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गैब्रियल गार्सिया मार्खेज़ का उपन्यास – उस मौत का रोजनामचा (3)

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गैब्रियल गार्सिया मार्खेज़ के उपन्यास Chronicle of a death foretold  का अनुवाद अनुवादक – सूरज प्रकाश mail@surajprakash.com     किश...

गैब्रियल गार्सिया मार्खेज़

के उपन्यास

Chronicle of a death foretold 

का अनुवाद

अनुवादक – सूरज प्रकाश

mail@surajprakash.com

 

  किश्त 1 | किश्त 2 |

 

2.

बयार्दो सां रोमां, वह शख्स, जिसने अपनी दुल्हन को वापिस भेज दिया था, पिछले बरस अगस्त में पहली बार आया था: शादी से छ: महीने पहले वह हफ्तावारी नाव से पहुंचा था और उसके पास चाँदी मढ़े कुछ झोले थे चाँदी की यह सजावट उसकी बेल्‍ट के बकसूए और उसके जूतों से मेल खाती थी वह तीसेक बरस का रहा होगा, लेकिन उसकी उम्र का सही अंदाजा नहीं लगाया जा सकता था इसी वजह यह थी कि उसकी छाती किसी नौसिखुए बुल फाइटर की तरह थी और आंखें सुनहरी थीं उसकी चमड़ी शोरे पर जैसे धीमी आंच पर भूनी हुई लगती थी जिस वक्‍त वह पहुंचा, उसने तंग जैकेट और उससे भी तंग पतलून पहन रखी थी। ये दोनों चीज़ें बछड़े के असली चमड़े से बनी हुई थीं और मेमने के खाल से बने उसके दस्ताने भी उसी रंग के थे। माग्‍दालेना ओलिवर भी उसके साथ उसी नाव पर आयी थी और पूरी यात्रा के दौरान एक पल के लिए भी उस पर से अपनी आंखें नहीं हटा पायी थी।

“वह परी लोक के वासी की तरह लगता था,” माग्‍दालेना ने मुझे बताया था, “और इसी बात का अफसोस था। काश, मैं उस पर मक्खन लगा कर उसे ज़िंदा खा पाती।”

ऐसा सोचने वाली सिर्फ वही अकेली लड़की नहीं थी और न ही यह महसूस करने वाली आखिरी कि बयार्दो सां रोमां उस किस्‍म का आदमी नहीं था, जिसे पहली ही नज़र में जाना जा सके।

मेरी मां ने अगस्‍त के आखिरी दिनों में मुझे स्‍कूल में एक खत लिखा था और उसमें एक चलताऊ सी टिप्पणी थी: “एक बहुत ही अजीब आदमी आया है।” अपने अगले खत में मां ने मुझे लिखा था, “हर कोई कहता है कि वह सजीला, बांका है, लेकिन मैंने उसे नहीं देखा है।”

कोई भी नहीं जानता था कि वह कहां से आया है। एक भला आदमी उससे पूछने का लोभ संवर नहीं पाया तो उसे, शादी से पहले यही जवाब मिला था, “मैं शादी के लिए तैयार लड़की की तलाश में शहर-दर-शहर भटक रहा हूं।” यह सच भी हो सकता था। वह इसी लहजे में कोई और भी जवाब दे सकता था, क्‍योंकि उसके पास बात करने का जो तरीका था, उससे बात खुलने, सामने आने के बजाये छुपती ज्‍यादा थी।

जिस रात वह पहुंचा था, उसी रात उसने सिनेमाघर में लोगों तक यह बात पहुंचा दी थी कि वह रेल इंजीनियर था। उसने कहा था कि भीतरी इलाकों में रेल मार्ग तत्काल बनाने की ज़रूरत है ताकि हम नदी के टेढ़े मेढ़े रास्तों से आगे बढ़ सकें। अगले ही दिन उसने एक तार भेजा था तो उसने खुद ही तार भेजने की मशीन चला ली थी। इसके अलावा, तार भेजने वाले क्‍लर्क को एक नुस्खा भी सिखा दिया जिसके जरिये वह पुरानी पड़ चुकी बैटरी को दोबारा इस्‍तेमाल कर सकता था।

इसी आत्म विश्वास के साथ उसने एक मिलीटरी डॉक्टर के साथ सीमावर्ती इलाकों की बीमारियों के बारे में बात की। डॉक्‍टर उन दिनों वहां जबरन सैनिक भर्ती की मुहिम पर आया हुआ था। बयार्दो सां रोमां को शोर शराबे वाले और देर तक चलने वाले उत्सव पसंद थे, लेकिन वह कुशल शराबखोर, लड़ाई झगड़ों का मध्यस्थ और पत्‍तेबाजों का दुश्मन था। इतवार के दिन, प्रार्थना के बाद, उसने सबसे अधिक कुशल तैराकों को, जो कि वहां कई एक थे, चुनौती दे डाली और नदी पार करके लौटने में सबको बीस हाथ पीछे छोड़ दिया।

मेरी मां ने ये सब कुछ मुझे एक खत में लिखा था। आखिर में उसने ये भी जोड़ दिया था, “यह लगता है कि वह स्वर्ण में तैर रहा था।” यह टिप्पणी मां ही कर सकती थी। यह बात उस समय पूर्व धारणा के उत्तर में थी कि बयार्दो सां रोमां न केवल कुछ भी करने में, बल्‍कि बेहतर तरीके से करने में सक्षम था, उसकी पहुंच भी अंतहीन स्रोतों तक थी।

अक्तूबर में मुझे लिखे अपने एक खत में मां ने उसे फाइनल आशीर्वाद दे डाला था, “लोग उसे बेहद पसंद करते हैं।” मां ने मुझे बताया था, “चूंकि वह ईमानदार है, और दिल का साफ़ है, इसलिए पिछले इतवार को उसने घुटनों पर झुक कर कम्‍यूनियन हासिल किया और लातिनी में प्रार्थना करने में मदद की।” लेकिन मेरी मां किसी भी मामले की तह तक जाना चाहती है तो इस तरह के आडम्‍बरपूर्ण ब्‍यौरे भी नोट करने की आदी हो जाती है। उस भली मानस को शायद पता ही नहीं था कि उन दिनों खड़े खड़े कम्‍यूनियन लेने की अनुमति नहीं थी और सारी चीज़ें लातिनी में ही होती थीं। इसके बावजूद, इस धार्मिक फतवे के बाद मां ने मुझे दो खत लिखे जिनमें उसने मुझे बयार्दो सां रोमां के बारे में कुछ भी नहीं लिखा। तब भी नहीं, जब सब लोगों को यह अच्छी तरह से पता चल गया कि वह एंजेलो विकारियो से शादी करना चाहता है। इस दुर्भाग्‍यपूर्ण शादी के बहुत अरसे के बाद उसने मेरे सामने ये बात स्‍वीकार की थी कि जब तक वह बयार्दो सां रोमां को जान पायी, इतनी देर हो चुकी थी कि वह अक्‍तूबर वाले अपने खत को सही कर पाती, और कि उसकी सुनहरी आंखों ने उसके भीतर डर की एक सिहरन सी भर दी थी।

