सुशान्त सुप्रिय का व्यंग्य - दुमदार जी की दुम

SHARE:

दुमदार जी की दुम ----------------------- --- सुशांत सुप्रिय आज मैं आपको एक विश्व-प्रसिद्ध दुम की कहानी सुनाने जा रहा हूँ। यह कहानी किसी ऐर...

दुमदार जी की दुम

-----------------------

--- सुशांत सुप्रिय

आज मैं आपको एक विश्व-प्रसिद्ध दुम की कहानी सुनाने जा रहा हूँ। यह कहानी किसी ऐरे-ग़ैरे व्यक्ति की नहीं है। यह कहानी दुमदार जी की है।

दुमदार जी का असली नाम कोई नहीं जानता। बचपन से ही दुमदार जी विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। चमचागिरी, चापलूसी , चाटुकारिता और मक्खन लगाने में उनका कोई सानी नहीं थी। हैरानी की बात यह है कि उनके पिता बेहद ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ स्कूल-मास्टर थे जो दुम हिलाने को पाप समझते थे। ऐसे परिवार में पैदा हो कर भी दुमदार जी ने हिम्मत नहीं हारी। दुम हिलाने की कला उन्हें विरासत में नहीं मिली थी यह कला उनकी 'जीन्स' में नहीं थी। उनकी आनुवंशिकी इससे वंचित थी। लेकिन उन्होंने इस अड़चन को अपनी सफलता की राह में रुकावट नहीं बनने दिया। अपने परिवेश और समाज से निरंतर शिक्षा ग्रहण करते हुए अंत में वे इतने बड़े दुमबाज़ बन गए कि लोगों ने उनका नाम ही दुमदार जी रख दिया। इस लिहाज़ से दुमबाज़ी में वे एक 'सेल्फ़-मेड' व्यक्ति थे।

दुमदार जी प्रागैतिहासिक काल में पूर्वजों के पास पाई जाने वाली विलुप्त पूँछ हिलाने में माहिर थे।दुम हिलाने को फूहड़ सड़क-छाप-पने के टुच्चे स्तर से उठा कर उसे ललित-कला के स्तर तक पहुँचाने में श्री दुमदार जी का अद्भुत योगदान भुलाया नहीं जा सकता। अखिल भारतीय दुमदार महासभा के पहले अधिवेशन में उनका ऐतिहासिक भाषण मील का पत्थर साबित हुआ।' दुनिया के दुमबाज़ो, एक हो जाओ'

और ' दुम नहीं तो दम नहीं ' जैसी उनकी उक्तियाँ लोकप्रिय उद्धरण बन गए।'सफलतापूर्वक दुम कैसे हिलाएँ' शीर्षक वाली उनकी पुस्तक इतनी लोकप्रिय हुई कि उसे ' नेशनल बेस्टसेलर ' माना गया। इस पुस्तक के कई संस्करण निकले और दर्जनों भाषाओं में अनूदित हो कर इसकी करोड़ों प्रतियाँ बिकीं।

लेकिन यह तो बाद की बात है। इसकी शुरुआत कैसे हुई वह भी किसी चमत्कार से कम नहीं था। एक रात दुमदार जी सोने गए। सुबह उठने पर उन्होंने पाया कि उनकी दुम निकल आई है। यह ख़बर दुमबाज़ों के बीच हिलती पूँछ-सी फैली। इसे क़ुदरत का करिश्मा और भगवान् का वरदान माना गया इस महान् दुम के दर्शन के लिए अपार जन-सैलाब उमड़ पड़ा। लोगों को आपस में यह कहते हुए सुना गया --

" ज़रूर दुमदार जी ने पूर्व-जन्म में दुमबाज़ी के अच्छे कर्म किए होंगे। इसीलिए भगवान् दुमश्री महाराज ने उन्हें यह फल दिया है। " इस तरह देखते-ही-देखते दुमदार जी जग-प्रसिद्ध हो गए। शोहरत के साथ सम्मान और धन भी आया। दुमदार जी के दिन फिर गए।

इतिहास में कहीं ऐसा कोई उल्लेख नहीं मिलता जब किसी आदमी की दुम निकल आई हो। लिहाज़ा अरबों में एक होने की वजह से दुमदार जी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति-प्राप्त हो गए। उनकी महान् दुम को ' राष्ट्रीय धरोहर' की संज्ञा दी गई। उन्हें अनेक सम्मानों से अलंकृत किया गया। लाल क़िले की प्राचीर से प्रधानमंत्री जी ने राष्ट्र के नाम अपने सम्बोधन में दुमदार जी को ' दुम-विभूषण ' की उपाधि देने की घोषणा की। विपक्ष के नेता भला क्यों पीछे रहते। उन्होंने भी अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन में दुमदार जी को ' दुम केसरी ' की उपाधि से नवाज़ा। राष्ट्रपति जी ने भी राष्ट्रपति-भवन के प्रांगण में आयोजित एक भव्य समारोह में महामहिम दुमदार जी को देश के सर्वोच्च सम्मान ' दुम-रत्न ' से अलंकृत किया। ' दुम-रत्न

