शुक्रवार, 16 मई 2014

ललिता भाटिया की लघुकथा - पत्थर दिल

-- पत्थर दिल

आज राधा काम पर नहीं जा सकी थी । कल उस के बेटे राजू के स्कूल में छुट्टी थी सो वो राजू को अपने साथ कोठी पर ले गई थी सोचा वो अंदर काम करेगी तब तक राजू बहार लान में खेलता रहेगा । उस समय वो टामी के बारे में बिलकुल ही भूल गई थी । टामी राधा को तो पहचानता था पर राजू उस के लिए अनजान था सो मौका मिलते राजू पर झपट पड़ा उसे २ ३ जगह काट लिया । काम छोड़ राधा बेटे को मेडिकल ले गई काफी डांट फटकार के बाद आखिर एक नर्स ने इंजेक्शन लगा दिया । तभी उसे लगा बाहर कोई हे देखा तो दरवाजे पर मालकिन खड़ी  है । मन में उम्मीद कि किरण जगी । सोचा आज राजू के लिये कुछ फल लाएगी । मालकिन आप आइये ,वो बोली

आना छोड़ हम तो ये जानने आये हे कहीं तुम्हारे बेटे को और कोई बीमारी तो नहीं जैसे टी बी ,अस्थमा

नहीं मालकिन मेरा राजू एकदम स्वस्थ हे ।

ओह थैंक गॉड मुझे डर था कहीं तुम्हारे बच्चे को कोई बीमारी

हुई तो उसे काटने से मेरा टौमी बीमार न हो जाये । अच्छा में चलती हूं तुम राजू का ध्यान रखना मैंने दूसरी काम वाली रक्ख ली हे राधा बुत बनी पत्थर दिल औरत को जाते देखते रही ।

7 blogger-facebook:

  1. अखिलेश चन्द्र श्रीवास्तव8:37 pm

    ललिता भाटिया जी की कहानी पत्थर दिल
    बहुत मार्मिक लगी ऐसे लोग संसार में होते हैं
    जो पूरी तरह से संवेदनाहीन होते हैं अछि लहनी के लिये बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  2. जमाने के चलन से मिलतू डजुलती .. वास्तविकता के निकट अच्छी कहानी.

    उत्तर देंहटाएं
  3. लघुकथा कि सबसे बड़ी विशेषता यही है कि कम शब्दो में भी गहरा प्रभाव होता है इस दृस्टि से लेखिका ने सफलतापूर्वक निर्वहन किया है.

    उत्तर देंहटाएं
  4. लघुकथा कि सबसे बड़ी विशेषता यही है कि कम शब्दो में भी गहरा प्रभाव होता है इस दृस्टि से लेखिका ने सफलतापूर्वक निर्वहन किया है.

    उत्तर देंहटाएं
  5. मार्मिक कहानी

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------