यशवंत कोठारी का व्यंग्य - भारत का सरकारी पर्व : फ़ाइल फ़ाड़ोत्सव

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व्यंग्य

फ़ाइल    फ़ाड़ोत्सव

यशवंत  कोठारी

सरकार चुप है. मंत्री चुप है। वित्त  मंत्री ने बजट का हलुआ  चख लिया है. जनता ने बजट  की मार झेल  ली है। महंगाई के कारण  केवल  प्याज  , टमाटर  और आलू  पर व्यंग्य पढ़ने  पड़  रहे हैं  .ऐसी विकट  परिस्थितियों में सरकार ने एक चमत्कार किया  उसने फाइल   फ़ाड़ोत्स्व  का आयोजन  किया  .

सभी  सरकारी  दफ्तरों में  फाइल   फाड़ने , जलाने, नष्ट करने  की एक प्रतियोगिता चली।  बहुत सी महत्त्व पूर्ण ऐतिहासिक महत्त्व की फाईलें    जला दी गयीं   नष्ट कर दी गयीं।   आने वाले समय  में   शोधकर्ता  इतिहासकार   राजनीति  के  अध्येता  इन फाईलों के बिना  क्या करेंगे ? देश का वास्तविक इतिहास कैसे लिखा  जायेगा ?फाईलें फाड़ने की ऐसी भी क्या जल्दी थीमहत्त्व पूर्ण अंशों  को बचाया जासकता  था। या फिर उनको कम्प्यूटर  में सुरक्षित किया  जा सकता था।

मगर सरकार जो करे सो ठीक।   सरकार  राजनितिक नियुक्तियों में उलझ  कर रह गयी है

कभी सरकारी दफ्तरों में एक नोट शीट या  फाइल  के  एक कागज   के खो जाने पर बड़े बड़े अफसरों  बाबुओं की शामत आ जाती थी।   उस पत्रावली के खो जाने की सूचना पूरे ऑफिस  को दी जाती थी,   और फाइल को पूरी शिद्दत से खोजा  जाता   था।  संबंधित लिपिक  पर तो निलंबन की तलवार लटक जाती थी।  फाईलें व पुराने रिकॉर्ड जलाने की भी एक निश्चित   प्रक्रिया थी  जिसका  पालन  विभाग की जिम्मेदारी थी।  मगर  महात्मा गांधी, सुभाष बोस   जैसे महत्वपूर्ण  नेताओं की फाईलों पर प्रश्न चिन्ह  लग  गए हैं।

इधर सरकार के मंत्रियों  का  मीडिया से एकालाप , प्रेमालाप अलाप   भी लगभग  बंद है.  हज़ारों फाईलों  के नस्ट  होने की बात पर देश व्यापी बहस की जरूरत है।  पहले अनुपयोगी   फाईलों को   लाल कपडे में बांध कर भंडार में सुरक्षित   रखा जाता था।   मगर  लाल फीताशाही का यह चलन भी  फाईलों को नहीं बचा सका।

वैसे शुरू में फाइल  एक नोट शीट  और एक कागज से  चलती है,  जो बिलकुल तन्वंगी होती है। धीरे धीरे     कई टैब्लों पर जाती जाती  प्रौढ़ा जाती है और  अंत  में भंडार की शोभा बढाती है.

फाईलों की  कथा अनंत है।  प्रसिद्ध   व्यंग्यकार  रविन्द्र नाथ त्यागी सरकार में एक बड़े अफसर थे  एक बार एक  फाइल  आधा घंटा देरी से लाने के  कारण  परेशानी में पड़   गए थे।  यहाँ तो लाखों फाईलें  नष्ट  हो गयी हैं।  कुछ करो  भाई।

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यशवंत कोठारी 

८६  लक्ष्मी नगर  ब्रह्मपुरी जयपुर

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