बुधवार, 23 अप्रैल 2014

राजीव आनंद की लघुकथाएँ

आज का मजनू

एक जमाना था जब मंजनू लैला के लिए लख्‍ते जिगर खाता था और खूने जिगर पीता था पर अब जमाना बदल गया है․ आज कोई मजनू नहीं है लेकिन लैलाएं तो आज भी है․

रेशमा के साथ जीने मरने की कसमें खाने वाला आदित्‍य जब एक मल्‍टीनेशनल में नौकरी करने लगा तो उसके माता-पिता ने उसके लिए कामकाजू लड़की ढूंढने लगे․ आदित्‍य को यह बात पता होेने के बावजूद उसने अपने माता-पिता को जैसा आपलोगों को उचित लगे वैसी लड़की ढं़ढ़ने की सहमति दे दिया था․ इधर रेशमा से प्‍यार-मोहब्‍बत की बातें भी जारी रखे हुए था․ रेशमा जब भी आदित्‍य को कहती कि उसके माता-पिता भी उसके लिए लड़के की तलाश कर रहें है तो आदित्‍य उसे यह कह कर चुप करा देता कि इस बार जब वो अपने घर आएगा तो अपने माता-पिता से बात करेगा․ रेशमा को आदित्‍य के प्‍यार पर भरोसा था․

एक दिन रेशमा की एक सहेली ने उसे बताया कि आदित्‍य की शादी तो ठीक हो चुकी है․ शहर के नामी रईसों में से एक चोपड़ा साहब की एकलौती बेटी से, जो अपने साथ एक मोटी रकम भी साथ ला रही है․ रेशमा को तो जैसे सांप सूंघ गया हो․ उसके आंखों में आंसू आ गए थे․ उसने तुरंत घर जाकर आदित्‍य से फोन पर बात की․ आदित्‍य ने कहा सोरी रेशमा, आखिर तुम्‍हें पता चल ही गया, मैं तो खुद ही तुमसे बात करने वाला था․ दरअसल हुआ यूं कि मैंने आपने माता-पिता को तुम्‍हारे संबंध में बताया नहीं था इसलिए उनलोगों ने मेरी शादी चोपड़ा साहब की लड़की से तय कर दिया और अब मैं इससे इंकार नहीं कर सकता क्‍योंकि यह मेरे माता-पिता के इज्‍जत का सवाल बन गया है․ रेशमा इतना सुन कर एक शब्‍द भी न बोल सकी और फोन रख दिया․

रेशमा को आदित्‍य की दलीले सुनकर प्‍यार से ही नफरत सी हो गयी थी․ रेशमा आदित्‍य के बिना जीने की सोच भी नहीं सकती थी जबकि आदित्‍य बड़ी आसानी से प्‍यार रेशमा से करने का ढ़ांेग करता रहा और ब्‍याह चोपड़ा साहब के बेटी से कर लिया․

 

वचनबद्धता

क्‍या कहा, लड़की सामूहिक बलात्‍कार की शिकार भी है और दलित भी ? चौंकते हुए शेखर ने अपने साले तरूण को कहा․

तरूण एक साल हुए अपनी मेहनत से दंड़ाधिकारी बना था․ माता-पिता तो बहुत पहले ही स्‍वर्ग सिधार गए थे․ बस लेदकर एक बड़ी बहन ही थी निशा जिसकी बहुत इज्‍जत करता था तरूण․ तरूण ने कहा जीजा जी, सिर्फ किताब पढ़ने से समाज में बदलाव नहीं आयेगा, किताब में लिखी बातों पर अमल भी करना जरूरी है तभी तो बदलाव आयेगा․

अरे साले․․․․․साहब, शेखर ने कहा, समाज और समाज के बदलाव को छोड़ो, अपनी फिक्र करो, अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा, छोड़ो दलित और बल्‍तकृत लड़की को, मैं तुम्‍हारी ऐसी शादी कराउंगा कि लोग देखते रह जायेंगे․

तरूण कुछ भावुक होता हुआ कहा, जीजा जी जब रजनी का मूकदमा मेरी न्‍यायालय में आया था तब मैं रजनी के हिम्‍मत को देखकर उसपर मुग्‍ध हो गया․ आज तो बलात्‍कार के मामले जितने दर्ज होते है उससे कहीं ज्‍यादा दबा दिए जाते हैं․ ऐसे में एक लड़की का सामूहिक बलात्‍कार होता है और वो न्‍यायालय तक आने की हिम्‍मत करती है जो तारिफेकाबिल है․ मैंने तो रजनी के मूकदमे को जिला न्‍यायाधीश के न्‍यायालय में कमिट कर दिया लेकिन रजनी जैसी लड़की को अपनी पत्‍नी बनाने के कमिटमेंट के साथ․ आप ही बतायें जीजा जी दलित के यहां जन्‍म लेने में और उसका बलात्‍कार होने में रजनी का क्‍या दोष है ? रजनी में वो सब गुण मौजूद है कि वो मेरी कानूनी रूप से पत्‍नी बन सके और मैंने उसे और उसके माँ-बाप को वचन दे चुका हॅूं․

शेखर फनफनाते हुए जोर से चिल्‍ला-चिल्‍ला कर अपनी पत्‍नी निशा को बुलाने लगा और जब निशा दौड़ी-दौड़ी आयी तो शेखर ने उससे कहा, निशा तुरंत सामान बांधो, अब एक मिनट भी इस म्‍लेच्‍छ के घर नहीं रूकना है मुझे․ एक तो लड़की दलित तिसपर बलात्‍कार की शिकार और हम ठहरे खानदानी राजपूत․ इस म्‍लेच्‍छ के घर का पानी भी पीना मुझे मंजूर नहीं․

निशा जो अपने पति से मुंह नहीं लगाती थी, आज अपने छोटे भाई तरूण के एक दलित और बलात्‍कार की शिकार लड़की से शादी के फैसले से बहुत खुश थी, उसने कहा, तरूण तुमने सही फैसला किया है, मुझे तुम्‍हारे फैसले पर गर्व है मुझे तो तुम्‍हारे जीजा जी तुम्‍हारी शादी में शरीक नहीं होने देंगे इसलिए मैं जा रही हॅूं लेकिन मेरा आर्शीवाद सदा तुम्‍हारे साथ रहेगा․

शेखर अपनी पत्‍नी को तकरीबन घसीटते हुए घर से निकल गया․ तरूण अपनी बेबस दीदी को तब तक देखता रहा, जब तक कि वो आँखों से ओझल न हो गयी․

दूसरे दिन निहायत ही साधारण तरीके से तरूण ने रजनी का हाथ रजिस्‍टार के सामने अपने चंद मित्रों के बीच थाम लिया․

 

राजीव आनंद

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  1. वाह! राजीव जी वाह!!
    नि:सँदेह ही आपकी रचनायेँ तारीफे काबिल है|

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह! राजीव जी वाह!!
    नि:सँदेह ही आपकी रचनायेँ तारीफे काबिल है|

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