गुरुवार, 25 सितंबर 2014

चन्द्रकुमार जैन का आलेख - नवरात्रि की मंगल बेला और भारतीय 'शक्ति' का 'मंगल' प्रवेश

नवरात्रि की मंगल बेला और भारतीय 'शक्ति' का 'मंगल' प्रवेश

डॉ.चन्द्रकुमार जैन 

मंगल ग्रह ने हमेशा से ही सभी को अपनी ओर आकर्षित किया है। लाल रंग के दिखने वाले इस ग्रह पर नासा ने क्यूरियोसिटी रोवर यान को सफलतापूर्वक उतारकर एक बार फिर से इस ग्रह पर जीवन तलाशने की संभावनाओं की शुरुआत कर दी। यान ने मंगल की सतह पर उतरने के साथ ही वहां की तस्वीरें भेजना भी शुरु कर दिया है। मंगल कक्षित्र मिशन ( मार्स आर्बिटर मिशन ) की शुरुआती सफलता ने नासा के वैज्ञानिकों के चेहरों पर खुशी ला दी है। क्यूरियोसिटी रोवर यहां पर पानी और जीवन तलाशने के साथ-साथ कई अन्य परीक्षण भी करेगा। 

स्मरण रहे कि 24 सितम्बर को सुबह 7 बज कर 17 मिनट पर 440 न्यूटन लिक्विड एपोजी मोटर (एलएएम) यान को मंगल की कक्षा में प्रवेश कराने वाले थ्रस्टर्स के साथ सक्रिय की गई जिससे यान की गति को 22.1 किमी प्रति सेकंड से घटा कर 4.4 किमी प्रति सेकंड करके मंगलयान को मंगल ग्रह की कक्षा में सफलतापूर्वक प्रविष्ट किया गया । यह कार्य संपन्न होते ही सभी वैज्ञानिक खुशी से झूम उठे। इस क्षण का सीधा प्रसारण दूरदर्शन द्वारा राष्ट्रीय टेलीविज़न पर किया गया तथा भारत के इस गौरवमयी क्षण को देखने के लिए भारत के प्रधानमंत्री स्वयं वहाँ उपस्थित रहे। जिस समय यान मंगल की कक्षा में प्रविष्ट हुआ उस समय पृथ्वी तक इसके संकेतों को पहुंचने में लगभग 12 मिनट 28 सेकंड का समय लगा। ये संकेत नासा के कैनबरा और गोल्डस्टोन स्थित डीप स्पेस नेटवर्क स्टेशनों ने ग्रहण किए और आंकड़े रीयल टाइम पर यहां इसरो स्टेशन भेजे गए।

बहरहाल मंगल के बारे में आपने अक्सर पढ़ा होगा.नासा और बीबीसी के मुताबिक़ मंगल पर जीवन की मौजूदगी से भी आगे बहुत सी बातें हैं जो जानना दिलचस्प हो सकता है. पढ़िए ऐसी ही कुछ दिलचस्प बातें जो शायद आप न जानते हों.

1. मंगल को लाल ग्रह कहते हैं क्योंकि मंगल की मिट्टी के लौह खनिज में ज़ंग लगने की वजह से वातावरण और मिट्टी लाल दिखती है.

2. मंगल के दो चंद्रमा हैं. इनके नाम फ़ोबोस और डेमोस हैं. फ़ोबोस डेमोस से थोड़ा बड़ा है. फ़ोबोस मंगल की सतह से सिर्फ़ 6 हज़ार किलोमीटर ऊपर परिक्रमा करता है.

3. फ़ोबोस धीरे-धीरे मंगल की ओर झुक रहा है, हर सौ साल में ये मंगल की ओर 1.8 मीटर झुक जाता है. अनुमान है कि 5 करोड़ साल में फ़ोबोस या तो मंगल से टकरा जाएगा या फिर टूट जाएगा और मंगल के चारों ओर एक रिंग बना लेगा.

