शनिवार, 19 अप्रैल 2014

एस. के पाण्डेय की लघुकथा - खबर

खबर

रोशनी के पिता जी की तबियत अचानक खराब हो गई । पेट में असहनीय दर्द होने लगा था । उसने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया । डॉक्टर ने कहा पेट में ट्यूमर है । ओपरेशन करना पड़ेगा । खर्चा पचास हजार के आस-पास आएगा ।

रोशनी के पास बीस हजार रूपये थे । उसने वेतन से बचा-बचा कर इतना रुपया इकट्ठा किया था । अब प्रश्न था कि बाकी के पैसे कहाँ से जुटाए ? उसने सोचा कि उसका बॉस इतने रूपये आसानी से दे सकता है । परंतु यह विचार उसे नहीं जमा । उसे डर था कि बॉस कहीं बाद में कोई दबाव न बनाए ।

रोशनी सुबह ऑफिस गई । रोज की तरह उसके चेहरे पर मुस्कान नहीं थी । चेहरा उतरा हुआ था । उसके एक सहकर्मचारी रमन ने इसका कारण पूछा । रोशनी ने सारी बात बताई और बोली सर से छुट्टी माँगने आई हूँ । कुछ दिन ऑफिस नहीं आ सकूँगी ।

रमन ने यह बात अपने शेष साथियों को बताई । और सबने सहमति से रोशनी को मदद देने की योजना बनाई । किसी ने पाँच सो, किसी ने हजार और किसी ने दो हजार रूपये रमन को दिए । रमन पैसा इकट्ठा करता गया । और थोड़ी ही देर में तीस हजार से अधिक रूपये इकट्ठे हो गए । जो उसके पिताजी के इलाज के लिए पर्याप्त थे ।

अपने पिताजी के इलाज के बाद रोशनी ने इस घटना को एक अखबार में छपवा दिया । फिर यह खबर बनकर लाखों लोगों तक पहुँच गई । इस खबर के अंत में रिपोर्टर की तरफ से अपील की गई थी कि यदि ऐसा एक कार्यालय में हो सकता है तो ऐसा अन्य कार्यालयों, गाँवो और मोहल्लों आदि में भी हो सकता है । यदि हम मिलकर लोगों की मदद करें तो अनेक लोगों की मुश्किलें आसान हो सकती हैं ।

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डॉ. एस. के. पाण्डेय,

समशापुर (उ. प्र.) ।

ब्लॉग: http://www.sriramprabhukripa.blogspot.com/
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