दुमदार जी, अमर रहें, अमर रहें ' के नारों से आकाश गूँज उठा।

दुमदार जी की हिलती दुम की ख्याति दिन-दोगुनी, रात-चौगुनी बढ़ने लगी। सरकारी खर्चे पर करोड़ों रुपयों में उनकी दुम का बीमा कराया गया। उनकी दुम की सुरक्षा के लिए ' नेशनल सेक्येरिटी गार्ड ' के जाँबाज़ कमांडो नियुक्त किए गए। यूनिसेफ़ ने उन्हें अपना ' गुडविल अम्बैसेडर ' बना लिया। दुमदार जी की दुम को दुनिया का आठवाँ आश्चर्य माना गया।विदेशी शासनाध्यक्षों के भारत आगमन पर दुमदार जी से मिलना उनके कार्यक्रम का अभिन्न भाग बन गया।

हालाँकि कुछ लोग ज़रूर दबी ज़ुबान से दुमदार जी की दुम को ' ईश्वर का

दंड ' या ' दैवी प्रकोप ' बताते थे। पर ऐसे लोग केवल मुट्ठी भर थे। इन्हें विदेशी एजेंट या राष्ट्र-द्रोही कहा जाता था।

एक बार दुमदार जी की महान् दुम को चोट लग गई। पूरा राष्ट्र हतप्रभ रह गया। लोग स्तब्ध और शोकाकुल थे। इसे दुमदार जी के विरोधियों का षड्यंत्र माना गया। मंदिरों, मस्जिदों , गुरुद्वारों और गिरिजा-घरों में दुमदार जी की दुम की सलामती के लिए विशेष प्रार्थना-सभाएँ आयोजित की गईं तथा नमाज़ पढ़ी गई। जगह-जगह हवन और यज्ञ किए गए। करोड़ों लोग दुमदार जी की दुम की सलामती का समाचार पाने के लिए रेडियो और टी. वी. से चौबीसों घंटे चिपके रहे। फ़ेसबुक और ट्विटर पर लोगों ने इस के बारे में अपनी चिंता व्यक्त की। दुमदार जी की दुम की सलामती का समाचार आते ही जनता में हर्ष की लहर दौड़ गई। जगह-जगह मिठाइयाँ बाँटी गईं और पटाखे चलाए गए। उस रात हुई ज़बर्दस्त आतिशबाज़ी के आगे दीवाली की रात हुई आतिशबाज़ी भी फीकी लगने लगी।

' लिम्का-बुक ' वालों ने तो पहले ही दुमदार जी की महान् दुम का उल्लेख अपनी रेकार्ड-बुक में कर लिया था। अब ' गिनेस-बुक ' वालों ने भी दुमदार जी का नाम अपनी रेकार्ड-बुक में दर्ज कर लिया।

देखते-ही-देखते दुमदार जी पूरे राष्ट्र के लिए आदर्श, अनुकरणीय , श्रद्धेय और प्रतिमान बन गए। पूरा राष्ट्र प्रागैतिहासिक काल में पूर्वजों के पास पाई जाने वाली विलुप्त पूँछें हिलाने लगा। जो दुम-हीन थे, वे मिसफ़िट थे। समाज में दुम हिलाना सफलता की कुंजी थी। बल्कि दुम हिलाना हमारा राष्ट्रीय खेल बन गया था। यदि दुम हिलाने की प्रतियोगिता को ओलम्पिक खेलों में शामिल कर लिया जाता तो हम अवश्य ही इस प्रतियोगिता में स्वर्ण-पदक जीत जाते। उद्योग , व्यापार , शिक्षा-जगत और खेल-कूद --- हर जगह दुमबाज़ी का बोलबाला था। जो व्यक्ति अपनी विलुप्त पूँछ हिलाना नहीं जानता था, वह सफलता की दौड़ में सबसे पिछड़ जाता था। यह दुम हिलाने वाले चमचों, चाटुकारों, चापलूसों और मक्खनबाज़ों का ज़माना था। कोई बाॅस की कृपा-दृष्टि पाने के लिए दुम हिला रहा था, कोई पदोन्नति पाने के लिए दुम हिला रहा था। कोई सहयोगियों की जड़ काटने के लिए दुम हिला रहा था, कोई सत्ता के शीर्ष पर बैठने के लिए दुम हिला रहा था। किसी भी तरह सफल होने और दूसरों से आगे बढ़ने के लिए लोग थूक कर चाट रहे थे, बाप को गधा और गधे को बाप बता रहे थे। हिलती हुई दुमें आॅफिस और व्यापार चला रही थीं। हिलती हुई दुमें देश की सरकार चला रही थीं। लोग इतना ज़्यादा दुम हिला रहे थे कि भरी जवानी में शरीर से झुकते जा रहे थे।

