गुरुवार, 16 जनवरी 2014

ललिता भाटिया की लघुकथा - मोहभंग

मोहभंग 

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निर्मला कुछ दिन पहले ही नेपाल से आ कर   शहर में बसी हे साथ में पति रामबहादुर और बेटा मनु  है । जब आई तो  चार बर्तन और कुछ कपड़े   थे । आते  ही एक खाट खरीदी जिस पर मनु अपने पापा के साथ सोता और वो वहीं नीचे चादर  सो जाती ।  कुछ दिन बाद उस के पति को एक ढाबे पर काम  गया और वो खुद भी चार घरों  में बर्तन सफाई का काम करने लगी । कोठियों के हर कमरे में जब वो डबल बेड  देखती तो कल्पना करती उस के कमरे में भी ऐसा ही बेड होगा । जहाँ उन दोनों के बीच मनु सोया होगा । एक दिन जब वो काम पर आई तो उस दि छुट्टी होने के कारण साहब और मैडम सोये  हुए थे । पर उसे तो काम निपटाना था आते ही काम में जुट गई पर हैरानी तब हुई जब उस ने देखा साहेब और मैडम अलग अलग कमरे में सो रहे हैं । उस की आँख भर आई क्या हुआ जो उन के पास डबल बैड नहीं है पर वो सोते तो एक कमरे में ही हैं । उस का मोहभंग हो चुका था । उस के हाथ तेज़ २  झाड़ू चलाने लगे । 

Lalita Bhatia 

211 Subhash Nagar 

Rohtak 124001

2 blogger-facebook:

  1. ललिता भाटिया जी ,
    छोटी सी सुंदर सी रचना | बधाई हो ...

    उत्तर देंहटाएं

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