शनिवार, 7 जून 2014

शिलांग में राष्ट्रीय हिंदी विकास सम्मेलन का भव्य आयोजन

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शिलांग में राष्ट्रीय हिंदी विकास सम्मेलन का भव्य आयोजन

पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी के तत्वावधान में दिनांक 30 मई 2014 से 1 जून 2014 तक श्री राजस्थान विश्राम भवन, लुकियर रोड, गाड़ीखाना, शिलांग में राष्ट्रीय हिंदी विकास सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। इस तरह का आयोजन अकादमी द्वारा प्रतिवर्ष मई महीने में सन् 2008 से किया जा रहा है। इसके पूर्व 2002 में भी अखिल भारतीय लेखक शिविर का आयोजन किया गया था।

उद्घाटन सत्र

दिनांक 30 मई को इस सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि श्री जी. एल. अग्रवाल, वरिष्ठ पत्रकार एवं प्रधान संपादक पूर्वांचल प्रहरी, गुवाहाटी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस सत्र में मुख्य अतिथि के अतिरिक्त अति विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री अतुल कुमार माथुर, भारतीय पुलिस सेवा, भूतपूर्व निदेशक उत्तर पूर्वी पुलिस अकादमी, उमियम, जिला रिभोई, विशिष्ट अतिथि के रूप में वैश्य परिवार मासिक पत्रिका के प्रधान संपादक श्री श्रीहरि वाणी, कानपुर, स्थानीय समाजसेवी एवं अकादमी के संरक्षक श्री ओंमप्रकाश जी अग्रवाल, पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी के अध्यक्ष श्री बिमल बजाज, संरक्षक श्री किशन टिबरीवाल, प्रबंध निदेशक, होटल पोलो टावर लि., शिलांग मंच पर उपस्थित थे। इस सत्र को दौरान अकादमी द्वारा प्रकाशित पत्रिका पूर्वोत्तर वार्ता एवं शुभ तारिका के डा. महाराज कृष्ण जैन विशेषांक सहित वैश्य परिवार पत्रिका, पावन छाया पुस्तक, वैष्य शिरोमणि भामाशाह तथा डा. महाराज कृष्ण जैन की रचनाओं का नूतन संग्रह गुरु नमन का लोकार्पण मंचस्थ अतिथियों ने किया।  इस सत्र का सफल संचालन किया डॉ. अरुणा कुमारी उपाध्याय ने। सम्मेलन के संयोजक डा. अकेलाभाइ ने अपने स्वागत में इस समारोह तथा पुरस्कारों का पूरा विवरँ प्रस्तुत किया। इस संत्र का आरंभ में कुमारी लानुला जमीरस सुश्री सुष्मिता दास, कुमारी अर्पिता चक्रवर्ती एवं साथियों ने स्वागत गीत तथा सरस्वती वंदना प्रस्तुत किया। इस सत्र के अति विशिष्ट अतिथि श्री अतुल कुमार माथुर ने अपने बीज भाषण में अकादमी की गतिविधियों से लोगों को अवगत कराते हुए कहा कि हिंदीतर प्रदेशों में हिंदी का प्रचार-प्रसार करना अत्यंत कठिन कार्य है और इस कठिन कार्य को पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी सक्रिय रूप से विगत 24 वर्षों से कर रही है। यह अकादमी सिर्फ हिंदी का प्रचार ही नहीं करती बल्कि पुस्तक प्रकाशन, विद्यालयों में गांधी शिक्षा देने आदि का कार्य भी कर रही है। इस अकादमी के हर प्रयास को सफल एवं उचित कहा जाएगा। श्री जी. एल अग्रवाल ने अपने वक्तव्य में कहा कि अकादमी का कार्य निसन्देह सराहनीय है। हिंदी प्रेमियों को सम्मानित करना और पूर्वोत्तर भारत में हिंदी का प्रचार प्रसार करना यह अत्यंत सराहनीय है। असम तथा पूर्वोत्तर भारत आठों राज्यों में पत्रकारिता की दशा और दिशा की चर्चा करते हुए कहा कि पूर्वांचल प्रहरी विगत 26 वर्षों से पूर्वोत्तर क्षेत्र में हिंदी पत्रकारिता कर रहा है। उन्होंने ने आयोजन समिति को आश्वासन दिया कि इस तरह का समारोह यदि गुवाहाटी में आयोजित किया जाता है तो हमारी तरफ से पूरा आर्थिक सहयोग प्रदान किया जाएगा। श्री ओमप्रकाश अग्रवाल, श्री श्रीहरि वाणी, श्री किशन जी टिबरीवाल ने भी अपने अपने विचार रखे और अकादमी के प्रयासों की सराहना की। इस सत्र का समापन अकादमी के अध्यक्ष श्री बिमल जी बजाज के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

