गुरुवार, 15 मई 2014

एस. के. पाण्डेय की लघुकथा - आफत

आफत

रजनी गौने के बाद दूसरी बार अपने ससुराल में आई हुई थी । एक दिन घर की सफाई कर रही थी कि बिच्छू ने डंक मार दिया । उसकी छोटी ननद ने दौड़कर अपने माताजी को बताया । रजनी की सास और सभी ननदें आँगन में इकट्ठा हो गईं । बड़ी ननद बोली अभी कुछ देर पहले मैं उसी कमरे में थी, न कहीं बीछी थी न बीछा । उसकी सास बोली चलो चूल्हा-चौका की तैयारी करो । इनका तो दो दिन का इंतजाम हो गया ।

घर में यही सब चल रहा था । इतने में रजनी का छोटा देवर बिच्छू डंसने पर झाड़-फूँक करने वाली रमिया चाची को बुला लाया । वे झाड़ –फूँक करके चली गईं । पूरे गाँव में यह घटना छा गई । कई लोग खबर लेने के लिए आने-जाने लगे ।

रजनी ने दूसरे दिन से ही घर का काम-काज सँभाल लिया । लेकिन तीसरे ही दिन उसी कमरे में सफाई करते समय बिच्छू ने फिर से रजनी को डंक मार दिया । सारे घर में हलचल मच गई । रजनी की सास ने दौड़कर छोटे बेटे का कान पकड़ा और बोली आज कहीं मत जाना । सब लोग यहाँ-वहाँ बात करने लगे कि अभी परसों ही बिच्छू ने डंक मारा था । और आज उसी कमरे में और उसी आदमी को फिर से बिच्छू ने डंक मार दिया ।

रजनी की बड़ी ननद बोली अम्मा लगता है कि जैसे घर में और कोई आदमी ही नहीं है । या फिर बिच्छू और रजनी का आपस में कोई सांठ-गाँठ है । हमारे तो पल्ले ही नहीं पड़ रहा है कि उन्हीं को बार-बार बिच्छू क्यों काट खाता है ?

रजनी के ससुर कहीं बाहर थे । आते ही पूछा कि बहू रो क्यों रही है? रजनी की सास ने सारा हाल बताया । वे बोले आज फिर ! जरूर कोई बात है । इनके मायके संदेश भिजवा दो कि आकर ले जाएँ और ओझाई कराएँ । यह आफत मेरे वश की नहीं है ।

---------

डॉ. एस. के. पाण्डेय,

समशापुर (उ.प्र.)।
ब्लॉग: श्रीराम प्रभु कृपा: मानो या न मानो URL1: http://sites.google.com/site/skpvinyavali/

*********

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------