रविवार, 20 जुलाई 2014

सुभाष लखेड़ा की लघुकथाएँ

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सुभाष लखेड़ा


समाधान 

वह सुबह से असमंजस में था। उसकी माँ ने उसे काम से लौटते समय घुटनों के दर्द की एक दवा लाने के लिए कहा था तो
पत्नी ने चेहरे पर लगाने के लिए कोई क्रीम। महीने का आख़िरी दिन होने की वजह से उसके पास जो पैसे बचे थे, उनसे या
तो दवा खरीदी जा  सकती थी या क्रीम। आखिकार, उसने क्रीम खरीदी। साइकिल पर घर लौटते हुए वह सोच रहा था," माँ
को तो वर्षों से इन्तजार करने की आदत है लेकिन क्रीम न मिलने पर घर में जो माहोल बनता उससे बचना बेहद जरूरी था। "
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नसीहत
वे हमेशा एक द्वितीय दर्जे के छात्र रहे। संयोगवश, उन्हें उच्च पदासीन अपने किसी रिश्तेदार की बदौलत एक प्रयोगशाला में
वैज्ञानिक " बी " का पद मिला। तत्पश्चात, वे सफलता की सीढ़ियां चढ़ते गए। उनकी जुबान यह कहते हुए नहीं थकती थी कि
इंसान को कर्म करना चाहिए, फल की चिंता करना बेवकूफी है। बहरहाल, इस बार वे निदेशक पद के इंटरव्यू के लिए गए थे
लेकिन पहली बार वे असफल रहे। कल वे किसी से कह रहे थे, " इस देश में भाई - भतीजावाद का राज है और इसलिए यहाँ से
प्रतिभा पलायन हो रहा है। "     
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उम्मीद

अपनी झुग्गी में लेटा हुआ वह अपने भविष्य के बारे में सोच रहा था। उसे गाँव में  किसी रिश्तेदार के द्वारा कहे ये शब्द याद आ
रहे थे - मुन्ना, शहर जा रहे हो तो वहाँ ऐसा काम पकड़ना जिसमें भविष्य सुनहरा हो भले ही शुरू में पैसे कम मिलते हों।काफी
सोच - विचार के बाद उसने तय किया कि वह चाय बेचने का काम करेगा क्योंकि कल शाम जब वह बगल के मैदान के सामने 
से गुजर रहा था तो कोई नेता मंच से कह रहा था -  उन्होंने अपने जीवन की शुरूआत चाय बेचने से की थी और देखिये अब वे इस
देश के प्रधानमंत्री बनने वाले हैं।
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नजरिया
सिन्हा साहब उस दिन शाम को पार्क में टहलते हुए  मिले।  अभी कुछ महीनेपहले उनके बेटे की शादी में जाने का अवसर मिला था।
कुशल क्षेम के बाद कुछ उदास स्वर में बोले, " बहू का झुकाव अपने मायके की तरफ इतना अधिक है कि कभी - कभी लगता है हमारा
लड़का घर जंवाई है। मैंने सांत्वना देते हुए कहा, " आप चिंता न करें। धीरे - धीरे सब ठीक हो जाएगा। " फिर मैंने टॉपिक बदलते हुए
उनसे उनकी बेटी के बारे में पूछा तो उनके चेहरे की रौनक लौट आई। वे हँसते हुए बोले," वर्मा जी, भगवान ऐसी बेटी सबको दे। शादी हुए
पांच  साल हो गए हैं लेकिन जब तक दिन में हमें दो बार फोन न कर ले, उसे चैन नहीं मिलता है।"
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सुभाष चन्द्र लखेड़ा,
सी - 180 , सिद्धार्थ कुंज, सेक्टर - 7, प्लाट नंबर - 17, नई दिल्ली - 110075.

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