सोमवार, 14 जुलाई 2014

सीमा शर्मा की कहानी – अथ श्वान बनाम नेताजी

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हाँ तो भाइयो-बिरादरों मैं कह रहा था कि हम श्वान बिरादरी बरसों से वफादारी में अव्वल आते रहे हैं लेकिन कुछ समय से देखने में आ रहा है कि कुछ श्वान उधर नेताओं के पिछलग्गू बनके उनकी बिरादरी को पसंद कर रहे हैं। वो भ्रम में न रहें कि नेताजी जात बिरादरी छोड कुकुरों में शामिल हो रहे हैं हालांकि जनता ने हाल ही में उन्हें हमारी जात की गालियों से नवाजा है पर ये गलत है। जो श्वान वायदा खिलाफी और बेवकूफियों में समय नष्ट कर रहे हैं वो वास्तव में गद्दार है और हमारी कुकुर समाज की काफिर कौम है। इतनी देर से भौंक-भौंक कर मैं कहना चाहता हूँ अब हमारी गौरवमयी परम्परा की इज्जत आप कुकुरों के हाथ में है अतः कृपा करें इसे बचाऐं।'' रात के सन्नाटे में और भी न जाने क्या-क्या भौंककर वो अपने भाइयों को उलाहना देता रहा। कभी-कभार तो गुस्से में पागल सा होकर उन्हें खाने दौडता। उसी गली के थोडी दूर एक नुक्क्ड पर सरकार को गिरने से बचाने के लिए नेताजी की एक अन्य सभा चल रही थी।

''देखो। उधर देखो उन श्वानों को। सीखो कुछ उनसे, बस क्या कुकुरों की भाषा ही सीखोगे, हरदम भौंकते रहते हो। कभी तो उनकी वफादारी के गुण पर नजरपात कर लिया करो। इधर भीड में कमोशन जारी था। नेताजी क्या कह रहे थे स्पष्ट सुनाई नहीं दे रहा था। इसके स्थान पर तो कुकुरो की गोष्ठी ज्यादा रंपष्ट सुनाई दे रही थी। तमाम धर्मगुरूओं के चलते अब आम आदमी जानवरों की भाषा ज्यादा स्पष्ट समझने लगा है, बजाय इंसानों के।

तभी एक मरियल सा काला श्वान जोर-जोर से भौंककर सबका ध्यान अपनी ओर आकृष्ट कर बोला - ''अपने कुत्तत्व के लिए मैं अपनी जान तक गँवाने को तैयार हूँ। मुझे इसमें किसी भी तरह की शरम नहीं है।'' तभी एक भूरे श्वान ने धीरे से चुटकी ली - कौन सा अहसान करेगा, तेरे में जान ही कितनी है, मात्रा सौ ग्राम।'' जाने कैसे धीमे से कही ये बात उसके कान में पड गई और वो तेजी से उसके काटने दौडा पर टॉमी ने उसे अपनी टंगडी लड़ाकर रोका और कहा - ''शोभा देता है तुम्हें ऐसा करना, कैसे आदमीयत के काम करे हो। सभ्य बनो ............... देखो? उस सभा में कैसी गदर मची है। ऐसा लगता है अभी मार-काट मचने वाली है। मेरे ख्याल से तो अब सभा यहीं स्थगित करके कल शाम डॉ लाल के पिछवाडे वाले गार्डन के पास रखें तो बेहतर होगा। सभी सहमत होकर भू-भू करके अपनी टेढी पूँछ हिलाते चल दिए। मरियल कुत्ता. भूरे कुत्ते की तरफ जबडे दिखाता निकल गया।

उधर नुक्कड की सभा में नेताजी अभी भी श्वान चालीसा में लगे अपने साथियों के नोहरे-पाते करने में लगे थे। श्वानों की वफादारी की कसम दिला रहे थे और सरकार को न गिराने के लिए बर्गला रहे थे। फिर नेताजी ने उन्हें घर पर मालपानी के लिए आमंत्रित किया सभी छुटभैये, चमचे खुश हो गए और सभा वहीं समाप्त हो गई।

