की एक कैन में 130 कैलोरी या 08 चम्मच शर्करा समतुल्य होता है.

गत वर्षों में प्रति व्यक्ति कैलोरी उपयोग में कमी आने के बावजूद मोटापाग्रस्त रोगियों की संख्या में वृद्धि से यह स्पष्ट है कि इसके पीछे पोषण में असंतुलन के साथ स्थावर दिनचर्या का महत्वपूर्ण योगदान है. अतः शारीरिक सक्रियता के साथ स्वास्थ्यरक्षक आहार का सेवन दीर्घ स्वस्थ जीवन के लिए आवश्यक है.

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डा. राकेश शुक्ल

पशुचिकित्साधिकारी, पशुचिकित्सालय सांऊखोर – 273402, गोरखपुर उ.प्र.

 

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