रविवार, 27 अप्रैल 2014

असगर वजाहत की दो लघुकथा श्रृंखला–गुमनाम आदमी की कहानियाँ तथा संसद में चोर

गुमनाम आदमी की कहानियां

(1)

अचानक गुमनाम आदमी का बड़ा नाम हो गया। वह बड़ा परेशान हो गया, लोग उसकी चमचागीरी करने लगे। लोग उससे डरने लगे। लोग उससे मिलने लगे। गुमनाम आदमी ने सबको समझाना चाहा कि वह गुमनाम आदमी है, लेकिन किसी ने एक न सुनी।

गुमनाम आदमी का चेहरा बदलने लगा। वह और ज्यादा परेशान हो गया। एक दिन उसके चेहरे ने उससे कहा-अब बचकर कहां जाओगे तुम गुमनाम नहीं रहे।

अगले दिन गुमनाम आदमी सड़क के किनारे गोलगप्पे खाता पकड़ा गया तो वह मर गया।

(2)

गुमनाम आदमी के बच्चे उससे बहुत नाराज रहते थे कि वह गुमनाम है। एक दिन गुमनाम आदमी के नाम लॉटरी निकल आई। वह खरबपति बन गया। गुमनाम आदमी के बच्चे परेशान रहने लगे कि वह किस बच्चे को क्या देता है पत्नी परेशान रहने लगी कि बच्चे परेशान रहते हैं। गुमनाम आदमी परेशान हो गया कि सब परेशान हैं।

गुमनाम आदमी ने तंग आकर लॉटरी का पैसा लौटा दिया। बच्चों को जब पता चला तो उन्हें इतना गुस्सा आया कि उन्होंने गुमनाम आदमी की हत्या कर दी।

हत्या के बाद गुमनाम आदमी मशहूर हो गया।

(3)

गुमनाम आदमी के पास एक बहुत बड़ा नेता आया और बोला-मैं तुम्हें नेता बनाना चाहता हूं।

गुमनाम आदमी ने कहा-क्यों

बड़ा नेता बोला-क्योंकि तुम गूमनाम हो।

गुमनाम आदमी ने कहा, मैं नेता नहीं बनना चाहता।

नेता बोला-ये तो बड़ी हैरानी की बात है। पूरा देश नेता बनना चाहता है। तुम क्यों नहीं बनना चाहते

गुमनाम आदमी बोला-इसलिए कि मैं गुमनाम रहना चाहता हूं।

नेता बोला-नेता बोला-तो तुम सबसे अलग चलोगे

गुमनाम आदमी बोला-हां।

नेता ने कुर्त्ते की जब से रिवाल्वर निकाला और गुमनाम आदमी के सीने में छः गोलियां दाग दी।

(4)

गुमनाम आदमी चाहता था कि वह शान्ति से रहे लेकिन शान्ति ये नहीं चाहती कि वह शान्ति से रहे। उसकी शान्ति से लड़ाई चलती रहती थी। एक दिन शान्ति ने उससे कहा-तुम क्यों मेरे पीछे पड़े हो यह आतंकवाद का जमाना है। तुम मुझ बुढ़िया पर अब तक रीझे हुए हो।

गुमनाम आदमी बोला-मैं तो तुम्हें ही चाहता हूं। तुम मुझे अच्छी लगती हो।

शान्ति बोली-जानते हो मैं क्या बनकर आई हूं तुम्हारे सामने

-क्या...

-‘मानव बम’ कहकर शान्ति फट पड़ी और गुमनाम आदमी के चीथड़े उड़ गए।

(5)

गुमनाम आदमी का दिल खराब हो गया। डॉक्टरों ने उसे बदल दिया। दिमाग खराब हो गया। डॉक्टरों ने बदल दिया जिगर, गुर्दे खराब हो गए। डाक्टरों ने बदल दिए। आंख, नाक, कान, हाथ, पैर सब बदल दिए।

गुमनाम आदमी ने पूछा-क्या अब भी मैं गुमनाम ही हूं

डाक्टर बोले-तुम तो गुमनाम ही हो...हां हम लोग अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति के हो गए हैं।

सदन में चोर

(1)

सदन में शोर हो रहा था। कान में पड़ी आवाज भी नहीं सुनाई दे रही थी। लगता था जैसे करोड़ों लोग एक साथ चीख रहे हों। वैसे सदन के अन्दर सभी सदन चुप थे। सदन भवन के दरवाजे और खिड़कियां बन्द थीं। एक-एक छेद को सील कर दिया था, पर रोने जैसा शोर लगातार अन्दर आ रहा था। सब परेशान थे कि यही होता रहा तो सदन की कार्यवाही कैसे चलेगी इतने में प्रधानमंत्री आए और बोले-आप लोगों की समझ में इतनी छोटी-सी बात नहीं आ रही है कि कानों में सरसोें का तेल डाल लें

(2)

सदन की कैंटीन में एक सदस्य अपने मुंह में मुर्गे की टांग ले गया तो ऐसा लगा जैसे किसी पेड़ की जड़ चबा रहा हो। वह घबराया और मुर्गे की टांग लेकर सीधा स्पीकर के पास पहुंचा। वहां भीड़ लगी थी। कुछ सांसद कह रहे थे कि उन्हें सदन की कैंटीन में दिए गए गेहूं के नरम-नरम फुल्के जौ-चने की रोटी जैसे लग रहे हैं। कोई शिकायत कर रहा था कि बिरयानी पतली खिचड़ी जैसी लग रही है। चिकन मसाला महुए की लपसी जैसा हो गया था।

