बुधवार, 9 अप्रैल 2014

वीरेन्‍द्र कुमार कुढ़रा की कहानी - "रिजल्ट"

 

एक बार तो उनकी इच्‍छा हुई कि मतपेटी की सील तोड़ दे। मतपत्रों को पेटी में डालकर पुनः सील कर दें। वह कभी जेब में पड़े मतपत्रों को टटोलते। कभी जीप में रखी मतपेटी को देखते। जीप तेजी से चुनाव मुख्‍यालय की ओर भागी जा रही थी। दिन डूबने के बाद हल्‍का स्‍याह अंधेरा भी उतरने लगा था।

बार बार पोंछने पर भी उनके माथे का पसीना बंद नहीं हो रहा था। तीनों सह मतदान अधिकारी भी खामोश और आशंकित थे। नौकरी का सवाल था-”रिटर्निंग आफिसर“ क्‍या एक्‍शन लेगा? कहा नहीं जा सकता। ”इलेक्‍शन अर्जेंट“ की विभिन्‍न कार्यालयीन शीलें पीठासीन अधिकारी के सामने घूम गयीं थी। बिना ”सो-काज“ नोटिस के निलम्‍बित तो तत्‍काल ही कर दिये जायेंगे। मस्‍तिष्‍क में मतपेटी की सील तोड़ने की बात पुनः कौंधी। तोड़ना तो आसान बात थी। लेकिन उसे पुनः यथावत सील करना कठिन। विभिन्‍न पार्टियों के पोलिंग एजेन्‍ट्‌स के हस्‍ताक्षर कहाँ से होंगे? किसी पार्टी की नोटिस में यदि यह बात आ गयी तो उपद्रव होगा। चुनाव निरस्‍त भी हो सकते हैं। इसके लिये उसी की पार्टी को उत्‍तरदायी ठहराया जायेगा। काउन्‍टिंग में यदि मतपेटी चैक हो गयी तो सीधी हवालात ही होगी।

पीठासीन अधिकारी होने के नाते उन्‍होंने मतदान शांति तरीके से सम्‍पन्‍न कराया था। पिछले चुनाव जल्‍दी जल्‍दी हुये हैं जिसमें वह लगातार पीठासीन अधिकारी रह चुके थे। कभी किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुयी। लेकिन इस चुनाव में उनके मतदान केन्‍द्र पर कुछ अपना मतपत्र मतपेटी में न डालकर बूथ के अंदर रखी टेबिल के दराज, जिस पर रखकर मतदाता मतपत्र पर निशान लगाते थे, उसी टेबिल की दराज में अपना मतपत्र डालकर चले गये थे। मतपेटी सील करते समय तक यह बात उनको मालूम नहीं थी। लेकिन वापिस लौटने के लिये ज्‍यों ही वह जीप में बैठे त्‍यों ही चौकीदार दौड़कर आया और मतपत्र उनके हाथ में थमा गया था। चौकीदार ने टेबिल की दराज खोलकर देखा तो उसमे सील लगे मतपत्र थे, जिन पर पीठासीन अधिकारी के हस्‍ताक्षर भी थे। संख्‍या में मतपत्र 13 थे। मतपेटी की निगरानी पीठासीन अधिकारी के अतिरिक्‍त अन्‍य तीनों सहयोगी मतदान अधिकारियों ने भी समय समय पर की थी। यह घटना किसके समय में घटित हुयी। इसकी जबाबदेही कोई भी अपने सिर पर लेने को तैयार नहीं था। पी०अ० ही वैधानिक रूप से इसके लिये पूरी तरह जिम्‍मेदार था।

जीप चुनाव मुख्‍यालय पर आकर रूक गयी। अधिकांश पार्टियों ने अपना सामान एवं मतपेटी आदि जमा करवाकर वापिसी ले ली थी। पसीने में भीगे पीठासीन अधिकारी ने मतपेटी सहायक मतदान अधिकारियों को सौंपते हुये वहीं रूकने को कहा। उपनिर्वाचन अधिकारी से वह इस विषय पर अकेले में बातचीत करना चाहता था। किसी तरह याचना करते हुये वह उपनिर्वाचन अधिकारी को भीड़ से अलग ले आया। और पूरी बात बतलायी। अधिकारी बौखला पड़ा-”हरामखोरी की आदत जो पड़ी है। साल भर में एक भी दिन जिम्‍मेदारी से काम नहीं कर सकते। मेरे सामने सील तोड़कर क्‍या मुझे भी अपने साथ जेल भेजना चाहते हो?“ उपनिर्वाचन अधिकारी ने बात की गंभीरता को देखते हुये कहा-”मतपेटी जमा करवाओ। तब तक कोई रास्‍ता ढूँढ़ता हूँ।“ पीठासीन अधिकारी मतपेटी जमा करने चला गया। उपनिर्वाचन अधिकारी पूरे जिले के चुनाव के लिये उत्‍तरदायी था।

पसीने में भीगे पीठासीन अधिकारी की स्‍थिति अब पंख कटे पक्षी की सी हो रही थी। मतदान अधिकारियों के साथ वह उपनिर्वाचन अधिकारी के पास आ गया। वह कांप रहा था। तथा सहयोगी भी सशंकित थे। अधिकारी ने उनको बताया-”देखो! जो मतपत्र अब जेब में हैं, उनको निरस्‍त कर दो। तथा 'मतपत्र लेखा पत्रक' में प्रविष्‍टियां काट सही कर दो। डाले गये मतपत्रों की संख्‍या 13 कम करके उतनी ही निरस्‍त किये गये मतपत्रों की संख्‍या बड़ा दो। कटिंग पर अपनी इनीशियल बनाकर 'मतपत्र लेखा पत्रक' सौंप दो। जाओ जल्‍दी करो।“

पीठासीन अधिकारी ने अपने चेहरे पर बनावटी मुस्‍कान लाते हुये कहा-”इससे सर पार्टी के रिजल्‍ट पर असर पड़ेगा।“

”पार्टी का रिजल्‍ट छोड़ो अपने बीबी बच्‍चों और अपने रिजल्‍ट का ध्‍यान करो।“ कहते हुये अधिकारी आगे बढ़ गया।

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वीरेन्‍द्र कुमार कुढ़रा

3/14 रिछरा गेट

दतिया गेट (म०प्र०)475661

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