दूसरे दिन शाम डॉ. लाल के बंगले के पिछवाडे सभी श्वान एकत्रित हुए। सभी ने डॉ लाल के बंगले के पीछे के गेट की सरधों से झाँक कर देखा। वहाँ डी. लाल की कुकुरी - लिली पॉमेरियन दो पोनी बनाए सजी-धजी लाल फ्रॉक पहने टहल रही थी। टॉमी का दिल बल्लियों उछलने लगा और आखिर कार उसने भी टॉमी की तरफ प्यार से भौंक कर अपने प्यार की स्वीकृति दे दी। सभा के कुछ नकारा, निकम्मे आवारा कुकुर अपने कुत्तत्व पर उतर आए उन्होंने गेट में मुँह डाल कर लिली की पूँछ खींचने की कोशिश की। इस पर टीम ने उन्हें लताडा। तभी उस मरियल कुत्ते में जाने कहाँ से जोश आ गया और उसने गली के गंदे कुत्तों को भौंक भौंक कर खदेडना शुरू कर दिया। जोरदार घमासान शुरू हो गया। कुत्तों में आपस में जंग छिड गई। गली के निकम्मे कुत्ते मरियल कुत्ते से मोर्चा लेने तैयार हो गए। बेचारे मरियल कुते को दो तीन जगह काट लिया पर टॉमी ने उसे बचा ही लिया। लहूलुहान मरियल कुत्ता तब भी टॉमी के पक्ष में भौंकता रहा - ''छोडूगा नहीं अगर किसी ने भी लिली की पूँछ खींची।'' लिली को भी दया आ गई उस पर. उसने प्यार से मरियल कुत्ते को देखा। टॉमी चौकन्ना हो गया। सभी कुकुर अपनी-अपनी राह चल पडे।

अतत: नुक्कड की सभा के सत्ताधारी तब तक कुकुरों से सबक ले चुके थे। वफादारी की कस्में खाई गई। कुत्तत्व के नियमों को अनिवार्य कर के अपने घोषणा पत्र में सुधार किया। सत्ता का स्वाद चख चुके नेता अब शूकरों तक की कसम खाने को तैयार हो गए। नुक्कड वाले पनवाडी की दुकान पर लगे टीवी में समाचार आ रहा था -

''जोड तोड कर बनी सरकार को गिराने के प्रयास असफल हो चुके हैं। अब सरकार पाँच साल तक राज्य करेगी आसानी से।''

दूसरी तरफ गंदले धूल धूसरित कुकुर अभी भी लिली की फिराक में खंबे के आसपास घूम रहे थे। जैसे ही डॉ लाल उसे लेकर बाहर निकले सत्ताधारी चापलूस की तरह वो उसे पीछे लगकर सेंट की गंध की ओर आकृष्ट हो रहे थे। पर टॉमी मरियल कुत्ते को उसकी गली तक छोडकर वापस आ चुका था। उसने उन घुसपैठियों को लताडा - ''गँवारों, औकात में रहो, अभिजात्य वर्ग की कुकुरियों पर हाथ डालने से तो बेहतर है कि तुम सेना या पुलिस में भर्ती हो जाओ। '' तभी एक चितकबरे कुत्ते ने फत्ती कसी -''देखा नेताजी को? खुद में इश्क-विश्क-रोमास और हमें मरने के लिए बारूद सूँघाने के काम में जाने की सलाह दे रहा है।'' तभी टॉमी ने उन्हें फुसलाया ''अरे तुम वीर जवान हो हमें तुम पर गर्व है कुछ निकम्मे कुत्ते अपना कुतत्व गिरवी रख कर समाज में बीमारियाँ फैला रहे हैं। गली के गंदे कुत्तों को नगर निगम भी नहीं पकडते।'' घूस खिला दी होगी ''एक मटमैला कुत्ता जीभ लपलपाता हुआ हंसा। गली की तीन-चार स्वस्थ कुकुरियाऐं टॉमी के साथ डेट फिक्स करना चाहती थीं पर गली के आवारा निकम्मे, बदमाश कुत्तों के मारे बेचारी ट्रक के नीचे छिपी बैठी है। भूरा कुकुर उस सारी गतिविधि का गवाह था। उसने टॉमी की आशनाइयों के किस्से गली के दूसरे कुकुरों को बताऐ, साथ ही उस ट्रक के नीचे इशारा किया, फिर क्या खुन्नस खाए कुकुर टॉमी के पीछे लग गए और भौंक-भौंक कर दूर तक उसको खदेडा ...... ''बदमाश कहीं का, बडा नेता बना फिरता है लुच्चा.. ...... लफंगा. .''। और भी न जाने कितनी आदमीयत से भरी गालियाँ सुनाकर सबके सब कुकुर एकजुट हो गए। टॉमी लड़खडाता हुआ भागा। सारी नेतागिरी धरी रह गई, सारा प्यार हवा हो गया। बाकी कुकुरों ने भूरा को अपना नेता मान लिया और उसके गले में हार माला डाल दी। पूर्ण बहुमत के साथ नया नेता सामने सीना ताने, दो पैरों पर खडा था। सत्ता हासिल हो गई थी। बेचारी कुकरियाँ आशनाई छोड़ दुम दवा कर भाग लीं

 

डॉ. सीमा शर्मा

सहा. प्रा. अंग्रेजी

ग्वालियर मप्र

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(चित्र – रेखा श्रीवास्तव की कलाकृति)

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