एस. के. पाण्डेय की लघुकथा - आफत

आफत

रजनी गौने के बाद दूसरी बार अपने ससुराल में आई हुई थी । एक दिन घर की सफाई कर रही थी कि बिच्छू ने डंक मार दिया । उसकी छोटी ननद ने दौड़कर अपने माताजी को बताया । रजनी की सास और सभी ननदें आँगन में इकट्ठा हो गईं । बड़ी ननद बोली अभी कुछ देर पहले मैं उसी कमरे में थी, न कहीं बीछी थी न बीछा । उसकी सास बोली चलो चूल्हा-चौका की तैयारी करो । इनका तो दो दिन का इंतजाम हो गया ।

घर में यही सब चल रहा था । इतने में रजनी का छोटा देवर बिच्छू डंसने पर झाड़-फूँक करने वाली रमिया चाची को बुला लाया । वे झाड़ –फूँक करके चली गईं । पूरे गाँव में यह घटना छा गई । कई लोग खबर लेने के लिए आने-जाने लगे ।

रजनी ने दूसरे दिन से ही घर का काम-काज सँभाल लिया । लेकिन तीसरे ही दिन उसी कमरे में सफाई करते समय बिच्छू ने फिर से रजनी को डंक मार दिया । सारे घर में हलचल मच गई । रजनी की सास ने दौड़कर छोटे बेटे का कान पकड़ा और बोली आज कहीं मत जाना । सब लोग यहाँ-वहाँ बात करने लगे कि अभी परसों ही बिच्छू ने डंक मारा था । और आज उसी कमरे में और उसी आदमी को फिर से बिच्छू ने डंक मार दिया ।

रजनी की बड़ी ननद बोली अम्मा लगता है कि जैसे घर में और कोई आदमी ही नहीं है । या फिर बिच्छू और रजनी का आपस में कोई सांठ-गाँठ है । हमारे तो पल्ले ही नहीं पड़ रहा है कि उन्हीं को बार-बार बिच्छू क्यों काट खाता है ?

रजनी के ससुर कहीं बाहर थे । आते ही पूछा कि बहू रो क्यों रही है? रजनी की सास ने सारा हाल बताया । वे बोले आज फिर ! जरूर कोई बात है । इनके मायके संदेश भिजवा दो कि आकर ले जाएँ और ओझाई कराएँ । यह आफत मेरे वश की नहीं है ।

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डॉ. एस. के. पाण्डेय,

समशापुर (उ.प्र.)।
ब्लॉग: श्रीराम प्रभु कृपा: मानो या न मानो URL1: http://sites.google.com/site/skpvinyavali/

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