शनिवार, 2 अगस्त 2014

नन्दलाल भारती की कहानी–बदलते युग के नरपिशाच

देश की हवा को भ्रष्‍टाचारी,स्‍वार्थी जहरीली बनाते जा रहे है। आदमी की तासिर में परायापन घर करता जा रहा है।स्‍वार्थ की ऐसी आंधी चल पडी है कि आदमी आदमी का गला काटने को उतावला हो रहा है।

हां भाई देवदत्‍त ठीक कह रहे हो। अभी तक तो खाने पीने की चीजों में मिलावट हो रही थी जिसके दुश्‍परिणाम असाध्‍य बीामरियों के रूप में सामने हैं। भ्रष्‍टा्रचारी,मिलावटखोर नोट की बोरियां इक्‍टठा कर खुशियां मना रहे थे।देश के रक्षक भी तनिक कम नही थे। वे तो देश और देश के लोगों की उम्‍मीदों का दहन और पेट पर लात मारकर विदेशी बैंकों का खजाना भर रहे थे। अब तो और बड़ी मुसीबत देश को पंगु बना रही है।

हंसदेव-किस मुसीबत की बात कर रहे हो देवदत्‍त।

देवदत्‍त-भगवान की ।

हंसदेव-भगवान और मुसीबत ․․․․․․․․․․․?

देवदत्‍त-हां मित्रवर भगवान । नील गगन के पार बसने वाले भगवान को तो हमारे खानदान में किसी ने देखा नही है। सुना था धरती पर डाक्‍टर भगवान है।

हंसदेव-ठीक सुना है भाई ।

देवदत्‍त-हम भी मान रहे है पर भगवान कसाई होगा ? यह भी मानना पड़ रहा है आज स्‍वार्थ,भ्रष्‍ट्राचार के इस युग में ।

हंसदेव-क्‍या से क्‍या बना दिया ?

देवदत्‍त-भगवान को कसाई ।

हंसदेव-मानता हूं आज भी कई भगवान है पर जो कसाईयों ने किया है,वह देश समाज के स्‍वास्‍थ्‍य के लिये कैंसर की असाध्‍य बीमारी हो गया है। होनहारों के भविष्‍य के दहन के कारण है ये कसाई। भ्रष्‍ट्राचारी नरपिशाच होने के मायने के खूनी सिद्ध कर दिये हैं।कसाईयों के दिये घाव से देश और समाज कैसे भूल पायेगा?

हंस देव और देवदत्‍त की बातें सुनकर रविदेव सिसक-सिसक कर रोने लगा।रविदेव को सिसकता हुआ देखकर मानों हंस देव और देवदत्‍त के सिर पर पहाड़ गिर पड़ा हो।हंसदेव अपनी अर्धागिनी को चिल्‍लाकर बुलाया। वह आंगन में से कपड़ा धोना छोड़कर हाथ में मुंगरी लिये भागी आयी। हंसदेव को घबराया हुआ देखकर बोली क्‍यों चिल्‍ला रहे हो चांद जमीन पर उतर आया है क्‍या ?

हंसदेव-रविदेव की हालत देखो तनिक जल्‍दी लोटा भर पानी लेकर आओ।

लोटा का पानी थमाते हुए दामिनी बोली कौन सी ऐसी बात कह दिये की बेचारे रवि भईया का सोया दर्द ज्‍वालामुखी की तरह फूट पड़ा।रविदेव अहक-अहक रहा था,उसकी आंखों से आंसू बांध के टूटने जैसे बह रहे थे।दामिनी हाथ में पानी लेकर रविदेव का मुंह धोकर आंचल से पोंछी।रोते बच्‍चे को जैसे चुप कराते हैं ठीक उसी तरह रवि के सिर पर हाथ फिराकर चुपकराने लगी। दामिनी की तरकीब काम आयी,रवि के तनिक आंसू थमें। दामिनी गिलास उसके मुंह में लगाते हुए बोली भईया पानी पी लो जीव ठौरीक हो जायेगा।

रविदेव-भौजाई क्‍या जीव ठौरीक होगा कसाईयों ने बेटे का भविष्‍य तहस-नहस कर दिया मेरे जीवन की ख्‍वाहिश दफन हो गयी।

दामिनी ऐसा क्‍या हो गया भईया?

