रचनाकार में खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

कुबेर के दो व्यंग्य

SHARE:

व्यंग्य 1: अपनी-अपनी ईमानदारी सेठ जी की सारी आदतें पारंपरिक हैं, जैसे - परंपराओं को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी का निष्ठा व ईमान...

व्यंग्य

1: अपनी-अपनी ईमानदारी

सेठ जी की सारी आदतें पारंपरिक हैं, जैसे - परंपराओं को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे
बढ़ाने की जिम्मेदारी का निष्ठा व ईमानदारी पूर्वक निर्वहन करना। बेदाग
श्वेत परिधान पहनते हैं जिसमें ऊपर कुर्ता और नीचे पायजामा होता है।
कुर्ते के नीचे विशेष रूप से डिजाइन किया हुआ बंडी पहनते हैं जिसमें नगदी
और कीमती सामानों को छिपाकर रखने के लिए कुछ गुप्त पाकिट बने होते हैं।
हाथ में बड़ा सा झोला, रास्ते में मिलने वाले सस्ते पर कीमती सामानों को
समेटने के लिए होता है। पाँव में चप्पल और चेहरे पर विशिष्ट भावाकृति की
पुराइन पत्ते के महत्व को कम करता हुआ एक ऐसा आवरण पहनते हैं, जिस पर से
मान-अपमान, लाज-शरम जैसी अति सामान्य मानवीय भावनाएँ पानी की बूंदों की
तरह बिना दाग छोड़े ढर जाते हैं।

सेठ जी पूर्णतः अहिंसक और शाकाहारी जीव हैं; यद्यपि सूदखोरी, मिलावटखोरी
और मुनाफाखोरी उनका खानदानी व्यवसाय है। झूठ बोलना तो इनके व्यवसाय का
अनिवार्य गुण है। भीमकाय शरीर के मालिक हैं। शरीर के खुले अंगों से पता
चलता है कि उनका रंग काला है और काली चमड़ी पर सूअर के बालों की तरह
काले-काले घने बाल उगे हुए हैं। चेचक दाग वाले चेहरे पर बड़ी-बड़ी सफेद
आँखें बच्चों के मन में भय पैदा करने के लिए पर्याप्त हैं। चेहरा डरावना
हुआ तो क्या, सेठ जी बड़े मिष्ठभाषी हैं, पर लोग न जाने क्यों उनकी मीठी
बातों से हरगिज, हर हाल और हर कीमत पर बचना चाहते हैं। मिष्ठता के साथ
शायद दुष्टता का सोने पे सुहागा के समान योग हो?

सेठ जी आज अपने पारंपरिक परिधानों में सज-धज कर निकले हैं। उन्हें कहीं
बाहर जाना है। बस में ज्यादा भीड़, ज्यादा तकलीफ और ज्यादा बकझक होती है।
ऊपर से किराया भी ज्यादा। अतः उन्होंने भारतीय रेल को ही इस यात्रा के
लिए निरापद समझा है। मरना यदि हुआ भी, तो खटारा बस में क्यों? महान
भारतीय परंपरा अनुसार भारतीय रेल में क्यों नहीं ?

सेठ जी अप दिशा की ओर जाने वाली रेल के सामान्य दर्जे का टिकिट लेकर
निर्धारित प्लेटफार्म पर रेल के आने की प्रतीक्षा कर रहें हैं, जिसके आने
में तीस मिनट की देरी रेल्वे की इलेक्ट्रानिक सूचना पटल पर दिखाई जा रही
है, और जिसके एकाध घंटा और बढ़ जाने की पूरी संभावना है।

रेल-आगमन का समय जैसे-जैसे निकट आ रहा था, प्लेटफार्म पर भीड़ बढ़ती जा रही
थी। कुछ लोग जो अकेले थे, और जल्दी में थे, बड़ी व्यग्रता के साथ कंधे या
पीठ पर बैग लटकाए इधर-उधर घूम रहे थे। कुछ लोग बड़े इत्मिनान के साथ
सीमेंट की बनी स्थायी बेंचों पर बैठे हुए थे। कुछ लोग अपने उन मित्रों या
परिजनों के साथ भावनात्मक वार्तालाप में रत थे जो उन्हें बिदा करने आये
थे।

सेठ जी अपने बड़े झोले को अपनी तोंद पर रखे सीमेंट की एक बेंच पर पसरे हुए
थे। बेंच पर केवल उन्हीं का कब्जा था। बीच में कुछ लोग आकर उनके साथ बैठे
जरूर, लेकिन न जाने क्यों वे वहाँ से बहुत जल्दी उठ कर चले भी गए।

