ललिता भाटिया की लघुकथा - तमाचा

तमाचा 

दिल्ली जाने वाली एक बस खचाखच भर चुकी थी।
एक बुढिया बस रुकवा कर चढ़ गई।
कंडक्टर के मना करने पर उस ने कहा मुझे ज़रुरी जाना है।
किसी ने बुढिया को सीट नहीं दी।
अगले बस स्टैंड से एक युवा सुंदर लडकी बस में चढी
तो एक दिल फैंक युवक ने अपनी सीट उसे आँफरकर दी
और खुद खडा हो गया।
युवती ने बुढिया को सीट पर बैठा दिया और खुद खडी रही ।
युवक अहिस्ता से बोला: " मैंने तो सीट आप को दी थी।"
इस पर युवती बोली, : "धन्यवाद,
लेकिन किसी भी भी चीज पर बहन से ज्यादा मां का हक होता है
युवक के मुंह पर मनो तमाचा जड़ दिया । 

Lalita Bhatia 211 

Subhash Nagar Rohtak 

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1 टिप्पणी "ललिता भाटिया की लघुकथा - तमाचा"

  1. कहानी सुनी जरूर थी लेकिन इसकी प्रस्तुति आपने बहुत अच्छी की है.

    धन्यवाद,

    अयंगर. laxmirangam.blogspot.in

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