काव्य संध्या

शाम 6-30 बजे से काव्य संध्या का आयोजन कानपुर उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार डा. रामस्वरूप सिंह चन्देल की अध्यक्षता में किया गया। जिसमें विभिन्न भाषाओं के कवियों ने अपनी स्वरचित कविताओं का पाठ किया। इस सत्र का संचालन श्री अजय कुलश्रेष्ठ और श्रीमती रश्मि कुलश्रेष्ठ ने किया। इस सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में मंच पर श्री अतुल कुमार माथुर, भारतीय पुलिस सेवा, भूतपूर्व निदेशक उत्तर पूर्वी पुलिस अकादमी, उमियम, जिला रिभोई उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में नेपाली भाषा के कवि एवं चित्रकार श्री विक्रमवीर थापा, साहित्य अकादेमी पुरस्कार विजेता और खासी विभाग की प्रो. स्ट्रीमलेट डखार मंच पर उपस्थित रहे। जिन कवियों ने अपनी कविताओं का पाठ किया उनमें प्रमुख थे, सर्वश्री नयन कुमार राठी, डा. सतीशचन्द्र शर्मा सुशांधु, केवलकृष्ण पाठक, सूर्य नारायण सूर्य, राधेश्याम चौबे, केदारनाथ सविता, किसान दीवान, अजय कुलश्रेष्ठ, चंद्रप्रकाश पोद्दार, रमेश चौरसिया राही, संजय अग्रवाल, श्रीप्रकाश सिंह, विशाल के. सी. बलजीत सिंह, कुमारी आईनाम इरिंग, श्रीमती मालविका रायमेधी दास, सलमा जमाल, डा. अनीता पण्डा, श्रीमती सरिता शर्मा, कुमारी मिलीरानी पाल, कुमारी मोर्जूम लोई, कुमारी गुम्पी ङूसो, श्रीमती बन्टी आशा काकति चालिहा, श्रीमती रश्मि कुलश्रेष्ठ और श्रीमती हरकीरत हीर। आभार एवं धन्यवाद ज्ञापन संयोजक डा. अकेलाभाइ ने किया। डा. अरुणा उपाध्याय और डा. अनीता पण्डा ने मंचस्थ कवियों का स्वागत फुलाम गामोछा पहना कर किया।

हिंदी संगोष्ठी

दिनांक 31 मई 2014 को पूर्वाह्न 10.30 बजे से केन्द्रीय हिंदी संस्थान की क्षेत्रीय निदेशिका प्रो. अपर्णा सारस्वत की अध्यक्षता में पूर्वोत्तर भारत में हिंदी-दशा और दिशा विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से आये 9 प्रतिभागियों ने अपने-अपने आलेख पढ़े। इस सत्र का संचालन राजीव गांधी विश्वविद्यालय की हिंदी अधिकारी कुमारी गुम्पी ङुसो ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में असम राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, गुवाहाटी के मंत्रि डा. क्षीरदा कुमार शइकीया, अति विशिष्ट अतिथि के रूप में पावरग्रीड कारपोरेशन के उप महा-प्रबंधक श्री उत्पल शर्मा, विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती सलमा जमाल और प्रेरणा भारती साप्ताहिक समाचार पत्र की संपादिका श्रीमती सीमा कुमार मंच पर उपस्थित थे। श्रीमती मालविका रायमेधा दास, कुमारी ययमुना तायेंग, श्री संजय अग्रवालस श्री हरिमोहन नेमा हरि, श्रीमती बन्ती आशा काकति चालिहा, श्रीमती सलमा जमाल, श्री किसान दीवान, कुमारी भारती लालुंग, कुमारी लानुला जमीर आदि विद्वानों ने अपने-अपने आलेख प्रस्तुत किये। अपने अध्यक्षीय भाषण में डा. सारस्वत ने कहा कि हिंदी का विकास राष्ट्र का विकास है। इस भाषा के विकास के लिए हम सभी को प्रयत्न करना चाहिए। राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए हिंदी का विकास आवश्यक है।  इस संत्र के लिए डा. अकेलाभाइ ने आभार व्यक्त किया।

