शनिवार, 19 अप्रैल 2014

श्याम गुप्त का आलेख–सृष्टि व ब्रह्मांड की रचना

सृष्टि व ब्रह्मांड रचना –डा श्याम गुप्त

सृष्टि रचना एक अत्यंत ही गूढ़ एवं अनुत्तरित प्रश्न है जो आदिकाल से लेकर आज तक वैज्ञानिकों, दार्शनिकों को खोजलीन रखता आया है। सृष्टि रचना के वैज्ञानिक आलेख तमाम ब्लोगों व आलेखों पर उपस्थित हैं। इस प्रक्रिया में इस विषय पर भारतीय वैदिक विज्ञान के उन्नत तथ्यों का भी उल्लेख होता आया है जिसे प्रायः अधिक गंभीरता से नहीं लिया जता। अतः हम इस पत्रिका में एक नवीन श्रृंखला “सृष्टि व जीवन “ प्रारम्भ करने जा रहे हैं जिसमें आधुनिक विज्ञान के तथ्यों का एवं उनका भारतीय वैदिक विज्ञान के तथ्यों से साम्यता दृष्टिगत होगी।

भारतीय सभ्यता विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं‌ मे से एक है। अन्य सभ्यताओं की तरह इस सभ्यता से भी ज्ञान, विज्ञान का एक निर्बाध प्रवाह प्रारंभ हुआ था। विदेशी आक्रान्ताओं तथा औपनिवेश शासन काल मे इस सभ्यता के चिन्ह धूमिल हो गये। आवश्यकता है आम समाज को उस विज्ञान से परिचित कराने की। इससे न केवल भारत के विज्ञान का विश्व से परिचय होगा बल्कि न केवल अज्ञान जनित पुरा-मिथ्या धारणाएं तथा अंधविश्वास खंडित होगा अपितु आधुनिक विज्ञान जनित कुछ मिथ्या धारणायें भी। यही उद्देश्य प्रस्तुत क्रमिक आलेख का।

भूमिका.....

ज्ञान चक्षु खुलने पर जब मानव ने प्रकृति के विभिन्न रूपों को रोमांच, आर्श्चय, भय व कौतूहल से देखा और सोचा की इन सब का क्या रहस्य है, क्या इन सब का कोइ संचालन-कर्ता है? उसी क्षण मानव मन मे ईश्वर का आविर्भाव हुआ, और उसी ईश्वर की खोज के परिप्रेक्ष्य में सृष्टि, जीवन, मानवता, समाज, देश, राष्ट्र, आचरण, सत्य-असत्य, दर्शन, विज्ञान आदि के क्रमिक उन्नति व विकास की यात्राएं हैं। सृष्टि व ईश्वर के बारे में विभिन्न दर्शन, धर्म व आधुनिक विज्ञान के अपने-अपने मत हैं; परन्तु मानव आचरण व सदाचार जो समस्त विश्व; शान्ति हो या उन्नति या विकास सभी का मूल है, उस पर किसी में कोइ मत भेद नहीं है।

संक्षिप्त में विषय भाव कुछ इस प्रकार है:.....

खंड अ---सृष्टि व ब्रह्माण्ड
भाग १: आधुनिक विज्ञान का मत - सृष्टि पूर्व, आरम्भ, बिग-बेंग, ऊर्जा व कणों की उत्पत्ति, कोस्मिक-सूप, परमाणु - निर्माण, हाइड्रोज़न-हीलियम, पदार्थ, लय व पुनः सृष्टि।
भाग २: वैदिक विज्ञान के अनुसार सृष्टि - सृष्टि पूर्व, एकोअहम बहुस्याम, ऊर्जा, कण, त्रिआयामी कण, पदार्थ, चेतन तत्व, कण-कण में भगवान, पंचौदन अज।
भाग ३: समय, जड़ व जीव सृष्टि की भाव संरचना,महातत्व, व्यक्त पुरुष ,व्यक्त माया, त्रिदेव, त्रि-आदिशक्ति, हेमांड-ब्रह्माण्ड।
भाग ४: सृष्टि संगठन प्रक्रिया, नियामक शक्तियां, विभिन्न रूप सृष्टि, लय व पुनर्सृष्टि।

सभी का आधुनिक वैज्ञानिक मत से तुलनात्मक संदर्भित व्याख्या।

खंड ब---जीव व जीवन: संक्षिप्त में, आरम्भ कब, कैसे, किसने, कहाँ से, वृद्धि, गति, संतति वर्धन, लिंग चयन, स्वतः संतति-उत्पादन प्रक्रिया, प्राणी व मानव विकास क्रम आदि।
भाग १: आधुनिक विज्ञान सम्मत - योरोपीय, रोमन, ग्रीक आदि मत, डार्विन -सिद्धांत।
भाग २: वैदिक विज्ञान सम्मत  -  भारतीय दर्शन मत- ब्रह्मा का मूल सृष्टि -क्रम, भाव-पदार्थ निर्माण, रूप सृष्टि, प्राणी निर्माण, मानव, मानस-संकल्प व मैथुनी सृष्टि, मानव विकास क्रम।
खंड अ---सृष्टि व ब्रह्माण्ड

