रविवार, 3 अगस्त 2014

राजीव आनंद का आलेख - नाडिन गोर्डिमरःदक्षिण अफ्रीकी साहित्य की प्रतिनिधि स्वर

          नाडिन गोर्डिमरःदक्षिण अफ्रीकी साहित्य की प्रतिनिधि स्वर
नोबेल पुरूस्कार विजेता दक्षिण अफ्रीकी लेखिका नाडिन गोर्डिमर का 90 वर्ष की आयु में 13 जुलाई को जोहन्सवर्ग में निधन हो गया. नाडिन गोर्डिमर के निधन से न सिर्फ दक्षिण अफ्रीका बल्कि पूरे विश्व के उत्पीड़ितों एवं वंचितों को एक गहरा सदमा लगा है. तमाम उम्र नाडिन रंगभेद की नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद करती रही. यद्यपि उन्हें 90 वर्षों की एक लंबी जिंदगी मिली जरूर थी परंतु उनका जीवन उथल-पूथल से भरा था. नाडिन गोर्डिमर कहा करती थी कि ''लेखिका तो वह कहीं भी हो जाती पर अपने देश में लेखन का मतलब ही नस्लवाद से टकराना है.''


    नाडिन का लेखन नस्लवादी भेदभाव वाले समाज में नस्लवादी मनोविज्ञान को समझने की दृष्टिकोण से बहुत ही महत्वपूर्ण है. नाडिन निरंतर रंगभेद की राजनीति के खिलाफ विपुल साहित्य रचा जो विश्व साहित्य की एक धरोहर है. उनकी रचना 'द लेट बुर्जआ बर्ल्ड' रंगभेद के खिलाफ दक्षिण अफ्रीकी सरकार द्वारा पहली पुस्तक के रूप में चिन्हित की गयी जिसे 1976 में प्रतिबंधित किया गया था. इसके पश्चात 'ए बर्ल्ड आँफ स्ट्रेन्जर' को बारह वर्षों के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया. जून 1979 में 'बरजर डाउटर' को तथा 'जुलाईस पिपिुल्स' को भी रंगभेद की नीतियों के तहत प्रतिबंधित कर दिया गया था. 1991 में साहित्य के लिए उन्हें जो नोबेल पुरूस्कार मिला उसे उन्होंने अपने देश के अश्वेतों वंचितों को समर्पित किया था. रंगभेद के खिलाफ आंदोलन की अगुवाई करती नाडिन अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस का उस वक्त सदस्यता ग्रहण की जब इसे गैरकानूनी संगठन समझा जाता था. नाडिन कहा करती थी कि उनके जीवन का सबसे गौरवशाली दिन वह था जब उन्होंने 1986 में रंगभेद के खिलाफ बाइस सदस्यों को 'डेलमास ट्रिजन ट्रायल' में शपथपूर्वक साक्ष्य दिया था. दक्षिण अफ्रीकी लेखकों के कांग्रेस की वे संस्थापक सदस्य रही. 1990 के दशक में नाडिन अपने देश में एड्स नामक बीमारी के खिलाफ जागरूकता अभियान चलायी. उन्होंने वर्ष 2004 में बीस बड़े-बड़े लेखकों को 'टेलींग टेल्स' के लिए लघुकथा लिखने के लिए प्रेरित किया तथा 'टेलींग टेल्स' नामक पुस्तक को एड्स बीमारी के इलाज हेतु धन अर्जित करने का माघ्यम बनायीं. दक्षिण अफ्रीकी कांग्रेसी नेताओं ने सत्ता के अंहकार में नाडिन गोर्डिमर पर श्वेत उदारवादी होने का आरोप भी लगाया था यद्यपि उन्होंने श्वेत प्रभुत्व के विरूद्ध पार्टी के सशस्त्र क्रांति के आह्वान का भी समर्थन किया था.


