रविवार, 27 अप्रैल 2014

असगर वजाहत की कहानी - खेल का बूढ़ा मैदान गुस्से में है

खेल का बूढ़ा मैदान गुस्से में है

(1)

स्टेडियम खचाखच भरा है। स्टार और सुपर स्टार से लेकर प्रधानमंत्री और उप राज्यमंत्री तक विराजमान हैं। आकाश और पाताल में कैमरे लगे हुए हैं। पूरा देश सांस रोके खड़ा है। खेल विशेषज्ञ अभी खेले जाने वाले प्रीमियर लीग के मैच पर बहस कर रहे हैं।

एम्पायर विकेट लगाने आए। वे जब विकेट लगाने गए तो पता चला कि मैदान तो पत्थर का हो गया है। एम्पायर किसी तरह विकेट लगाने में कामयाब न हो सके। प्रीमियर लीग के मैनेजर भी विकेट न लगा सके। टीमों के कप्तान हजार कोशिश करने के बाद भी विकेट न लगा सके।

तो क्या मैच नहीं होगा

दस हजार करोड़ रुपये दांव पर लगे हैं। स्पांसर कहने लगे-हम लोग लुट जाएंगे।

टीम के मैनेजर और कप्तान कहने लगे-मैच तो खेला ही जाना चाहिए।

मीडिया ने कहा किसी भी कीमत पर...मैच तो होना ही चाहिए...पांच हजार करोड़ के विज्ञापन लाइन से लगे हुए हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा-क्या देर है। मैच शुरू करो।

खेल का बूढ़ा मैदान दिल ही दिल हंस रहा था। विकेट लगाए बिना खेल कैसे हो सकता है।

लेकिन खेल शुरू हो गया। संसार में पहली बार बिना विकेट लगाए क्रिकेट खेला जा रहा है।

(2)

खेल के मैदान में विज्ञापन फिल्म की शूटिंग हो रही है। शाट बहुत आसान है। देश का सबसे बड़ा फास्ट बॉलर गेंद फेंकता है। विश्व सुन्दरी और देश की सुपर ‘स्टार’ छक्का लगा देती है। उसके बाद कट होता है। फास्ट बॉलर का मुंह लटका हुआ है। सुन्दरी उसे ‘डोनूडे बबलगम’ देती है। जिस खाते ही फास्ट बॉलर...

लेकिन यह आसान सा शॉट ओ.के. ही नहीं हो रहा है क्योंकि सुन्दरी को जब भी बॉल फेंकी जाती है। बूढ़ा खेल का मैदान पिच पर आकर खड़ा हो जाता है

‘‘ओय...इस बूढ़े को हटाने का है...क्या लफड़ा करता है। इसको कुछ देकर अलग करो। आज काम पूरा होने का है।’’ डायरेक्टर ने कहा।

‘‘ले बूढ़े ये लेने का है।...पचास हजार...अब हटने का है। नहीं हटा। ले एक लाख...नहीं हटा...पकड़ दो लाख।’’

‘‘सर ये बूढ़ा तो पिच से हटता ही नहीं।’’

‘‘ओय बाबा...ऐसा आदमी नहीं देखा...दो लाख लेके नहीं हटता...चल अपुन किसी और मैदान में चलेगा।’’

(3)

एक दिन सुबह लोगों ने देखा कि खेल के मैदान में खिलाड़ियों की कटी-कटी लाशें पड़ी हैं। कुछ हथियार बिखरे पड़े हैं, जिन पर खून जम गया है। खिलाड़ियों के सिर इधर-उधर लुढ़क रहे हैं। कुछ बुरी तरह घायल हैं। कुछ कराह रहे हैं।

आवाजें आ रही हैं-तोड़ दो, किल इट, रौंद डालो, कर ला मुट्ठी में, रगड़ डालो, पटक दो, कमर की हड्डी तोड़ दो, नष्ट कर दो। कर दो काम तमाम।

लोगों ने देखा कि कंकाल उठकर खड़े हो गए। बिना सिर वाले बॉलिंग करने लगे, बिना हाथों वाले बैंटिग करने लगें

लोग तालियां बजा रहे थे।

(4)

इंटरनेशनल टूर्नामेंट 20-20 का फाइनल नहीं खेला जा सका।

मैच बहुत ही रोचक मोड़ पर था। सटोरिए दिल थामे बैठे थे। करोड़ो दर्शक अपनी टी.वी सेटोें से मक्खी की तरह चिपक गए थे। मीडिया पूरी तरह चौकस था। खिलाड़ी जान की बाजी लगाए दे रहे थे कि अचानक बारिश होने लगी...पर ये पानी की बारिश नहीं...सोने के सिक्के बरस रहे थे।