भौजाई-देश को नेता खुले सांड़ की तरह चर रहे है।महगाई डायन आम आदमी का खून पी रहा है।चारों तरफ स्‍वार्थ भ्रष्‍टा्रचार ने तबाही मचा रखी है। भगवान भी भ्रष्‍ट्राचार के दंगल में कूद पड़ है रविदेव बोला।

दामिनी-भगवान कहा कूदे है। ये तो जनता की अंधभक्‍ति हैं। जनता दूध पिला रही ह,ैदही से नहवा रही है। सोना चांदी,धन दौलत न्‍यौछावर कर रही है,दूसरी तरफ गरीब बच्‍चों को दूध और पोषण नही मिल रहा है। गरीब लोग भूखे सड़क किनारे रात गुजारने को मजबूर हैं। इसमें भगवान क्‍या क्‍या दोष ?

हंसदेव-इस भगवान की बात नही हो रही है।

देवदत्‍त-भाभी भी बिल्‍कुल सही रास्‍ते पर जा रही है।

दामिनी हंसदेव की तरफ इशारा करते हुये बोली देखो जी तुम मुझे नही समझे देवभइया समझ लिये,तुम तो हमें मुरख ही समझते हो ना जाने क्‍यो ? हां जी समझोगे भी क्‍यो नहीं,धर्मग्रंथों ने हमें अधिकार जो नही दिये। धर्मग्रंथ तो कहते हैं शुद्र गंवार ढोल पशु नारी ये ताड़ना के अधिकारी।

देवदत्‍त-भाभी बदले युग में इन धर्मग्रन्‍थों ने अपना महत्‍व खो दिया है।हम लोग जिस भगवान की बात कर रहे थे वह डाक्‍टर के मुद्‌दे पर थी।

दामिनी-डाक्‍टर इलाज करता है जीवन देता है,भगवान तो है ही,दामिनी अपनी बात पूरी कर पाती उसके पहले रविदेव बोला भाभी बदले युग में कुछ डाक्‍टर नर पिशाच के पर्याय बन गये है।

हंसदेव बोला रवि तुम्‍हें हमारी बातों से इतनी गहरी चोट क्‍यों लगी कि तुम्‍हारी धैर्य का पहाड़ टूट पड़ा।

रविदेव बात है दुखद है,पूरी पीढ़ी दफन की बात है। डां․विनोद,डां․सागर ये भी तो डांक्‍टर है,सच कहे तो ये नरपिशाच के असली मायने है।

देवदत्‍त-अच्‍छा चिकित्‍सा शिक्षा के फर्जीवाड़े से इंसानियत का पुजारी आहत है।

रविदेव-मेरा तो सब कुछ लूट गया जीते जी लाश होकर रह गया।

दामिनी-भइया क्‍या कह रहे हो ?

रविदेव-भौजाई बदलते युग के नरपिशाचों ने कहीं का नही छोड़ा धन,सपना और बेटवा का भविष्‍य तक लूट लिया ।

हंसदेव-बेटवा फिर फेल हो गया ।

रविदेव-भइया मेरा बेटवा तीन साल पहले भी पास था इस साल भी पर ․․․․․․․

दामिनी-पर क्‍या रवि भइया ․․․․․?

रविदेव-बदलते युग के नरपिशाच डां․विनोद,डां․सागर ,सरकारी अफसर,राजनेताओं ने मिलकर मुझ गरीब के बेटे को डाक्‍टर नहीं बनने दिये।

देवदत्‍त-हे भगवान बदलते युग के नरपिशाचों से गरीब आदमी,उसके सपनों की रक्षा कैसे होगी।

रविदेव-भइया बेटवा से बड़ी उम्‍मीद थी । पी․एफ․लोन लेकर कोचिंग करवाया बेटवा को डाक्‍टर बनाने के लिये। बेटवा भी कोई कोर कसर नही छोड़ा पर ये नरपिशाच लाखों करोड़ो लेकर दसवी -बारहवी फेल लड़के लड़कियों को डाक्‍टर बनवा दिये ।मुझ गरीब का बेटा प्रतिभावावन होकर भी बार-बार फेल कर दिया जा रहा है। अब तो उसने तौबा करने का मन बना लिया कहता है इस तरह से तो मेरा कैरिअर खराब हो जायेगा,जीवन के तीन साल बर्बाद हो गये।लगता है जीवन बर्बाद हो गया ।

