रविवार, 22 दिसंबर 2013

जसबीर चावला की लघु श्रम कथा


चार दोस्त गपिया रहे थे. प्रश्न उठा अगले जन्म में कौन कहाँ पैदा होना चाहेगा और क्यों.

एक बोला मैं मरने के बाद अगले जन्म में अमेरिका में पैदा होना चाहूँगा.मौज ही मौज. मेरा तो इस जन्म में यही सपना है.

दूसरे का सपना अगले जन्म में कहीं का भी राजा बनने का था. कोई काम न करना पड़े.निरंकुश सत्ता का उपभोग.

तीसरा तेल से भरपूर अरब देश में किसी शेख़ के घर पैदा होने की इच्छा रखता था.खाओ पियो ऐश करो
आराम ही आराम.

चौथे से पूछा गया वह अगले जन्म में कहाँ पैदा होना चाहता है और क्या बनना चाहता है.

उसका उत्तर सुनकर सब चौंक गये. उसने कहा कि वह प्रायश्चित करना चाहता है,भारत में ही पैदा होना चाहता है और मर कर गधा बनना चाहता है.

तीनों मित्र व्यंग्य से हंस पड़े-'गधा'- भला गधा क्यों ?

'क्योंकि गधा प्रतीक है मेहनत का,ईमानदारी से काम का'.'इस देश में लोग काम नहीं करते. दफ़्तरों में मक्कारी करते हैं' -'श्रम से जी चुराते हैं'-अगर कोई साथी मेहनत से काम करें तो कहतें हैं कि -'क्या गधे के समान काम कर रहा है'-'उसका मज़ाक़ उड़ाया जाता है-उसे गधा कहा जाता है'

तीनों मित्र आवाक रह गये

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