गुरुवार, 9 जनवरी 2014

हनुमान मुक्त का व्यंग्य - फुड इंस्पेक्टर की दावत

फुड इंस्पेक्टर की दावत

 

फुड इन्सपेक्टर जैन की शादी की वर्षगांठ थी। शहर के सबसे बड़े मैरिज गार्डन में आयोजन रखा गया था। सभी व्यवसायी भागभाग कर व्यवस्था में लगे हुए थे, कहीं कोई कमी ना रह जाए इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा था। उपहार देने वालों के नामपते, उपहार का नाम लिखने के लिए जैन साहब के विश्वसनीय बाबा हलवाई पूरी मुस्तैदी से अपने काम को अंजाम दे रहे थे। वे ज्यादातर लोगो को उनके नाम और काम के हिसाब से जानते थे। हर माह जैन साहब को उगाही भी वे ही कर के देते थे। दूधिया रोशनी और रंग बिरंगी सजावट से मैरिज गार्डन चकाचौंध था। जैन साहब भी अपनी पत्नी के साथ शादी के नए जोड़े पहन कर मुस्कराते हुए आगंतुकों का स्वागत कर रहे थे। पार्टी में चुनिंदा लोगों को ही शामिल किया गया था। खाने के पांडाल में सैकड़ों तरह की स्टाल लगी हुई थी। जिसमें हर तरह की मिठाइयाँ, पकवान, नमकीन, चाट, रोटियाँ (सादा, मिस्सी, परांठे) एवं सब्जियाँ सजी हुई थी। सूप आइसक्रीम, ज्यूस ले लेकर वैटर मेहमानों को सर्व कर रहे थे। शानदार आयोजन था। कहीं कोई कमी दिखाई नहीं दे रही थी। कार्यकर्ता तन, मन, धन से अपने काम में जुटे हुए थे। फुड इंस्पेक्टर की शादी की वर्षगांठ जो थी। रंग जम रहा था। हल्का-हल्का कर्ण प्रिय संगीत बज रहा था। पार्टी अपने अंतिम दौर में थी। मेहमान लोग अपना अपना काम निपटाकर अपने घरों को प्रस्थान कर रहे थे। कुछेक जैन साहब के ‘‘खास आदमी’’ ही पार्टी में शेष बचे थे। अचानक रंग में भंग पड़ गया। सी.एम.एच.ओ. साहब का फोन आया कि पचासों लोगो को उल्टी हो रही है और वे हॉस्पिटल में पहुँच गए हैं। पता लगा है कि वे लोग किसी दावत में खाना खा कर आए हैं। तुरन्त दावत वाले स्थान पर पहुंचो और उसे सील कराओ। हो सकता है मिलावटी सामग्री खाने से उनके शरीर में स्लो पॉइजन बन गया है। बॉस का फोन आते ही उनके शरीर में झुरझुरी सी आ गई। हाथपैर फूल गए उनके। इस पार्टी का आयोजन उन्होंने बॉस से छिपाकर किया था। इसमें उन्हें आमंत्रित भी नहीं किया था। आने वाले उपहारों से हिस्सा बचाने के लिए। हर छः माह में वे इस तरह का आयेजन करते रहते हैं।

वफादार सरकारी नुमाइन्दो की तरह जैन साहब तुरन्त अपने विश्वसनीय बाबा हलवाई को लेकर हॉस्पिटल पहुँचे। देखकर हतप्रभ रह गए। यहाँ वे ही लोग भर्ती थे जो अभी उनकी दावत में से गए थे।

आँखों में खून उतर आया था उनके। सबसे पहले ही कह दिया था कि इस कार्यक्रम में सभी सामान शुद्ध काम में लेना है फिर ऐसा कैसे हो गया। सिंथेटिक दूध, मावा इत्यादि का प्रयोग किसी भी हालत में यहां नहीं किया जाएगा फिर ऐसी हिमाकत करने की जरूरत किसने कर दी। तुरंत बॉस के निर्देशानुसार दावत वाले स्थान पर पहुंचे। लालपीले हो रहे थे वे। दूध किस किसके यहां से आया? सभी दूध वाले हाथ जोड़कर खड़े हो गए। हुजुर हम दूध लाए थे। दूध कैसा था सिंथेटिक? नहीं हुजुर, बिल्कुल शुद्ध दूध था। हमारे सामने भैंस का निकलवा कर लाये थे। आज तो बिल्कुल मिलावट नहीं की थी। यूरिया भी नहीं मिलाया था। मावा किस हलवाई के यहां से आया? हुजुर हमारे यहाँ से। सौ टंच शुद्ध था। बिल्कुल भी अरारोट , आंलू, ऑयल मिक्स नहीं किया था। घी के पीपे किसके यहां से आये? व्यापारी हाजिर था। बोला सब मिलावट करके मरना था क्या। शुद्ध घी था। पाम ऑयल, एसेन्स से बने पीपे तो रखे हैं जो आपको पहले दिखाए थे। साब को विश्वास नहीं हो तो गिनकर देख लें ये उतने ही हैं जितने परसो आपकी काउन्टिंग के समय थे। तब से लेकर अब तक तो आपके यहां लग ही रहे है। हो ना हो मसालों में मिलावट हो? पंसारी पन्नालाल हाजिर हुए। कसम पोथी की साब। भगवान झूठ ना बुलाए। आपके यहाँ आया सब मसाला मेरे घर से आया है। घर पर ही साफ करके, कूट छनवा कर यहाँ मंगाया है। रिक्शे वाले से पूछ लो यह मसाला घर से लाया है या दुकान से।

बुरादा, भूसा, गोबर मिला हुआ धनियां, ईंट पाउडर और रंग मिली हुई मिर्च, सेलम पाउडर और रंग मिली हुई हल्दी, बेकार पत्तों को मिलाकर पिसवाया हुआ गरम मसाला सब कुछ दुकान पर बेचता हूं। जैन साहब ने सभी को बुलाकर उनसे पूछा, लेकिन सबका एक ही जवाब था। सब सामान शुद्ध काम में लिया गया है। फिर ऐसा कैसा हो गया?  शुद्ध सामान खाने से लोग बीमार कैसे पड़ गए? जैन साहब मन ही मन सोच रहे थे। ‘‘खग ही जाने खग ही भाषा’’ बाबा हलवाई बोला ऐसा लगता है साब शुद्ध खाना नहीं खाया। मिलावटी खाने की आदत पड़ी हुई है, शरीर एक साथ इतनी सारी शुद्ध चीजों को हजम नहीं कर सका। अनुकूलन में समय लगता है। आप चाहे तो सबके सैम्पल भर लें और उन्हें जाँच के लिए भिजवा दें। जैन साहब के चेहरे पर मुस्कराहट आ गई। सी.एम.एच.ओ साहब को फोन पर कह दिया सब कुछ ठीक है। दावत वाले स्थान से सैम्पल ले लिए हैं।

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Name : HANUMAN MUKT

Address : Kanti Nagar , Gangapur City

District : Sawai Madhopur (RAJASTHAN)

 

Email-id : hanumanmukt@gmail.com

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