“वह मुझे राक्षस की याद दिलाता था,” मां ने मुझे बताया था, “लेकिन तुमने खुद ही तो मुझसे कहा था कि इस तरह की बातें लिखनी नहीं चाहिये।”

मैं उससे मिला था। उससे मां की मुलाकात के कुछ ही अरसे बाद। तब मैं बड़े दिनों की छुट्टी पर घर आया हुआ था। मैंने उसे वैसा ही अजीब पाया जैसा लोगों ने बताया था। बेशक वह आकर्षक लगता था, लेकिन माग्‍दालेना ओलिवर ने जिस मुग्‍ध करने वाली नज़रों से उसे देखा था, उससे कोसों दूर।

वह मुझे उससे कहीं अधिक गम्भीर लगा जितनी उसकी अजीबो-गरीब हरकतें किसी को विश्वास दिलातीं। उसमें एक छुपा हुआ सा तनाव था जो उसके अच्‍छे आचरण में भी मुश्‍किल से ढका रह पाता था। इसके बावजूद, इन सब बातों के ऊपर, वह मुझे बेहद उदास आदमी लगा। उस वक्‍त तक वह एंजेलो विकारियो के आगे प्रणय निवेदन कर चुका था।

इस बात को कभी भी अच्‍छी तरह साबित नहीं किया जा सकता था कि आखिर दोनों की मुलाकात कैसे हुई होगी। जिस बोर्डिंग हाउस में बयार्दो सां रोमां रहता था, उसकी मालकिन ने बताया था कि किस तरह सितम्बर के आखिरी दिनों में बैठक में एक आराम कुर्सी पर बैठा वह झपकियां ले रहा था, तभी एंजेला विकारियो और उसकी मां दो टोकरियों में नकली फूल लिये चौक की तरफ गयीं। बयार्दो सां रोमां ने अधजगी हालत में उन दोनों औरतों को देखा जो भरी दोपहरी में दो बजे के करीब अकेले ही दो जीवित प्राणियों की तरह घने काले मातमी कपड़े पहने चली जा रही थीं। उसने जवान युवती का नाम पूछा था। मकान मालकिन ने उसे बताया था कि जवान वाली लड़की साथ चल रही औरत की सबसे छोटी बेटी है और उसका नाम एंजेला विकारियो है। बयार्दो सां रोमां ने चौक के दूसरे सिरे तक अपनी निगाहों से उन दोनों का पीछा किया। “उसका नाम बहुत अच्‍छा है।” उसने कहा। फिर उसने अपना सिर कुर्सी की टेक से लगा लिया और आंखें बंद कर लीं।

“जब मेरी नींद खुले,” उसने कहा था, “तो मुझे याद दिला देना कि मैं उससे शादी करने जा रहा हूं।”

एंजेला विकारियो ने मुझे बताया था कि बोर्डिंग हाउस की मालकिन ने, इससे पहले कि बयार्दो सां रोमां उससे मिलना जुलना शुरू करता, उसे इस सारे किस्‍से के बारे में बता दिया था। “मैं एकदम चौंक गयी थी।” तीन आदमियों ने, जो उस वक्‍त बोर्डिंग हाउस में मौजूद थे, इस घटना की पुष्टि की, जबकि अन्य चार लोग ऐसे थे जो पक्‍के तौर पर कुछ नहीं कह सकते थे।

दूसरी तरफ, इन दोनों की पहली मुलाकात को ले कर जितने भी किस्‍से थे, सारे के सारे इस बात से मेल खाते थे कि एंजेला विकारियो और बयार्दो सां रोमां ने पहली बार एक दूसरे को अक्तूबर में राष्ट्रीय छुट्टी के दिन एक चैरिटी बाज़ार के दौरान देखा था, जहां एंजेला विकारियो एक रैफल के नाम पुकारने की इन्‍चार्ज थी। बयार्दो सां रोमां बाजार में आया और सीधे उस रैफल वाले बूथ में गया। वह सिर से पैर तक मातमी बनी खड़ी थी। बयार्दो सां रोमां ने उससे सीपी जड़े म्‍यूजिक बॉक्‍स की कीमत पूछी। वह बॉक्‍स मेले का सबसे बड़ा आकर्षण रहा होगा। एंजेला विकारियो ने उसे बताया था कि यह बिक्री के लिए नहीं है बल्‍कि रैफल में दिया जाना है।

“ये तो और भी अच्‍छा है,” बयार्दो सां रोमां ने कहा था, “इस तरह से तो इसे लेना और भी आसान रहेगा और सस्ता भी।”

एंजेला विकारियो ने मेरे सामने यह बात स्‍वीकार की थी कि बयार्दो सां रोमां उस पर असर डालने में सफल तो हो गया था लेकिन इसके पीछे जो कारण थे, वे प्रेम के ठीक विपरीत थे, “मुझे दम्भी पुरुषों से घृणा होती है और मैंने कभी इतना चिपकू आदमी नहीं देखा था,” उस दिन को याद करते हुए वह बता रही थी, “इसके अलावा, मैं समझे बैठी थी कि वह पोलक है।” जब वह लॉटरी के नाम पुकार रही थी तो उसकी नाराज़गी बहुत बढ़ गयी थी। सब लोग इससे चिंता में पड़ गये थे। तय था, रैफल बयार्दो सां रोमां ने ही जीता था। वह इस बात की कल्‍पना भी नहीं कर सकती थी कि सिर्फ़ उसे प्रभावित करने के लिए बयार्दो सां रोमां ने रैफल के सारे के सारे टिकट खरीद लिये थे।