सामने से केला वाला ’दस के बारा, दस के बारा’ चिल्लाता हुआ निकल गया। जिस
बेंच पर सेठ जी का आधिपत्य था उससे कुछ ही दूरी पर प्लेटफार्म पर
आने-जाने के लिए सीढ़ियों का सिलसिला शुरू होता था, जो ऊपर की ओर ओवर बृज
से जुड़ा हुआ था। सीढ़ियों के नीचे एक महिला झालमुड़ी बेंच रही थी। महिला
शायद ही पढ़ी-लिखी हो। उसके कपड़े काफी पुराने व चिकटाए हुए थे। अधेड़ उम्र
में भी उसके वक्ष खुले गले की ब्लाऊज में से लोगों को आकर्षित करने में
सक्षम थे। टमाटर और प्याज काटने, फिर मुर्रे में नमक, मिर्च आदि मिलाकर
झालमुड़ी तैयार करने तथा अखबारी कागज के छोटे-छोटे चैकोर टुकड़ों को
शंक्वाकार मोड़कर, उसमें तैयार झालमुड़ी भर कर ग्राहक को पेश करने की उसकी
दक्षता देखकर पता चलता था कि वह अपने काम में माहिर हैं और अर्से से इसी
काम में लगी हुई हैं। सेठ जी की बाईं ओर कुछ दूरी पर रेल्वे पुलिस का एक
कांस्टेबल और भद्र सा दिखने वाला एक नौजवान पुलिसिया शैली में बतिया रहे
थे। बीच-बीच में ठहाका भी लगा रहे थे। तभी एकाएक प्लेटफार्म पर भूचाल आ
गया। सेठ जी माथा पीट-पीट कर चिल्लाने लगे - ’’हाय! मैं लुट गया, बर्बाद
हो गया, किसी ने मेरी जेब कांट ली।’’

कांस्टेबल ने अपने मित्र युवक की ओर अर्थ भरी निगाहों से देखा। निगाहों
-निगाहों में बातें हुई और इसके पहले कि भीड़ उग्र होती या सेठ जी के
आस-पास एकत्रित होती, उसने तत्परता पूर्वक सेठ जी को अपने संरक्षण में ले
लिया, मानो उन्हें इसी क्षण की प्रतिक्षा थी। पूछा - ’’कितने रूपये थे
?’’

’’क्या बताएँ सरकार, पूरे हजार रूपये थे।’’ सेठ जी ने रूआँसे स्वर में जवाब दिया।

कांस्टेबल आश्वस्त हुआ परन्तु रौब जमाने, अज्ञात पाकिटमारों के प्रति
भद्दी-भद्दी पुलिसिया गालियों की बौछार करते हुए कहने लगे - ’’बहोत हौसले
बढ़ गये हैं ........ के।’’

जब उन्हें लगा, उनका गाली-यज्ञ पूरा हो गया है, तब उन्होंने सेठ जी से
कहा - ’’जनाब! चलिये आप, रपट लिखवाइये। इत्मिनान रखिये, बहोत जल्दी हम
उन्हें पकड़ लेंगे। कितना कहा आपने, एक हजार ? चलिये। ’’

चैंकी पर पहुंचते ही भद्र सा दिखने वाला वह युवक जो कुछ देर पहले इसी
कांस्टेबल के साथ गप्पे लड़ा रहा था, और जो पूरे समय कास्टेबल के ही साथ
बना हुआ था, कुछ परेशान दिखने लगा। अपनी जेब से एक बटुआ निकाल कर उसमें
रखे रूपयों को वह गिनने लगा। नोट गिन चुकने के बाद उसके चेहरे पर हवाइयाँ
उड़ने लगी। एक भद्दी सी गाली दी और सेठ से कहा - ’’सेठ जी झूठ काहे बोलते
हो यार।’’

’’बाबा हम झूठ काहे बोलेंगा।’’

’’यही है न तेरा बटुआ ?’’

’’अंय ......!’’

’’..........सौ रूपट्टी रखा है और हजार की बात करता है। अपना बटुआ रख और
भाग यहाँ से। हल्ला नहीं मचाने का, समझे ?’’
ट्रेन आई और चली गई। सेठ जी भी चले गये। प्लेटफार्म पर भीड़ अब एकदम कम हो गई।

वह कांस्टेबल अब उस युवक के साथ गप्पें नहीं लड़ा रहा था। उस पर बुरी तरह
झुंझला रहा था और उसे निहायत ह़ी भद्दी-भद्दी गालियाँ बकते हुए कह रहा था
- ’’कब से हरिश्चन्द्र की औलाद हो गया बे?’’