एक ज़माने में दुमदार जी मेरे सहयोगी थे। वे मेरे ही आॅफ़िस में काम करते थे। तब वे एक महान् दुमबाज़ के रूप में जन-साधारण के मन में स्थापित नहीं हुए थे। अक्सर वे मेरे आगे-पीछे भी दुम हिलाते रहते थे क्योंकि उनके कई काम मेरे पास फँसे पड़े थे। बाॅस के साथ मेरे सम्बन्ध अच्छे थे। इस कारण से भी दुमदार जी मेरी चापलूसी में जुटे रहते थे। समय बदला। बॉस का स्थानांतरण हो गया। नया बॉस आ गया। दुमदार जी के मुझसे सारे काम निकल गये। फिर तो मैं कौन और तू कौन ! दुमदार जी ने मेरी ओर झाँकना भी बंद कर दिया। उनके इस व्यवहार से मुझे ठेस पहुँची। मैंने दो-एक लोगों से इसका ज़िक्र किया। इस पर वे हँस कर बोले -- " आप भी बिल्कुल दुमहीन व्यक्ति हैं ! अरे, दुमदार जी ने जो आपके साथ किया , इसी को तो दुमबाज़ी कहते हैं ! "

तो मैं बता रहा था कि यह दुमबाज़ी का ज़माना था। पूरा देश दुमदार जी की हिलती हुई महान् दुम पर फ़िदा था। चमचे और चापलूस इतराए नहीं समा रहे थे , फूल कर कुप्पा हुए जा रहे थे। ऐसे माहौल में सरकार ने दुमदार जी की महान् दुम के सम्मान में पाँच, दस और पंद्रह रुपयों के सुगंधित डाक-टिकट जारी किए जिनमें दुमदार जी की दुम को कई मुद्राओं में दिखाया गया। साथ ही दुमदार जी की महान् दुम के सम्मान में विशेष सिक्के भी जारी किए गए जिन पर उनकी दुम की मनोहर छवि अंकित थी। रिज़र्व बैंक के नोटों पर भी इस सम्मानित दुम के चित्र छपने लगे। दुमदार जी के चमचों ने उनके सम्मान में विश्व का सबसे विशाल मंदिर बनवाया जिसमें लाखों लोगों की मौजूदगी में दुमदार जी की एक दुम-क़द प्रतिमा स्थापित की गई। वहाँ रोज़ सुबह-शाम पूजा-अर्चना और आरती होने लगी। देखते-ही-देखते उस मंदिर में करोड़ों रुपयों का चढ़ावा चढ़ने लगा। और कुछ ही समय में ' दुमदार - स्वामी मंदिर ' में चढ़ने वाले चढ़ावे ने तिरुपति के मंदिर को भी पीछे छोड़ दिया।

दुमदार जी के शिष्यों ने उनकी महान् दुम के सम्मान में ' दुम चालीसा ' और ' दुम पचासा ' लिख डाली। देश के तमाम कवि, कहानीकार, गीतकार, संगीतकार और चित्रकार दुमदार जी की महान् दुम के महिमामंडन की नदी में स्नान करने लगे :

" दुम ही हो माता, दुम ही पिता हो, / दुम ही हो बंधु, दुम ही सखा हो। " इस तरह पूरे राष्ट्र का माहौल दुम-मय हो गया। हर व्यक्ति दुम-छल्ला बन कर घूमने लगा।

दुमदार जी की महान् दुम स्कूल-कालेजों के पाठ्य-क्रम का विषय बन

गई। यहाँ दिमाग़ से नहीं, ' दुमाग़ ' से शिक्षा दी जाने लगी। परीक्षाओं में दुमदार जी और उनकी महान् दुम के बारे में प्रश्न पूछे जाने लगे :

-- बताओ, दुमदार जी ने पहली बार दुम हिलाना कब सीखा?

-- दुम हिलाने के क्या लाभ हैं? उदाहरण सहित बताओ।

-- ' दुम चालीसा ' और ' दुम पचासा ' के लेखकों के नाम बताओ तथा इन पुस्तकों से कुछ पंक्तियाँ उद्धृत करो।

-- दुमदार जी एक ' सेल्फ़-मेड ' व्यक्ति हैं। इस पर टिप्पणी लिखो।

-- दुमदार जी ने दुम हिलाने की कला को फूहड़ सड़क-छाप-पने के टुच्चे स्तर से उठा कर उसे ललित-कला के स्तर पर पहुँचाया। इस विषय पर एक लेख लिखो। वग़ैरह।

दुमदार जी की महान् दुम के सम्मान में विश्वविद्यालयों में दुम-पीठों की स्थापना हो गई जहाँ छात्रों को इस विषय पर एम. फ़िल् . और पी. एच. डी. की डिग्रियाँ प्रदान की जाने लगीं। कई विद्वानों ने इस विषय पर डी. लिट् . की डिग्री भी अर्जित की। बी. ए . और एम. ए. के स्तर पर दुमदार जी की महान् दुम को एक विषय के रूप में पढ़ने पर छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्तियाँ दी जाने लगीं।

सरकार ने दुम हिलाने के अधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए

' राष्ट्रीय दुम आयोग ' का गठन किया। इसे क़ानूनी दर्ज़ा देने के लिए सरकार ने

' अखिल भारतीय दुम-हिलाओ अधिकार संरक्षण विधेयक ' को संसद में प्रस्तुत किया

जहाँ इसे दुम-मत से पारित भी कर दिया गया। सरकार ने संसद के संयुक्त अधिवेशन में देश में ' दुम-तंत्र ' को सुदृढ़ करने का अपना संकल्प दोहराया। सभी दल इस बात पर एकमत थे।

