बुधवार, 25 जून 2014

शैलेन्द्र नाथ कौल की बाल कहानी - मन्टू और चन्टू

 

सिद्धपुर गांव में दो जुड़वा भाई मन्टू और चन्टू रहते थे । दोनों का बचपन बहुत कठिनाइयों में बीता । जब वे पांच वर्ष के थे तभी उनके पिता दयाराम की मृत्यु गांव में फैली महामारी में हो गयी थी । मां पार्वती ने लोगों के खेतों में मज़दूरी कर उन्हे पाला । दस वर्ष के होने के कुछ दिनों के बाद ही उनकी मां भी एक सड़क दुर्घटना में चल बसीं और दोनों अनाथ हो गये ।

दोनों भाई एक दूसरे को ढाढ़स बंधाते और आगे के जीवन के बारे में सोचते लेकिन कुछ सोच न पाते । कुछ दिन तो गांव के लोगों ने उन्हें खाने को दिया परन्तु फिर कतराने लगे । मन्टू बहुत सीधे और सरल स्वभाव का था और चन्टू बहुत समझदार और चतुर था । कई बार दोनों को भूखे पेट ही सोना पड़ता लेकिन उनके मन में कभी भी किसी प्रकार की चोरी या बेईमानी करने का विचार नहीं आता । वे मेहनत और ईमानदारी से जीना चाहते थे पर इतनी छोटी उम्र में उन्हें कोई काम ही नहीं देता था ।

एक दिन दोनों ज़मींदार के आम के बाग़ के पास घूम रहे थे । ज़मींदार के नौकरों ने उन्हें यह सोच कर पकड़ लिया कि वे बाग़ से आम चुराने आये हैं । उन्होने ने बहुत विनती की कि वे चोर नहीं हैं, वे तो अनाथ हैं और काम की खोज में भटक रहे हैं । नौकरों ने उनकी एक न सुनी और दोनों को पकड़ कर ज़मींदार के सामने पेश किया । ज़मींदार को दोनों ने अपनी कठिनाइयों के बारे में बताया और प्रार्थना की कि वे उन्हें कुछ काम दिला दें । ज़मीदार को उनकी आयु और भोली सूरत देखकर उन पर दया आ गयी । उसने पूछा - ''तुम दोनों क्या काम कर सकते हो ?'' यह सुन चन्टू ने मन्टू के कान में कुछ फुसफुसा दिया । फिर चन्टू बोला - ''बाबू साहब, मेरा भाई बहुत सीधा है यह कुछ भी कह देता है और मैं उसे सही सिद्ध कर देता हूँ । हम सिद्धपुर के रहने वाले हैं न ।''

ज़मींदार ने कहा - ''वह कैसे सिद्ध करोगे ?''

चन्टू ने मन्टू के कान में फिर कुछ कहा और मन्टू बोला - ''बाबू साहब, जब हम दोनों छोटे थे तो गर्मी में पिताजी खजूर के पेड़ के पत्तों के पास चारपायी डाल कर बैठते थे । खजूर के पत्ते हिलते तो बड़ी अच्छी हवा लगती थी और बड़ा मज़ा आता था । '' इतना कह कर मन्टू चुप हो गया और चन्टू की ओर देखने लगा । चन्टू के चहरे पर ख़ुशी की लहर तैर रही थी ।

ज़मींदार सोचने लगा कि खजूर का पेड़ इतना लम्बा होता है, उसके पेड़ के पत्तों के पास चारपायी कैसे डाली जा सकती है ? उसने हैरानी से पूछा - ''ऐसा कैसे हो सकता है ?''

चन्टू तुरन्त बोला - ''हो सकता है बाबू साहब । हमारे घर  के आँगन में एक कुआँ था । पिताजी बताते थे कि उनसे बचपन में खजूर की एक गुठली कुएं में गिर गयी थी । उस गुठली से खजूर का पेड़ निकल आया वही बड़ा होकर उपर तक आ गया । बस , कुएं के किनारे चारपायी बिछाते थे और ठंडी हवा खाते थे । ''

 

चन्टू का यह उत्तर सुनकर ज़मींदार उसकी समझदारी और आपसी प्रेम देख कर बहुत प्रभावित हुआ । उसने अपने मुंशी से कहा कि वह इन दोनों बच्चों के रहने, खाने और पढ़ाई की व्यवस्था करवा दें । दोनों ने ख़ूब पढ़ाई की और आगे चलकर अपनी मेहनत, ईमानदारी और बुद्धिमत्ता से बहुत ख्याति प्राप्त की ।

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( मार्च-अप्रैल 2014 को बालवाणी (हिन्दी संस्थान, लखनउ) में प्रकाशित )

(शैलेन्द्र नाथ कौल)
11,बसन्त विहार
(निकट सेन्ट मेरी इन्टर कालेज)
सेक्टर-14, इन्दिरा नगर, लखनउ-226016

2 blogger-facebook:

  1. शैलेन्द्र नाथ कौल की बाल कहानी - मन्टू और चन्टू बहुत पसंद आयी . दोनों बालकों ने अपने अपने गुणो से विकट परिस्तिथि का जिस तरह से सामना किया वह बहुत प्रभावित कर गया .


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