युवक ने बेधड़क कहा - ’’आप तो देख ही रहे थे न सा’ब, कितना चालाक था साला
सेठ का बच्चा। सौ का हजार बता रहा था।’’

’’तो क्या ?’’

’’आप तो उन्हीं का यकीन करते न? हिस्से की बात आती तो कहाँ से लाता मैं
हजार रूपये।’’

फिर दोनों के बीच एक दीर्घ खामोशी छा गई।

स्टेशन पर भी खामोशी छाई हुई थी और इस खामोशी से उभर रहे थे अनेक सवाल।
000

व्यंग्य

2: कामरेड का रिक्शा वाला


कामरेड सोमेश साहब इस शहर में एक जानी-मानी हस्ती हैं। इस समय उनकी
अवस्था लगभग साठ की है। ऊँगलियों के पोरों से लेकर पुतलियों के नीचे तक
अर्थात् नख से शिख तक चर्बी की एक मोटी परत जमा हो गई है और शरीर
हिप्पोपोटेमस के शरीर के समान चिकना, चमकदार और थुलथुला हो गया है। किसी
समारोह में अतिथि वक्ता के रूप में इन्हें आमंत्रित करने के पहले आयोजक
का पहला महान कर्तव्य होता है, इनके शरीर के अनुरूप इनके लिए आसन और असन
की समुचित व्यवस्था करना।

इनका भरापूरा परिवार और देश-विदेश में फैला विस्तृत कारोबार है। शहर और
शासन के अति विशिष्ट हस्तियों के साथ इनका बड़ा मधुर और पारिवारिक परंतु
पारदर्शी संबंध है।

पारदर्शी चीजें अक्सर दिखाई नहीं पड़तीं।

मज़दूर संघों से इनका रिश्ता आज का नहीं अपितु संघर्ष के दिनों से है, जब
ये युवा थे और शरीर छरहरा था, पुतलियाँ आँख-कोटर में धँसी और शिराएँ
त्वचा के ऊपर उभरी हुई होती थी। तब ये अपने माता-पिता के साथ किराये के
मकान में रहा करते थे।

शहर में इनकी प्रसिद्धि के वर्ग-वार अलग-अलग कारण हैं। साहित्यिक हल्कों
में ये अपनी प्रगतिशील विचारधारा के लिए पूजे जाते हैं। इनकी लिखी ’भारत
में साम्यवाद की दिशा और दशा’ शीर्षक से वृहद् ग्रन्थ माला की दो खंडों
का प्रकाशन अब तक हो चुका है।

व्यवसायियों और पूँजीपतियों के लिए ये बड़े काम की चीज हैं, क्योंकि
श्रमिक वर्ग और शासन-तंत्र के साथ इस वर्ग का संतुलन बनाये रखने में ये
उस्ताद हैं।

श्रमिकों के लिये तो ये कार्ल मार्क्स के साक्षात अवतार ही हैं। उन्हें
आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि ये साहब एक दिन इस शहर में उनका (अर्थात
श्रमिकों का) राज स्थापित करने में जरूर कामयाब होंगे।

रिक्शा वालों के बीच इनकी प्रसिद्धि का कारण कुछ अलग है। आइये एक सत्य
घटना के आधार पर इसे समझने का प्रयास करें।

यूँ तो यह घटना हर वर्ष मई दिवस अर्थात एक मई को घटित होती है, परंतु जिस
घटना का विवरण यहाँ दिया जा रहा है वह इसी वर्ष की है। दिन दुनिया भर के
मजदूरों-श्रमिकों के लिये जश्न मनाने, रैलियाँ निकालने ओर नारे बुलंद
करने का था। चूकि यह शहर भी दुनिया का ही मजदूर बहुल एक हिस्सा है, और
सोमेश साहब जैसा व्यक्ति उनका खेवनहार हैं, अतः यहाँ भी यह परंपरा निभाई
जा रही थी। तय कार्यक्रम के अनुसार विभिन्न मजदूर संगठनों को अपना-अपना
जुलूस, शहर के विभिन्न मार्गों से गुजार कर, अंततः शासकीय स्कूल के विशाल
मैदान में आम-सभा के रूप में परिवर्तित कर लेना था, जहाँ दिन के दो बजे
सोमेश साहब प्रकट होकर मजदूरामृत वाणी की मधुर वर्षा से मजदूरों को
नव-जीवन देने वाले थे।

