मंगलवार, 30 अप्रैल 2013

अनुरूपा चौघुले की कविताएँ - मेरे कॉलेज की वह लंबी लड़की

ओस बनूँगा तांक झांक कर रही दुपहरिया अल्हड़ हो गई सारी अमियाँ गुलमोहर से कुमकुम बरसे सजी सेज पर सजनी हरसे छांव नीम की ठंडी ठंडी मदहोशी...

महावीर सरन जैन का आलेख - भारतीय भाषा परिवार

भारोपीय भाषा परिवार : प्रोफेसर महावीर सरन जैन (मैंने इधर कुछ विद्वानों के आलेख पढ़े हैं जिनमें यूरोपीय भाषाओं के अनेक शब्दों की व्युत्पत्...

डाक्टर चंद जैन अंकुर की कविता - संगे मर मर से श्री विग्रह तक

मेरी कविता  " संगे मर मर से श्री विग्रह तक " उस अमर चेतना का प्रतिनिधित्व करता  है जो कण कण में समाया है । जड़ और चेतन से विश्व वि...

अनिल मेलकानी की कविताएँ

  ख़ामोशी कितना अजीब? कि इतनी नजदीकियों बाद भी, तुम हमें आम-लोगों में ही गिन पाते हो; और ये भी, कि इतना कुछ  होते हुए; तुम हमें दिल के उतने...

सोमवार, 29 अप्रैल 2013

बशर नवाज की नज्म - मुझे जीना नहीं आता

            मुझे जीना नहीं आता                                      मूल उर्दू शायर- बशर नवाज                                      अनुवाद- ड...

रविवार, 28 अप्रैल 2013

सुरेश सर्वेद की कहानी - जागृति

खेत की मेढ़ पर कदम रखते ही मनहरण की द्य्ष्टि खेत के भीतरी हिस्से में दौड़ी. खेतों में बोई फसल को देखकर उसका पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया. उसे ...

सुरेश सर्वेद की कहानी - हलकू इक्कीसवीं सदी का

हलकू शहर से वापस अपने गाँव आ गया.उसके पास अब लबालब सम्पति थी.धन दौलत के कारण ग्रामीण उसे अब हलक ू कहने से परहेज करने लगे.अब वह सेठ के नाम स...

सुरेश सर्वेद की कहानी - आक्रोश

बादल की टुकड़ियों को देखकर विश्राम तिलमिला रहा था.मानसून के आगमन की खबर फैली और एक बारिस हुई भी.फिर बारिस थमी तो बरसने का ही नाम नहीं ले रही...

सुरेश सर्वेद की कहानी - परिवर्तन

संध्या होते होते अमृतपाल शराब के नशे में चूर हो जाता. कोई दिन ऐसा नहीं गया कि वह बिना शराब पिये घर पहुंचा हो। वह दिन भर रिक्शा खींचता और जो...

आत्माराम यादव पीव की कविताएँ

           सम्पादक जी नमस्कार। मैंने जीवन में अनेक अवसरों मनोकाश पर उभरे.. . . शब्दों की लड़ियों में दर्जनों अभिव्यक्तियां अपने डायरी के प...

सुरेश सर्वेद की कहानी - नहीं बिकेगी जमीन

पु स्तैनी सम्पत्ति को बिगाड़ने की जरा सी भी इच्छा गोविन्द के मन में नहीं थी.वह चाह रहा था जिस तरह उसके दादा की सम्पत्ति को पिता ने सहज कर रख...

आशीष कुमार त्रिवेदी की लघुकथा - मेरी इच्छा

मेरी इच्छा  ईशान बेसब्री से अपने मम्मी डैडी के आने की प्रतीक्षा कर रहा था। बंसी ने कई बार कहा की वह खाना खाकर सो जाए नहीं तो मेमसाहब नाराज़ ...

शनिवार, 27 अप्रैल 2013

रामवृक्ष सिंह का व्यंग्य - शहर में साँड़

व्यंग्य शहर में साँड़ डॉ . रामवृक्ष सिंह इधर हमारे शहर में साँड़ों की संख्या बेतहाशा बढ़ गई है। और साँड़ से हमें अभिधा वाला अर्थ ही अभि...

बच्चन पाठक 'सलिल' की ऐतिहासिक कहानी - नियति चक्र

नियति चक्र -डॉ बच्चन पाठक 'सलिल    मगध साम्राज्य के राज वैद्य आचार्य जीवक को उस रात  नींद नहीं आरही थी अपने प्रसाद में ,अपने पर्यंक प...

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------