शुक्रवार, 2 मई 2014

सुशील यादव का व्यंग्य - आवारा कुत्तों का रोड शो .....

आवारा कुत्तों का रोड शो .....

मार्निग-वाक में डागी ‘सीसेंन’ को घुमाने का काम फिलहाल मेरे जिम्मे आ गया है।

रास्ते में दीगर कुत्तों से बचा के निकाल ले जाने का टिप, गणपत ने जरूर दिया था, मगर प्रेक्टिकल में तजुर्बा अलग होता है।

एक हाथ में डंडा,एक हाथ में पटटा पकडे, कुत्ते के बताए रास्ते में खुद खिचते चले जाओ। सामने आये दूसरी नस्ल की बिरादरी वालो को भगाते रहो।

उस दिन शर्मा जी साथ हो लिए ,पूछे कौन सा है ?मैंने कहा अल्शेशियन।

 

कितने का लिए ? मैंने कहा ,एक मित्र के यहाँ बोल रखा था ,उनने दिलवाया। वे बोले; और कोई मिले तो दिलवाइए हमें भी ।

मैंने कहा ,शर्मा जी ,कंझट का काम है कुत्ते का शौक करना। अपना बस चले तो अभी ये पट्टा आपको थमा के छुट्टी पा लें ,मगर पिंटू का शौक है; सो खींचे जा रहे हैं।

वैसे भी आप मांस-मच्छी,अंडा कहाँ खिला पाओगे ,ये नस्ल तो इनके बिना गाय माफिक हो जायेगी।

शर्मा जी नान वेज पर टिक नहीं पाए; वे राजनीति में उतर आये। क्या कहते हैं ?किसकी बनेगी ?

मैंने कहा जो ज्यादा भौक ले वही मैदान से दूसरों को खदेड़ने के काबिल होता है ,आपका क्या कहना है ?

आपकी बात तो सही है। आजकल टी वी देख-देख ,सुन सुन के तो कान पाक गए हैं। ये तो अच्छा है कि आई पी एल वाले सम्हाल ले रहे हैं ,आप इंटरेस्ट रखते हैं न, क्रिकेट में ?

 

मैंने कहा हाँ ,क्यों नहीं, सीसेंन उधर नही ....रास्ते में चलो ....।

शर्मा जी ने कहा आपकी बात समझ लेता है ,देखो रास्त में आ गया।

मैंने कहा शर्मा जी यही तो खूबी है इन कुत्ते लोगो की।

भौकते जबरदस्त हैं ,दौड़ाएंगे भी खूब, मगर जब तक मालिक न कहे काटेंगे नहीं।

आगे देखिये...... ,वे जो कुछ आवारा कुत्ते आ रहे हैं कैसे गुर्रायेगे इस पर....... लगेगा अकेला आये तो नोच लेगे........।

मगर वहीँ ,जब हमारा अल्शेशियाँ एक गुर्रायेगा तो दुम दबा के भाग खड़े हो जायेंगे स्साले .....।

शर्मा जी को तत्कालिक परिणाम भी देखने को मिल गया।

 

चक्रव्यह की माफिक, आवारा रोड छाप कुत्तों से, अल्शेशियन सीसेन घिर गया। ,वो थोडा सहमा मगर जैसे ही हमने हिम्मत दी, वो उन सब पर भरी पडने लगा।

आवारा कुत्ते आपनी रोड शो रैली को, दूसरी गली की तरफ ले गए।

मैंने कहा देखा शर्मा जी ,यही हमारे इधर भी हो रहा है। रैलियां देख के हम अंदाजा लगा लेते हैं उमीदवार में दम है। जब तक कोई ताल ठोंक के सामने आके नहीं गुर्रायेगा जनता बेचारी भ्रम पाले रहेगी और अपना वोट देते रहेगी।

हमारा मानना है ,आप क्वालिटी देखो नस्ल देखो ,दमखम देखो। ये नहीं कि चोर,उठाईगीर धोखेबाज ,सुपारी-किलर ,ब्लेक मार्केटियर ,दलाल-ठेकेदार कोई भी टिकट हथिया ले, और उसे आप चुन लो।

 

शर्मा जी आजकल यही सबकुछ हो रहा है।

एक ने भाषण झाडने में महारत हासिल कर ली,दूसरे ने पोल खोलने की विद्या सीख ली, और बन गए राजनीति के दिग्गज पंडित । गुंडे-मवाली,घूसखोरो से देश को बचाओ भइ ... बहुत हो गया।

इतनी देर खड़े गपियाने में, सीसेन कब दिशा मैदान से फारिग हो गया ,पता ही नहीं चला।

 

सुशील यादव

न्यू आदर्श नगर दुर्ग (छ ग)

 

1.5,14

3 blogger-facebook:

  1. बहुत ही सम-सामयिक और तीखा व्यंग्य...बधाई....प्रमोद यादव

    उत्तर देंहटाएं
  2. अखिलेश चन्द्र श्रीवास्तव5:14 pm

    वाह भाई सुशील क्या करारा व्यंग है हमारी चुनावी रैलियों और रोज रोज के रोड शो पर अपने दल की नीतियों और किये गये जन कल्याणों का प्रचार करने के बजाय एक दूसरे को गरियाने और बदनाम करने पर लगे रहतें हैं
    जिसकी आपनेबहुत सुन्दर तुलना की है बधाई

    उत्तर देंहटाएं

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