रविवार, 3 अगस्त 2014

एस.के.पाण्डेय की तीन लघुकथाएँ–कमी, चार सौ बीस तथा सोचा न था

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कमी

रेनू ने कहा कि राजीव सर जैसा कोई विरला ही मिलता है। बड़े ही अच्छे इंसान है। यह सुनकर राहुल ने हँसते हुए कहा कि बड़े अच्छे हैं तभी तो अधिकारी उनका कोई काम जल्दी नहीं करते।

रेनू ने कहा अच्छे तो हैं। इसमें कोई दो राय नहीं है। उनके अंदर एक अच्छे इंसान के सभी गुण हैं। फिर भी उनमें एक कमी है। उनमें वह गुण नहीं है जिसकी आजकल ज्यादा जरूरत होती है।

राहुल बोला वह कौन सा गुण है ? रेनू ने कहा कि वे मक्खनबाज नहीं हैं। किसी को मक्खन नहीं लगा पाते। यदि वे भी चापलूस होते तो अब तक कहाँ पँहुच गए होते ? चापलूसी उनको नहीं आती। यह सुनते ही राहुल का रंग फीका पड़ गया। रेनू आगे बोली उनमें यही कमी है

 

चार सौ बीस

रंजन अपने विभाग में सबसे ईमानदार कर्मचारी के रूप में जाना जाता था। हाल ही में उसके विभाग में वेतन वृद्धि हुई। किसी का हजार, किसी का पन्द्रह सो तो किसी का दो हजार रुपया प्रति माह बढा दिया गया। लेकिन रंजन के वेतन में केवल चार सो बीस रूपये की वृद्धि हुई।

अगले दिन सब अपने-अपने वेतन-वृद्धि के बारे में बता रहे थे। किसी ने रंजन से कहा कि आप तो रोज सबसे पहले आ जाते हैं और सबसे बाद में जाते हैं। जब देखो तब काम में लगे रहते हैं। आपका तो ज्यादा बढ़ा होगा। रंजन बोला ज्यादा क्या पाँच सो भी नहीं बढा है। सिर्फ चार सो बीस रुपया बढ़ाया गया है। यह सुनकर सब हँसने लगे।

सबको हँसते हुए देख रजनी बोली रंजन सर यदि आप भी चार सो बीस होते तो आपका भी वेतन कमसे कम हजार रुपया जरूर बढा होता। लेकिन आप बड़े ही ईमानदार हैं। और यहाँ बाकी सब चार सो बीस हैं। अधिकारी भी। इसलिए अधिकारियों ने सोचा होगा कि केवल एक ही ऐसा है जो चार सो बीस नहीं है। चलो उसको भी चार सो बीस बना देते है। और इस प्रकार आप भी हम लोगों की टीम में शामिल हो गए। अब आप यह नहीं कह सकते कि हमको चार सो बीसी नहीं आती। क्योंकि अब आप भी चार सो बीस बन गए हैं।

 

 

सोचा न था

कविता ने सरला से पूछा कि आपका वेटा किस श्रेणी में पास हुआ है। सरला बोली द्वितीय श्रेणी में। यह सुनकर कविता बहुत आश्चर्य प्रकट करते हुए बोली कि यदि मेरा बेटा द्वितीय श्रेणी में पास हो जाय तो उसकी पढ़ाई बंद करवा दूँ।

सरला ने कहा क्या करूँ ? हमे तो यह सुनकर ही बहुत खुशी हुई कि वह पास हो गया। कम से कम फेल तो नहीं हुआ। उसको कोई घर में कुछ बताने वाला नहीं था। खैर आपका बेटा किस श्रेणी में पास हुआ है। कविता बोली वह तो हमेशा प्रथम ही आता है। उसको पता है कि यदि प्रथम नहीं आया तो पढ़ाई बंद।

दो वर्ष बाद सरला का बेटा इंटर में प्रथम आया। वह बहुत खुश हुई। और यह बताने कविता के घर चल पड़ी। वहाँ पहुँचकर उसने अपनी खुशी जाहिर की। लेकिन देखा कि कविता बहुत उदास है। उसने पूछा क्या हुआ ?

कविता बोली राजू इंटर में फेल हो गया। सरला आश्चर्य से बोली फेल ! कविता बोली जो सोचा न था वह हो गया। कल से राजू का कुछ पता भी नहीं है।

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डॉ. एस. के. पाण्डेय,
समशापुर (उ.प्र.)।
ब्लॉग: http://www.sriramprabhukripa.blogspot.com/ URL1: http://sites.google.com/site/skpvinyavali/
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