सोमवार, 20 जनवरी 2014

जसबीर चावला की लघु कथा : होने वाले रिश्ते का दुखांत

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उन्हें अपने सुशील लड़के के विवाह के लिये सुघड़ लड़की की तलाश थी.एक रिश्ता आया जो उन्हें और सारे परिवार को पसंद आया.लड़की बेंगलोर में साफ्टवेयर ईंजिनियर थी.लड़का पुणे में जाॅब करता था.

दो सप्ताह बाद दोनों पक्षों ने मुंबई में मिलकर एक दूसरे की देखा-देखी करने का तय किया.

लड़का होशियार था.उसने "अ" नाम के प्रायवेट डिटेक्टिव की सेवाएँ ली.वह जानना चाहता था का लड़की ऐसी वैसी तो नहीं है."अ" जासूस को विशेष रूप से कहा कि वह पता करें कि लड़की का कोई ब्वाय फ़्रेंड तो नहीं.वह किसी नाइट कल्ब की मेंबर तो नहीं है.बंगलोर की किसी रेव पार्टी में शामिल तो नहीं.ड्रिंक्स-ड्रग्स लेती है क्या.

एक सप्ताह में डिटेक्टिव "अ" की रिपोर्ट आ गई.रिपोर्ट सकारात्मक थी.लड़की में कोई अवगुण नहीं था बल्कि उसमें और भी कई कलात्मक रुचिया थी.

लड़का परिवार ख़ुश था.अगले सप्ताह मंुबई की तैयारी में जुट गया.होने वाली बहू के लिये ज़ेवर साड़ी भी ख़रीद ली.

मुंबई रवाना होनें के एक दिन पूर्व उन्हें"ब" डिटेक्टिव की एक भारी भरकम रिपोर्ट मिली ,जिसे लड़की ने लड़के की जानकारी जुटाने को कहा था.

रिपोर्ट में कई गर्ल फ़्रेंड के साथ लड़के के फ़ोटो,ड्रग्स और ड्रिंक्स लेते फ़ोटो और पुणे में पुलिस की रेव पार्टी की रेड के समाचार पत्र की कटिंग एवं फ़ोटो थी जिसमें लड़का भी गिरफ़्तार हुआ था.

ज़ाहिर है मुंबई जाना निरस्त हो गया और 'बहू'के लिये लाये ज़ेवर साड़ी मिठाईयां परफ़्यूम धरे के धरे रह गये.


48,आदित्य नगर ए.बी.रोड़ इन्दौर
chawla.jasbir@gmail.com

1 blogger-facebook:

  1. आज वधु पक्ष भी सचेत है ,पहले लड़के के चरित्र को नजरंदाज कर दिया जाता था .बधाई

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