उस रात जब एंजेला विकारियो घर लौटी उसने गिफ्ट पैकिंग में म्‍यूजिक सिस्‍टम को वहीं मौजूद पाया। उपहार मखमली फीते से बंधा था।

“मैं कभी इस बात का पता नहीं लगा पायी कि उसे पता कैसे चला कि उस रोज़ मेरा जन्मदिन था।” एंजेला विकारियो ने मुझे बताया था। उसके लिए अपने माता-पिता को विश्वास दिलाना मुश्‍किल हो गया था कि उसने बयार्दो सां रोमां से इस तरह की कोई बात नहीं की थी कि उसे ऐसा उपहार भेजा जाता और वो भी इतने खुले आम जो किसी की भी निगाहों से छुपा नहीं रह पाया था। इसलिए उसके दोनों भाइयों, पैड्रो और पाब्‍लो ने म्‍यूजिक सिस्‍टम उठाया और उसे उसके मालिक को वापिस करने के लिए होटल ले गये। वे दोनों इतनी हड़बड़ी में गये और आये कि न तो वहां उन्‍हें किसी ने न जाते देखा और न ही वापिस आते ही।

चूंकि एक ही बात ऐसी थी जिसका यह परिवार अंदाजा नहीं लगा पाया था, वो था बयार्दो सां रोमां का सम्मोहक आकर्षण, जिसकी वजह से दोनों जुड़वां भाई अगले दिन की सुबह तक वापिस ही नहीं लौटे। वे नशे में धुत्‍त थे। वे एक बार फिर अपने साथ म्‍यूजिक बॉक्‍स उठा लाये थे और इसके अलावा उनके साथ था बयार्दो सां रोमां, जो अब उनके घर आकर मौज मजा कर सकता था।

एंजेला विकारियो परिवार की सबसे छोटी लड़की थी। परिवार की आय के सीमित साधन थे। उनका पिता पोंसियो विकारियो गरीब लोगों का सुनार था। अपने परिवार का सम्‍मान बनाये रखने के लिए सोने का बारीक काम करते-करते उसकी आंखों की रोशनी जाती रही थी। पुरिसिमा देल कारमैन, उसकी मां, शादी से पहले तक स्‍कूल में पढ़ाती रही थी। उसकी विनम्र और कुछ कुछ विपदाग्रस्त नज़र उसके चरित्र की ताकत को बखूबी छुपा जाती थी।

“वह नन, मठवासिनी जैसी लगती थी।” मर्सीडीज ने याद करते हुए कहा था। उसने अपने पति की देखभाल में और बच्‍चों को बड़ा करने में त्याग की जिस भावना के साथ खुद को खपा डाला था, उससे कई बार याद ही नहीं रहता था कि वह जीती भी है या नहीं। एंजेला विकारियो की दोनों बड़ी बहनों की शादी बहुत देर से हुई थी। जुड़वां भाइयों के अलावा, उनकी, बीच की एक और बहन भी थी जो रात्रिक ज्‍वर से जाती रही थी। दो बरस बीत जाने के बाद भी वे अब तक उसका सोग मना रहे थे। घर के भीतर तो इस मातम में थोड़ी बहुत ढील दे भी दी जाती, लेकिन गली में इसका कड़ाई से पालन किया जाता। दोनों भाइयों को ढंग का आदमी बनाने के हिसाब से पाला पोसा जा रहा था और लड़कियों के शादी-ब्याह हो सकें, इसलिए उन्‍हें परदों की कशीदाकारी, सीना पिरोना, तरह-तरह की लेस बनाना, कपड़े धोना, इस्‍त्री करना, नकली फूल और कैंडी बनाना और सेहरे लिखना बखूबी सिखाया गया था। ये लड़कियां दूसरी लड़कियों की तरह नहीं थीं जो मृत्यु की उपासना की परवाह नहीं करती थीं। ये चारों बहनें मरीजों के सिरहाने बैठने, मरणासन्न लोगों को आराम दिलाने और मरों हुओं को कफन ओढ़ाने की पुरानी परम्‍परा की कुशल नायिकाएं थीं। उनके बारे में बस, एक ही बात मेरी मां को अखरती थी। वो थी रात को सोने के पहले कंघी करना।

“बच्चियो,” मेरी मां उनसे कहा करती, “रात को बाल मत बनाया करो, इससे समुद्र में नाव चला रहे नाविकों की गति धीमी होती है।” इसके अलावा मेरी मां का मानना था कि उनसे बेहतर पाली पोसी गयी लड़कियां और कोई नहीं थीं। “वे आदर्श लड़कियां हैं,” मेरी मां को अक्‍सर कहते सुना जा सकता था, “कोई भी आदमी उनके साथ सुखी रहेगा क्‍योंकि उन्‍हें तकलीफें झेलने के लिए ही पाला पोसा गया है।” इसके बावजूद उनके दोनों बहनोई उन्‍हें कभी भी फुसला बहला नहीं सके। इसकी वजह यह थी कि वे जहां भी जातीं, एक साथ ही जाती थीं और वे सिर्फ औरतों के डांस का इंतज़ाम करती थीं और वे पुरुषों की चालबाजियों में छुपी नीयत ताड़ने में हमेशा उद्यत रहती थीं।

एंजेला विकारियो चारों भाई बहनों में सबसे ज्‍यादा प्‍यारी थी। मेरी मां कहा करती थी कि वह महान ऐतिहासिक महारानियों की तरह अपनी गर्दन पर लिपटी नाभि नाल के साथ जन्‍मी थी। लेकिन एंजेला विकारियो में बेचारगी का-सा भाव था और उसकी आत्‍मा इतनी प्रदीप्‍त नहीं थी जिसकी वजह से उसके लिए भविष्‍य के अनिश्‍चित होने की आशंकाएं बढ़ गयी थीं। मैं उसे बड़े दिन की छुट्टियों में साल दर साल देखा करता और वह हर बार अपने घर की खिड़की में पहले से ज्‍यादा दीन हीन लगती। खिड़की में वह दोपहरियों में अपनी पड़ोसिनों के साथ बैठी कपड़े के फूल बनाती रहती और वाल्‍ट्ज के अकेले गाये जाने वाले गीत गाती रहती।