अखिल भारतीय लेखक सम्मान समारोह

दोपहर 3-30 बजे से अखिल भारतीय लेखक सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि रूप के रूप में श्री अतुल कुमार माथुर, विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. क्षीरदा कुमार शइकीया, श्री कुंज बिहारी अजमेरा, श्री पवन बावरी, श्री पुरुषोत्तमदास चोखानी, अकादमी के अध्यक्ष श्री बिमल बजाज मंच पर उपस्थित थे। इस सत्र का सफल संचालन डॉ. अरुणा उपाध्याय ने किया। इस सत्र में सर्व श्री नयन कुमार राठी, हरिमोहन नेमा हरि (इंदौर), रमेश चौरसिया राही, राधेश्याम चौबे, केवलकृष्ण पाठक (बिलासपुर), डा. रामस्वरूप सिंह चन्देल, अजय कुलश्रेष्ठ, रश्मि कुलश्रेष्ठ, सुरेन्द्र जायसवाल (कानपुर), डा. सतीशचन्द्र शर्मा सुधांशु (बदायूँ), कुमारी मिलीरानी पाल, गुम्पी ङुसो, मोर्जूम लोई (अरुणाचल प्रदेश), किसान दीवान (छतीसगढ़), सीमा जैन (पंजाब), सूर्यनारायण गुप्ता सूर्य, केदारनाथ सविता, मञ्जरी पाण्डेय (उत्तर प्रदेश), बलजीत सिंह (हरियाणा), कुमारी रानी तिवारी, सलमा जमाल (म. प्र.), श्रीप्रकाश सिंह, विशाल के. सी. (मेघालय), श्रीमती बंती आशा काकति चालिहा, सोमित्रम (असम) को डॉ. महाराज कृष्ण जैन स्मृति सम्मान प्रदान किया गया। आस वर्ष का श्री केशरदेव गिनिया देवी बजाज स्मृति सम्मान सर्वश्री संजय अगवाल (सिक्किम), बिमल कुमार मिश्र, श्रीमती मालविका रायमेधी दास, श्रीमती सीमा कुमार (असम), कुमारी लानुला जमीर (नागालैण्ड) को प्रदान किया गया। श्री जीवनराम मुंगी देवी गोयनका स्मृति सम्मान 2014, श्रीमती हरकीरत हीर, डा. संतोष कुमार (असम), डा. अनीता पण्डा (मेघालय) को तथा श्री जे. एन. बावरी स्मृति सम्मान 2014, श्रीमती सरिता शर्मा, श्री चन्द्रप्रकाश पोद्दार (असम) को उनके समस्त लेखन एवं साहित्यधर्मिता के लिए प्रदान किया गया। पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी को सहयोग देने तथा हिंदी के क्षेत्र में अत्यंत सराहनीय योगदान के लिए डा. क्षीरदा कुमार शइकीया, श्री जी. एल. अग्रवाल (असम) तथा श्री श्रीहरि वाणी  (उ. प्र.) को मानपत्र से सम्मानित किया गया।

