शुक्रवार, 18 अप्रैल 2014

विशेष/ श्रद्धांजलि गैब्रियल गार्सिया मार्खेज : चला गया कल्पनाओं का जादूगर - लोकमित्र

विशेष/ श्रद्धांजलि
 गैब्रियल गार्सिया मार्खेज
चला गया कल्पनाओं का जादूगर
                -लोकमित्र
                                    [ लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं ]                       
                 
उनके प्रशंसक उन्हें कल्पनाओं का जादूगर कहते हैं | उनके आलोचक उन्हें मैजिक ऑफ़ रिलिजन कहते हैं | लेकिन गैब्रियल गार्सिया मार्खेज हमेशा खुद को महज तर्जुमाकार कहते थे | वो कहते थे, ‘दुनिया जिसे मेरी लेखनी का कमाल मानती है , वह मेरी कल्पना नहीं बल्कि लैटिन अमरीकी जीवन का नंगा सच है | मेरी इस खौफनाक रोमांचक सच को प्रस्तुत करने में महज एक जिम्मेदार दर्शक की भूमिका है | मै जो देख रहा हूं ,जो सुन रहा हूँ ,जो एहसास कर रहा हूँ उसे बस ज्यों का त्यों पूरी ईमानदारी के साथ दुनिया के सामने रख दे रहा हूँ |’ वह कहते थे मैं लैटिन अमरीका से बाहर की दुनिया के लिए महज एक  दुभाषिया हूँ |

अपने को कुछ न साबित करना किसी भी दौर के महान लेखक की विनम्रता होती है | लेकिन हम जानते हैं मार्खेज इस दौर के ही नहीं शायद आने वाले सौ सालों के भी सबसे बड़े और जादूगर लेखक थे |शब्द उनके इशारे पर ताल से ताल मिलाते थे और कल्पनाएं जादू की दुनिया रचती थीं | वह जादूगर अब नहीं रहा | अठारह मार्च को उसका निधन हो गया | नोबेल पुरस्कार से सम्मानित कोलंबिया के इस महान उपन्यासकार गैब्रियल गार्सिया मार्खेज को उनके कालजयी उपन्यास वन हन्ड्रेड इयर्स ऑफ सालीट्यूड के लिए भी जाना जाता है जिसके बारे में न्यूयार्क टाइम्स ने लिखा था  यह किताब हर किसी को पढना चाहिए |

  मार्खेज की यह वह पुस्तक है जिसके बारे में न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा था, ''बुक ऑफ जेनेसिस के बाद ये साहित्य की पहली कृति है जिसे पूरी मानव नस्ल को पढ़ना चाहिए |'' वह पेशे से पत्रकार थे | १९५० में रोम और पेरिस में स्पेक्टेटर के संवाददाता रहे। १९५९ से १९६१ तक क्यूबा की संवाद एजेंसी के लिए हवाना और न्यूयार्क में काम किया। मगर पत्रकार होने के साथ साथ वह एक निर्वासित योद्धा थे जो ताउम्र अपनी बौद्धिक रियासत के लिए जंग लड़ी | वामपंथी विचारधारा की ओर झुकाव के कारण उन पर अमेरिका और कोलम्बिया सरकारों द्वारा देश में प्रवेश करने पर प्रतिबंध लगाया हुआ था | लेकिन इसका उनके जीवन और चेहरे में कभी मलाल नहीं दिखा । संभवतः उनका यथार्थवाद इसीलिए इतना जीवंत था क्योंकि वो खौफनाक खूनी जीवन कल्पना में नहीं उतार रहे थे उसे यथार्थ में जी रहे थे |

      उनका पहला कहानी-संग्रह लीफ स्टार्म एंड अदर स्टोरीज १९५५ में प्रकाशित हुआ । बाज़ार में आते ही इसकी कहानियों ने खौफ के सच से भरी ताज़ी हवा का एहसास कराया | नो वन नाइट्, टु द कर्नल एंड अदर स्टोरीज और आइज़ ऑफ ए डॉग संग्रहों के साथ वो दुनिया के श्रेष्ठ कहानीकार के रूप में स्थापित हो गए | उनके उपन्यास सौ साल का एकांत (वन हंड्रेड इयर्स ऑफ सालीच्यूड) को १९८२ में नोबल पुरस्कार प्राप्त हुआ।पिछले काफी दिनों से वो मैक्सिको में रह रहे थे और समझा जा रहा था की एक नोबेल तराई की रुपरेखा बनाने में जुटे हैं | उनके रहस्यमयी श्याम यथार्थ ने विज्ञान के लिए भी चुनौती और अवसर पैदा किये हैं की छायाओं में भी जीवन हो सकता है | मार्खेज का बचपन अपने नाना नानी के घर उत्तरी कोलंबिया के एक बड़े ही ख़स्ताहाल शहर आर्काटका में गुजरा था | वह अपने लेखक होने का श्रेय अपनी नानी और किस्से कहानियों से भरी स्थितियों को देते हैं जिनमें वो पीला बढे |   