“रिश्‍ते की तुम्‍हारी बहन को,” सैंतिएगो नासार कहा करता, “कोई न कोई ज़रूर फांसेगा।” अचानक ही, उसकी बहन के सोग से पहले, मैं गली में उसकी बगल से गुज़रा। मैंने उसे पहली बार एक भरपूर औरत की तरह कपड़े पहने और बाल घुंघराले किये देखा। मैं मुश्‍किल से यकीन कर पाया था कि यह वही लड़की है। लेकिन यह एक क्षणिक दृश्य था: आत्‍मा की उसकी दरिद्रता बरस बीतने के साथ साथ बढ़ती गयी। यहां तक कि जब यह पता चला था कि बयार्दो सां रोमां उससे शादी करना चाहता है तो कई लोगों को लगा, यह एक बाहरी आदमी के साथ विश्वासघात है।

परिवार ने इसे न केवल गम्‍भीरता से लिया बल्‍कि अति उत्‍साह से स्‍वीकार भी किया। पुरा विकारियो के सिवाय, जिसने यह शर्त लगा दी थी कि बयार्दो सां रोमां खुद का ढंग से परिचय वगैरह दे। तब तक तो किसी को पता भी नहीं था कि वह है कौन। उसका अतीत उस दोपहर से पीछे नहीं गया था जब वह अभिनेता की-सी पोशाक में नाव से उतरा था। वह अपने मूल स्थान आदि के बारे में इतना घुन्ना था कि वह जितनी भी दूर की कौड़ी लाता, उसे सच मान लिया जाता। यह कहा जाने लगा था कि ट्रुप कमांडर के रूप में उसने कासानारे में गांव के गांव मटियामेट कर डाले थे और वहां आतंक बरपा दिया था, कि वह डेविल्‍स द्वीप से भागा हुआ था और कि उसे पेरनाम्‍बुको में प्रशिक्षित भालुओं के जोड़े के साथ रहने की कोशिश करते हुए देखा गया था और कि वह विंड वार्ड चैनल में डूब गये सोने से लदे एक इस्‍पानी जहाज का सारा साज़ो सामान बाहर निकाल कर लाया था। बयार्दो सां रोमां ने इन सारी अटकलों पर एक मामूली-सा काम करके पर्दा डाल दिया था। वह अपना पूरा परिवार ले आया था।

वे कुल मिला कर चार जने थे: पिता, मां और दो बहनें। वे एक मॉडल टी फोर्ड गाड़ी में पहुंचे। गाड़ी पर सरकारी प्‍लेटें लगी हुई थीं। दिन के ग्‍यारह बजे इस गाड़ी के बत्‍तख की आवाज़ जैसे हॅार्न ने पूरी गली को जगा दिया। उसकी मां अलबेर्ता सिमाण्‍ड्स कुराफेओ की रहने वाली हट्टी कट्टी संकर नीग्रो औरत थी। वह पापियामेंटों बोली का पुट लिये इस्‍पानी भाषा बोलती थी। जवानी के दिनों में उसे एंटीलेस नगर की दो सौ सबसे सुंदर औरतों में से सर्वाधिक सुंदर औरत का खिताब दिया गया था। दोनों बहनें, जो जवानी की दहलीज पर कदम रख ही रही थीं, बेचैन बछेड़ियों की तरह थीं। लेकिन सबसे बड़ा आकर्षण पिता थे: जनरल पेत्रोनियो सां रोमां। वे पिछली सदी के गृह युद्ध के हीरो थे। वे कंजर्वेटिव सत्ता के उन प्रमुख गौरवों में से एक थे जिन्‍होंने तुकुरिंका को मटियामेट कर दिया था और कर्नल ऑरलिएनो को लड़ाई के लिए ललकारा था। अकेली सिर्फ मेरी मां ही ऐसी थी जो यह पता चलने पर कि वह कौन था, उससे मिलने नहीं गयी थी।

“मुझे यह ठीक-ठाक लगता है कि उन दोनों का ब्याह हो जाये,” मेरी मां ने मुझे बताया था, “लेकिन यह एक बात है और यह बात बिलकुल जुदा है कि ऐसे शख्स से हाथ मिलाया जाये जिसने मेरीनेल्‍डो मार्खेज़ की पीठ पर गोली मारने के आदेश दिये थे।”

जैसे ही जनरल अपनी कार की खिड़की में सफेद हैट हिलाता नज़र आया, सबने उसे, उसकी तस्‍वीरों की प्रसिद्धि की वजह से पहचान लिया। उसने सफेद रंग का सूती सूट, ऊंचे तस्‍मों वाले कार्डोवा चमड़े के जूते और सुनहरी फ्रेम वाला चश्मा पहने हुए थे। उसका चश्मा उसकी नाक पर एक बकसूए के सहारे टिका हुआ था और इसी से एक चेन जुड़ी हुई थी जो उसकी वास्‍केट के बटन होल तक जाती थी। उसने अपनी छाती पर शौर्य के पदक लगा रखे थे और वह एक छड़ी लिये हुए था जिसकी मूठ पर राष्ट्रीय प्रतीक उकेरा हुआ था। गाड़ी में से सबसे पहले वही उतरा था। वह सिर से पाँव तक हमारी खस्‍ताहाल सड़कों की बदन जलाती धूल से लिथड़ा हुआ था। इसे सिर्फ इतना ही करना था कि चलती गाड़ी के पायदान पर खड़ा हो जाये ताकि हर कोई विश्वास कर ले कि बयार्दो सां रोमां ने जिस किसी को भी चुना है, उससे वह शादी करने जा रहा है।

सिर्फ़ एंजेला विकारियो ही ऐसी थी जो उससे शादी नहीं करना चाहती थी।

“वह मेरे लिए कुछ ज्‍यादा ही मर्दाना लगता है।” एंजेला विकारियो ने मुझे बताया था। बयार्दो सां रोमां ने तो उससे प्रणय निवेदन तक की कोशिश नहीं की थी, लेकिन उसने उसके परिवार वालों को अपने आकर्षण के मोह पाश में बाँध रखा था। एंजेला विकारियो उस रात के आतंक को कभी भूल नहीं पायी जब उसके माता-पिता, उसकी दोनों बहनें और उनके पति बैठक में इकट्ठे हुए थे और उस पर यह फरमान जारी कर दिया गया कि वह एक ऐसे शख्स से शादी करे जिसे उसने ढंग से देखा भाला भी नहीं था। दोनों जुड़वां भाई इस मामले में अलग ही रहे।