सोमेश साहब अपने सिद्धान्तों के पक्के हैं। श्रमिक-सभाओं के मंच पर
उपस्थित होने के लिए वे मोटर वाहन का उपयोग न कर रिक्शे का ही उपयोग करते
हैं। आधे घंटे से वे अपने भव्य ’श्रमिक निवास’ के सामने खड़े होकर किसी
रिक्शे की प्रतीक्षा कर रहे थे, पर न जाने शहर के सारे रिक्शा वाले कहाँ
मर गए थे।

दरअसल शहर के रिक्शा वाले जानते हैं कि कामरेड साहब अपने रिक्शा चढ़ने की
तीन सौ चैसठ दिनों की दमित-संचित साध मई दिवस के दिन ही पूरी करते हैं,
ठीक वैसे ही जैसे होली के दिन लोग दुश्मनी भुनाने की साध पूरी करते हैं।

दो बजने वाले थे। सूरज आग उगल रहा था। सड़क के ऊपर डामर पिघल कर फैलने लगा
था। धूप से बचने के लिए लोग गमछों-तौलियों का प्रयोग करने लगे थे। तभी
इशारा पाकर एक रिक्शा सोमेश साहब के पास आकर रुका। चालक शायद नया था।
सवारी और चालक, दोनों ने एक दूसरे को पतियाते हुए निगाहों से तौला।
ग्राहक की आँखों में कांइयापन साफ झलक रहा था जबकि चालक की आँखों में
विवशता और लाचारी हिलोरें मार रही थी। पाँच मिनट की खासी मोल-भाव के बाद
रिक्शा आगे बढ़ा।

कुछ ही दूर चलने के बाद रिक्शा वाले की साँसें फूलने लगी। शरीर पसीने से
लतपथ हो गया। रिक्शे की चाल धीमी हो गई। सोमेश साहब को रिक्शे की सवारी
का वांछित आनंद नहीं मिल पा रहा था। मोल-भाव के कारण वे वैसे भी झुंझलाए
हुए थे। मंच पर पहुँचने का समय भी निकला जा रहा था। अब तो धैर्य जवाब दे
गया। वे रिक्शा वाले पर बरस पड़े -’’अबे, जल्दी चल, दम नहीं है तो रिक्शा
क्यों चलाता है।’’
पूरे शरीर की ताकत पैरों में समेट कर रिक्शा वाले ने जोर लगाया।

किसी तरह मंजिल आई। रिक्शा वाले की जैसे जान बची। एक हाथ से गले में लटक
रहे गमछे से चेहरे का पसीना पोंछते हुए उन्होंने दूसरा हाथ मजदूरी के लिए
आगे बढ़ा दिया। उनके इस दुःसाहस से सोमेश साहब उबल पड़े - ’’कौन वापस लेकर
जायेगा, तेरा बाप? और फिर इस जलसे में क्या तुम शामिल नहीं होगे ?
तुम्हारे जैसे लोगों के कारण ही मजदूरों का संगठन आज इतनी कमजोर हुई जा
रही है।’’
तब तक सोमेश साहब आयोजकों से घिर चुके थे।

रिक्शा वाला प्रत्युत्तर में दम साध कर कुछ बोलने ही जा रहा था कि अचानक
उसे खाँसी का दौर शुरू हो गया। मुँह पर गमछा रख वह खाँसने लगा। सोमेश
साहब आयोजकों के साथ मंच की ओर बढ़ गये।

रिक्शा वाला खाँसते-खाँसते निढ़ाल हो गया। वह वहीं जमीन पर बैठ गया। अब तो
उसे इस जलसे का हिस्सा बनना ही था।

उधर सोमेश साहब मंच पर मुख्य अतिथि की आसंदी का शोभा बढ़ा रहे थे और
भावपूर्ण, आत्मीय स्वागत से गद्गद् हो रहे थे।

सोमेश साहब अपने सारगर्भित और ओजस्वी भाषण में हिंदुस्तान के मजदूरों की
दयनीय हालत, उनके अधिकार जिनसे वे वंचित कर दिये गए हैं, पूँजीपतियों के
जुल्मों-सितम और शासन तंत्र का पूँजीपतियों के हाथों बिक जाने आदि न जाने
कितने रहस्यों पर से एक-एक करके परदा उठाते चले जा रहे थे। मजदूरों को
साम्यवाद का सिद्धांत अच्छी तरह समझा रहे थे।

