गुरुवार, 12 दिसंबर 2013

दिलीप भाटिया की लघुकथाएँ

लघुकथाएं

केरियर

सुजाता केरियर हेतु नौकरी करना चाह रही थी। श्‍ोखर भी सहमत था कि बच्‍चों को उनके दादाजी सम्‍भाल लेगें, लेकिन सुजाता का दो टूक हल था, ‘‘तुम्‍हारे बाबूजी बच्‍चों को बिगाड़ देंगे, बच्‍चों को होस्‍टल में डाल देंगे एवं तुम्‍हारे पूज्‍य बाबूजी को वृद्‌घाश्रम में।‘‘

शगुन

त्‍यौहार पर रंग बिरंगी लाइट सीरीज से सजावट कर शानदार पार्टी चल रही थी, पर अचानक पावर कट से घर में अंधेरा हो गया, रंग में भंग से सब दुःखी थे, बालकनी के कोने में खाट पर पड़ी अम्‍मा हल्‍के से बोली, ‘‘मैंने पहले ही कहा था, शगुन के पांच दीपक के लिए।‘‘

डूबता सूरज

नेहा बेटी की शादी के निमंत्रणों की सूची अजय-अरूणा फाइनल कर रहे थे, सूची देखकर अरूणा बोली, ‘‘तुमने कमल अंकल का नाम क्‍यों काट दिया? उनसे तो हमारे घनिष्‍ठ संबंध थे।‘‘ अजय का फैसला था ‘‘अब वे रिटायर हो गए, क्‍या काम के? डूबते सूरज को कौन अर्ध्‍य देता है?‘‘

मकान

बाबूजी संतुष्‍ट थे कि उनके बाद भी बेटे बहू उनके बनाए गांव के मकान के बहाने सब रिश्‍तेदारों, समाज से जुड़े रहेंगे पर बहू तो प्रतीक्षा कर रही थी कि बाबूजी की मुक्‍ति के पश्‍चात गांव का मकान बेचकर शहर में फ्‍लेट बुक करवा लेंगे, कौन गांव में घुटन में रहेगा?

फेसबुक

दीपाली शिकायत कर रही थी, ‘‘अंकल, मैने फेसबुक पर इनवाइट किया था, पर आप मेरी शादी में नहीं आए।‘‘ अंकल बोले ‘‘बेटी, फेसबुक पर मैंने लाइक तो कर ही दिया था, फेस टू फेस स्‍वयं घर आकर निमंत्रण देने आती, तो आशीर्वाद देने अवश्‍य ही आता।^

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