गुरुवार, 6 फ़रवरी 2014

मिलन राम साहु का संस्मरण - मुस्कुराने की वजह कभी-कभी होती है, रोने के सबब हैं तमाम

image

''मुस्‍कुराने की वजह कभी-कभी होती है, रोने के सबब है तमाम

'' संस्‍मरण ''

यह दशक पूर्व उन दिनों की बात है जब मैं अकादमिक संकुल क्षेत्र ''जन साक्षरता अभियान '' का प्रमुख हुआ करता था। प्रौढ़ साक्षरता रुपी सूर्य जो अस्‍त हो चला था तब पुनः जन साक्षरता की नव-विहान लेकर उदित हुआ जब देश में निरक्षरता उन्‍मूलन के लिए राष्‍ट्रीय साक्षरता मिशन नामक विशाल जन अभियान का उद्‌धाटन तत्‍कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी जी ने 5 मई 1988 को किया तो किसे भान था कि खैरबना कलॉ निवासी मूक-बधिर मिलन भी साक्षरता अभियान की इस ज्ञान गंगा में अपनी पुण्‍य आहूति अर्पित कर पाएंगे।

नवीन कबीरधाम जिले के विकास खण्‍ड बोड़ला मुख्‍यालय से 34 किलोमीटर दूर मैकल पर्वत श्रेणी की तराई में, विपुल जल राशि से आप्‍लावित सरोदा जलाशय ''आधुनिक काल का तीर्थ स्‍थल'' (चाचा नेहरु के शब्‍दों में) की गोद में बसा खैरबना कला जिसकी तत्‍कालीन आबादी लगभग 3500 थी का 20 प्रतिशत जनसंख्‍या संपूर्ण साक्षरता अभियान के पूर्व सर्वेक्षण में असाक्षर के दायरे में आये जो कि अभियान की प्रगति के साथ ही 436 नवसाक्षरों ने पढ़ना-लिखना सीख लिया।

खैरबना में संपूर्ण साक्षरता अभियान की सफलता को रेखांकित करता व्‍यक्‍तित्‍व निरक्षर एवं मूक-बधिरता से अभिशप्‍त अविवाहित 32 वर्षीय मिलन तीन भाईयों में सबसे बड़े पिताश्री अंजोरी साहू एवं माता श्रीमती जेठिया बाई के साथ रहकर स्‍वयं व माता-पिता का भरण-पोषण का महती उत्‍तरदायित्‍व कृषि-मजदूरी एवं बढ़ईगिरी द्वारा खटिया, नागर व अन्‍य पारंपरिक काष्‍ठ कृषियंत्रों का निमार्ण ही जीवकोपार्जन का एक जरिया मात्र था।

मिलन साहू का मिलन ज्ञानदूत श्री धन्‍नू साहू के साथ ज्ञानगुड़ी में हुआ। वे रोज-बरोज स्‍वप्रेरित ज्ञान-गुढ़ी्र (साक्षरता केन्‍द) में आते। उनकी उत्‍सुकता, लगन एवं सीखने की माद्‌दा देखते ही बनती, यही बात अनुदेशक के लिए मिलन को साक्षर बनाने की प्रतिबद्धता का पर्याप्‍त कारण बन गया।

मैंने यह लिखने के पूर्व कई बार उनसे जीवंत सम्‍पर्क, साक्षात्‍कार हेतु मिलन की आस में मिलन का निवास पहूँचा। घीरे-धीरे आत्‍मीयता बढ़ी उनका प्रसन्‍नचित्‍त होकर न समझ आने वाली असंज्ञानात्‍क आवाज के ईशारों से स्‍वागत की तत्‍परता एवं खाट बिछाना, साक्षरता अनुदेशिका पुस्‍तिकाओें को इशारे मॉगने पर दौड़कर कमरे में जाना व दरबे से लाना, अपने लिखे इबारतों को खुशी-खुशी दिखाना। अनुदेशक के सहयोग से चर्चा के दौरान पढ़ते रहने तथा फिर आने की बात कहने पर अपने अनुदेशक से शिकायती लहजे में '' नहीं पढूँगा तो साहब कान पकड़ेंगे।'' की अभिव्‍यक्‍ति पढ़ने-लिखने की सहज समपर्ण प्रदर्शित करता था।

वैसे तो गाँव में कुल 32 ज्ञान-गुढ़ी (विकासखण्‍ड में ग्राम स्‍तर में सर्वाधिक) संचालित होती थी जिसमें से कक्षा नवमी तक शिक्षा प्राप्‍त ज्ञानदूत श्री धन्‍नू साहू दो अलग- अलग साक्षरता कक्षाओं एक अनुसूचित जाति व दूसरा साहू बाहुल्‍य की साक्षरता कक्षाओं को ज्ञानदान देता था। श्री धन्‍नू साहू कहते थे '' मैंने कुषक मिलन के उसर हृदय में साक्षरता का हल चलाकर अक्षर बीज बोये है जो अंकुरित पुष्‍पित एवें पल्‍लवित हो रहे है।'' मिलन अब अपने परिचय का मोहताज नहीं था वह स्‍वयं अपना नाम, पिता का नाम, ग्राम, विकास खण्‍ड, जिला व अनुदेशक का नाम के साथ-साथ घरेलू वस्‍तुएँ एवं पालतू पशु-पक्षियों के नाम इशारे के बल पर लिख लेता था। पुस्‍तक देखकर पूरी इबारते उकेर लेने की क्षमता उनमें सहज ही आ गई थी, अंकों की पहचान, महत्‍ता एवं उपयोगिता से भी कमोबेश परिचित हो गया था।''

आज अपरिचितों से मिलने की तत्‍परता, सहज-सरल आँखों में चमक लिए अभिवादन उनके लिए साक्षरता का अभिप्राय बन चुका है। मई 98 में दिल्‍ली से आए समीक्षा दल ने अपने समक्ष बिठाकर अनुदेशक के सहयोग से प्रोत्‍साहित कर जाँच पत्रक पूर्ण कराया तथा उनके सीखने की माद्‌दा को खैरबना कला संकुल में जन-साक्षरता अभियान का निष्कर्ष निरुपित किया।

कुछ दिनों बाद वह दिन भी आया जब सीमांन्‍त खेतिहर मजदूर ज्ञानदूत धन्‍नू साहू जो यह कहते थकता नहीं था -'' खैरबना का खैर नहीं, जब तक निरक्षरता से बैर नहीं।'' धनार्जन हेतु एक दिन अचानक गाँव छोड़कर महानगर की ओर पलायन कर गया । दुभाषिए की भूमिका में संपूर्ण समर्थन देता धन्‍नू को खोजती मिलन की आँखें थक गई थी। फिर एक नए पढ़ने-पढ़ाने के साक्षरता अभियान की आस में मिलन एवं मिलन जैसे अनेक नवसाक्षर .........!!!

'' आओ मिलकर करें, देश का नाम ।

पी ले, पीला दें, साक्षरता का जाम॥

महावीर, नानक, ईशा या राम के नाम।

शिक्षित रहे भारत, ऐसा करे काम ॥

 

सतीश कुमार यदु (व्‍याख्‍याता)

कवर्धा, कबीरधाम

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------