रिक्शा वाला उधर लगातार खांसे जा रहा था। सोमेश साहब के किसी
रहस्योद्घाटन से अथवा साम्यवाद के किसी सिद्धांत से उसकी खाँसी पल भर के
लिये भी थम नहीं रही थी। इस जलसे के किसी तामझाम से उसे कोई लेना-देना भी
नहीं था। उसे लेना था सोमेश साहब से अपनी मेहनत की तयशुदा वह रकम जिसके
अनुसार उसने उसके भारी-भरकम शरीर को यहाँ तक ढो कर लाया था और जिससे उसे
खाँसी की दवाइयाँ खरीदनी थी।

अंत में ’हर जोर जुल्म के आगे में, संघर्ष हमारा नारा है’ और ’इन्कलाब,
जिंदाबाद’ के नारों के साथ सभा के समापन की घोषणा हुई।
जिंदाबाद के गगनभेदी नारों के बीच भी रिक्शा वाले की निगाहें निरंतर
सोमेश साहब का पीछा करती रहीं। उसके लस्त-पस्त शरीर में थोड़ी बहुत जान जो
बची थी वह इन नारों की वजह से नहीं बल्कि अपनी मेहनत के उन्हीं पैसों के
मिलने की आस में बची थी, जिसे सोमेश साहब से लेना था।

परन्तु सोमेश साहब अब न जानें भीड़ के किस कोने में गुम हो चुके थे।

भीड़ धीरे-धीरे पूरी छट गई। विवशता के कारण छलछला आई रिक्शा वाले की
निगाहें उन्हें अब भी मैदान के चारों ओर तलाश रही थी। उसे अब भी उम्मीद
था कि मजदूरों का यह मसीहा उसकी मजदूरी का पैसा देने उसके सामने जरूर
आयेगा और यह भी कि वह वापस घर भी उन्हीं की रिक्शा में बैठ कर जायेगा।पर
सोमेश साहब अंतध्र्यान हो चुके थे।
मसीहा अक्सर अंतध्र्यान हो जाया करते हैं।

रिक्शा वाले की खाँसी रुकने का नाम नहीं ले रही थी।

000
कुबेर
मो. 9407685557

COMMENTS

BLOGGER
---*---

-----****-----

|नई रचनाएँ_$type=complex$tbg=rainbow$count=6$page=1$va=0$au=0

विज्ञापन --**--

|कथा-कहानी_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$count=6$page=1$src=random-posts$s=200

|हास्य-व्यंग्य_$type=blogging$au=0$count=6$page=1$src=random-posts

-- विज्ञापन --

---

|लोककथाएँ_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$count=6$page=1$src=random-posts

|लघुकथाएँ_$type=list$au=0$count=5$com=0$page=1$src=random-posts

|काव्य जगत_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$count=6$page=1$src=random-posts

-- विज्ञापन --

---

|बच्चों के लिए रचनाएँ_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$count=6$page=1$src=random-posts

|विविधा_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$va=0$count=6$page=1$src=random-posts

