रविवार, 10 नवंबर 2013

लघुकथाएं

लघुकथा

जहरीला आम
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  -- डॉ बच्चन पाठक 'सलिल'

सरदार धूप सिंह शहर के अरब पति ठेकेदार थे । शहर के मध्य में उनकी करोड़ों रुपयों की कोठी है । शहर का पांच सितारा होटल ''धूप छांव" भी उन्ही का है ।

सरदार जी के तीन पुत्र हैं । एक होटल का कारबार देखता है, दूसरा बोकारो में ठेकेदारी करता है और तीसरा सरदार जी के साथ रहकर ट्रांसपोर्ट का व्यवसाय संभालता है । सरदार जी प्रत्येक बेटे से पचास प्रतिशत मुनाफा में हिस्सा लेते हैं और अपनी तथा अपनी बीबी के संयुक्त खाते में जमा करते हैं । किसी बेटे ने मुनाफा का शेयर नहीं दिया, तो उस पर मुकदमा भी करते हैं ।  दो बेटों के विरुद्ध करोड़ों रुपयों के मुकदमे हाई कोर्ट में चल रहे हैं ।

सरदार जी ने गरीबी देखि थी । वे पहले टेम्पो चलाते थे । बाद में छोटे-छोटे ठेके लेने लगे । बुद्धि के तेज़ थे । अफसरों को खुश करने की कला जानते थे । बाद में बड़े-बड़े ठेके लेने लगे और अरबपति हो गए । कहते थे -- यदि कोई मुझे पांच करोड़ का फायदा कराता है और मैं उसके बाल बच्चों को पांच लाख का उपहार देता हूँ, तो भ्रष्टाचार नहीं, शिष्टाचार है ।

सूचना पाकर सभी लड़के जमा हुए । उन्होंने कहा-- पहले संपत्ति का बंटवारा हो जाना चाहिए, फिर लाश उठेगी ।

उन्होंने माँ से बैंक का पास बुक माँगा । जो लड़का माँ-बाप के साथ रहता था, उसने कहा-- मम्मी अभी बेहोशी की हालत में हैं । दो चार दिनों के बाद देख लेंगे ।

दोनों भाइयों को संदेह हो गया । बक-झक शुरू हुयी । खबर पाकर पुलिस आ गयी । दोनों भाइयों ने कहा-- बाबूजी कल तक ठीक थे, आज अचानक कैसे मर गए? लाश को पोस्ट मोर्टेम कराया जाय । पुलिस ने लाश को पोस्ट मोर्टेम के लिए भेज दिया ।

भाइयों की बक-झक चल रही थी । संवेदना जताने आये लोग एक-एक कर जाने लगे । एक शिक्षक ने कहा-- गरीबी की कब्र पर उगे अमीरी का आम जहरीला होता है ।

पता-- बाबा आश्रम, पञ्च मुखी हनुमान मंदिर के पास

        आदित्यपुर-२, जमशेदपुर-१३, झारखण्ड

फोन- 0657/ 2370892

मेल-- drsaliljsr@gmail.com

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सीमा स्‍मृति

इलाज

क्‍या हुआ सर, आप आज आफिस के लिए लेट कैसे हो गए ?

अरे मैडम क्‍या बताये, आप तो जानती हो घर में हम सभी नौकरी करते हैं। तो नौकर भी पालना पड़ता है। बस उसी नौकर को बुखार हो गया। तो उसे डाक्‍टर के पास ले कर गया था इसी कारण लेट हो गया। उसे वापिस ऐजेंसी वालों के पास भी तो नहीं भेज सकते वरना पता नहीं वापिस आये या नहीं।

हां सर, ये तो है।

अब डाक्‍टर ने उसे डेंगू बताया है। खून टेस्‍ट करवाया, प्लटेलेट थोड़े कम आये हैं।

सर कितने हैं ?

यही तीस हजार।

सर, ये तो बहुत कम हैं ।

मैडम, हम उसको दवाई के साथ ताजा जूस, दूध सब दे रहे हैं। ऐजेंसी वाले क्‍या ख्‍याल रखते जो हम रख रहे हैं। ठीक हो जाएगा । उस के बिना हमारा भी तो गुजारा नहीं हो सकता। कुछ नहीं होगा। तीन चार दिन टाइम तो लगेगा पर ठीक हो जाएगा।

मैंने अखबार में पढ़ा था कि इस बार दिल्‍ली में डेंगू से मरने वालों की संख्‍या बहुत ही कम है।

सीमा स्‍मृति

30.10.2013

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2 blogger-facebook:

  1. गरीबी की कब्र पर उगे अमीरी का आम जहरीला होता है ।

    वर्तमान परिस्थिति को उजागर करती सटीक लघुकथाएँ ।।

    उत्तर देंहटाएं
  2. Bahut sundar laghukatha Dr salil ji ki. unko badhai.
    Pro Manoj Kumar Pathak

    उत्तर देंहटाएं

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