खेल रुक गया। खिलाड़ियों ने सिक्के बटोरने शुरू कर दिए...फिर नया खेल शुरू हो गया कि कौन-सी टीम ज्यादा सिक्के जमा कर लेती है।

पिच पर राकेश सावंत खड़ा है। बूढ़ा मैदान उसे जानता है। महाराष्ट्र की टीम में रणजी ट्रॉफी का अच्छा बैट्समैन है। पिछले साल उसने यू.पी. के खिलाफ सेंचूरी बनाई थी। उसके बाद नेशनल में आ गया है।

पिच पर राकेश सावंत खड़ा है। पवेलियन में उसके पिता हनुमान चालीसा पढ़ रहे थे। वह जानता है माताजी घर में बिस्तर पर लेटी भजन गुनगुना रही होंगी। और सामने टी.वी. स्क्रीन पर उसे देख रही होंगी। उसकी बहन अपनी सहेलियों के साथ उसे एकटक देख रही होंगी।

पिच पर राकेश सावंत खड़ा है। कोच इतना टेंस है कि पत्थर हो चुका है। उसे मालूम है अगर राकेश सावंत इस इनिंग में हॉफ सेंचुरी बना लेता है तो वह ड़ेढ करोड़ में बिकेगा और कोच को ‘पैतीस परसेंट’ ट्रेनिंग चार्ज मिलेगा।

पिच पर राकेश सांवत खड़ा है। मैच के बाद उसे ब्रांड एंबेसडर बनाने वाली विशाल कम्पनी के सीईओ बैठे हैं। विज्ञापन एजेंसी के एम.डी भी मौजूद हैं। अभी राकेश सावंत के रेट का फैसला होने जा रहा है।

पिच पर राकेश सांवत खड़ा है और नेशनल प्रीमियर लीग में उसकी बोली घट-बढ़ रही है। ये चौका लगाया। अब डेढ़ करोड़ का पैकेज ये बॉल मिस कर दी पचास लाख कम कर दो। ये...छक्का।

धड़-धड़ दिल नहीं धड़क रहे हैं बल्कि अरबो-खरबों उगलने वाली मशीनों के विशालका इंजन सांस रोके खड़े हैं। एक-एक पल भारी है...जो सकता है, करोड़ों हार्स पावर के इंजन दौड़ने लगें या हो सकता है गहरी सांस छोड़कर धरती को बंजर बना दें।

पिच पर राकेश सांवत खड़ा है। बॉलर दौड़ता हुआ आता है। बॉल फेंकता है। राकेश सावंत जोर से हिट करता है। बॉल आसमान में ऊपर की तरफ उठती है। उसके साथ हाथ में बैट पकड़े सावंत भी बॉल के साथ उड़ रहा है। उसे सब देखते हैं। वह आसमान में ओझल हो जाता है। उसे कैच करने वाले आसमान को ताकते रह जाते हैं। कुछ देर बाद बैट और बॉल नीचे गिर जाते हैं लेकिन राकेश सावंत को कोई कैच नहीं कर पाता।

(5)

एक दिन सुबह जब खिलाड़ी वगैरा खेल के मैदान आए तो उन्होंने देखा कि मैदान तो पूरी झील बना हुआ है। पानी ही पानी है।

रात में बारिश भी नहीं हुई थी। तब इतना पानी कहां से आ गया। कल हो तो यहां खिलाड़ियों की नीलामी हुई थी। बोलियां लगी थीं। खिलाड़ी बन-संवरकर आए थे। तब तो यहां एक बूंद पानी नहीं था। आज कहां से आ गया।

बूढ़ा मैदान बोला-मैं रोया हूं...माफ करो-मैं रोया हूं...लेकिन जानता हूं। खेल तो होना ही होना है...मैं अपने आंसू पोंछे ले रहा हूं। खेल शुरू हो गया।

(6)

रात में एक लड़का अपना स्कूल बैग लिये आया और बूढ़े मैदान के सीने पर पटक दिया।

‘‘ये क्या बेटा तुम कल स्कूल नहीं जाओगे’बूढ़े मैदान ने छठी क्लास के लड़के से पूछा।

लड़का कुछ नहीं बोला। उसकी आंखों में सपने थे।

‘‘तुम्हारे मां-बाप तुम्हें नहीं समझाते’बूढ़े मैदान ने पूछा।

लड़का कुछ नहीं बोला। स्कूल बैग से निकालकर किताब फेंकने लगा।

‘‘ये तुम क्या कर रहे हो बेटा’

‘‘उन लोगों के मुंह पर किताबें फेक रहा हूं। जिन्होंने मुझे दी थीं।’’

(7)