“हमें यह लफड़ा औरतों वाली समस्याओं जैसा लगा।” पाब्‍लो विकारियो ने मुझे बताया था। माता-पिता का निर्णायक तर्क ये था कि गुज़र बसर कर सकने लायक इस इज्ज़तदार परिवार के पास किस्‍मत के इस पुरस्कार को ठुकरा देने का कोई हक नहीं था। एंजेला विकारियो किसी तरह साहस करके बयार्दो सां रोमां के प्रति प्यार के अभाव से होने वाली असुविधा की ओर संकेत कर पायी थी, लेकिन उसकी मां ने इस डर को एक ही वाक्य कह कर हवा में उड़ा दिया – प्यार सीखा भी तो जा सकता है।

उस समय की सगाइयों के विपरीत, जब सगाई और शादी के बीच वाला लम्बा अंतराल रहता था और जिन पर निगरानी रखी जाती थी, इन दोनों की सगाई और शादी के बीच का अरसा बयार्दो सां रोमां के आग्रह पर मात्र चार महीने का रहा। यह अरसा कम भी नहीं था, क्‍योंकि पुरा विकारियो की मांग थी कि वे पारिवारिक सोग पूरा होने तक इंतज़ार करें।

लेकिन यह वक्‍त भी बिना किसी चिंता के इस वजह से गुज़र गया कि बयार्दो सां रोमां ने सारी चीज़ों का इंतज़ाम सम्मोहक तरीके से कर लिया।

“एक बार उसने मुझसे पूछा कि मुझे कौन-सा घर अच्‍छा लगता है,” एंजेला ने मुझे बताया था, “और मैंने कारण पूछे बिना ही बता दिया था, “शहर में सबसे प्यारा घर तो विधुर जीयस का फार्म हाउस है।” मैं खुद भी उसी घर का नाम लेता। यह घर उस पहाड़ी पर था जहां खूब हवाएं चलती थीं। आप टैरेस पर बैठ कर बैंजनी पवन पुष्पों से ढके दलदल के अंतहीन स्वर्ग का नज़ारा देख सकते थे। साफ़ गर्म दिनों में, वहां से कैरिबिया का साफ़ स्वच्छ क्षितिज और कार्टालेना दे इंडियाज से आने वाले यात्री जहाज साफ़ साफ़ नज़र आते थे। उसी रात बयार्दो सां रोमां सोशल क्‍लब में गया और डोमिनो के खेल पर हाथ आजमाने के लिए विधुर जीयस की मेज़ पर जा बैठा।

“विधुर महाशय” उसने जीयस से कहा था, “मैं आपका मकान खरीदूंगा।”

“यह बिक्री के लिए नहीं है।” विधुर जीयस ने जवाब दिया।

“मैं इसे मय साज़ो सामान के खरीदूंगा।”

विधुर ने उसे पुराने दिनों की भलमनसाहत के साथ समझाया कि घर के भीतर रखी चीज़ें उसकी बीवी ने पूरी ज़िंदगी त्याग करके जुटायी थीं और वे उसके लिए अभी भी अपनी मरहूम बीवी का हिस्‍सा ही हैं।

“वह अपने दिल पर हाथ रख कर बात कर रहा था।” मुझे यह बात दियोनिसियो इगुआरां ने बतायी थी जो उस वक्‍त उनके साथ खेल रहा था, “मुझे यकीन था कि जिस घर में वह तीस बरस से भी ज्‍यादा से सुखपूर्वक रह रहा था, उसे बेचने के लिए हां करने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया होता।”

बयार्दो सां रोमां को भी उसकी वजहें समझ में आ गयी थीं।

“ठीक है तो फिर, मुझे खाली घर ही बेच दो।” बयार्दो सां रोमां ने कहा था।

लेकिन विधुर खेल के अंत तक अपना बचाव करता रहा था। तीन रातों के बाद एक बार फिर पूरी तरह से चाक चौबंद हो कर बयार्दो सां रोमां डोमिनो की मेज़ पर लौटा।

“विधुर महाशय,” उसने फिर कहना शुरू किया, “घर की कीमत क्‍या है?”

“इसकी कीमत नहीं लगायी गयी है।”

“आप जो भी कीमत चाहें, बोल कर देखें।”

“मुझे खेद है बयार्दो सां रोमां,” विधुर ने कहा था,“लेकिन तुम जवान लोग दिल की प्रेरणाओं को नहीं समझते हो।”

बयार्दो सां रोमां सोचने तक के लिए नहीं रुका।

“चलो, पाँच हज़ार पीसो ठीक रहेंगे।” उसने कहा।

“तुम इधर उधर की तो हांको नहीं।” जवाब देते समय विधुर का आत्म सम्‍मान जाग उठा था,“मकान की इतनी कीमत तो कत्‍तई नहीं है।”

“दस हज़ार” बयार्दो सां रोमां ने कहा,“अभी और इसी वक्‍त और सारे नोट एक दूसरे के ऊपर रखे हुए।”

विधुर ने उसकी तरफ देखा। उसकी आंखें आंसुओं से भर आयी थीं।

“वह गुस्‍से के कारण रो रहा था।” यह बात मुझे डॉक्‍टर दियोनिसियो इगुआरां ने बतायी थी जो फिजिशियन होने के अलावा किस्‍सागोई भी कर लेता था।

“ज़रा कल्पना करो, दौलत आपके सामने पड़ी हो, और आपको सिर्फ अपनी आत्मा की कमज़ोरी की वजह से ना कहनी पड़े।”

विधुर जीयस की आवाज़ ही नहीं निकली। उसने बिना हिचकिचाहट के सिर्फ सिर हिला कर ना कह दी।

“तब आप मुझ पर एक आखिरी अहसान कीजिये,” बयार्दो सां रोमां ने कहा था, “मेरे लिए यहीं पर पाँच मिनट के लिए इंतज़ार कीजिये।”

सचमुच वह पाँच मिनट के भीतर सोशल क्‍लब में लौट आया। उसके पास चाँदी मढ़े काठी पर टांगने वाले बैग थे। उसने दस हज़ार पीसो के नोटों के दस बंडल मेज़ पर रख दिये। उन पर अभी भी स्टेट बैंक का छपा हुआ फीता लगा हुआ था। विधुर जीयस दो महीने बाद चल बसा।

