मंगलवार, 26 अगस्त 2014

सुभाष चंद्र लखेड़ा का व्यंग्य - महंगाई और सरकारी उपाय

व्यंग्य :

                                          महंगाई और सरकारी उपाय

                   - सुभाष चंद्र लखेड़ा

बढ़ती हुई महंगाई को रोकने का वादा करके वे सत्ता के सिंहासन पर तो पहुँच गए लेकिन महंगाई रुकने का नाम नहीं ले रही थी। 

उनकी समझ में नहीं आया कि वे इस महंगाई को क्यों नहीं रोक पा रहे हैं ? वे खिन्न मन से अपने गुरु के पास गए और इसका कारण पूछा। 

गुरु ने उन्हें सिंकदर-ए-आजम की यह कथा सुनाई।
         " सिंकदर-ए-आजम ने छोटी सी उम्र में दुनिया के एक बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया था । खैर, भारत की सीमा तक पहुंचने पर उसे 

अपनी ताकत की कमजोरी का तब बोध हुआ, जब एक फकीर ने उससे प्रश्न किया कि तुम अपने वतन से इतनी दूर तक लड़ते हुए क्यों चले आए ?  

सिकंदर का जवाब था कि वह पूरी दुनिया पर अपना नियंत्रण करना चाहता है। फकीर हंसा और सिकंदर से कहा, " क्या तुम वहां सामने पड़े उस 

बड़े आकार के सूखे हुए चमड़े के टुकड़े के पास जाकर जैसा मैं कहूँगा वैसा करोगे ? " " क्यों नहीं " कहते हुए सिकंदर उस टुकड़े के पास जाकर खड़े 

हो गए। फ़कीर ने सिकंदर से कहा कि अब वह उस टुकड़े के इधर वाले सिरे पर खड़ा होकर देखे कि क्या होता है ? सिकंदर ने वैसा ही किया। तत्पश्चात 

फ़कीर ने सिकंदर को चमड़े के उधर वाले हिस्से पर खड़ा होने के लिए कहा। सिकंदर ने आज्ञा पालन करते हुए वैसे ही किया। अब फ़कीर जोर से हँसते 

हुए बोला कि तुम दुनिया पर क्या नियंत्रण करोगे, तुम तो जिस चमड़े पर खड़े हो वो तक तुम्हारी सत्ता को चुनौती दे रहा है। तुम जिधर पैर रखते हो 

तो उधर तो वह दब जाता है लेकिन उसका दूसरी तरफ वाला हिस्सा उठ खड़ा होता है। सिंकदर ने अपने पैरों के नीचे दबी मृगछाला को देखा और उसे 

अपनी कमजोरी का ज्ञान हुआ। तत्पश्चात, वह बिना आगे बढ़े अपने वतन की तरफ लौट गया।"
       कहानी सुनाने के बाद गुरु बोले, " ऐसा ही तुम्हारे साथ भी हो रहा है। तुम आलू पर पैर रखते हो तो प्याज खड़ा हो जाता है और प्याज पर पैर 

रखते हो तो टमाटर खड़ा हो जाता है। "
       " आखिर, ऐसा क्यों ? " उन्होंने गुरु से जानना चाहा।
       गुरु बोले, " ऐसा इसलिए कि तुम्हें चुनाव के लिए जिन लोगों ने करोड़ों रुपये दिए थे, उन्हें भी तो अपनी रकम वसूल करनी है। एक बात और ! 

सिकंदर के पैर तो चमड़े के ऊपर थे लेकिन तुम्हारे पैर तो जिंदा इंसानों के ऊपर हैं जिन्हें बेसब्री से उन अच्छे दिनों का इन्तजार है जिनको लाने का वादा 

कर तुमने बहुमत हासिल किया है। "

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- सुभाष चंद्र लखेड़ा, सी - 180 , सिद्धार्थ कुंज, सेक्टर - 7, प्लाट नंबर - 17, नई दिल्ली - 110075 .

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