 आलेख कविता कहानी व्यंग्य 14 सितम्बर 14 september 15 अगस्त 2 अक्टूबर अक्तूबर अंजनी श्रीवास्तव अंजली काजल अंजली देशपांडे अंबिकादत्त व्यास अखिलेश कुमार भारती अखिलेश सोनी अग्रसेन अजय अरूण अजय वर्मा अजित वडनेरकर अजीत प्रियदर्शी अजीत भारती अनंत वडघणे अनन्त आलोक अनमोल विचार अनामिका अनामी शरण बबल अनिमेष कुमार गुप्ता अनिल कुमार पारा अनिल जनविजय अनुज कुमार आचार्य अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ अनुज खरे अनुपम मिश्र अनूप शुक्ल अपर्णा शर्मा अभिमन्यु अभिषेक ओझा अभिषेक कुमार अम्बर अभिषेक मिश्र अमरपाल सिंह आयुष्कर अमरलाल हिंगोराणी अमित शर्मा अमित शुक्ल अमिय बिन्दु अमृता प्रीतम अरविन्द कुमार खेड़े अरूण देव अरूण माहेश्वरी अर्चना चतुर्वेदी अर्चना वर्मा अर्जुन सिंह नेगी अविनाश त्रिपाठी अशोक गौतम अशोक जैन पोरवाल अशोक शुक्ल अश्विनी कुमार आलोक आई बी अरोड़ा आकांक्षा यादव आचार्य बलवन्त आचार्य शिवपूजन सहाय आजादी आदित्य प्रचंडिया आनंद टहलरामाणी आनन्द किरण आर. के. नारायण आरकॉम आरती आरिफा एविस आलेख आलोक कुमार आलोक कुमार सातपुते आशीष कुमार त्रिवेदी आशीष श्रीवास्तव आशुतोष आशुतोष शुक्ल इंदु संचेतना इन्दिरा वासवाणी इन्द्रमणि उपाध्याय इन्द्रेश कुमार इलाहाबाद ई-बुक ईबुक ईश्वरचन्द्र उपन्यास उपासना उपासना बेहार उमाशंकर सिंह परमार उमेश चन्द्र सिरसवारी उमेशचन्द्र सिरसवारी उषा छाबड़ा उषा रानी ऋतुराज सिंह कौल ऋषभचरण जैन एम. एम. चन्द्रा एस. एम. चन्द्रा कथासरित्सागर कर्ण कला जगत कलावंती सिंह कल्पना कुलश्रेष्ठ कवि कविता कहानी कहानी संग्रह काजल कुमार कान्हा कामिनी कामायनी कार्टून काशीनाथ सिंह किताबी कोना किरन सिंह किशोरी लाल गोस्वामी कुंवर प्रेमिल कुबेर कुमार करन मस्ताना कुसुमलता सिंह कृश्न चन्दर कृष्ण कृष्ण कुमार यादव कृष्ण खटवाणी कृष्ण जन्माष्टमी के. पी. सक्सेना केदारनाथ सिंह कैलाश मंडलोई कैलाश वानखेड़े कैशलेस कैस जौनपुरी क़ैस जौनपुरी कौशल किशोर श्रीवास्तव खिमन मूलाणी गंगा प्रसाद श्रीवास्तव गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर ग़ज़लें गजानंद प्रसाद देवांगन गजेन्द्र नामदेव गणि राजेन्द्र विजय गणेश चतुर्थी गणेश सिंह गांधी जयंती गिरधारी राम गीत गीता दुबे गीता सिंह गुंजन शर्मा गुडविन मसीह गुनो सामताणी गुरदयाल सिंह गोरख प्रभाकर काकडे गोवर्धन यादव गोविन्द वल्लभ पंत गोविन्द सेन चंद्रकला त्रिपाठी चंद्रलेखा चतुष्पदी चन्द्रकिशोर जायसवाल चन्द्रकुमार जैन चाँद पत्रिका चिकित्सा शिविर चुटकुला ज़कीया ज़ुबैरी जगदीप सिंह दाँगी जयचन्द प्रजापति कक्कूजी जयश्री जाजू जयश्री राय जया जादवानी जवाहरलाल कौल जसबीर चावला जावेद अनीस जीवंत प्रसारण जीवनी जीशान हैदर जैदी जुगलबंदी जुनैद अंसारी जैक लंडन ज्ञान चतुर्वेदी ज्योति अग्रवाल टेकचंद ठाकुर प्रसाद सिंह तकनीक तक्षक तनूजा चौधरी तरुण भटनागर तरूण कु सोनी तन्वीर ताराशंकर बंद्योपाध्याय तीर्थ चांदवाणी तुलसीराम तेजेन्द्र शर्मा तेवर तेवरी त्रिलोचन दामोदर दत्त दीक्षित दिनेश बैस दिलबाग सिंह विर्क दिलीप भाटिया दिविक रमेश दीपक आचार्य दुर्गाष्टमी देवी नागरानी देवेन्द्र कुमार मिश्रा देवेन्द्र पाठक महरूम दोहे धर्मेन्द्र निर्मल धर्मेन्द्र राजमंगल नइमत गुलची नजीर नज़ीर अकबराबादी नन्दलाल भारती नरेंद्र शुक्ल नरेन्द्र कुमार आर्य नरेन्द्र कोहली नरेन्‍द्रकुमार मेहता नलिनी मिश्र नवदुर्गा नवरात्रि नागार्जुन नाटक नामवर सिंह निबंध नियम निर्मल गुप्ता नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’ नीरज खरे नीलम महेंद्र नीला प्रसाद पंकज प्रखर पंकज मित्र पंकज शुक्ला पंकज सुबीर परसाई परसाईं परिहास पल्लव पल्लवी त्रिवेदी पवन तिवारी पाक कला पाठकीय पालगुम्मि पद्मराजू पुनर्वसु जोशी पूजा उपाध्याय पोपटी हीरानंदाणी पौराणिक प्रज्ञा प्रताप सहगल प्रतिभा प्रतिभा सक्सेना प्रदीप कुमार प्रदीप कुमार दाश दीपक प्रदीप कुमार साह प्रदोष