“वह इसी वजह से मरा।” डॉक्‍टर दियोनिसियो इगुआरां ने बताया था, “वह हम सबमें तगड़ा था, लेकिन जब आप उसकी छाती पर स्‍टैथस्‍कोप लगा कर उसके दिल की धड़कन सुनते तो आप उसके भीतर आंसुओं को फूटता सुन सकते थे।”

लेकिन उसने न केवल घर के भीतर के सारे सामान के साथ घर को बेच डाला था, उसने बयार्दो सां रोमां से यह भी कहा था कि वह उसे थोड़ी थोड़ी करके रकम देता रहे क्‍योंकि उसके पास एक खाली बक्‍सा तक नहीं बचा था जिसमें वह इस सौदे से मिली रकम रख पाता।

कोई यह बात सोच भी नहीं सकता था और न ही किसी ने कहा ही था कि एंजेला विकारियो कुंवारी नहीं थी। उसके किसी पिछले प्रेमी के बारे में कोई नहीं जानता था और वह लोहे की तरह सख्त अपनी मां के कड़े पहरे में अपनी बहनों के साथ बड़ी हुई थी। यहां तक कि जब उसके ब्याह को दो महीने से कम का वक्‍त बाकी रह गया तो पुरा विकारियो ने उसे बयार्दो सां रोमां के साथ अकेले वह घर देखने भी नहीं जाने दिया था जिसमें वे जा कर रहने वाले थे। उसका अंधा बाप उसके सम्‍मान की पहरेदारी करने के लिए उसके साथ साथ गया था।

“ईश्वर से मैंने एक ही चीज़ के लिए प्रार्थना की कि वो मुझे इतनी शक्ति दे कि मैं खुद को मार सकूं।” एंजेला विकारियो ने मुझे बताया था, “लेकिन ईश्‍वर ने मुझे यह शक्ति नहीं दी थी।”

वह इतनी अधिक विचलित थी कि उसने तय कर लिया था कि अपने आपको इस शहादत से बचाने के लिए मां को सब कुछ बता देगी। उसकी दो खास सहेलियों ने, जो कपड़े के फूल बनाने में उसकी मदद करती थीं, उसे इस नेकनीयती से रोका।

“मैं आँख मूंद कर उनकी बात मानती रही।” उसने मुझे बताया था,“क्‍योंकि इन सखियों ने मुझे यकीन दिला दिया था कि वे पुरुषों को झूठा विश्वास दिलाने में माहिर हैं।” उन्‍होंने उसे यकीन दिला दिया कि अमूमन सभी औरतों का कौमार्य बचपन में ही दुर्घटनाओं की वजह से भंग हो सकता है। उन्‍होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि अड़ियल से अड़ियल पति भी इसके आगे हार मान लेते हैं जब तक किसी को इसके बारे में पता न चले।

आखिरकार,उन्‍होंने एंजेला विकारियो के दिमाग में यह बात भर दी कि शादी की रात तो अधिकतर मर्द इतने डरे-डरे आते हैं कि औरत के सहयोग के बिना कुछ कर ही नहीं सकते और जब सच्चाई के पल आते हैं तो वे अपनी खुद की कारस्‍तानियों के बारे में ही जवाब नहीं दे पाते।

“वे सिर्फ एक ही चीज़ पर भरोसा करते हैं। वे चादर देखते हैं।” उन सहेलियों ने उससे कहा था। और उन्‍होंने उसे बूढ़ी और खूसट बीवियों वाली तरकीब बतायी जिससे वह अपनी खोयी हुई आबरू का स्वांग भर सके ताकि नई नवेली दुल्हन की तरह अपनी शादी की पहली सुबह वह अपने घर के आँगन में खड़े हो कर धूप में अपने कौमार्य भंग होने के दागों वाली सूती चादर दिखला सके।

इसी भ्रम को पाले हुए उसने शादी कर ली। जहां तक बयार्दो सां रोमां का सवाल था, उसने तो अपनी ताकत और किस्‍मत के भारी भरकम तामझाम के साथ इस गरूर में शादी की होगी कि वह इनसे खुशियां खरीद सकेगा।

जैसे-जैसे उत्सव का माहौल बनता गया, इसे और बड़े पैमाने पर मनाने के उन्मादी ख्याल उसके दिमाग में कुलबुलाने लगे। जब यह बताया गया कि बिशप पधार रहे हैं तो बयार्दो सां रोमां ने अपनी शादी एक दिन पीछे खिसकाने की कोशिश की, ताकि उसकी शादी बिशप के हाथों सम्‍पन्‍न हो सके लेकिन एंजेला विकारियो ही इस प्रस्‍ताव के खिलाफ थी।

“दरअसल,” एंजेला विकारियो ने मुझे बताया था, “बात ये थी कि मैं एक ऐसे आदमी के हाथों अपनी शादी नहीं होने देना चाहती थी जो मुर्गे की सिर्फ कलगी का सूप बनवाने के लिए उन्‍हें कटवा देता था और बाकी पूरे मुर्गे को कचरे में फेंक देता था।”

इसके बावजूद, बिशप से आशीर्वाद के बिना भी समारोह ने ऐसा रंग जमा लिया था कि उस पर काबू पाना मुश्‍किल हो गया। सब कुछ बयार्दो सां रोमां के हाथों से छूटता चला गया। इसकी समाप्ति सार्वजनिक उत्सव के रूप में हुई।

जनरल पेत्रोनियो सां रोमां और उनका परिवार, उस वक्‍त राष्ट्रीय कांग्रेस की उत्‍सवों वाली नाव में आया था। उनकी यह नाव समारोहों के अंत तक घाट के किनारे लगी रही। उनके साथ कई सम्मानित लोग आये थे जो, नये चेहरों की भगदड़ में खास होने के बावजूद आम भीड़ का हिस्‍सा बन कर रह गये थे। इतने सारे उपहार लाये गये थे कि बिजली के पुराने पावर प्‍लांट की भूली बिसरी जगह को फिर से आबाद करना ज़रूरी हो गया ताकि सबसे खूबसूरत उपहारों को प्रदर्शित किया जा सके।