फ़ोबोस पर गुरुत्वाकर्षण धरती के गुरुत्वाकर्षण का एक हज़ारवां हिस्सा है. इसे कुछ यूं समझा जाए कि धरती पर अगर किसी व्यक्ति का वज़न 68 किलोग्राम है तो उसका वज़न फ़ोबोस पर सिर्फ़ 68 ग्राम होगा.माना जाता है कि मंगल पर पानी बर्फ़ के रूप में ध्रुवों पर मौजूद है.

4. अगर ये माना जाए कि सूरज एक दरवाज़े जितना बड़ा है तो धरती एक सिक्के की तरह होगी और मंगल एक एस्पिरीन टैबलेट की तरह होगा.

5. मंगल का एक दिन 24 घंटे से थोड़े ज़्यादा का होता है. मंगल सूरज की एक परिक्रमा धरती के 687 दिन में करता है. यानी मंगल का एक साल धरती के 23 महीने के बराबर होगा.

6. मंगल और धरती करीब दो साल में एक दूसरे के सबसे करीब होते हैं, दोनों के बीच की दूरी तब सिर्फ़ 5 करोड़ 60 लाख किलोमीटर होती है.

7. मंगल पर पानी बर्फ़ के रूप में ध्रुवों पर मिलता है और ये कल्पना की जाती है कि नमकीन पानी भी है जो मंगल के दूसरे इलाकों में बहता है.

8. वैज्ञानिक मानते हैं कि मंगल पर करीब साढ़े तीन अरब साल पहले भयंकर बाढ़ आई थी. हालांकि ये कोई नहीं जानता कि ये पानी कहां से आया था, कितने समय तक रहा और कहां चला गया.

9. मंगल पर तापमान बहुत ज़्यादा भी हो सकता है और बहुत कम भी.

क्या आप जानते हैं?

मंगल के दो चंद्रमा हैं

मंगल का एक दिन 24 घंटे से थोड़ा ज़्यादा होता है

मंगल और धरती करीब दो साल में एक दूसरे के सबसे ज़्यादा करीब होते हैं

मंगल पर तापमान बहुत ज़्यादा भी हो सकता है और बहुत कम भी.

मंगल का गुरुत्वाकर्षण धरती के गुरुत्वाकर्षण का एक तिहाई है

मंगल पर धूल भरे तूफ़ान उठते रहते हैं.

10. मंगल एक रेगिस्तान की तरह है, इसलिए अगर कोई मंगल पर जाना चाहे तो उसे बहुत ज़्यादा पानी लेकर जाना होगा.

11. मंगल पर ज्वालामुखी बहुत बड़े हैं, बहुत पुराने हैं और समझा जाता है कि निष्क्रिय हैं. मंगल पर जो खाई है वो धरती की सबसे बड़ी खाई से भी बहुत बड़ी है.

12. मंगल का गुरुत्वाकर्षण धरती के गुरुत्वाकर्षण का एक तिहाई है. इसका मतलब ये है कि मंगल पर कोई चट्टान अगर गिरे तो वो धरती के मुकाबले बहुत धीमी रफ़्तार से गिरेगी. किसी व्यक्ति का वज़न अगर धरती पर 100 पौंड हो तो कम गुरुत्वाकर्षण की वजह से मंगल पर उसका वज़न सिर्फ़ 37 पौंड होगा.

13. मंगल की सतह पर धूल भरे तूफ़ान उठते रहते हैं, कभी-कभी ये तूफ़ान पूरे मंगल को ढक लेते हैं.

14. मंगल पर वातावरण का दबाव धरती की तुलना में बेहद कम है इसलिए वहां जीवन बहुत मुश्किल है.

15. मंगलयान लाल ग्रह की सतह, संरचना, खनिज, तथा वातावरण का अध्ययन करेगा... मंगलयान पर लगे पांच सौर-ऊर्जा संचालित उपकरण ऐसे आंकड़े एकत्र करेंगे, जिनसे मंगल ग्रह के मौसम के बारे में तो जानकारी मिलेगी ही, यह भी पता लगाया जा सकेगा कि उस पानी का क्या हुआ, जो माना जाता है कि कभी मंगल ग्रह पर अच्छी मात्रा में मौजूद था...

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