    नाडिन गोर्डिमर का पहला उपन्यास 'द लाइंग डे' 1953 में प्रकाशित हुआ. आत्मकथात्मक शैली में लिखा गया यह उपन्यास एक युवा श्वेत महिला हेलेन की रंगभेद के खिलाफ मुखर होती राजनीतिक जागरूकता को मर्मस्पर्शीय ढ़ंग से बयान करता है. 1963 में आयी उनका दूसरी उपन्यास 'ऑकेजन फॉर लवींग' में एक श्वेत महिला अन्न डेविस एवं एक अश्वेत युवक गाइऑन सिबेलो के प्रेम के बीच रंगभेद कैसे दीवार बनती है, का यथार्थपरक वर्णन है. 1971 में नाडिन को उनके उपन्यास 'अ गेस्ट ऑफ आनर' के लिए 'जेम्सटेट ब्लैक मेमोरियल प्राइज' प्रदान किया गया तथा 1974 में उन्हें 'द कंजरवेशनिस्ट' उपन्यास के लिए बुकर प्राइज से नवाजा गया. 'बरजर डाउटर' रंगभेद एवं नस्लवाद पर तीखा प्रहार करता हुआ नाडिन का सर्वश्रेष्ठ उपन्यास कहा जा सकता है जिसे रोजा बरजर नामक स्त्री को रंगभेद व नस्लवाद के खिलाफ राजनीतिक रूप से सक्रिय कार्यकर्ताओं के रूप में चित्रित किया गया है. नाडिन गोर्डिमर ने इस उपन्यास में ब्राम फिशर नामक वकील को श्रद्धांजलि अर्पित की है. ब्राम फिशर वही वकील थे जिन्होंने नेल्सन मंडेला सहित अन्य रंगभेद के खिलाफ सक्रिय कार्यकर्ताओं के बचाव पक्ष से मूकदमा लड़ा था. 1981 में प्रकाशित 'जुलाईस पिपुल्स' में नाडिन नस्लवादी सरकार के खिलाफ उस क्रांति की कल्पना की है जिसे अश्वेतों ने श्वेतों के खिलाफ किया जिसमें श्वेत लोगों की हत्याएँ तक की गयी हैं. यह उपन्यास उस स्थिति की जाँच भी करती चलती है जब हिंसा और नस्लवादी घृणा लोगों पर जबरन लाद दिया जाता है तब लोगों द्वारा बचाव का कौन सा रास्ता अख्तियार किया जाता है.

1998 में आयी 'द हाउस गन' नामक उपन्यास में नाडिन दक्षिण अफ्रीका में बढ़ते जुर्म के ग्राफ और घर-घर में रखे जाने वाली बंदूक की कहानी एक पति-पत्नी क्लाउडिया और हेराल्ड के माघ्यम से उनके पुत्र डनकन की हत्या और फिर एक अश्वेत वकील द्वारा हत्या के मूकदमे को लड़े जाने की हृदय विदारक कहानी है. विस्थापन, एकाकीपन, प्रेम, धार्मिक विश्वास, वर्गभेद, रंगभेद एवं आर्थिक शक्ति को आधार बना कर नाडिन ने एक बेहद सशक्त उपन्यास 'द पीकअप' 2002 में लिखा था जिसका मुख्य पात्र एक श्वेत स्त्री जुली समर और एक गैरकानूनी अरब घुसपैठिया अब्दू के बीच प्रेम की मर्मस्पर्शी व्याख्यान है. अपने दूसरे पति रेनहॉल्ड के मृत्यु के बाद नाडिन ने 2005 में 'गेट अ लाइफ' नामक उपन्यास लिखा जिसमें एक असाघ्य रोग से जुझते हुए पुरूष की असाधारण कहानी है. इसके अतिरिक्त नाडिन एक नाटक 'द फर्स्ट सर्किल' के साथ साथ 'लूट', जम्प, वन्स अपोन अ टाइम, फेस टू फेस आदि लघुकथाएँ भी लिखीं जो काफी लोकप्रिय हुई. नाडिन गोर्डिमर कहा करती थी,'सत्य हमेशा सुंदर नहीं होता परंतु सत्य के लिए छटपटाहट हमेशा सुंदर होती है.'


    नाडिन गोर्डिमर के नहीं रहने पर किसी को खले या न खले पर विश्व के उत्पीड़ितों एवं वंचितों को उनकी हमेशा कमी खलती रहेगी.

 


राजीव आनंद
प्रोफेसर कॉलोनी, न्यू बरगंड़ा, गिरिडीह-815301
झारखंड़

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