बाकी सारे उपहार तत्काल ही जीयस के पुराने घर में ले जाये गये थे। इस घर को नव दम्‍पत्‍ति की अगवानी के लिए पहले ही सजा लिया गया था। दूल्हे को एक ऐसी कार मिली थी जिसे मनचाहे ढंग से खुली या छत वाली बनाया जा सकता था। इस कार पर कंपनी की सील के अलावा गॉथिक लिपि में दूल्हे का नाम लिखा था। दुल्हन को एक अलमारी मिली थी जिसमें चौबीस मेहमानों के लायक शुद्ध सोने का खाने की मेज़ का साज़ो सामान था। वे लोग अपने साथ एक बैले कंपनी और दो वाल्‍ट्ज ऑरक्रेस्‍टा लाये थे। उन्‍होंने स्थानीय बैंड बाजों और ब्रास तथा एर्काडियन बजाने वालों के साथ उत्सवी शोर शराबे के बीच धुनें बजायीं।

विकारियो परिवार ईंट की दीवारों और ताड़पत्री की छत वाले मामूली घर में रहता था। इस पर दो दुछत्‍त्तियां थीं जहां अबाबीलों ने जनवरी में अंडे दिये थे। घर के सामने की तरफ एक टैरेस था, जो लगभग पूरी तरह से फूलों के गमलों से भरा हुआ था। एक बड़ा सा दालान था जिसमें मुर्गियां खुली घूमती रहती थीं और वहां फलों के दरख्‍त थे। दालान के पीछे की तरफ जुड़वां भाइयों का सूअर बाड़ा था। एक बड़ा सा पत्‍थर था जिस पर सूअर काटे जाते थे और एक मेज़ थी जिस पर सूअरों की अंतड़ियां निकाली जाती थीं। जब से पोंसियो विकारियो की आंखों की रौशनी जाती रही थी, यही काम उनकी घरेलू आमदनी का ठीक ठाक ज़रिया था। पेड्रो विकारियो ने कारोबार शुरू किया था लेकिन जब से वह मिलिटरी सेवा में गया, तो दोनों जुड़वां भाइयों ने कसाई का धंधा भी सीख लिया।

घर के भीतर, ढंग से रहने भर के लिए भी सुभीते की जगह नहीं थी। इसलिए बड़ी बहनों ने जब समारोह के आकार का अंदाज़ा लगाया तो उन्‍होंने एक मकान उधार लेने की कोशिश की।

“जरा कल्पना करो,” एंजेला विकारियो ने मुझे बताया था, “उन्‍होंने प्‍लेसिडा लिनेरो के घर के बारे में सोचा था लेकिन खुशकिस्मती से मेरे माता पिता अपने पुराने राग पर ही अड़ गये कि हमारी लड़कियों की शादी तो हमारे सूअर बाड़े में ही होगी या फिर होगी ही नहीं।”

इसलिए उन्‍होंने घर को उसके पुराने पीले रंग में ही रंगा, दरवाजे ठीक करवाये, फर्श की मरम्मत करवायी और उसे धूमधाम वाली शादी के लायक, जैसा भी बनाया जा सकता था, बनाया। जुड़वां भाई सूअरों को कहीं और लिवा ले गये और सूअर बाड़े को चूने से लीप पोत कर साफ़ कर दिया।

लेकिन इसके बावजूद, यह बात साफ़ थी कि जगह की कमी थी। आखिरकार, बयार्दो सां रोमां की कोशिशों के फलस्वरूप, उन्‍होंने दालान की फेंस गिरा दी। नाच वगैरह के लिए पड़ोसियों का घर मांगा और इमली के पेड़ों तले खाना खाने और बैठने के लिए बढ़ई वाली मेजें ठुकवा दीं।

सिर्फ एक ही अनहोनी अजीब बात दूल्‍हे की तरफ से हो गयी थी कि वह एंजेला विकारियो से शादी की सुबह दो घंटे की देरी से पहुंचा था और एंजेला विकारियो ने तब तक दुल्‍हन के कपड़े पहनने से ही इनकार कर दिया था जब तक वह उसे खुद अपने घर के भीतर न देख ले।

“ज़रा कल्पना करो,” एंजेला विकारियो ने मुझसे कहा था, “अगर वह न भी आता, तो भी मैं खुश रहती, लेकिन तब तो कत्‍तई नहीं जब वह मुझे दुल्‍हन के जोड़े में छोड़ कर चला जाता।” एंजेला विकारियो की चिंता वाजिब थी क्‍योंकि किसी औरत के लिए उसे दुल्‍हन के जोड़े में छोड़े दिये जाने की ज़लालत से अधिक सरेआम दुर्भाग्‍य और कुछ नहीं था। दूसरी तरफ, एंजेला विकारियो ने कुंवारी न होने के बावजूद घूँघट निकाला, और गुलाबी कलियां डालीं, इस बात को बाद में पतिव्रता के प्रतीकों को अपवित्र करने के रूप में माना जाता। मेरी मां ही सिर्फ अकेली औरत थी जिसने उस तथ्‍य की बहादुरी के कारनामे के रूप में तारीफ की कि आखिर उसने आखिरी बाजी लगने तक अपने निशान वाले पत्‍ते खेले।

“उन दिनों,” मां ने मुझे समझाया था, “भगवान ऐसी चीज़ों को समझता था।” दूसरी तरफ, कोई भी इस बात को नहीं जानता था कि बयार्दो सां रोमां कौन सी चालबाजी कर रहा था। फ्राक कोट और ऊंचे हैट में अंततः प्रकट होने से ले कर जीवन को तूफान से भर देने वाली औरत के साथ नृत्‍य करने तक वह प्रसन्न चित्त दूल्‍हे का आदर्श प्रतिरूप नज़र आ रहा था। न ही कोई इस बात को समझ पाया था कि सैंतिएगो नासार कौन से पत्‍ते खेल रहा था। मैं लगातार उसके साथ बना रहा था। गिरजा घर में, उत्‍सव में, हमारे साथ क्रिस्‍तो बेदोया और मेरा भाई लुई एनरिक थे। हम में से किसी को भी उसके तौर तरीकों में बदलाव की रत्ती भर भी झलक नहीं मिली थी। मुझे इस बात को कई बार दोहराना पड़ा था क्‍योंकि हम चारों स्‍कूल में एक साथ बड़े हुए थे और बाद में छुट्टियों में हम चारों की ही चांडाल चौकड़ी एक साथ रहती। और कोई इस बात पर विश्‍वास ही नहीं कर सकता था कि हमारे बीच कोई ऐसा राज़ हो सकता है जो आपस में बांटा न गया हो। वह भी इतना बड़ा राज़!

