सोमवार, 19 मई 2014

एस. के. पाण्डेय की लघुकथा - बुरा मत मानना

बुरा मत मानना

रामकेवल की संस्था में ‘बुध पूर्णिमा’ का त्यौहार मनाया जा रहा था । बॉस ने कहा कि हम खुद सेकुलर हैं और हमारी संस्था भी सेकुलरिज्म में विश्वास करती है । अभी हमने ‘गुडफ्रायडे’ मनाया था, उसके पहले ‘ईद’ का त्यौहार मनाया गया था । अपने सेकुलर होने पर गर्ब महसूस करते हुए बॉस ने बोलना बंद किया ।

बॉस के बाद अन्य लोगों ने भी कुछ न कुछ बोला, सबने बॉस की तारीफ के पुल बाँधे । जब रामकेवल का नाम बोला गया तो पहले उसने मना कर दिया । बाद में जोर देने पर वह स्टेज पर आया ।

रामकेवल ने बोलना शुरू किया ‘मैं इसलिए स्टेज पर नहीं आ रहा था क्योंकि हमे ‘बौद्ध धर्म’ के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है । मेरा मानना है कि पर्याप्त जानकारी के बिना किसी के बारे में कुछ भी नहीं बोलना चाहिए । लेकिन सर ने कहा कि थोड़ा-बहुत कुछ भी बोलो तो मैं इतना ही कहना चाहता हूँ कि मैं हिंदू हूँ । यदि हिंदू धर्म के बारे में बोलने का मौका मिले तो थोड़ा-बहुत बोल सकता हूँ’ ।

उसकी यह बात सुनकर उसके कई साथियों ने आपस में कानाफूसी करना शुरू कर दिया कि अब इसका तो पत्ता साफ समझो । यह सठिया गया है । खुले मंच पर और सेकुलर बॉस के सामने बोल रहा है कि मैं हिंदू हूँ ।

रामकेवल ने बॉस को देखते हुए आगे बोला ‘साहब बुरा मत मानना हमारी संस्था विभिन्न धर्मों के त्यौहार मनाती है । यह अच्छी बात है । यह हमें भी अच्छा लगता है । लेकिन हमारा संबिधान भी कहता है कि हमे किसी के भी धार्मिक भावना को ठेस नहीं पहुँचानी चाहिए । मुझे इस संस्था में आए हुए एक वर्ष हो चुका है, लेकिन अब तक हिंदू धर्म का एक भी त्यौहार नहीं मनाया गया । ऐसा क्यों हो रहा है’ ?

राम केवल ने आगे कहा ‘अभी हाल में ‘श्रीराम नवमी’ का त्यौहार आया था, वह भी नहीं मनाया गया । साहब बुरा मत मानना किसी को पहुँचती हो यह नहीं लेकिन संस्था के इस रुख से हमारी धार्मिक भावना को ठेस पहुँचती है । मेरा कहना है कि यदि हम मनाएँ तो सभी धर्मों के त्यौहार मनाएँ अन्यथा संस्था में त्यौहार मनाने की परम्परा को ही खत्म कर दें । लगता है मैं कुछ अधिक ही बोल गया । सभी को बुध पूर्णिमा की बधाई । धन्यबाद’ ।

---------

डॉ. एस. के. पाण्डेय,

समशापुर (उ.प्र.)।
ब्लॉग: श्रीराम प्रभु कृपा: मानो या न मानो URL1: http://sites.google.com/site/skpvinyavali/

*********

4 blogger-facebook:

  1. बुरा मानना भी नहीं चाहिये ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. अखिलेश चन्द्र श्रीवास्तव8:38 pm

    पाण्डेय जी की कहानी सच पर आधारित है
    रामकेवल का यह कहना एकदम सही है
    हिन्दू विरोधी होना ही तथाकथित सेकुलरिज्म
    की खास पहिचान है और हिन्दुओं की कायरता की भी वर्ना क्या कोई भो उन्हें नेगलेक्ट करने
    की हिम्मत कर सकता है जबकि वे बहु संख्यक
    भी हैं इस अच्छी लघुकथा के लिये मेरी बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  3. धर्मनिरपेक्षता पर केंद्रित लघुकथा 'बुरा मत मानना ' सन्देश देने में कामयाब रही .

    उत्तर देंहटाएं
  4. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------