कई वरिष्ठ फ़िल्म-निर्देशकों ने कई भाषाओं में दुमबाज़ी पर कई अच्छी फ़िल्में बनाईं जिन्हें बाद में ' दुम साहब मालके ' सम्मान भी मिला। इन फ़िल्मों में दिखाई जाने वाली ' दुमगिरी ' जनता में बेहद लोकप्रिय हुई। दुमबाज़ी के नये-नये हथकंडों को जन-जन तक पहुँचाने में इन फ़िल्मों का योगदान अभूतपूर्व है। इन में से कई फ़िल्मों में दुमदार जी ने बतौर नायक काम भी किया।

बाज़ार में दुमदार जी के दुम-मय व्यक्तित्व और उनकी महान् दुम का महिमामंडन करने वाली पुस्तकों, सी. डी . और कैसेटों की बाढ़ आ गई। दुमों के सम्मान में आरती और भजन गाए जाने लगे :

" हम को दुम की शक्ति देना , दुम विजय करें ,

दूसरों की दुम से पहले , अपनी दुम की जय करें...।"

एक समानांतर अर्थव्यवस्था अस्तित्व में आ गई जो पूरी तरह से दुमदारजी और उनकी महान् दुम पर टिकी थी।

दुमदार जी की हिलती हुई महान् दुम से प्रेरित हो कर देश के डॉक्टर और वैज्ञानिक गहन शोध और अनुसंधान में लग गए ताकि वे जान सकें कि मनुष्यों में दुमों को दोबारा कैसे उगाया जाए।

कई नए नारों का जन्म हो गया। जैसे -- ' गर्व से कहो कि हम दुमदार

हैं।' टी. वी. पर नए-नए तरह के विज्ञापन आने लगे। जैसे-- ' भला उसकी हिलती हुई दुम आपकी हिलती हुई दुम से तेज़ कैसे? अपनी दुम को तेज़ी से हिलाने के लिए आज ही लीजिए -- दुमदार चूरन। '

पूरे राष्ट्र का आलम यह हो गया कि लोगों को जिनसे अपना काम निकालना होता , वे उन के पजामों में नाड़ों की तरह प्रवेश कर जाते। लोग अपना काम निकालने के लिए ' डोर-मैट ' बन जाते , दूसरों के पैरों की चप्पल बन जाते, जूते बन जाते। काम निकलते ही ऐसे दुमदार लोग दूसरों को ठेंगा दिखा देते। हर सभ्यता और संस्कृति किसी-न-किसी समय अपने उत्कर्ष पर होती है। इस समय दुमबाज़ी की सभ्यता अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँच गई थी।

इस दुममय माहौल में दुमदार जी मुस्कुरा दें तो वसंत आ जाता था। दुमदार जी उदास होते थे तो पतझड़ आ जाता था। दुमदार जी खाँसते थे तो आँधी आ जाती थी। दुमदार जी छींकते थे तो भूचाल आ जाता था। दुमदार जी रोते थे तो नदियों में बाढ़ आ जाती थी। दुमदार जी हँसते थे तो मोर नाचने लगते थे। दुमदार जी नाराज़ होते थे तो बादल गरज उठते थे। दुमदार जी जिस ओर अपनी विश्व-प्रसिद्ध महान् दुम हिलाते हुए चल देते थे, वहीं रास्ता बन जाता था। वे जिस ओर से अपनी दुम वापस खींच लेते थे , वह जगह बंजर हो जाती थी।

इस दुम-मय माहौल में सरकार ने नोबेल पुरस्कार देने वाली समिति से सिफ़ारिश की कि हर व्यक्ति के लिए पूँछ हिलाने को लोकप्रिय , सरल और सुगम बनाने में श्री दुमदार जी के महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए उन्हें नोबेल पुरस्कार प्रदान किया जाए। इससे स्वयं नोबेल पुरस्कार का सम्मान बढ़ता।

दुमदार जी से प्रेरणा ले कर अब दुम हिलाना लघु और कुटीर उद्योग बनता जा रहा था। देश के घर-घर में अब दुम-क्रान्ति आ रही थी। इंसानों द्वारा अपनी अदृश्य दुम को हिलाने के नए-नए तरीक़े ईजाद किए जा रहे थे।अब यह बात साबित हो चुकी थी कि दुम हिलाने में देशवासी पूरी दुनिया में सबसे आगे थे। यह देश के लिए गौरव की बात थी।

एक बार दुमदार जी को शहर के सबसे प्रतिष्ठित स्कूल ने अपने वार्षिक समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया। वहाँ छात्र-छात्राएँ दुमदार जी की महान् दुम को हसरत भरी निगाहों से देखते रहे। इस मौक़े पर दुमदार जी ने एक ज़ोरदार भाषण दिया :