दामिनी-तीन साल कम तो होते नहीं।अब तक तो तीन साल का कोर्स पूरा हो गया होता साल भर बाद बेटा डाक्‍टर बन जाता पर हाय रे बदलते युग के नर पिशाचों मेरे बेटे का जीवन बर्बाद कर दिया। हमारे खानदान का सपनों का बलात्‍कार कर दिया कहते हुए दामिनी सिसकने लगी।

रविदेव-भागवान आंसू बहाने से क्‍या होगा।बेटवा ने खूब मेहनत किया,हमने लोन लेकर टयूशन की फीस भरा जो कर सकता था हम सबने किया।अपनी औकात तो इतनी नहीं है कि हम नरपिशाचों को पच्‍चास लाख देकर सीट खरीद लेते।इतना रूपया कहा से लाता,इसके बाद पांच लाख रूपया सालाना की फीस भी।इतना पैसा होता तो विदेश भेजकर बेटवा को डाक्‍टर की पढ़ाई नही करवा लेता।रविदेव अपनी बात पूरी भी नही कर पाया कि तेजप्रकाश आ गया और बोला कहां विदेश जा हो काका ?

रविदेव-तू भी ससुर के नाती आग में घी डाल रहा है।बेटवा का एम․बी․बी․एस․ की पढ़ाई के लिये एडमिशन नही करवा पा रहा हूं,तू विदेश जाने को कह रहा है।सोच कितना ममजबूर बाप मैं हूं बेटा को उसकी इच्‍ठा और समर्पण के अनुसार शिक्षा दिलाने की अपनी औकात नही।मैं भी पैसे वाला होता तो बेटवा का एडमिशन करवा नही लेता।

तेजप्रकाश-कहां करवा लेते काका? ये देखो अखबार चिकित्‍सा शिक्षा के माफिया तो जेल गये ही है साथ ही वे होने वाले डाक्‍टर और उनके पालक भी जेल जा रहे है जिन्‍होने पच्‍चास-पच्‍चास लाख चिकित्‍सा शिक्षा माफिया को देकर एडमिशन करवाये।उनका तो सब लूट गया। काका उनकी सोचो जो पच्‍चास लाख देकर जेल जा रहे है। चिकित्‍सा शिक्षा माफिआओं ने तो सरकार तक को कटघरे में खड़ा कर दिया है।खैर बिना मिली भगत के ऐसा हो भी तो नही सकता था।लोग तो चीफ मिनिस्‍टर का इस्‍तीफा तक मांगने लगे है।

दामिनी-मेरे उज्‍जवल का जीवन तो बर्बाद हो गया।

तेजप्रकाश-काकी तीन साल बर्बाद हुए है,खैर तीन साल कम तो नही होता पर उज्‍जवल के सामने भविष्‍य सुधारने के मौके तो है।सोचो जिनकी मेडिकल की पढ़ाई पूरी हो गयी थी वे जेल जा रहे है। सन्‌ 2009 के बाद के चिकित्‍सों तक के भविष्‍य पर तलवार लटक गयी है।उज्‍जवल होशियार है दूसरे विषय में भविष्‍य बना लेगा। पूरे खानदान की ख्‍वााहिश थी कि परिवार से एक डाक्‍टर हो ,वह सपना बदलते युग के नरपिशाचों ने नही पूरा होने दिया इसका गम तो रहेगा।हां अब तो भगवान से प्रार्थना करो कि शिक्षा माफिआओं को फासी की सजा मिले ताकि देश और समाज को अच्‍छे ईमानदार,डाक्‍टर,इंजीनियर मिले।

देवदत्‍त-ऐसा नही हुआ तो आम आदम का न्‍याय से भरोसा उठ जायेगा। तेजप्रकाश कानून के हाथ बहुत लम्‍बे होते है,इन माफिआओं को फांसी के फंदे तक जरूर पहुंचायेंगे।