मिश्र प्रभात दुबे प्रभु चौधरी प्रमिला भारती प्रमोद कुमार तिवारी प्रमोद भार्गव प्रमोद यादव प्रवीण कुमार झा प्रांजल धर प्राची प्रियंवद प्रियदर्शन प्रेम कहानी प्रेम दिवस प्रेम मंगल फिक्र तौंसवी फ्लेनरी ऑक्नर बंग महिला बंसी खूबचंदाणी बकर पुराण बजरंग बिहारी तिवारी बरसाने लाल चतुर्वेदी बलबीर दत्त बलराज सिंह सिद्धू बलूची बसंत त्रिपाठी बातचीत बाल कथा बाल कलम बाल दिवस बालकथा बालकृष्ण भट्ट बालगीत बृज मोहन बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष बेढब बनारसी बैचलर्स किचन बॉब डिलेन भरत त्रिवेदी भागवत रावत भारत कालरा भारत भूषण अग्रवाल भारत यायावर भावना राय भावना शुक्ल भीष्म साहनी भूतनाथ भूपेन्द्र कुमार दवे मंजरी शुक्ला मंजीत ठाकुर मंजूर एहतेशाम मंतव्य मथुरा प्रसाद नवीन मदन सोनी मधु त्रिवेदी मधु संधु मधुर नज्मी मधुरा प्रसाद नवीन मधुरिमा प्रसाद मधुरेश मनीष कुमार सिंह मनोज कुमार मनोज कुमार झा मनोज कुमार पांडेय मनोज कुमार श्रीवास्तव मनोज दास ममता सिंह मयंक चतुर्वेदी महापर्व छठ महाभारत महावीर प्रसाद द्विवेदी महाशिवरात्रि महेंद्र भटनागर महेन्द्र देवांगन माटी महेश कटारे महेश कुमार गोंड हीवेट महेश सिंह महेश हीवेट मानसून मार्कण्डेय मिलन चौरसिया मिलन मिलान कुन्देरा मिशेल फूको मिश्रीमल जैन तरंगित मीनू पामर मुकेश वर्मा मुक्तिबोध मुर्दहिया मृदुला गर्ग मेराज फैज़ाबादी मैक्सिम गोर्की मैथिली शरण गुप्त मोतीलाल जोतवाणी मोहन कल्पना मोहन वर्मा यशवंत कोठारी यशोधरा विरोदय यात्रा संस्मरण योग योग दिवस योगासन योगेन्द्र प्रताप मौर्य योगेश अग्रवाल रक्षा बंधन रच रचना समय रजनीश कांत रत्ना राय रमेश उपाध्याय रमेश राज रमेशराज रवि रतलामी रवींद्र नाथ ठाकुर रवीन्द्र अग्निहोत्री रवीन्द्र नाथ त्यागी रवीन्द्र संगीत रवीन्द्र सहाय वर्मा रसोई रांगेय राघव राकेश अचल राकेश दुबे राकेश बिहारी राकेश भ्रमर राकेश मिश्र राजकुमार कुम्भज राजन कुमार राजशेखर चौबे राजीव रंजन उपाध्याय राजेन्द्र कुमार राजेन्द्र विजय राजेश कुमार राजेश गोसाईं राजेश जोशी राधा कृष्ण राधाकृष्ण राधेश्याम द्विवेदी राम कृष्ण खुराना राम शिव मूर्ति यादव रामचंद्र शुक्ल रामचन्द्र शुक्ल रामचरन गुप्त रामवृक्ष सिंह रावण राहुल कुमार राहुल सिंह रिंकी मिश्रा रिचर्ड फाइनमेन रिलायंस इन्फोकाम रीटा शहाणी रेंसमवेयर रेणु कुमारी रेवती रमण शर्मा रोहित रुसिया लक्ष्मी यादव लक्ष्मीकांत मुकुल लक्ष्मीकांत वैष्णव लखमी खिलाणी लघु कथा लघुकथा लतीफ घोंघी ललित ग ललित गर्ग ललित निबंध ललित साहू जख्मी ललिता भाटिया लाल पुष्प लावण्या दीपक शाह लीलाधर मंडलोई लू सुन लूट लोक लोककथा लोकतंत्र का दर्द लोकमित्र लोकेन्द्र सिंह विकास कुमार विजय केसरी विजय शिंदे विज्ञान कथा विद्यानंद कुमार विनय भारत विनीत कुमार विनीता शुक्ला विनोद कुमार दवे विनोद तिवारी विनोद मल्ल विभा खरे विमल चन्द्राकर विमल सिंह विरल पटेल विविध विविधा विवेक प्रियदर्शी विवेक रंजन श्रीवास्तव विवेक सक्सेना विवेकानंद विवेकानन्द विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक विश्वनाथ प्रसाद तिवारी विष्णु नागर विष्णु प्रभाकर वीणा भाटिया वीरेन्द्र सरल वेणीशंकर पटेल ब्रज वेलेंटाइन वेलेंटाइन डे वैभव सिंह व्यंग्य व्यंग्य के बहाने व्यंग्य जुगलबंदी व्यथित हृदय शंकर पाटील शगुन अग्रवाल शबनम शर्मा शब्द संधान शम्भूनाथ शरद कोकास शशांक मिश्र भारती शशिकांत सिंह शहीद भगतसिंह शामिख़ फ़राज़ शारदा नरेन्द्र मेहता शालिनी तिवारी शालिनी मुखरैया शिक्षक दिवस शिवकुमार कश्यप शिवप्रसाद कमल शिवरात्रि शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी शीला नरेन्द्र त्रिवेदी शुभम श्री शुभ्रता मिश्रा शेखर मलिक शेषनाथ प्रसाद शैलेन्द्र सरस्वती शैलेश त्रिपाठी शौचालय श्याम गुप्त श्याम सखा श्याम श्याम सुशील श्रीनाथ सिंह श्रीमती तारा सिंह श्रीमद्भगवद्गीता श्रृंगी श्वेता अरोड़ा संजय दुबे संजय सक्सेना