गुरुवार, 16 जनवरी 2014

सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा की 10 क्षणिकाएँ

10 क्षणिकाएँ

सब कुछ अपना हो / जरूरी तो नहीं है

clip_image002

                                                                 

1. सब कुछ अपना हो
     जरूरी तो नहीं है
     जो होता है
  वो भी नहीं होता अपना सब कुछ .

2.  हर शाम के साथ दिन ढल जाये
     यह जरूरी होता तो फिर
     हर सुबह के साथ
     दिन भी तो निकलना चाहिए था .

3. रात गहरा जाये
     किसी के बस में नहीं
   रात का गहरा जाना
     नई सुबह का इशारा  भी तो हो सकता है.

4. रूठ कर  मान जाना
    बड़ा अच्छा लगता है
  फिर रूठने  की बारी 
    बदलने के लिए .

5. कोई रूठ जाये
    यह उसका हक़ है
    पर मनाना भी तो
    हर किसी को नहीं आता . 


6. याद आकर चली जाये
  फिर आये
   लगता है छूटा हुआ
   खजाना फिर से मिल गया .

7. पास बैठते हो तुम
     सुरक्षा का घेरा बन जाता है
     हर पल कोई अपना 
    दिल के तार झनझना जाता  है  .


8. आओ एक बार फिर बैठें साथ - साथ
     उन सहेजे सपनों के लिए
     जो  सिर्फ सपना नहीं थे
     एक जिद थे .

9. तुम्हारे आने से  रुक जाता है समय
     तुम्हारे जाने से  कटता नहीं समय
     खेलता है खेल समय , या है
     मेरा पागलपन गिरफ्त में , समय की .

10. ढूंढता है प्यार  सौंदर्य को 
       प्यार तो स्व्यम् ही  सुंदर होता है 
       होता है प्यार त्याग की प्रतिमूर्ति
      त्याग तो स्व्यम् ही  प्यार की देन है .

 

 


सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा 27/12/2013
डी - 184 , श्याम पार्क एक्स्टेनशन        साहिबाबाद  - 201005 ( ऊ . प्र . )
  (arorask1951@yahoo.com)

2 blogger-facebook:

  1. 1. सब कुछ अपना हो
    जरूरी तो नहीं है
    जो होता है
    वो भी नहीं होता अपना सब कुछ .
    3. रात गहरा जाये
    किसी के बस में नहीं
    रात का गहरा जाना
    नई सुबह का इशारा भी तो हो सकता है.
    8. आओ एक बार फिर बैठें साथ - साथ
    उन सहेजे सपनों के लिए
    जो सिर्फ सपना नहीं थे
    एक जिद थे .

    यह तीनों क्षणिकाएं बेहद पसंद आयीं ...

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा7:15 pm

    धन्यवाद : सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------