        सिर्फ अपने लेखन के लिए ही मार्खेज अपनी नानी और नाना के शुक्रगुजार नहीं थे बल्कि  अपनी राजनीतिक चेतना,दृढनिश्चय यथार्थवादी स्वभाव और पक्षधरता के लिए भी उन्ही के एह्शानमंद थे | उनके नाना दो गृह युद्धों में शामिल  रहे थे और अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले कार्यकर्ता भी थे | वह फीदेल कास्त्रो से प्रभावित थे शायद इसीलिए मार्खेज भी न केवल फिदेल के प्रशंसक रहे बल्कि दोस्त भी रहे | अपनी नानी से ही मार्खेज ने अंधविश्वासों और स्थानीय कहानियों को जाना-समझ और इनकी लत का शिकार हुए |  नानी उन्हें मरे हुए पूर्वजों, भूतों और प्रेतात्माओं की कहानियां कुछ इस तरह सुनाती थीं मानों आँखों देखा हाल सुना रहे हों | लगता था वो सब उनके घर के पिछवाड़े में नाचते रहते हैं मार्खेज जादुई वर्णन की शैली नानी से ही पायी थी | इसे उन्होंने ताउम्र अपनी यूएसपी बनाकर रखा |

 मार्खेज ने पेरिस, वेनेजुएला और मेक्सिको में अपना ज्यादातर जीवन जीया | वह सेलिब्रिटी लेखक थे लेकिन उन्होंने पत्रकारिता कभी नहीं छोड़ी |  यहां तक कि जब उनकी कहानियां बहुत लोकप्रिय हो गईं और उन्हें पैसे की कोई चिंता नहीं रह गयी तब भी वह कहते थे पत्रकारिता मुझे जीने ,लिखने और सच को समझने की ताकत देती है | वह उपन्यासकार विलियम फॉकनर से प्रभावित  थे |उन्होंने एक व्यख्यान में बताया था कि 1965 में उन्हें हन्ड्रेड इयर्स ऑफ सॉलीट्यूड के पहले अध्याय का ख़्याल उस समय आया जब वो अकापुलो की तरफ कार से जा रहे थे |  उन्होंने कार रोकी, वापस घर आए और अपने कमरे में खुद को बंद कर लिया | 18 महीने के बाद वो जब किताब पूरी कर उठे तो उन पर 12 हज़ार डॉलर का कर्ज़ था |  लेकिन राहत की बात ये थी कि उनके हाथ में 1300 पन्नों का एक ऐसा उपन्यास था जिसे तब कोई नहीं जनता था कि एक दिन यह दुनिया का महान उपन्यास कहलायेगा |

   उनका यह उपन्यास जब स्पेनी भाषा में प्रकाशित हुआ तो पहले हफ्ते में ही सारी प्रतियां बिक गईं |बाद के सालों में तो बस इतिहास रचा जाता रहा | अगले तीस वर्षों में इस उपन्यास की दो करोड़ से अधिक प्रतियां बिक चुकी थीं | यह एक उपन्यास के लिए न भूतो न भविष्यति रिकॉर्ड था | मारियो पूजो के गॉड फादर से भी ज्यादा |  आज पूरी दुनिया में इसके पैंतीस भाषाओँ में संस्करण मौजूद हैं | मार्खेज की तारीफ उनके लेखन की जीवंतता और धक् कर देने वाली जादुई शैली के चलते होती है | उनकी भाषा कल्पनाओं को नई उड़ान देती है | हालाँकि कुछ लोगों का मानना है कि वो अपने लेखन में जानबूझकर कल्पनाओं का, सुपरनैचुरल  तैयार करते हैं जिसके प्रति आकर्षण इंसान की कमजोरी है | मगर वह इसे अपने समाज की उथल पुथल और कुछ हद तक साम्राज्यवाद  से लड़ने की के लिए जरुरी पराशक्ति मानते हैं |


                संपर्क – 104 शांति निकेतन
                       बी-विंग ,नियर रामदेव पार्क
                        मीरा रोड ईस्ट
                         ठाणे [मुंबई],महाराष्ट्र
                       पिन-401107
                        E-mail: lokmitra4irc@gmail.com
                                              

3 blogger-facebook:

  1. अल्विदा मार्खेज । विनम्र श्रद्धांजलि ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. मार्खेज दुनिया तुम्हें सदैव याद रखेगी।
    विनम्र श्रद्धांजलि

    उत्तर देंहटाएं

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