शनिवार, 30 नवंबर 2013

मुकेश वर्मा की कहानी - दिल की इक आवाज़ ऊपर उठती हुई...

कहानी दिल की इक आवाज़ ऊपर उठती हुई․․․ मुकेश वर्मा तीन सौ सड़सठवीं मंजिल से गिरते हुये जब वह अपने होश-हवास पर कुछ काबू कर पाया तो उसने देखा...

शुक्रवार, 29 नवंबर 2013

देवीलाल पाटीदार की मृदा कलाकृतियाँ

देवीलाल पाटीदार की मृदा कलाकृतियों में प्रकृति अपने सजीव स्वरूप में अवतरित हो जाती है. प्रस्तुत हैं उनके कुछ नवीनतम सृजन -

राजीव आनंद का आलेख - स्‍मृति-शेष : डोरिस लेसिंग का जाना

स्‍मृति-शेष डोरिस का जाना डोरिस लेसिंग अब नहीं रहीं. 17 नवंबर को 94 साल की उम्र में ब्रिटेन के सबसे प्रभावशाली साहित्‍यकारों में शुमार डोरि...

राम नरेश 'उज्ज्वल' का व्यंग्य - दुम लगवाने की कोशिश

               (व्यंग्य) दुम लगवाने की कोशिश     -राम नरेश'उज्ज्वल'    मेरी समझ से दो जून की रोटी ईमानदारी पूर्वक कमाना और खाना सब...

जसबीर चावला का व्यंग्य: चेनल चूँ चूँ का मुरब्बा धोनी और भैंस

  ............................................... बेहद परेशान थे टीवी चैनल सीसीकेएम (पूरा मतलब चूँ चूँ का मुरब्बा) के सीईओ इन दिनों.परेशानी...

गुरुवार, 28 नवंबर 2013

गोवर्धन यादव का आलेख : अविज्ञात रहस्यों से भरापूरा संसार

अविज्ञात रहस्यों से भरा-पूरा संसार यह संसार एक विचित्र रंगमंच है, जिस पर तरह-तरह के विलक्षण अजूबे देखने को मिलते हैं. वैज्ञानिक प्रयास करते...

रामनरेश उज्जवल की कहानी - बूंद बूंद पानी

चाँद आसमान के ठीक बीचोंबीच आ गया है। ‘हाँ, शायद बारह बजा होगा।' मन ने अनुमान लगाया। बादल इधर-उधर दौड़ लगा रहे थे। काले, धुँआरे तथा सफेद...

बुधवार, 27 नवंबर 2013

गुणशेखर का यात्रा संस्मरण : चीन की उड़ान

चीन की उड़ान ============ [यात्रावृत्त चलते-चलते देखे गए दृश्यों और अनुभूत सत्यों का उदघाटन मात्र है या कुछ औरभी है,जिसे इसमें जोड़ा जा सकता ...

मंगलवार, 26 नवंबर 2013

साहित्य समाचार : आंचलिका का विमोचन और साहित्यिक विभूतियों का सम्मान‌

आंचलिक साहित्यकार परिषद छिंदवाड़ा की पत्रिका आंचलिका का लोकार्पण शहर के रवींद्र भवन हिंदी प्रचारिणी परिसर में सादे किंतु गरिमा पूर्ण परिवेश ...

सोमवार, 25 नवंबर 2013

सीमा सक्सेना का आलेख - नई कहानी के संस्थापक राजेंद्र यादव

मो हन राकेश, कमलेश्वर के बाद राजेंद्र यादव जी को नई कहानी विधा का अंतिम हस्ताक्षर माना जाता है, 1986 में कालजयी कथाकार मुंशी प्रेमचंद्र के द...

रविवार, 24 नवंबर 2013

जसबीर चावला की चुनावी चकल्लस और व्यंग्य कविताएँ

चुनावी पाठशाला ंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंं अमर उठ अब उठ बहुत सोया सो मत रो मत बहुत खोया अब खो मत * बक बक मत कर चख चख मत कर मत मत मत कर मतदा...

प्रमोद यादव की कहानी - दहेज का दानव

दहेज का रहस्य/ प्रमोद यादव जब से अखिल से मिलकर लौटी हूँ,बेहद उलझ गयी हूँ.कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि अखिल के कौन से रूप को सही मानूं. उसका...

श्याम गुप्त की कहानी - यक्ष प्रश्न

(डॉ. श्याम गुप्त  ) पुष्पाजी अपनी महिला मंडली के नित्य सायंकालीन समागम से लौटकर आयें तो कहने लगीं,’ आखिर राम ने एक धोबी के कहने पर सीताजी ...

सुरेश कुमार 'सौरभ' का आलेख - क्षीण होती सामाजिक सद्भावना

सा माजिक सद्भावना का तात्पर्य है- समाज के हित अथवा कल्याण की भावना । मनुष्य समाज में रहने वाला एक विचारशील प्राणी है । वह संसार के सभी प्राण...

राकेश शुक्ल का आलेख - चीनी भी जहर है!

चीनी भी जहर है ! हम भारतीय चावल, आलू, ब्रेड, स्नैक्स एवं शीतल पेयों के रूप में प्रतिदिन कार्बोहाइड्रेट युक्त आहार का सेवन करते हैं जिसस...

शुक्रवार, 22 नवंबर 2013

सुशील यादव का व्यंग्य - जहाँ सोच है, वहाँ शौचालय है

जहां सोच है वहाँ शौचालय है । यस, वी केन ,,,, मैं मानता हूँ इतने रद्दी तरीके से कोई शुरुआत नहीं होती ,मगर क्या करे अपने अंदर क्या –क्या क...

सोमवार, 18 नवंबर 2013

सप्ताह की कविताएँ

निर्मला सिंह गौर उम्र भर अनुभवों की धार ने हमको तराशा उम्र भर हमने हर्जाना चुकाया अच्छा खासा उम्र भर हमको जिनकी धीरता गम्भीरता पर ग...

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