शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2014

हनुमान मुक्त का व्यंग्य - चरित्रहीन

चरित्रहीन

कितने ही लोग हैं जो ‘चरित्रहीन’ होकर भी ‘चरित्रवान’ का तमगा लगाकर, सर उठाकर जी रहे हैं। जब भी वे पुलिस फाइल्स या क्राइम पेट्रोल सीरियल देखते होंगे, उनकी आत्मा अंदर तक झकझोर जाती होगी। जीवित रहते हुए उन्हें इस लोक में और मरने के बाद परलोक में उन्हें चैन नहीं मिलता होगा।

मेरे एक मित्र हैं, वे किस श्रेणी के हैं, ये तो मुझे नहीं पता, लेकिन उनके ऊपर चरित्रवान का तमगा लगा हुआ है। जब भी कभी स्त्री-पुरुषों के सम्बन्धों की बात आती है, वे बहुत नैतिक बन जाते हैं। ज्यादातर मामलों में पुरुषों की गलती उन्हें नजर नहीं आती। वे कहते हैं, ‘आग दोनों ओर से लगती है। बिना महिला की सहमति के पुरुष आगे बढ़ ही नहीं सकता।’ जितने भी महिलाओं की ओर से पुरुषों द्वारा बहला-फुसलाकर महीनों से, सालों से दुष्कर्म करने के आरोप लगाए जा रहे हैं, बिल्कुल गलत है। ये सब आपसी सहमति से ही हो रहा होता है। लेकिन महिला द्वारा पुरुष को ब्लैकमेल करने की गरज से ये मामले प्रकाश में आते हैं।

मैंने उनसे पूछा, ‘आप यह सब इतने विश्वास के साथ कैसे कह रहे हो? आपके पास इसका कोई पुख्ता सबूत है?’

वे मेरी बात पर मुस्करा गए, जिसका मतलब था, वे इस बारे में कोई सबूत तो नहीं देना चाहते। लेकिन वे जो कुछ कह रहे हैं, बिल्कुल सौ फीसदी सत्य है। वे स्वयं इसके भुगत भोगी हैं। मैं उनकी बात समझ जाता हूँ। उन्हें मुस्काराते देखकर, मेरे मन में भी चरित्रहीन होने की इच्छा पैदा होती है। मैं भी किसी स्त्री के साथ अपना नाम जुड़वाने की इच्छा रखता हूँ। अपने आसपास जितनी भी महिलाएं व युवतियां हैं, उनके बारे में अंदर तक झांककर देखता हूँ। कहीं कोई क्लू मिल जाए, जिसका सहारा लेकर अपुन भी बेतरणी पार कर लें।

कई बार मौका भी मिला, लेकिन चरित्रहीन होने के तरीके नहीं जानने के कारण महिलाओं के पति और युवतियों के पिता के पास जाकर कहना पड़ा कि, ‘फलां आदमी ठीक नहीं है, उससे मेलजोल बढ़ाना ठीक नहीं। वह चरित्रहीन है।’

इसका परिणाम यह हुआ कि मोहल्ले की महिलाएं और युवतियां, जो कभी-कभार मेरी ओर देख लिया करती थी, उन्होंने मेरी ओर नजर उठाना तक बंद कर दिया। मैं स्वयं चरित्रहीन होने का चांस लेना चाहता था लेकिन अपने पैरों स्वयं ने कुल्हाड़ी मार ली। थोड़ा सा भी चरित्रहीन नहीं हो पाया।

जिन व्यक्तियों को मैंने महिलाओं और युवतियों के घर वालों के सामने चरित्रहीन बताया था उन्हें भी मेरी इस हरकत का पता चल गया। वे मुझे चरित्रवान होते हुए भी चरित्रहीन घोषित करने की फिराक में थे।

एक दिन वे चौराहे पर खड़े होकर मेरे बारे में कह रहे थे कि मेरे उस स्त्री से अनैतिक संबंध हैं। मैं, उससे छिप-छिपकर मिलता है। बात एक मुंह से दूसरे, दूसरे से तीसरे होते हुए पूरे मोहल्ले में फैल गई।

मेरे चरित्रवान मित्र ने मुझसे कहा, ‘तुम्हारे फलां स्त्री से अनैतिक सम्बन्ध हैं। सारे मोहल्ले में बात फैल गई है। सुनकर मेरा चेहरा खिल गया। किसी पराई स्त्री से तो नाम जुड़ा।’ मैंने कहा- मजा आ गया, लेकिन खराब बात यह है कि उस स्थिति से अपना कोई सम्बन्ध नहीं है। उससे थोड़ा बहुत सम्बन्ध बनाने की बात तो करो।

चरित्रवान मित्र निराश हो गया। बोला, दिमाग खराब है? वह स्त्री तुमसे सम्बन्ध होने की बात स्वीकार कर रही है। उसकी बात सुनकर मुझे धक्का लगा, ‘लेकिन उसने मुझसे सम्बन्ध बनाए तो है ही नहीं। मैं उसके लिए कब से आतुर हूँ।’ चरित्रवान मित्र मेरी बातों को मेरा दिमाग खराब होना कहकर वहां से खिसक लिया। मैं अब थोड़ा-थोड़ा चरित्रहीन हो गया था। पूरा चरित्रहीन बनने के लिए उस महिला के पास जाना आवश्यक था। उसका पता जानने के लिए मैं उस व्यक्ति के पास चल दिया, जिसने मुझे चरित्रहीन घोषित किया था।

HANUMAN MUKT
Address : 93, Kanti Nagar

                Behind head post office

                Gangapur City(Raj.)

                Pin-322201
                District : Sawai Madhopur (RAJASTHAN)

1 blogger-facebook:

  1. अखिलेश चन्द्र श्रीवास्तव6:32 am

    क्या बात है हनुमान मुक्त जी साहब चरित्रहीन और
    चरित्रवान होने का जो खाका आपने पेश किया भाई
    मज़ा आ गया जो चरित्रहीन होते हुये चरित्रवान दिखना
    चाहते हैं इसीलिये अच्छे भले चरित्रवान को चरित्रहीन
    सिद्ध करना चाहतें हैं आज ऐसे लोग बहुतायत से हैं

    उत्तर देंहटाएं

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