सैंतिएगो नासार महफिलें सजाता रहता था और अपनी मौत से पहले वाली शाम वह शादी के खर्च का हिसाब लगाते हुए बहुत अच्‍छा टाइम पास कर रहा था। उसने अनुमान लगाया था कि गिरजा घर में उन्‍होंने फूलों की जितनी ज्‍यादा सजावट की थी, उसकी लागत चौदह बेहतरीन अंत्‍येष्‍टियों के बराबर थी। हिसाब में इतनी बारीकी मुझे बरसों बाद सालती रहेगी क्‍योंकि सैंतिएगो नासार अक्‍सर मुझसे कहा करता था कि नजदीक से फूलों की गंध से उसके लिए मृत्‍यु से नजदीकी रिश्‍ता है और उस दिन जब हम गिरजा घर जा रहे थे तो उसने यही बात दोहरायी थी।

“मैं अपने अंतिम संस्कार में कोई फूल नहीं चाहता।” उसने मुझसे कहा था। तब उसने सोचा भी नहीं होगा कि अगले ही रोज़ मैं सचमुच इस बात का ख्याल रखूंगा कि उसके अंतिम संस्कार में कोई फूल न हो। गिरजा घर से विकारियो परिवार के घर की तरफ जाते समय उसने गली की सजावट के लिए लगाये गये बंदनवारों का हिसाब लगाया था। संगीत और आतिशबाजी की कीमत गिनी थी और यहां तक कि जो चावल छितरा कर पार्टी में हमारी अगवानी की गयी थी, उसकी कीमत का भी उसने हिसाब लगाया था।

उनींदी दोपहरी में नव दम्‍पत्‍ति ने चौबारे में कुछ चक्‍कर लगाये थे। बयार्दो सां रोमां हमारा बहुत अच्‍छा दोस्‍त बन गया था। कुछ पैगों वाला हमप्‍याला, जैसाकि उन दिनों कहा जाता था और वह हमारी मेज़ पर बिल्कुल बेतकल्लुफ, सहज लग रहा था। एंजेला विकारियो ने अपना घूँघट और दुल्‍हन वाला बुके हटा रखा था। पसीने के दागों से भरी साटन की पोशाक में वह अचानक ही शादीशुदा औरत में तब्‍दील हो गयी थी। सैंतिएगो नासार ने तब हिसाब लगाया था और बयार्दो सां रोमां को बताया था कि अब तक उसकी शादी में कोई नौ हज़ार पीसो खर्च हो चुके हैं। साफ़ साफ़ लग रहा था कि एंजेला विकारियो ने इस बात को बेमौके की बात के रूप में लिया था।

“मेरी मां ने मुझे सिखाया था कि कभी भी दूसरों के सामने रुपये पैसों की बात मत करो।” उसने मुझसे कहा था। दूसरी तरफ, बयार्दो सां रोमां ने इस बात को शिष्टता और कुछ हद तक गर्व से स्‍वीकार कर लिया था।

“हां, कमोबेश इतना ही,” बयार्दो सां रोमां ने कहा था,“लेकिन अभी तो शुरुआत है। जब सब निपट जायेगा तो यह खर्च दुगुने के आसपास पहुंचेगा।”

सैंतिएगो नासार ने एक प्रस्‍ताव रखा था कि वह आखिरी दमड़ी तक का हिसाब लगा कर इसे सिद्ध करके दिखायेगा। उसकी ज़िंदगी सचमुच शादी का हिसाब लगाने लायक ही बाकी रही। दरअसल, जब अगले दिन घाट पर सैंतिएगो नासार की मौत से पैंतालीस मिनट पहले क्रिस्‍तो बेदोया ने उसे शादी के खर्च के सारे ब्‍योरे दिये थे तो सैंतिएगो नासार ने सिद्ध कर दिया था कि बयार्दो सां रोमां का पूर्वानुमान राई रत्ती सही था।

जब मैंने इस बात का फैसला किया कि मैं दूसरों की याददाश्त के सहारे इस घटनाक्रम को टुकड़ा टुकड़ा जोड़ कर सामने लाऊंगा तो उससे पहले मेरे पास समारोह की बहुत गड्डमड्ड स्‍मृतियां ही थीं। बरसों तक मेरे घर में लोग इस तथ्‍य के बारे में बात करते रहे कि मेरे पिता नव दम्‍पत्‍ति के सम्‍मान में अपने लड़कपन के दिनों का वायलिन बजाने गये थे, कि मेरी बहन, जो कि नन थी, ने द्वारपालों का मेरिंग नृत्‍य किया और कि डॉक्‍टर दिओनिसियो इगुआरां, जो रिश्‍ते में मेरी मां का भाई लगता था, ने नव दम्‍पत्‍ति के साथ यह व्‍यवस्‍था थी कि वे उसे अपने साथ सरकारी नाव में लिये चलेंगे ताकि अगले दिन जब बिशप वहां आये तो वह वहां पर न हो। इस घटनाक्रम की जांच पड़ताल के दौरान मेरे हाथ बीसियों कम महत्‍व के अनुभव भी लगे। इनमें से मुझे बयार्दो सां रोमां की बहनों की धुंधली सी याद आयी जिन्‍होंने रेशम की पोशाकें पहन रखी थीं और पीठ पर सुनहरे ब्रोशर की मदद से तितलियों जैसे बड़े बड़े पंख खोंसे हुए थे। वे अपने पिता से भी अधिक आकर्षण का केन्‍द्र बनी हुई थीं। उनके पिता ने तुर्रे वाला हैट और बीसियों युद्ध पदक लगा रखे थे। कई लोगों को पता था कि संकोच के भ्रम में मैंने मर्सीडीज बारचा के सामने, उसके प्राइमरी स्‍कूल से बाहर आते ही, शादी का प्रस्‍ताव रख दिया था। यह बात उसने खुद ही 14 बरस बाद उस वक्‍त बतायी थी जब हमने शादी कर ली थी।

 

(क्रमशः अगली किश्तों में जारी…)

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कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,226,लघुकथा,808,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,306,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,57,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1882,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,637,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,676,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,14,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,52,साहित्यिक गतिविधियाँ,181,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,51,हास्य-व्यंग्य,52,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
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रचनाकार: गैब्रियल गार्सिया मार्खेज़ का उपन्यास – उस मौत का रोजनामचा (3)
गैब्रियल गार्सिया मार्खेज़ का उपन्यास – उस मौत का रोजनामचा (3)
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