नृत्य एवं संगीत समागम

सायं 6-30 बजे से सांस्कृतिक संध्या का आयोजन संगीत नाटक अकादेमी, नई दिल्ली के सहयोग से किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में श्री अतुल कुमार माथुर, विशिष्ट अतिथि श्री सन्त कुमार टिबरीवाल (कोलकाता), श्रीमती रागिनी माथुर, श्रीमती बबीता जैन, श्री राम अवतार बजाज, दीक्षा जैन, सन्ध्या सिंह, रूना अख्तर, लीली बरुआ, श्री रतनलाल सेठिया, अनीता देब, सदन दास, श्रीमती सरोजिनी देवी, श्रीमती कुसुमलता शर्मा, श्री गणपत लाल साहू, कुमारी जमुना तायेंग, कुमारी आशा सिंह, कुमारी आईनाम इरिंग, कुमारी गुमजुम लोई, कुमारी बोमी दोके, संजू शर्मा, कुमारी जोरम अपी, कुमारी भारती लालुंग, श्रीमती उषा गुप्ता, श्री हरिशंकर जायसवाल, श्री राम शंकर गुप्ता, डा. जमालुद्दिन, श्री नरोत्तमदास दीवान, श्रीमती हेमकुमारी दीवान, श्री सतीश चन्द्र झा कुमार, कुमारी कल्याणी देब, श्री सपन भोआल, श्री रामबुझावन सिंह, श्री दीपक वर्मा, अमर कुमार, रत्नेश सिंह सहित सौंकड़ों श्रोता-दर्शक तथा सम्मानित लेखक एवं साहित्यकार उपस्थित थे। इस सत्र का सफल संचालन कुमारी मिली रानी पाल ने किया। इस नृत्य एवं संगीत समागम में भारत नाट्यम्, असम प्रदेश का लोकप्रिय बिहु लोक नृत्य, मणिपुरी लोकनृत्य, नेपाली लोक नृत्य, पंजाबी लोकनृत्य, अरुणातल प्रदेश का लोक नृत्य, आधुनिक गीतों पर आधारित नृत्य, असमीया लोकगीत, भजन, आधुनिक गीत आदि विभिन्न कलाकारों ने प्रस्तुत किया। इस संगीत और नृत्य के रंगारंग कार्यक्रम में सिंह स्टार डांस इंसिच्यूट, नॉर्थ इस्ट डान्स अकादमी, कुमारी गरीयसी, दरथी ठाकुरिया, कुमारी गुम्पी ङुसो, मोर्जूम लोई, कुमारी ज्योत्स्ना शर्मा, उत्पल शर्मा, श्रीमती रमा चोरसिया, श्रीमती श्याम कुमारी चौरसिया, श्री किसान दीवान, श्री श्रीहरि वाणी, कुमारी लानुला जमीर, श्रीमती रश्मि कुलश्रेष्ठ, श्री सुखदेव सिंह, कुमारी रोमा सिन्हा आदि कलाकारों का सराहनीय योगदान रहा। संगीत नाटक अकादेमी, नई दिल्ली एवं पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी शिलांग के संयुक्त तत्वावधान में रविवार दिनांक 11 मई 2014 को स्थानीय स्टेट सेन्ट्रल लाइब्रेरी के उ सोसो थाम प्रक्षा गृह में भव्य नृत्य उत्सव का आयोजन किया गया। इस उत्सव में कुल 298 कलाकारों ने एकल एवं समूह नृत्य की प्रस्तुति के लिए भाग लिया। इस उत्सव में शिलांग के विभिन्न नृत्य विद्यालयों के विद्यार्थियों ने भाग लिया तथा अपनी कला का प्रदर्शन किया। इस अवसर पर 85 कलाकारों को उनकी विशेष प्रस्तुति के लिए पुरस्कृत किया। प्रातः 9 बजे से रात 10 बजे तक यह उत्सव जारी रहा जिसमें 700 से अधिक दर्शक प्रेक्षा गृह में उपस्थित थे। इस अवसर पर पधारे मेघालय सरकार के अवकाश प्राप्त आरक्षी महानिदेशक श्रा अतुल कुमार माथुर ने कलाकारों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि   नृत्य हम सबके लिए जीवन का उत्सव है। इसे जोर-शोर से मनाना चाहिए। मैं दुनिया का हर नृत्य को देखता हूं। इसमें रुचि लेता हूं। हालांकि मुझे कला का हर रूप भाता है। नृत्य एवं संगीत जीवन में रस घोलता है हम में नई ऊर्जा भरता हैं।

पर्यटन एवं वनभोज

रविवार 1 जून 2014 को कुल प्रतिभागी लेखकों ने बस द्वारा मतिलांग पार्क, मौसमाई गुफा, थांगखरांग पार्क आदि स्थानों  का भ्रमण किया। बस का सफर काफी मनोरंजक था। महिला प्रतिभागियों ने रास्ते भर गीत और संगीत से इस यात्रा को सुखद और मनोरंजन-पूर्ण बना दिया। जिन लोगों ने पहली बार इस सम्मेलन में आये उनके लिए यह पर्यटन कौतूहल भरा था और सभी अपने-अपने कैमरे में क़ैद करने की कोशिश कर रहे थे। दोपहर के भोजन का आनंद सभी लेखकों ने बांगलादेश की सीमा पर लिया और रूपातिल्ली नदी को देख कर आन्नदित हुए। लेखक जब थाँगख्रांग पार्क पहुँचे तभी बरसात शुरू हो गयी। इस तरह चेरापूँजी की बरसात का आनन्द भी लेखको ने खूब उठाया।

आभार

इस सम्मेलन के आयोजन में केशरदेव गिनिया देवी बजाज चैरिटेबुल ट्रस्ट, जीवनराम मुंगी देवी गोयनका पब्लिक चैरिटेबुल ट्रस्ट, जे. एन. बावरी ट्रस्ट, महाबीर जनकल्याण निधि, मेसर्स केशरीचंद जयसुखलाल, कहानी लेखन महाविद्यालय, श्री पुरुषोत्तम दास चोखानी और श्री ओमप्रकाश अग्रवाल के सहयोग और समर्थन के लिए आयोजन समिति ने आभार प्रकट करते हुए अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।

1 blogger-facebook:

  1. हिन्दी के विकास के लिए हर राज्य में इस प्रकार के सम्मेलन किए जाने चाहिए तभी हिन्दी को सम्मानजनक स्थान दिलवाया ज सकता है |

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