तेजप्रकाश-कानून के रक्षक भक्षक ना बनते तो ये अत्‍याचार,भ्रष्‍ट्राचार,बलात्‍कार और उज्‍जवल जैसे होनेहारों के भविष्‍य तक का बलात्‍कार होता क्‍या ,कभी ना काका,खैर गरीब आदमी की बद्‌दुआ व्‍यर्थ नही जाती।उज्‍जवल का भविष्‍य और खानदान के सपनो को बर्बाद करने वालो को भगवान बख्‍शेगा नहीं।

सच हुआ देश की सबसे बड़ी अदालत ने चिकित्‍सा माफिआओं को फांसी की सजा सुना दी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहां शिक्षा माफिया ने जघन्‍य अपराध किया है। इनके अपराध से होनहार युवापीढ़ी का कैरिअर तो बर्बाद हुआ है देश और समाज के स्‍वास्‍थ को इन माफिआओ ने खराब किया है,जिसका दुश्‍प्रभाव आने वाली पीढ़ी तक को भुगतना पड़ेगा,जापान के नाकासाकी में गिराये गये परमाणु बम की तरह।देश की सबसे बड़ी कोर्ट के इस फैसले ने अपराधी मन को देश और मानव समाज के कल्‍याण की ओर मोड़ दिया।रविदेव और दामिनी का बेटा उज्‍जवल कुमार पांच साल बाद देश के प्रबन्‍ध संस्‍थान की परीक्षा गोल्‍ड मैडल के साथ पास कर लिया।यह खबर तेजप्रकाश को लगी वह पुष्‍पगुच्‍छ लेकर दौड़ा चला आया,वह रविदेव को देते हुए बोला काका जो होता है अच्‍छे के लिये होता है।अपना भाई गोल्‍डमैडलिस्‍ट हो गया,अब तो इसे दुनिया का बड़ा से बड़ा संस्‍थान पच्‍चास लाख सालाना की नौकरी देने को तैयार हो जायेगा।चिकित्‍सा शिक्षा फर्जीवाड़े में लिप्‍त सभी भ्रष्‍ट्राचारियों को फांसी की सजा हो गयी।सभी भ्रष्‍ट्राचाकरयों की सम्‍पति राजसात्‌ कर ली गयी। इसे बड़ा दण्‍ड और क्‍या मिल सकता था बदलते युग के नरपिशाचों को।

उज्‍जवल-भईया मैं डाक्‍टर तो नही बन पाया ना।मेरे मांता-पिता और पूरी खानदान के सपनों को बदलते युग के नरपिशाचों ने नहीं पूरा होने दिया जबकि मैं अच्‍छा डाक्‍टर बन सकता था।

रविदेव और दामिनी एक स्‍वर में बोले बेटा सन्‍तोष करो जो होना था हो गया।ईमानदारी और पूरी लगन से देश और सभ्‍य मानव समाज की सेवा करना।

तेजप्रकाश-उज्‍जवल अभी डाक्‍टर बनने-बनाने के मौके खत्‍म नही हुए है।

उज्‍जवल-मेरी जिन्‍दगी में तो असम्‍भव है।

तेजप्रकाश-उज्‍जवल तुम अपनी औलाद को डाक्‍टर बना लेना क्‍यों नही मौके है।बहुत मौके है, बदलते युग के नरपिशाचों की वजह से जिन्‍दगी थम नही गयी है।तेजप्रकाश का बात सुनकर बसन्‍तनुमा माहौल में जैसे शहनाई गूंज गयी।

डा․नन्‍दलाल भारती

आजाददीप,15-एम-वीणा नगर,इंदौर ।म․प्र․।-452010

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  1. सुंदर प्रस्तुति...
    दिनांक 04/08/2014 की नयी पुरानी हलचल पर आप की रचना भी लिंक की गयी है...
    हलचल में आप भी सादर आमंत्रित है...
    हलचल में शामिल की गयी सभी रचनाओं पर अपनी प्रतिकृयाएं दें...
    सादर...
    कुलदीप ठाकुर

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  2. सुंदर प्रस्तुति...
    दिनांक 04/08/2014 की नयी पुरानी हलचल पर आप की रचना भी लिंक की गयी है...
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