सोमवार, 31 मार्च 2014

श्याम यादव का व्यंग्य - व्हाट एन आईडिया सर जी

ईडिया , आईडिया है वह किसी को भी आ सकता है ये आईडिया पर निर्भर करता है कि वे किस को किस तरह से और किस रूप में आता है, वैसे तो आईडिया के आने के लिए समय काल परिस्थियों का कोई बंधन नहीं होता। आईडिया जब चाहे, जहाँ चाहे , जिसे चाहे और जिस तरह भी चाहे आ सकता है. वैसे आईडिया के बारे में ये आम अवधारणा है कि ये सुबह के वक्त उस समय ज्यादा आता है जब लोग टायलेट में होते हैं, शौच के समय सोच में आये इस आईडिया की बात ही अलग होती है।

आईडिया जात पांत , धर्म, लिंग भेद को नहीं मानता ना ही अमीर गरीब, छोटे बड़े में भेद करता है, देश के लोकतंत्र की तरह ही उसके लिए सब बराबर होते हैं। कुछ लोग इसी उधेड़बुन में रहते हैं कि कैसे आईडिया लगाया जाय और कुछ के आईडिया हकीकत में आने से पहले ही दम तोड़ देते हैं।

वैसे आईडिया के अनेक प्रकार होते हैं कुछ आर्थिक होते हैं तो कुछ सामाजिक और कुछ राजनैतिक। आईडिया गरीबी के भी होते हैं और अमीरी के भी। आईडिया की आडियोलाजी भी होती है। वो धर्मनिरपेक्ष भी होती है साम्प्रदायिक भी। आईडिया की व्याख्या, करने वाले अपने हिसाब से करते हैं। तमाम तरह के आईडिया तब तक आईडिया ही रह जाते हैं जब तक कि इन्हें धरती पर ना उतारा जाय। बहुमत के बिना भी सरकार चलाने का आईडिया चल भी जाता है और केजरीवाल सरकार की तरह नहीं भी चलता।

व्याख्या करने वाले आईडिया को कला भी मानते हैं और विज्ञान भी। आईडिया कला है या विज्ञान इसे अपने अपने आईडिया से सिद्ध किया जा सकता है। अपना आईडिया आने के साथ आते ही कुछ लोग इसे फलीभूत करने में जुट जाते हैं। कुछ लोग इसे चुरा लेते हैं। जिनका अपना आईडिया चोरी जाता है वो अपने आईडिया के चोरी होने की रिपोर्ट भी नहीं कर सकता। अपने अन्डो को कोयल के घोंसले में रख कर उन्हें पलवाने का कौवे का आईडिया आज भी कारगर है तो एक पार्टी में दाल न गले तो दूसरी में जाने का राजनीतिक आईडिया भी है। वोट लेने के भी अपने अपने आईडिया है। गर्मी में भी कान पर मफलर लपेट कर तो कोई मंच पर पानी पी पी कर तो कोई जनता के बीच जा कर हाल चाल पूछने और छोटे बच्चों को गोद में दुलार कर अपना आईडिया लगाता है। आईडिया तो लडकी पटाने के भी है

इस आईडियों पर किसी का कापीराईट नहीं है मगर ये सदाबहार आईडिया है जो सदियों से प्रचालन में है और आगे भी रहेंगे। लेकिन अब आईडिया भी बदलती दुनिया के साथ बदल रहे है। टीवी पर अनेक आईडिया आते हैं जब ये आईडिया क्लिक हो जाय तो व्हाट एन आईडिया सर जी और नहीं भी क्लिक हो तो नो उल्लू बनाविंग का आईडिया तो चल ही जाता है।

©श्याम यादव इंदौर 452016

2 blogger-facebook:

  1. बहुत खूब श्याम जी दिमागी आइडिया ही तो कमाल होता है। हास्य फिल्मे, सीरियल इन्ही आइडियास पर ही चलते हैं

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  2. akhilesh chandra srivastava12:51 pm

    श्यामजी क्या आईडिया लगाया भाई
    पूरा व्यंग भी तो आपका मौलिक
    आईडिया ही था अच्छा व्यगलिखा है
    हमारी बधाई

    उत्तर देंहटाएं

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