गुरुवार, 24 अप्रैल 2014

बाल साहित्यकारों का सम्मान

भोपाल‌
बाल साहित्यकारों का सम्मान

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बाल कल्याण एवं बाल साहित्य शोध केंद्र भोपाल का आयोजन‌


आजकल जो सामजिक विष‌य सर्वाधिक चर्चा में है वे है चरित्र का गिरता स्तर ,मानव मूल्यों का पतन और संस्कारों का विनाश। शायद इसकेलिए पश्चिम का अंधानुकरण सबसे बड़ा कारण हो। चरित्र का निर्माण होता है बचपन से। पौधे को खाद पानी हवा ठीक मिलेगा तभी तो वह ठीक से पनपेगा बढ़ेगा जमीन बंजर होगी पथरीली होगी तो पौधे का सत्यनाश होना ही है।

आज बच्चों की दिनचर्या देखिये , उनके क्रिया कलाप देखियेक्या हम उनको अच्छे संस्कार दे रहे हैं?टी वी
कम्प्यूटर और माल संस्कृति में पला बढ़ा बालक क्या अपने कर्तव्यों के प्रति सावधान है  ?क्या अपने से बड़ो के प्रति उसके दिल में सम्मान है ,अपने पालकों के प्रति क्या बच्चे कर्तव्य निष्ठ हैं, बड़ों के लिए उनके दिल में सम्मान है ,करुणा दया प्रेम जैसे गुणों का उनके मन में कहीं स्थान है ,क्या वे माता पिता की चरण वंदना करते है,अथवा केवल हाय हैल्लो से ही काम चला रहे है इसका जबाब तो अब नकारात्मक ही होगा।

शायद पश्चिम का भौतिक वादी जीवन की नकल‌ ही इसका सबसे बड़ा कारण हो। फिर भी आशा के दियों मे कहीं न कहीं कुछ तेल तो बाक़ी है ,नक्कारखाने में भले सुनाई न पड़े, तूती की आवाज़ तो है ,भले ऊंट के मुंह में ही सही, जीरे का अस्तित्व तो है। सघन अंधकार में एक दीपक की रौशनी राह बताने के लिये बहुत होती है। ऐसे घने अंधेरे में बच्चों के लिए प्रकाश बनकर खड़े हैं श्री महेश सक्सेनाजी जी, बाल कल्याण एवं बाल साहित्य शोध केंद्र भोपाल के निदेशक। बालकों के उत्थानउनकी सुरक्षा और उनमें संस्कार जगाने के पुण्य कार्य मे अनवरत अपने को होम करने वाले महेशजी अपने आप में एक शोध केंद्र तो हैं ही ,देश भर के बाल साहित्यकारों को एक छत के नीचे एकत्रित कर उनका यथोचित सम्मान करने में भी अग्रणी है।

प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी भोपाल के मानस भवन की वह सुरमयी शाम यादगार बन गई जब देश के कोने कोने से पधारे बाल साहित्यकारों का हार्दिक अभिनन्दन कर उनका भाव भीना स्वागत किया गया।
। श्रीमती उषा चतुर्वेदी अध्य्क्ष राज्य बाल आयोग की अध्यक्ष‌ता और श्रीमती उपमा राय अध्य्क्ष राज्य महिला आयोग के मुख्या आतिथ्य में देश के १५ बाल साहित्यकार सम्मानित हुए। मंच पर बाल साहित्य के पुरोधा आदरणीय डा. राष्ट्रबंधुजी और देवपुत्र के देवतुल्य संपादक श्री क्रृष्णकुमार अस्थानाजी विशिष्ठ अतिथि के रूप में शोभायमान थे। तीन बाल प्रतिभाओं का भी सम्मान‌ इस अवसर पर हुआ।


सम्मानित बाल साहित्यकार
    [
१] श्री भीष्म सिंह चौहान स्मृति बाल साहित्य सम्मान
श्रीमती नीलम राकेश लखनऊ उ प्र
    [
२]श्री राजेन्द्र अनुरागी स्मृति बाल साहित्य सम्मान
डा विनय सदंगी राजाराम भोपाल मप्र
    [
३] डा हरिक्रृष्ण देवसरे स्मृति बाल साहित्य सम्मान
डा शेष‌ पाल सिंह शेष आगरा उ प्र
    [
४]श्री जे प्रसाद स्मृति बाल साहित्य सम्मान
श्री जुगल किशोर सदंगी तितलीगढ़ उड़ीसा
    [
५]सुसमा तिवारी स्मृति बाल साहित्य सम्मान
श्रीमती कुलतार कौर कक्क्ड़ भोपाल मप्र
    [
६] श्रीमति विद्ध्यादेवी भदौरिया स्मृति बाल साहित्य सम्मान
डा पुष्पारानी गर्ग इंदौर मप्र
    [
७] श्री श्याम उपाध्याय स्मृति बाल साहित्य सम्मान
श्री शिव चरण चौहान कानपुर उप्र
    [
८]श्रीमती चंद्रकांता लुनावत स्मृति बाल साहित्य सम्मान
श्री महावीर रवांल्टा मेहरगांव उत्तरकाशी
    [
९]श्री राजेंद्र सिंह भदो रिया स्मृति बाल साहित्य सम्मान
अंजीव अंजुम दौसा राजस्थान
    [
१०]हरीकृष्ण‌ वीरनावाली स्मृति बाल साहित्य सम्मान
अरविंद शर्मा भोपाल मप्र
     [
११]श्रीमती सुलेखा भल्ला स्मृति बाल साहित्य सम्मान
श्रीमती शुभदा पांडे सिलचर आसाम
     [
१२]डा उमा गौतम स्मृति बाल साहित्य सम्मान
डा लता अग्रवाल भोपाल मप्र
     [
१३]श्री शिवनारायण सूर्यवंशी स्मृति बाल साहित्य सम्मान
श्री पी दयाल श्रीवास्तव छिंदवाड़ा मप्र
      [
१४]श्री राम प्रसाद मारण स्मृति बाल साहित्य सम्मान
दुलारा नन्हा आकाश रायपुर छ ग
      [
१५]श्री श्याम सुधा स्मृति बाल साहित्य सम्मान
श्री अब्दुल समद राही सोजत शहर राजस्तान
बाल प्रतिभाएं
     [
१]श्रीमती मनोरमा चतुर्वेदी स्मृति लोककला सम्मान कु प्रगति झा
भोपाल मप्र
     [
२]श्रीमति भगवती शरमा खेल बाल प्रतिभा सम्मान आयुष्मान प्रणय खरे
भोपाल मप्र
     [
३] श्रीमति निर्मिला जोशी बाल प्रतिभा सम्मान कु मुस्कान निगम
भोपाल मप्र


इस शालीन और गरिमा पूर्ण आयोजन की साहित्यकारों बाल संस्कारों के उन्नयन के प्रति सजग बुद्धिजीवियों ने प्रशंसा की है। श्री महेश सक्सेनाजी निश्चित तौर पर इसके लिए बधाई के पात्र हैं।

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