सोमवार, 27 जनवरी 2014

जसबीर चावला की दो छुटकी कथाएँ

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अथःकंबल कथा

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रात का वक़्त था. बाहर बड़ी ठंड थी. पति पत्नी कार में जा रहे थे. सड़क किनारे पतली पुरानी चादर में लिपटे एक बूढ़े भिखारी को देख पत्नी का दिल द्रवित हो गया. पति से कहा कि वह बूढ़ा ठंड से काँप रहा है,कार रोको. पति ने कार रोक दी. पत्नी बोली कार में जो कंबल पड़ा है उसे दें देते हैं. पति बोला-"क्या कहती हो. इतना मंहगा कंबल,वह उसे बेच देगा. ये ऐसे ही होते हैं". पत्नी न मानी. अनमने पति नें कंबल उठाया और ले जाकर बूढ़े को ओढ़ा दिया-"ले बाबा ऐश कर"

अगले दिन दिन में भी ग़ज़ब की ठंड थी. पति पत्नी उसी रास्ते से निकले. सोचा देखें रात वाले बूढ़े का क्या हाल है. देखा तो बूढ़े भिखारी के पास वह कंबल नहीं था. वही पुरानी चादर ओढ़े भीख मांग रहा था. पति ने पत्नी से कहा -"मैंने कहा था कि उसे मत दो बेच दिया होगा". दोनों कार से उतर कर उसके पास गये. पति ने व्यंग्य से पूछा- "बाबा रात वाला कंबल कहाँ हैं बेच कर नशे का सामान ले आये क्या ?

बूढ़े ने हाथ से इशारा किया थोड़ी दूरी पर एक बूढ़ी औरत भीख मांग रही थी. कंबल उसने ओढ़ा हुआ था. बूढ़ा बोला-"वह औरत पैरों से विकलांग है, मेरे पास तो पुरानी चादर है,मैंने कंबल उसे दें दिया "

पति पत्नी हतप्रभ रह गये, फिर धीरे से पति नें पत्नी से कहा-"घर से एक कंबल लाकर बूढ़े को दे देते हैं"

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श्वेत क्रांति चारा और हरित क्रांति

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बिहार का कैमूर सिटी ग्रीन सिटी बन गया. अन्य हरियाली के अलावा वहाँ भवनों को भी हरे रंग से पेंट किया गया. हरे पेड़ हों या न हों ,शहर सावन के अंधे को ही नहीं,सबको सदा हरा भरा नज़र आयेगा.

हमारे पशु पालन मंत्री के समझदार पुत्र को इससे एक मौलिक रचनात्मक ख़्याल आया. मंत्री पिता से बोला- "अपने प्रांत की गाय भैंसे इन दिनों दूध कम दें रही हैं. कारण सूखा चारा. अगर घास हरी हो तो दूध का उत्पादन बढ़ जायेगा. दूध की 'श्वेत'क्रांति में 'हरित' क्रांति हो सकती है".

"पर समस्या है इन दिनों हरी घास मिलना मुश्किल है. हम एक काम कर सकते हैं,हम गाय भैंसों की आँखों पर प्लास्टिक के हरे चश्मे चढ़ा देते हैं,उन्हें सूखी घास हरी नज़र आयेगी,वे हरी समझ कर खायेंगीं दूध ज़्यादा देंगी - देश में फिर से दूध की नदियाँ बहेंगी"

पिता ने अपने होनहार लाल की अद्भुत समझ पर हंस कर उसे माँ यशोधरा के समान गले से लगा लिया और सचिव को कहा कि गाय भैंसों के लिये रहे चश्मों का टेंडर काॅल करें और शाम को प्रेस कान्फरेंस का आयोजन करें ताकि लोग इस'खोज' के बारे में जान सकें.

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