क्रिकेट के पुराने और अनभुवी खिलाड़ी रवि सिंह को यह सोचकर अपने माता-पिता पर गुस्सा आया कि उन्होंने समय से पहले ही उन्हें क्यों पैदा कर दिया था। रवि अपने माता पिता के पास गए और बोले, ‘‘मैं फिर से पैदा होना चाहता हूं।’’ पिता ने कहा, ‘‘मैं तो मर चुका हूं। पहले मुझे जीवित करो।’’

रवि सिंह अंडर नाइनटीन टीम के सेलेक्टर के पास गए। उसने रवि सिंह के पिता को जिन्दा कर दिया।

‘‘तुम्हारी माता कहां है’ पिता ने पूछा।

‘‘वह तो आपके बाद ही चल बसी थी।’’

‘‘तो अब’

‘‘आप चिन्ता न करें...हम इसका इन्तजाम कर देंगे...’’ एक विज्ञापन एजेंसी के सीईओ ने रवि सिंह के पिता से कहा।

माताजी आ गई।

अब शादी कैसे हो

विज्ञापन वालों ने शादी कर दी

अब अस्पताल का खर्चा

लीग वालों ने दे दिया।

रवि सिंह पुनः पैदा हुए। और अच्छा हुआ कि अठारह साल के ही पैदा हुए। पैदा होते ही अंडर नाइनटीन में आ गए।

(8)

देश की क्रिकेट टीम विश्व चैंपियन बन गई। पूरा देश शैंपेन में नहाने लगा। टेलीविजन चैनलों से शैंपेन बहने लगी। समाचार-पत्रों के पहले पन्नों पर शैंपेन की बारिश होने लगी। खेल के सभी मैदान शैंपेन से तर हो गए। चारों तरफ उत्सव का माहौल बन गया। हर तरफ से बधाइयों के सन्देश आने लगे। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, संसद के स्पीकर, विरोधी दल के नेता सबने टीम को बधाई सन्देश भेजे। पूरा देश क्रिकेट खिलाड़ियों कि लिए पागल हो गया। उनकी पॉपुलरिटी का ग्राफ आसमान छूने लगा।

देश के एक बहुत बड़े राजनीतिज्ञ से प्रेस रिपोर्टर ने पूछा, ‘‘श्रीमान जी आपकी देश क्रिकेट टीम की सबसे बड़ी खूबी क्या लगती है’

नेता ने कहा, ‘‘क्रिकेट के कप्तान और खिलाड़ियों का सबसे बड़ा गुणयह है कि उन्हें राजनीति में कोई रुचि नहीं है।’’

(9)

और ओवर की आखिरी बॉल पर हमारे कप्तान ने छक्का उड़ा दिया। पूरा स्टेडियम और पूरा देश झूम उठा। हम विश्वविजेता बन गए। एक बॉल पर चार रन बनाए थे।

राष्ट्रपति कार्यालय से तुरन्त बधाई का संदेश आया। प्रधानमंत्री ने एक-एक करोड़ का इनाम घोषित कर दिया। बीसीसीआई ने हर टीम के सदस्य को पांच-पांच करोड़ के इनाम का ऐलान किया। फिक्की ने हर मेंबर को रोल्स राइस देने की घोषणा कर दी। हर राज्य ने अपने यहां के खिलाड़ी को जो टीम में शामिल था, आलीशान कोठी देने का ऐलान कर दिया। एक जौहरी ने हर खिलाड़ी को एक-एक कोहेनूर देने की घोषणा कर दी। टी.टी. सी ने हर खिलाड़ी को एक-एक हेलीकाप्टर गिफ्ट में देने का ऐलान किया। सभी चैनलों ने अपने सब प्रोग्राम बन्द कर दिए और टीम को कवरेज देने लगे। देश के सभी अखबारों ने कोई भी दूसरी खबर न छापकर सिर्फ टीम के विश्वविजेता बन जाने की खबर छापी।

देश के हर शहर में विजय जुलूस निकलें।

टीम के कप्तान से एक रिपोर्टर ने खेल के मैदान में पूछा,‘‘आपको कैसा लग रहा है’

‘‘ज...ज...जी...मैं सच बताऊं।’’

‘‘हां...हां...क्यों नहीं...कहें तो कैमरा ऑफ कर दूं।’’

‘‘ज...ज...जी...मुझे बहुत डर लग रहा है।’’

‘‘डर’

‘‘हां, डर।’’

‘‘पर क्यों’

‘‘इसलिए कि अगले साल हम वर्ल्ड कप हार गए तो क्या होगा’

खेल के मैदान की आंख से एक आसूं निकलकर विजय उत्सव में शामिल हो गया।

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