सोमवार, 14 जुलाई 2014

सीमा शर्मा का व्यंग्य - जब हमने चुनाव लड़वाया

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आजकल जिस अंदाज में चुनाव हो रहे हैं उसे देखकर ऐसा लगने लगता है कि सब काम छोड़ कर चुनाव लड़वाने का धंधा सबसे बेहतर है। हमने गारंटीड चुनाव जिताऊ प्राइवेट लिमिटेड (गाचुजिप्रालि) नामक कंपनी खोल ली क्योंकि इस धंधे में मुनाफा ही मुनाफा है। बस आठ-दस लठैत, लाइसेंसी बदूकधारी का इंतजाम करना था सो बिलूना, मलूका, झरपट्टा, सरपट्टा सारे मुश्टुंडे साथियों को कंपनी का डीएम., ई.एम., पीए आदि बना दिया। चार छह पनवाड़ी के ठलुओं को भी ऊँची-ऊँची पोस्ट दे दी। शाम पांच से रात दस बजे तक पुरानी बूथ कैप्चरिंग और मतपेटी लूटने से संबंधी सीडी की व्यवस्था कर रखी थी।

ट्रेनिंग हेतु गांव के सुदूर इलाके में एक पुरानी गौशाला को झाड़-पोंछ कर गैयाओं को बाहर बांध दिया था। इस कंपनी के उद्देश्यों और ट्रेनिंग सेंटर के नियमों के तहत किसी को भी अंदर की बात बाहर ले जाने से साफ मना कर दिया। नहीं तो बाद में भेदियों को कैसे कहां लटकाकर जूते मारने हैं वो जगह भी दिखवा दी थी। गुप्त अभियान के तहत तीन-चार ठेके दो-दो लाख में तय हुए। नए-नवेले नेताजी को परमानेंट जिताने के लिए बुक कर लिया था। हरिओम दद्दा ने एक मोबाईल का इंतजाम करा दिया था। हालांकि हमारा पुराना धंधा कोई बुरा नहीं था। जमीन पर कब्जा करवाना हो, हफ्ता वसूली, फर्जी लाइसेंस, भूरा डकैत को राशन उपलब्ध कराना, राशन की दुकान पर सरकारी माल बटाने का जिम्मा सब हमारी गैंग के पास है। पुरानी टंडीले से जीप में सवार हो जिंदाबाद मुर्दाबाद तो बहुत किया। पर अब थोड़ी इज्जत से काम करने की चाह हो आई थी।

फर्राटा मचाओ गुटका खाकर, कल्लू भैया अमर रहे की, कूच पर जब हम निकलते तो गांव-गांव का बच्चा हमें आदर्श मानता। अब गुंडाई का पूरा चार्ज हरिओम दद्दा को दे दिया क्योंकि कंपनी में बड़े-बड़े नेताओं ने चार-चार साल पहले से बुकिंग करा रखी है। बहुत काम बाकी है। अब तो अंडरवर्ल्ड के कुछ रसूखदार नब्बू कलेम चुनाव लड़ना चाहते हैं, तो कहीं पर पूर्व दस्यु सुंदरी रीना फहियार चुनाव लड़ना चाहती हैं। सबके सब गाचुजिप्रालि की देहरी पर आकर सिर पटक रहे हैं। जबसे उन्हें पता चला कि हमारे बनाए तीन नेता लोकसभा में प्रतिनिधित्व कर रहे है। हमने देश का इतना भला किया है कि सारे के सारे फालतू पानबीड़ी वाले टपोरिए, कपनी में सम्मानित पोस्टों पर लगे हैं। लगातार कार्यरत रहते हैं कि अंबानी बधुओं के वर्कर्स भी शरमा जाऐं।

शहर में कहीं भी अव्यवस्था फैलानी हो गाचुजिप्रालि के सदस्य बस तीन मिनिट की समय सीमा में हाजिर। अबकी से कल्लन हलवाई ने जरूर मुसीबत में डाल दिया है। इस तोंदू-मोटे को भी चुनाव का भूत सवार है। इतना मना किया कि तू अपनी जलेबी-कचौड़ी पर ध्यान केन्द्रित कर पर वो तो पैसा बहाकर एक बार पार्षद बनने को बावला हुआ जा रहा है। कभी-कंबलों की रिश्वत, तो कभी अउए-पउए की जुगाड़ और फिर भी मतवाला न माने तो फिर सुताई तकनीक, मराई तकनीक अपनाई जाती है। सारी सेंटिग इतनी बेहतरीन तरीके से अपनाते हैं कि चुनाव-पर्यवेक्षक कहीं के नहीं रहते। बस कल्लन हलवाई का गलत ठेका ले रखा हे। इसके लिए मेहनत ज्यादा लग रही है। कुछ सालों बाद कंपनी का मुनाफा करोड़ों तक पहुंचा जाता है फिर तो शान से जिंदगी बिताएंगे। दो तीन अस्युओं-दस्युओं को तो एक झटके में नेता बना दिया है

 

कंपनी में अब उच्च तकनीक का सहारा लिया जाता है। अभी तक एक भी कांट्रेक्ट पर असफलता नहीं मिली। अब जब भी आप गारंटीड चुजिप्रालि के बारे में कोई गलत बात या अफवाह सुनें तो तुरंत हमारे मोबाइल पर संपर्क करें। अफवाह फैलाने वाला कब दुनिया से कूच कर जाएगा..आप जान भी नहीं पाएंगे।

नेताजी जिंदाबाद. ...प्राइवेट लिमिटेड जिंदाबाद...

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डॉ. सीमा शर्मा

सहायक प्राध्यापक

ग्वालियर मप्र

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(चित्र – रेखा श्रीवास्तव की कलाकृति)

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  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज गुरुवार १७ जुलाई २०१४ की बुलेटिन -- आइये एक कदम हम आगे बढ़ें– ब्लॉग बुलेटिन -- में आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार!

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