संजीव संजीव ठाकुर संद मदर टेरेसा संदीप तोमर संपादकीय संस्मरण संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018 सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन सतीश कुमार त्रिपाठी सपना महेश सपना मांगलिक समीक्षा सरिता पन्थी सविता मिश्रा साइबर अपराध साइबर क्राइम साक्षात्कार सागर यादव जख्मी सार्थक देवांगन सालिम मियाँ साहित्य समाचार साहित्यिक गतिविधियाँ साहित्यिक बगिया सिंहासन बत्तीसी सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध सीताराम गुप्ता सीताराम साहू सीमा असीम सक्सेना सीमा शाहजी सुगन आहूजा सुचिंता कुमारी सुधा गुप्ता अमृता सुधा गोयल नवीन सुधेंदु पटेल सुनीता काम्बोज सुनील जाधव सुभाष चंदर सुभाष चन्द्र कुशवाहा सुभाष नीरव सुभाष लखोटिया सुमन सुमन गौड़ सुरभि बेहेरा सुरेन्द्र चौधरी सुरेन्द्र वर्मा सुरेश चन्द्र सुरेश चन्द्र दास सुविचार सुशांत सुप्रिय सुशील कुमार शर्मा सुशील यादव सुशील शर्मा सुषमा गुप्ता सुषमा श्रीवास्तव सूरज प्रकाश सूर्य बाला सूर्यकांत मिश्रा सूर्यकुमार पांडेय सेल्फी सौमित्र सौरभ मालवीय स्नेहमयी चौधरी स्वच्छ भारत स्वतंत्रता दिवस स्वराज सेनानी हबीब तनवीर हरि भटनागर हरि हिमथाणी हरिकांत जेठवाणी हरिवंश राय बच्चन हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन हरिशंकर परसाई हरीश कुमार हरीश गोयल हरीश नवल हरीश भादानी हरीश सम्यक हरे प्रकाश उपाध्याय हाइकु हाइगा हास-परिहास हास्य हास्य-व्यंग्य हिंदी दिवस विशेष हुस्न तबस्सुम 'निहाँ' biography dohe hindi divas hindi sahitya indian art kavita review satire shatak tevari undefined
नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3790,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,326,ईबुक,182,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,257,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2744,कहानी,2067,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,484,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,129,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,87,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,61,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,309,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,326,बाल कलम,23,बाल दिवस,3,बालकथा,48,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,8,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,16,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,224,लघुकथा,806,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,306,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,57,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1882,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,637,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,676,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,14,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,52,साहित्यिक गतिविधियाँ,181,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,51,हास्य-व्यंग्य,52,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: कुबेर के दो व्यंग्य
कुबेर के दो व्यंग्य
http://lh4.ggpht.com/-Z7K0DxOOQ8Y/UgTk6WkKFRI/AAAAAAAAVdQ/rW21yZpL6jE/clip_image002%25255B8%25255D.jpg?imgmax=800
http://lh4.ggpht.com/-Z7K0DxOOQ8Y/UgTk6WkKFRI/AAAAAAAAVdQ/rW21yZpL6jE/s72-c/clip_image002%25255B8%25255D.jpg?imgmax=800
रचनाकार
http://www.rachanakar.org/2013/11/blog-post_429.html
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2013/11/blog-post_429.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय खोजें सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