भाग १- आधुनिक विज्ञान -की मान्यता के अनुसार उत्पत्ति का मूल "बिग-बैंग सिद्धांत" है। प्रारंभ में ब्रह्माण्ड ( एक अत्यंत घनीभूत बिंदु मात्र पिंड रूप ) एकात्मकता स्थिति (सिंगुलारिटी) में, शून्य आकार व अनंत ताप रूप (infinite hot ) था। तत्पश्चात.......क्रियाएं हुईं....( सन्दर्भ – द फर्स्ट थ्री मिनट्स तथा द ओरीजिन एंड फेट ऑफ़ यूनीवर्स ...स्टीफन हाकिंस।)
१ अचानक एक विष्फोट हुआ -बिग-बैंग, और १/१०० सेकंड में तापक्रम सौ बिलियन सेंटीग्रेड हो गया। उपस्थित स्वतंत्र -ऊर्जा एवं विकिरण से असंख्य उप-कण उत्पन्न होकर अनंत ताप के कारण एक दूसरे से बिखंडित होकर तीब्रता से दूर होने लगे। ये सब हलके उपकण इलेक्ट्रोन, पोज़िट्रान, व न्‍यूट्रान थे । जो शून्य भार, शून्य चार्ज थे एवं फ्री-ऊर्जा से लगातार बनते जा रहे थे।
२- एनिहिलेसन स्टेज -कणों के एक दूसरे से दूर जाने से तापमान कम होने पर भारी कण बनने लगे जो १००० से १ के अनुपात से बने। वे मुख्यतया इलेक्ट्रोन, प्रोटोन, न्‍युट्रोन व फोटोन (प्रकाश कण) थे। ये ऎटम- पूर्व कण बने। साथ ही भारी मात्रा में स्वतंत्र ऊर्जा भी थी।
३- स्वतंत्र केन्द्रक (न्युक्लिअस) १४ वे सेकंड में तीब्र एनिहिलाशन (सान्द्री करण) से काम्प्लेक्स न्युक्लिअस के बनने पर १ प्रोटोन व १ न्युत्रोन से हाइड्रोजन व २ प्रोटोन+ २ न्युत्रोन से हीलियम के अणु पूर्व कण बनने लगे।
४- तीन मिनट के अंत में शेष हलके कण, न्‍यूट्रान्‍स, प्रति-न्यूट्रान्‍स, लघु केन्द्रक कण के साथ ही ७३% हाइड्रोजन व २७ % हीलियम मौजूद थे। कोई एलेक्ट्रान शेष नहीं थे। अतः ठंडे होने की प्रक्रिया लाखों सालों तक रुकी रही। हाँ उपस्थित कणों के एकत्रीकरण (क्लाम्पिंग) की प्रक्रिया से गेलेक्सी (आकाश गंगाएं) व तारे आदि बनने की प्रक्रिया प्रारम्‍भ हो गयी थी।
५- ताप जब और गिरने से बहुत अधिक ठंडा होने पर पुनः ऊर्जा के निस्रत होने पर प्रोटोन न्युक्लयूस के साथ मिलकर केन्द्र में स्थित होने पर न्युत्रांस उसके चारों और एकत्र होगये एवं प्रथम परमाणु (एटम) का निर्माण हुआ जो हाइड्रोजन व हीलियम गैस बने। ये एटम ऊर्जा के साथ भारी पदार्थ व गेलेक्शी बनाने लगे। इस प्रकार भारी पदार्थ, हीलियम, हाइड्रोजन, हलके-कण व ऊर्जा मिलकर विभिन्न पदार्थ बनने की प्रक्रिया प्रारंभ हुई-----
-न्यूट्रिनो +एंटी-न्यूट्रिनो + चार्ज भारी-इलेक्ट्रोन =ठोस पदार्थ ( सोलिड्स), तारे, ग्रह ,पिंड आदि।
-बाकी एलेक्ट्रोन + पोजित्रोन+ ऊर्जा =तरल पदार्थ ( लिक्विड) ,जल आदि।
-फोटोन ( प्रकाश कण )+बाकी ऊर्जा =कम घनत्व के पदार्थ- नेबुला, गैलेक्सी आदि।
इस प्रकार सारा ब्रह्माण्ड बनता चला गया। विभिन्न अणुओं से विभिन्न समस्त पदार्थ बने।
पुनः एकात्मकता- क्योंकि प्रत्‍येक कण एक दूसरे से लगातार दूर होता जा रहा है, अतः ब्रह्मांड अत्यधिक ठंडा होने पर, कणों के मध्य आपसी आकर्षण समाप्त होने पर, कण पुनः एक दूसरे से विश्रंखलित होकर अपने स्वयं के रूप में आने लगते हैं एवं पदार्थ विलय होकर पुनः ऊर्जा व आदि कणों में संघनित होकर, ब्रह्माण्ड एकात्मकता को प्राप्त होता है, पुनः नए बिगबैंग के लिए, नई सृष्टि के क्रम के लिए।

प्रश्न यह है कि वह घनीभूत पिंड जिसमें विष्फोट हुआ वह कहाँ से आया, इसका उत्तर विज्ञान के पास नहीं है। विभिन्न पदार्थों के बनने का क्रम एवं प्रक्रिया भी आधुनिक विज्ञान को अभी विस्तृत प्रकार से ज्ञात नहीं हो पाई है। इन प्रश्नों के उत्तर आगे वर्णित वैदिक विज्ञान में मिलते हैं|

---क्रमश .. खंड अ---सृष्टि व ब्रह्माण्ड –भाग-२ – वैदिक विज्ञान का सृष्टि सृजन सिद्धांत ...

 

---- डा श्याम गुप्त, सुश्यानिदी,के-३४८,

आशियाना, लखनऊ २२६०१२

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