शुक्रवार, 3 जनवरी 2014

बच्चों का कोना - बीरबल की चतुराई

बीरबल की चतुराई

अकबर बीरबल की कहानियाँ

एक बार बादशाह अकबर युद्ध के लिए गए. युद्ध तो जीत लिया लेकिन अंगूठे में चोट लगने से नाखून उखड गया. अकबर ने नामी-गिरामी वैद्यों को बुलाया,किन्तु नाखून फ़िर से लाने में असफ़ल रहे. बादशाह का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. उन्होंने सभी वैद्यों से कहा कि दस दिनों में नाखून आ जाना चाहिए, अन्यथा कारावास की कठोर सजा सहनी पडॆगी.

जब वैद्यों को सजा से मुक्ति का कोई उपाय नहीं सूझा तो उन्होंने बीरबल को अपनी समस्या बताई. बीरबल ने सभी को आश्वस्त किया और अगले दिन अकबर से कहा “ हुजूर ! इन वैद्यों का कहना है हम बादशाह सलामत का नाखून ला तो सकते है,किन्तु इसके लिए जो औषधियां जरुरी है, वे हमें उपलब्ध करवा दी जाए. इन लोगों ने मुझे एक नुस्खा लिखवाया है. अब आप या तो उस नुस्खे के अनुसार औषधियों की व्यवस्था करवाएं या इन्हें छोड दें.

बादशाह ने बीरबल की बात मान ली और नुस्खा पूछा. बीरबल ने नुस्खा बताया- “गूलर के फ़ूल और मछली के पेशाब से नाखून आ सकता है.” बादशाह परेशानी में पड गए,क्योंकि गूलर पर तो फ़ूल होता ही नहीं और मछली का पेशाब लाना सर्वथा असंभव है. आखिर वायदे के मुताबिक उन्हें सभी वैद्यों को मुक्त करना पडा. बीरबल के प्रति सभी वैद्यों ने आभार व्यक्त किया.

वस्तुतः अचानक आए संकट से निपटने के लिए तत्काल क्रियाशील होना जरुरी है. इसे प्रत्युत्पन्नमति कहते हैं,जिसे थोड़े ज्ञान, कुछ अनुभव और तनिक चतुराई से अर्जित किया जा सकता है.

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प्रस्तुति - गोवर्धन यादव

१०३,कावेरीनगर,छिन्दवाडा(म.प्र.) ४८०००१

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