" प्यारे बच्चों, दुमबाज़ी की राह एक बेहद कठिन राह है। लेकिन यदि आप के भीतर चमचागिरी , चापलूसी और चाटुकारिता के बीज हैं तो आपको एक सफल मक्खनबाज़ बनने से कोई नहीं रोक सकता। आप मेरा उदाहरण लीजिए। मेरे पिता एक सीधे-सादे ईमानदार स्कूल-मास्टर थे। वे किसी के सामने पूँछ हिलाने को पाप समझते थे। मैं ऐसे बेकार ख़ानदान में पैदा हुआ। किंतु मैंने विकट परिस्थितियों में भी हिम्मत नहीं हारी। मेरे भीतर दुमबाज़ बनने की ललक थी। मैं पूरी निष्ठा से पूँछ हिलाने के सम्मानित काम में लगा रहा। अपने पिता के बेकार मूल्यों के विरुद्ध जा कर मैंने दुमबाज़ी का मार्ग चुना। हालाँकि इस बात पर मेरे पिता मुझसे नाराज़ भी हुए। पर मैंने दुमबाज़ी जैसे महान् कार्य के लिए पिता के साथ अपने सम्बन्धों की परवाह भी नहीं

की। मेरे पिता को ' आउटडेटेड आइडियलिज़्म ' के कीड़े ने काट रखा था। वे नहीं सुधर सकते थे। लिहाज़ा मैंने अपना मार्ग स्वयं बनाया। दिन-रात दुम हिला-हिला कर मैं आगे बढ़ा। आप भी मेरी तरह अवसरवादी बनिए। दुम हिलाइए और नाम कमाइये। "

बच्चे दुमदार जी की महान् दुम से अभिभूत थे। यहाँ तक सब ठीक चल रहा था कि अचानक अनर्थ हो गया। जैसे ही दुमदार जी अपना भाषण दे कर स्कूल के सभागार से बाहर निकले, यह दुर्घटना हो गई। पलक झपकते ही यह कांड हो गया।

कुछ लोग इसके लिए दुमदार जी के विरोधियों को ज़िम्मेदार ठहराते हैं। उनका कहना है कि दुमदार जी के विरोधियों ने ही दसवीं कक्षा के कुछ छात्रों को रुपए-पैसे दे कर उनसे यह काम करवाया। हालाँकि दुमदार जी के विरोधी इस बात का खंडन करते

हैं। वे कहते हैं कि उनका इस घटना से कुछ भी लेना-देना नहीं है। सच्चाई चाहे जो भी हो, जो अनर्थ होना था, हो गया।

हुआ यह कि जैसे ही दुमदार जी समारोह ख़त्म होने के बाद सभागार से बाहर निकले, दसवीं कक्षा के कुछ छात्रों ने उनकी दुम पकड़ कर उसे ज़ोर से खींच लिया। और वह महान् विश्व-प्रसिद्ध दुम दुमदार जी के शरीर से निकल कर उन लड़कों के हाथों में आ गई। सब सन्न रह गए। हे राम! यह क्या हो गया ? और तब जा कर यह राज खुला कि इतने वर्षों से दुमदार जी एक विशेष प्रकार की रबड़ की नक़ली दुम लगाए घूम रहे थे और पूरे विश्व को ठग रहे थे। फिर क्या था! पूरे देश में कोहराम मच गया। सदमे की अवस्था में कई लोगों ने आत्म-दाह कर लिया। कई जगह आगज़नी और तोड़-फोड़ हुई। पूरा देश हिल गया। यह तो होना ही था। जब भी कोई बड़ी दुम गिरती है, धरती हिलती है।

दुमदार जी के विरोधियों ने कहा-- " हमें तो पहले ही पता था कि दुमदार जी के शरीर पर दुम निकल आने का यह पूरा प्रकरण एक बहुत बड़ा 'फ़्रॉड' है।

इस पूरे शोर-शराबे में उस व्यक्ति की बात अनसुनी कर दी गई जिसने एक टी. वी. चैनल को दिए गए अपने इंटरव्यू में कहा था-- " दुम तो सभी चाटुकारों, चापलूसों और चमचों की होती है, पर वह अदृश्य रहती है। दिखाई नहीं देती। दुमदार जी के शरीर पर दुम का साक्षात निकलना तो उस अदृश्य दुम का प्रकटीकरण मात्र था। "

----------------०----------------

प्रेषकः सुशान्त सुप्रिय

मार्फ़त श्री एच. बी. सिन्हा

५१७४, श्यामलाल बिल्डिंग ,

बसंत रोड, ( निकट पहाड़गंज ) ,

नई दिल्ली-- ११००५५

 

ई-मेल: sushant1986@gmail.com

COMMENTS

BLOGGER

विज्ञापन

----
--- विज्ञा. --

---***---

-- विज्ञापन -- ---

|रचनाकार में खोजें_

रचनाकार.ऑर्ग के लाखों पन्नों में सैकड़ों साहित्यकारों की हजारों रचनाओं में से अपनी मनपसंद विधा की रचनाएं ढूंढकर पढ़ें. इसके लिए नीचे दिए गए सर्च बक्से में खोज शब्द भर कर सर्च बटन पर क्लिक करें:
मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें

|कथा-कहानी_$type=blogging$com=0$au=0$count=7$page=1$src=random-posts$s=200

-- विज्ञापन --

|हास्य-व्यंग्य_$type=complex$com=0$au=0$count=7$page=1$src=random-posts

|लोककथाएँ_$type=blogging$com=0$au=0$count=7$page=1$src=random-posts

-- विज्ञापन --

|लघुकथाएँ_$type=blogging$com=0$au=0$count=7$page=1$src=random-posts

|आलेख_$type=blogging$com=0$au=0$count=7$page=1$src=random-posts

-- विज्ञापन --

|काव्य जगत_$type=complex$com=0$au=0$count=7$page=1$src=random-posts

|संस्मरण_$type=blogging$com=0$au=0$count=7$page=1$src=random-posts

-- विज्ञापन --

|बच्चों के लिए रचनाएँ_$type=blogging$com=0$au=0$count=7$page=1$src=random-posts

|विविधा_$type=blogging$au=0$com=0$label=1$count=10$va=1$page=1$src=random-posts

 आलेख कविता कहानी व्यंग्य 14 सितम्बर 14 september 15 अगस्त 2 अक्टूबर अक्तूबर अंजनी श्रीवास्तव अंजली काजल अंजली देशपांडे अंबिकादत्त व्यास अखिलेश कुमार भारती अखिलेश सोनी अग्रसेन अजय अरूण अजय वर्मा अजित वडनेरकर अजीत प्रियदर्शी अजीत भारती अनंत वडघणे अनन्त आलोक अनमोल विचार अनामिका अनामी शरण बबल अनिमेष कुमार गुप्ता अनिल कुमार पारा अनिल जनविजय अनुज कुमार आचार्य अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ अनुज खरे अनुपम मिश्र अनूप शुक्ल अपर्णा शर्मा अभिमन्यु अभिषेक ओझा अभिषेक कुमार अम्बर अभिषेक मिश्र अमरपाल सिंह आयुष्कर अमरलाल हिंगोराणी अमित शर्मा अमित शुक्ल अमिय बिन्दु अमृता प्रीतम अरविन्द कुमार खेड़े अरूण देव अरूण माहेश्वरी अर्चना चतुर्वेदी अर्चना वर्मा अर्जुन सिंह नेगी अविनाश त्रिपाठी अशोक गौतम अशोक जैन पोरवाल अशोक शुक्ल अश्विनी कुमार आलोक आई बी अरोड़ा आकांक्षा यादव आचार्य बलवन्त आचार्य शिवपूजन सहाय आजादी आदित्य प्रचंडिया आनंद टहलरामाणी आनन्द किरण आर. के. नारायण आरकॉम आरती आरिफा एविस आलेख आलोक कुमार आलोक कुमार सातपुते आशीष कुमार त्रिवेदी आशीष श्रीवास्तव आशुतोष आशुतोष शुक्ल इंदु संचेतना इन्दिरा वासवाणी इन्द्रमणि उपाध्याय इन्द्रेश कुमार इलाहाबाद ई-बुक ईबुक ईश्वरचन्द्र उपन्यास उपासना उपासना बेहार उमाशंकर सिंह परमार उमेश चन्द्र सिरसवारी उमेशचन्द्र सिरसवारी उषा छाबड़ा उषा रानी ऋतुराज सिंह कौल ऋषभचरण जैन एम. एम. चन्द्रा एस. एम. चन्द्रा कथासरित्सागर कर्ण कला जगत कलावंती सिंह कल्पना कुलश्रेष्ठ कवि कविता कहानी कहानी संग्रह काजल कुमार कान्हा कामिनी कामायनी कार्टून काशीनाथ सिंह किताबी कोना किरन सिंह किशोरी लाल गोस्वामी कुंवर प्रेमिल कुबेर कुमार करन मस्ताना कुसुमलता सिंह कृश्न चन्दर कृष्ण कृष्ण कुमार यादव कृष्ण खटवाणी कृष्ण जन्माष्टमी के. पी. सक्सेना केदारनाथ सिंह कैलाश मंडलोई कैलाश वानखेड़े कैशलेस कैस जौनपुरी क़ैस जौनपुरी कौशल किशोर श्रीवास्तव खिमन मूलाणी गंगा प्रसाद श्रीवास्तव गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर ग़ज़लें गजानंद प्रसाद देवांगन गजेन्द्र नामदेव गणि राजेन्द्र विजय गणेश चतुर्थी गणेश सिंह गांधी जयंती गिरधारी राम गीत गीता दुबे गीता सिंह गुंजन शर्मा गुडविन मसीह गुनो सामताणी गुरदयाल सिंह गोरख प्रभाकर काकडे गोवर्धन यादव गोविन्द वल्लभ पंत गोविन्द सेन चंद्रकला त्रिपाठी चंद्रलेखा चतुष्पदी चन्द्रकिशोर जायसवाल चन्द्रकुमार जैन चाँद पत्रिका चिकित्सा शिविर चुटकुला ज़कीया ज़ुबैरी जगदीप सिंह दाँगी जयचन्द प्रजापति कक्कूजी जयश्री जाजू जयश्री राय जया जादवानी जवाहरलाल कौल जसबीर चावला जावेद अनीस जीवंत प्रसारण जीवनी जीशान हैदर जैदी जुगलबंदी जुनैद अंसारी जैक लंडन ज्ञान चतुर्वेदी ज्योति अग्रवाल टेकचंद ठाकुर प्रसाद सिंह तकनीक तक्षक तनूजा चौधरी तरुण भटनागर तरूण कु सोनी तन्वीर ताराशंकर बंद्योपाध्याय तीर्थ चांदवाणी तुलसीराम तेजेन्द्र शर्मा तेवर तेवरी त्रिलोचन दामोदर दत्त दीक्षित दिनेश बैस दिलबाग सिंह विर्क दिलीप भाटिया दिविक रमेश दीपक आचार्य दुर्गाष्टमी देवी नागरानी देवेन्द्र कुमार मिश्रा देवेन्द्र पाठक महरूम दोहे धर्मेन्द्र निर्मल धर्मेन्द्र राजमंगल नइमत गुलची नजीर नज़ीर अकबराबादी नन्दलाल भारती नरेंद्र शुक्ल नरेन्द्र