August 2013

पुस्तक समीक्षा - दलित विमर्श की कसौटी पर ‘मुर्दहिया’

दलित विमर्श की कसौटी पर ‘मुर्दहिया’ डॉ. विजय शिंदे संसार में मनुष्य का आगमन और बुद्धि नामक तत्व के आधार पर एक-दूसरे पर वर्चस्व स्थापित ...

चंद्रेश कुमार छतलानी की लघुकथा - थोड़ी सी प्यास

लघुकथा: थोड़ी सी प्यास किसान हीरा की पत्नी घाट से जो मटका भर कर लाती थी, उसमें छोटा सा छेद हो गया था| उस पर हाथ रखते रखते भी पानी ज़मीन प...

शैलेन्‍द्र नाथ कौल का आलेख - पर्यावरण - बच्‍चे क्‍या करें

पर्यावरण - बच्‍चे क्‍या करें ? (बालवाणी, हिन्‍दी संस्‍थान लखनऊ के जुलाई-अगस्‍त 2013 में प्रकाशित) बच्‍चों आप सबने अपने स्‍कूल की किताबों में...

महावीर सरन जैन का आलेख - स्वामी विवेकानन्द : मानव सेवा एवं सर्वधर्म समभाव

स्वामी विवेकानन्दः मानव-सेवा एवं सर्वधर्म समभाव प्रोफेसर महावीर सरन जैन स्वामी विवेकानन्द को ठीक तरह से समझने के लिए रामकृष्ण परमहंस को सम्य...

राजीव आनंद का आलेख - राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त

31 अगस्‍त को मैथिलीशरण गुप्‍त की 125 वीं जयन्‍ती पर विशेष राष्‍द्रकवि मैथिलीशरण गुप्‍त का अवदान आज भी प्रासंगिक है। यह जान कर आश्‍चर्य और ...

गोवर्धन यादव का आलेख - कर्मयोगी श्रीकृष्ण

(जन्माष्टमी के पावन पर्व पर विशेष) कर्मयोगी श्रीकृष्ण श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व एकदम निराला-अद्भुत और अनूठा है. देवताओं और अब तक हुए अवतारों...

प्रमोद भार्गव का आलेख - मानवीय गुणों के अवतार - श्रीकृष्ण

· संदर्भ 28 अगस्‍त श्रीकृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी के अवसर पर विशेष   मानवीय गुणों के अवतार श्रीकृष्‍ण प्रमोद भार्गव हाल ही में एक भारतवंशी...

सुजाता शुक्ला की कहानी - यायावर

यायावर वो यायावर था ।अलग अलग स्थान जाना न सिर्फ उसका शौक था, बल्कि उसकी प्रवृत्ति थी । उम्र के हिसाब से भी ज़्यादा जगह का भ्रमण कर चुका था ...

पूरन सरमा का व्यंग्य - मन्‍त्री जी के बंगले की एक सुबह

व्‍यंग्‍य एक सुबह मन्‍त्री जी के बंगले की पूरन सरमा मैं जिस समय मन्‍त्री जी के बंगले पर पहुँचा तो सुबह के सवा आठ बज चुके थे तथा मन्‍त्री...

पुस्तक समीक्षा - घर घर की राम लीला

सफल और सार्थक व्‍यंग्‍य सुप्रसिद्ध व्‍यंग्‍यकार पूरन सरमा का सोलहवां व्‍यंग्‍य संकलन घर घर की राम लीला' आया है। वे राष्ट्रीय स्‍तर पर चर...

दिलीप लोकरे की लघुकथा - कर्फ्यू

कर्फ्यू स्कूल से जैसे-तैसे घर आया वह बच्चा बहुत डरा हुआ था । स्वाभाविक भी था । सुबह जब वह स्कूल के लिए निकला था तब सब कुछ सामान्य था। मोर्नि...

सुशील यादव का व्यंग्य - पिछवाड़े बुढ्ढा खांसता

पिछवाड़े बुढ्ढा खांसता बुढ्ढे को जिंदगी भर कभी बीमार नहीं देखा । हट्टा-कट्टा,चलता-फिरता ,दौड़ता-भागता मस्त तंदरुस्त रहा। कभी छीक ,सर्दी-जु...

राम आश्रय की रचना - भीम गाथा

           भीम गाथा                                                     रचित & संपादित  – राम आश्रय चित्रांकन –विपुल सुधाकर        ...