रविवार, 31 अगस्त 2014

सुभाष चन्द्र लखेड़ा की तीन लघुकथाएँ - " जय जवान " , " रिश्तेदार ", और " बेताल का सवाल "

image



जय जवान

       इस घटना से जुड़े सभी नाम छुपाते हुए मैं एक सच्चा किस्सा बयां कर रहा हूँ। आर्मी में भर्ती के लिए प्रत्याशियों को कुछ मनोवैज्ञानिक सवालों 

से भी गुजरना पड़ता है। कोई 20 - 21 वर्ष  पहले एक मीटिंग के दौरान एक वरिष्ठ व्यक्ति ने जब शीर्षस्थ पद पर आसीन एक अधिकारी को बताया 

कि उनके विभाग ने प्रत्याशियों को परखने के लिए जो नई मनोवैज्ञानिक प्रश्नावली तैयार की है, वह बहुत ही त्रुटिहीन है तो शीर्षस्थ पद पर आसीन 

उस अधिकारी ने हम सभी को अपना एक अनुभव सुनाया। कुछ समय पहले उनके ड्राइवर ने उनसे आग्रह किया था कि वे उसके बेटे मंजीत  को फ़ौज 

में भर्ती करवाने की कृपा करें। उन्होंने उसी समय ड्राइवर द्वारा बताये गए भर्ती केंद्र के मुखिया को फोन पर मंजीत की मदद करने को कहा। तीन - चार 

दिन बाद भर्ती केंद्र के मुखिया ने खेद प्रकट करते हुए उन्हें सूचना दी कि मंजीत फ़ौज के लिए फिट नहीं पाया गया।  

      खैर, यही कोई छह महीने बाद उनका ड्राइवर मिठाई का डब्बा लिए उनके कमरे में दाखिल होते हुए बोला - साहब, मंजीत भर्ती हो गया है। " डब्बे 

से मिठाई का टुकड़ा उठाते हुए जब  उन्होंने ड्राइवर को थोड़ा कुरेदा तो पता चला कि जो काम उन जैसा उच्च अधिकारी न करवा पाया था , वह दलाल 

को दस हजार रुपये देने से  हो गया था । 

------------------------------------------------------------**---------------------------------------------------------------

रिश्तेदार

           आज सुबह जब  समाचार पत्र देखा था तो उस समय यह  बात मुझे कुछ स्पष्ट रूप से समझ में नहीं आई थी । सूबे के वर्तमान मुख्यमंत्री के बेहद 

करीबी पत्रकार मानवेन्द्र ने संपादकीय पृष्ठ पर छपे अपने लेख में उन पर नियमों की अवहेलना करते हुए अपने कुछ चुनिंदा लोगों को सरकारी ठेके दिलाने 

के आरोप लगाये थे। कुछ दिन पहले तक मुख्यमंत्री के साथ दिखने और उनके कसीदे काढ़ने वाले मानवेन्द्र को अचानक यह क्या हुआ, यह बात मैं उस समय 

तो नहीं समझ पाया था किन्तु अब इस पहेली का समाधान हो गया है । विश्वनीय सूत्रों  से पता चला है कि मुख्यमंत्री ने चुनाव से पहले मानवेन्द्र को अपना 

मीडिया एडवाइजर नियुक्त करने का जो वादा किया था, उसे भूलते हुए उन्होंने दो दिन पहले अपने किसी करीबी रिश्तेदार को यह जिम्मेदारी सौंपी है।  

          बहरहाल, मानवेंद्र के अनुसार सूबे की तरक्की के लिए हाइ कमांड को मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी किसी ऐसे नेता को सौंपनी होगी जो जनता से किये 

गए वादों को निभाने के लिए ठोस पहल करे । आप नैतिकता का सवाल उठा सकते हैं  किन्तु मुझे तो मानवेन्द्र का यह गुस्सा वाजिब लगता है। आखिर, वह 

भी तो जनता का हिस्सा है और उससे भी ऊपर मेरा करीबी रिश्तेदार है। 

------------------------------------------------------------- **-------------------------------------------------------------------

बेताल का सवाल

            अभी राजा विक्रम शव को कंधे पर लादकर कुछ ही कदम चले  थे  कि तभी उस शव में मौजूद बेताल ने अपनी पुरानी शर्त को दोहराते हुए राजा 

विक्रम को यह नयी कथा सुनाई। बेताल बोला, " महाराज, सिर्फ परिश्रम करने से लाभ नहीं होता है। सफलता के लिए परिश्रम के साथ चालाकी भी जरूरी है। 

उदहारण के लिए शायद तुम उस व्यक्ति को जानते हो जो युवावस्था में गुंडई करता था लेकिन अब इस देश में एक प्रदेश पर शासन कर रहा है और बड़े - बड़े 

विद्वानों से अपनी चरण वंदना करवा रहा है। मेरा सवाल सिर्फ इतना है कि ये तथाकथित विद्वान सब कुछ जानते हुए भी उसकी चरण वंदना क्यों करते हैं ? " 

           शर्त को भूलते हुए राजा विक्रम ने तनिक क्रोधित होते हुए कहा, " हे बेताल, ये  सभी विद्वान सरकार द्वारा दिए जाने वाले पुरस्कारों और अन्य सुविधाओं 

को प्राप्त करने हेतु उस घटिया इंसान की चापलूसी में लगे रहते हैं। " बहरहाल, राजा के जवाब को सुनकर बेताल ने फिर वही किया जो वो आजतक करता आया है। 

------------------------------------**--------------------------------------

- सुभाष चन्द्र लखेड़ा, सी - 180 , सिद्धार्थ कुंज, सेक्टर - 7, प्लाट नंबर - 17, नई दिल्ली - 110075.

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------