स्पीकर को ध्यान आया कि सदन देश में पड़े सूखे और अकाल से हुई मौतों की चर्चा कर रही है। स्पीकर को लगा कि उसके भी गले में कुछ फंस रहा है। वह घबरा गया और सदन की कार्यवाही स्थगित करने का आदेश दे दिया।

(3)

सदन में एक नया मामला सामने आया। एक सदस्य ने सदन में अपनी जगह अपने ड्राइवर को बैठा दिया था। पांच साल तक तो यह रहस्य न खुला पर अगले सदन में पता चल गया। स्पीकर ने जब ड्राइवर से पूछा कि वह सदन में क्यों बैठा है तो वह बोला कि चुनाव भी उसी ने लड़ा था। जीता भी वही था। एक बार वह उप राजमंत्री भी रह चुका है। छः बार उसने दल भी बदला है लेकिन यह सच है कि वह सदस्य का ड्राइवर है।

अब कोई कारण न था कि सदस्य के ड्राइवर को सदस्य न मान लिया जाता।

(4)

सदन में कोरम पूरा नहीं था। अधिकतर सदस्य जिनकी खुराक अच्छी थी सदन की कैंटीन में थे। कैंटीन में घटियां बज रही थीं कि सदस्य सदन में आ जाएं पर सदस्य नहीं जा रहे थे। तब स्पीकर ने कैंटीन में ही सदन की कार्यवाही चालू करवा दी।

सभी बिल पास हो गए। हर बिल पास होते वक्त सदस्यों के मुंह में कुछ न कुछ था।

(5)

सदन में प्रधानमंत्री का बयान : सरकार मानती है कि टेप में केन्द्रीय मंत्री श्री रा.का. को उनके कार्यालय में घूस लेते दिखाया गया है। सरकार मानती है कि कार्यालय की रा.का. का ही है। जिस कुर्सी पर श्री रा.का. बैठे हैं वह मंत्री की कुर्सी है। मेज की जिस दराज में नोटों की गड्डिया रखी जा रही हैं वह श्री रा.का. की मेज की दराज है। लेकिन वे हाथ जो मेज की दराज में गड्डियां रख रहे हैं क्या श्री रा.का. के हैं ऐसा भी नहीं है कि टेप में दिखाए गए हाथों और श्री रा. का. के हाथों में कोई अन्तर है। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि वे एक हैं।

(6)

सदन में एक सदस्य ने सोने का रिकार्ड बनाया और उसका नाम गिनीज बुक ऑफ रिकार्ड में आ गया। इसके बाद तो सदस्यों में स्वस्थ प्रतियोगिता शुरू हो गई। एक ने घूस लेने का रिकार्ड बनाया। एक ने कुछ न बोलने का; एक ने दल बदलने का; एक ने दिल बदलने का; एक ने खुजाने का। एक सदस्य ने मोटा होने का रिकार्ड बनाया। वह इतना मोटा हो गया कि सदन भवन के अन्दर घुस न सकता था। वह सदन भवन की छत पर सोता रहता था। वायु सेना के हेलीकाप्टर उसके मुंह में खाना डालते थे फायर बिग्रेड वाले पानी पिलाते थे। कपड़ा उद्योग मंत्रालय उसका पजामा सिलवाता था।

वह सभी सदस्यों का प्यारा था। आदर्श था। उसके खर्राटे सदनीय बहसों को गरिमा प्रदान करते थे। वही सदन था।

(7)

सदस्य को अपने चुनाव क्षेत्र से प्यार है। सदस्य का अपने मतदाताओं से गहरा रिश्ता है। उसके चारों और उसके चुनाव क्षेत्र के मतदाता ही नजर आते हैं। उसका रसोइया उसी के चुनाव क्षेत्र का है। झाड़ू-पोछा करने वाली बूढ़ी भी चुनाव क्षेत्र की है। माली भी और ड्राइवर भी; चौकीदार भी और गार्ड भ्ी। यहां तक भी सदस्य की रखैल तक उसके चुनाव क्षेत्र की है। सदस्य के कपड़े उसके चुनाव क्षेत्र से ही धुलकर आते हैं।

(8)

शून्यकाल में कुछ सदस्यों ने देश के अस्पतालों पर चर्चा रखनी चाही पर उन्हें अनुमति नहीं मिली। कुछ ने औरतों पर होने वाले अत्याचारों पर बात करनी चाही पर उन्हें अनुमति नहीं मिली। कुछ ने भुखमरी पर चर्चा करनी चाही पर उन्हें अनुमति नहीं थी।

कहा गया शून्यकाल में केवल शून्य पर ही चर्चा हो सकती है।

(9)

तीन सौ पार्टियों की मिली-जुली सरकार के प्रति सदन में अविश्वास प्रस्ताव रखा गया, लेकिन सरकार नहीं गिरी। प्रस्ताव भारी मतों से गिर गया।

तीन सौ पार्टियों की मिली-जुली सरकार में हर व्यक्ति केन्द्रीय मंत्री था।

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