कुमार आर्य नरेन्द्र कोहली नरेन्‍द्रकुमार मेहता नलिनी मिश्र नवदुर्गा नवरात्रि नागार्जुन नाटक नामवर सिंह निबंध निर्मल गुप्ता नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’ नीरज खरे नीलम महेंद्र नीला प्रसाद पंकज प्रखर पंकज मित्र पंकज शुक्ला पंकज सुबीर परसाई परसाईं परिहास पल्लव पल्लवी त्रिवेदी पवन तिवारी पाक कला पाठकीय पालगुम्मि पद्मराजू पुनर्वसु जोशी पूजा उपाध्याय पोपटी हीरानंदाणी पौराणिक प्रज्ञा प्रताप सहगल प्रतिभा प्रतिभा सक्सेना प्रदीप कुमार प्रदीप कुमार दाश दीपक प्रदीप कुमार साह प्रदोष मिश्र प्रभात दुबे प्रभु चौधरी प्रमिला भारती प्रमोद कुमार तिवारी प्रमोद भार्गव प्रमोद यादव प्रवीण कुमार झा प्रांजल धर प्राची प्रियंवद प्रियदर्शन प्रेम कहानी प्रेम दिवस प्रेम मंगल फिक्र तौंसवी फ्लेनरी ऑक्नर बंग महिला बंसी खूबचंदाणी बकर पुराण बजरंग बिहारी तिवारी बरसाने लाल चतुर्वेदी बलबीर दत्त बलराज सिंह सिद्धू बलूची बसंत त्रिपाठी बातचीत बाल कथा बाल कलम बाल दिवस बालकथा बालकृष्ण भट्ट बालगीत बृज मोहन बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष बेढब बनारसी बैचलर्स किचन बॉब डिलेन भरत त्रिवेदी भागवत रावत भारत कालरा भारत भूषण अग्रवाल भारत यायावर भावना राय भावना शुक्ल भीष्म साहनी भूतनाथ भूपेन्द्र कुमार दवे मंजरी शुक्ला मंजीत ठाकुर मंजूर एहतेशाम मंतव्य मथुरा प्रसाद नवीन मदन सोनी मधु त्रिवेदी मधु संधु मधुर नज्मी मधुरा प्रसाद नवीन मधुरिमा प्रसाद मधुरेश मनीष कुमार सिंह मनोज कुमार मनोज कुमार झा मनोज कुमार पांडेय मनोज कुमार श्रीवास्तव मनोज दास ममता सिंह मयंक चतुर्वेदी महापर्व छठ महाभारत महावीर प्रसाद द्विवेदी महाशिवरात्रि महेंद्र भटनागर महेन्द्र देवांगन माटी महेश कटारे महेश कुमार गोंड हीवेट महेश सिंह महेश हीवेट मानसून मार्कण्डेय मिलन चौरसिया मिलन मिलान कुन्देरा मिशेल फूको मिश्रीमल जैन तरंगित मीनू पामर मुकेश वर्मा मुक्तिबोध मुर्दहिया मृदुला गर्ग मेराज फैज़ाबादी मैक्सिम गोर्की मैथिली शरण गुप्त मोतीलाल जोतवाणी मोहन कल्पना मोहन वर्मा यशवंत कोठारी यशोधरा विरोदय यात्रा संस्मरण योग योग दिवस योगासन योगेन्द्र प्रताप मौर्य योगेश अग्रवाल रक्षा बंधन रच रचना समय रजनीश कांत रत्ना राय रमेश उपाध्याय रमेश राज रमेशराज रवि रतलामी रवींद्र नाथ ठाकुर रवीन्द्र अग्निहोत्री रवीन्द्र नाथ त्यागी रवीन्द्र संगीत रवीन्द्र सहाय वर्मा रसोई रांगेय राघव राकेश अचल राकेश दुबे राकेश बिहारी राकेश भ्रमर राकेश मिश्र राजकुमार कुम्भज राजन कुमार राजशेखर चौबे राजीव रंजन उपाध्याय राजेन्द्र कुमार राजेन्द्र विजय राजेश कुमार राजेश गोसाईं राजेश जोशी राधा कृष्ण राधाकृष्ण राधेश्याम द्विवेदी राम कृष्ण खुराना राम शिव मूर्ति यादव रामचंद्र शुक्ल रामचन्द्र शुक्ल रामचरन गुप्त रामवृक्ष सिंह रावण राहुल कुमार राहुल सिंह रिंकी मिश्रा रिचर्ड फाइनमेन रिलायंस इन्फोकाम रीटा शहाणी रेंसमवेयर रेणु कुमारी रेवती रमण शर्मा रोहित रुसिया लक्ष्मी यादव लक्ष्मीकांत मुकुल लक्ष्मीकांत वैष्णव लखमी खिलाणी लघु कथा लघुकथा लतीफ घोंघी ललित ग ललित गर्ग ललित निबंध ललित साहू जख्मी ललिता भाटिया लाल पुष्प लावण्या दीपक शाह लीलाधर मंडलोई लू सुन लूट लोक लोककथा लोकतंत्र का दर्द लोकमित्र लोकेन्द्र सिंह विकास कुमार विजय केसरी विजय शिंदे विज्ञान कथा विद्यानंद कुमार विनय भारत विनीत कुमार विनीता शुक्ला विनोद कुमार दवे विनोद तिवारी विनोद मल्ल विभा खरे विमल चन्द्राकर विमल सिंह विरल पटेल विविध विविधा विवेक प्रियदर्शी विवेक रंजन श्रीवास्तव विवेक सक्सेना विवेकानंद विवेकानन्द विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक विश्वनाथ प्रसाद तिवारी विष्णु नागर विष्णु प्रभाकर वीणा भाटिया वीरेन्द्र सरल वेणीशंकर पटेल ब्रज वेलेंटाइन वेलेंटाइन डे वैभव सिंह व्यंग्य व्यंग्य के बहाने व्यंग्य जुगलबंदी व्यथित हृदय शंकर पाटील शगुन अग्रवाल शबनम शर्मा शब्द संधान शम्भूनाथ शरद कोकास शशांक मिश्र भारती शशिकांत सिंह शहीद भगतसिंह शामिख़ फ़राज़ शारदा नरेन्द्र मेहता शालिनी तिवारी शालिनी मुखरैया शिक्षक दिवस शिवकुमार कश्यप शिवप्रसाद कमल शिवरात्रि शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी शीला नरेन्द्र त्रिवेदी शुभम श्री शुभ्रता मिश्रा शेखर मलिक शेषनाथ प्रसाद शैलेन्द्र सरस्वती शैलेश त्रिपाठी शौचालय श्याम गुप्त श्याम सखा श्याम श्याम सुशील श्रीनाथ सिंह श्रीमती तारा सिंह श्रीमद्भगवद्गीता श्रृंगी श्वेता अरोड़ा संजय दुबे संजय सक्सेना संजीव संजीव ठाकुर संद मदर टेरेसा संदीप तोमर संपादकीय संस्मरण संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018 सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन सतीश कुमार त्रिपाठी सपना महेश सपना मांगलिक समीक्षा सरिता पन्थी सविता मिश्रा साइबर अपराध साइबर क्राइम साक्षात्कार सागर यादव जख्मी सार्थक देवांगन सालिम मियाँ साहित्य समाचार साहित्यिक गतिविधियाँ साहित्यिक बगिया सिंहासन बत्तीसी सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध सीताराम गुप्ता सीताराम साहू सीमा असीम सक्सेना सीमा शाहजी सुगन आहूजा सुचिंता कुमारी सुधा गुप्ता अमृता सुधा गोयल नवीन सुधेंदु पटेल सुनीता काम्बोज सुनील जाधव सुभाष चंदर सुभाष चन्द्र कुशवाहा सुभाष नीरव सुभाष लखोटिया सुमन सुमन गौड़ सुरभि बेहेरा सुरेन्द्र चौधरी सुरेन्द्र वर्मा सुरेश चन्द्र सुरेश चन्द्र दास सुविचार सुशांत सुप्रिय सुशील कुमार शर्मा सुशील यादव सुशील शर्मा सुषमा गुप्ता सुषमा श्रीवास्तव सूरज प्रकाश सूर्य बाला सूर्यकांत मिश्रा सूर्यकुमार पांडेय सेल्फी सौमित्र सौरभ मालवीय स्नेहमयी चौधरी स्वच्छ भारत स्वतंत्रता दिवस स्वराज सेनानी हबीब तनवीर हरि भटनागर हरि हिमथाणी हरिकांत जेठवाणी हरिवंश राय बच्चन हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन हरिशंकर परसाई हरीश कुमार हरीश गोयल हरीश नवल हरीश भादानी हरीश सम्यक हरे प्रकाश उपाध्याय हाइकु हाइगा हास-परिहास हास्य हास्य-व्यंग्य हिंदी दिवस विशेष हुस्न तबस्सुम 'निहाँ' biography dohe hindi divas hindi sahitya indian art kavita review satire shatak tevari undefined
नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3752,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,325,ईबुक,181,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,234,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2731,कहानी,2040,कहानी संग्रह,224,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,482,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,129,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,82,नामवर सिंह,1,निबंध,3,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,61,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,309,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,325,बाल कलम,22,बाल दिवस,3,बालकथा,47,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,8,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,16,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,211,लघुकथा,791,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,16,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,302,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,57,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1864,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,616,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,668,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,14,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,49,साहित्यिक गतिविधियाँ,179,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,51,हास्य-व्यंग्य,51,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: सुशान्त सुप्रिय का व्यंग्य - दुमदार जी की दुम
सुशान्त सुप्रिय का व्यंग्य - दुमदार जी की दुम
रचनाकार
http://www.rachanakar.org/2014/03/blog-post_8306.html
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2014/03/blog-post_8306.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय खोजें सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